Class 12 Chemistry Notes Chapter 11 (Chapter 11) – Lab Manual (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आपके अनुरोध पर, मैं आपको कक्षा 12 रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला पुस्तिका (Lab Manual) के 'अध्याय 11' के विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) प्रदान कर रहा हूँ। चूंकि प्रयोगशाला पुस्तिका में अध्याय संख्याएँ अक्सर विशिष्ट प्रयोगों या विषयों को दर्शाती हैं, और 'अध्याय 11' सामान्यतः कार्बनिक यौगिकों में क्रियात्मक समूहों की पहचान से संबंधित होता है, इसलिए मैंने इसी विषय पर विस्तृत नोट्स तैयार किए हैं। यह विषय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अध्याय 11: कार्बनिक यौगिकों में क्रियात्मक समूहों का पता लगाना (Detection of Functional Groups in Organic Compounds)
परिचय:
कार्बनिक रसायन विज्ञान में, क्रियात्मक समूह (Functional Group) वे परमाणु या परमाणुओं के समूह होते हैं जो किसी कार्बनिक यौगिक के रासायनिक गुणों और अभिक्रियाशीलता के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। इन समूहों की पहचान करना यौगिक की संरचना को समझने और उसके व्यवहार का अनुमान लगाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रतियोगी और सरकारी परीक्षाओं में इन पहचान परीक्षणों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
पहचान का सामान्य दृष्टिकोण:
क्रियात्मक समूहों की पहचान के लिए गुणात्मक विश्लेषण (Qualitative Analysis) के अंतर्गत विभिन्न परीक्षण किए जाते हैं। इन परीक्षणों में विशिष्ट अभिकर्मकों का उपयोग किया जाता है जो क्रियात्मक समूह के साथ अभिक्रिया करके विशिष्ट रंग परिवर्तन, अवक्षेप निर्माण, गैस उत्सर्जन या विशिष्ट गंध जैसे दृश्यमान परिणाम देते हैं।
महत्वपूर्ण क्रियात्मक समूह और उनके पहचान परीक्षण:
1. असंतृप्तता (Unsaturation: C=C या C≡C)
- परीक्षण:
- ब्रोमीन जल परीक्षण (Bromine Water Test):
- अभिकर्मक: ब्रोमीन जल (Br₂/H₂O)
- प्रेक्षण: ब्रोमीन जल का लाल-भूरा रंग गायब हो जाता है (रंगहीन हो जाता है)।
- सिद्धांत: असंतृप्त यौगिक (एल्कीन या एल्काइन) ब्रोमीन के साथ योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction) करते हैं, जिससे ब्रोमीन का रंग समाप्त हो जाता है।
- अभिक्रिया: R-CH=CH-R' + Br₂ → R-CHBr-CHBr-R' (रंगहीन)
- बेयर परीक्षण (Baeyer's Test):
- अभिकर्मक: ठंडा, तनु और क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) विलयन (बेयर अभिकर्मक)
- प्रेक्षण: KMnO₄ का गुलाबी/बैंगनी रंग गायब हो जाता है और भूरा अवक्षेप (मैंगनीज डाइऑक्साइड, MnO₂) बन सकता है।
- सिद्धांत: असंतृप्त यौगिक KMnO₄ द्वारा ऑक्सीकृत हो जाते हैं, जिससे KMnO₄ का रंग समाप्त हो जाता है।
- अभिक्रिया: R-CH=CH-R' + [O] (KMnO₄) → R-CH(OH)-CH(OH)-R' (डाईऑल)
- ब्रोमीन जल परीक्षण (Bromine Water Test):
2. ऐल्कोहॉलिक समूह (-OH)
- परीक्षण:
- सोडियम धातु परीक्षण (Sodium Metal Test):
- अभिकर्मक: सोडियम धातु (Na) का छोटा टुकड़ा
- प्रेक्षण: हाइड्रोजन गैस (H₂) के बुलबुले निकलते हैं (जो जलती हुई माचिस की तीली के पास 'पॉप' ध्वनि उत्पन्न करते हैं)।
- सिद्धांत: ऐल्कोहॉल में उपस्थित अम्लीय हाइड्रोजन सोडियम धातु से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
- अभिक्रिया: 2R-OH + 2Na → 2R-ONa + H₂↑
- नोट: कार्बोक्सिलिक अम्ल और फ़ीनॉल भी यह परीक्षण देते हैं।
- एस्टरीकरण परीक्षण (Esterification Test):
- अभिकर्मक: कार्बोक्सिलिक अम्ल (जैसे एसिटिक अम्ल) और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)
- प्रेक्षण: फल जैसी गंध वाला एस्टर बनता है।
- सिद्धांत: ऐल्कोहॉल कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में अभिक्रिया करके एस्टर बनाते हैं।
- अभिक्रिया: R-OH + R'-COOH $\xrightarrow{\text{H₂SO₄}}$ R'-COOR + H₂O
- ल्यूकास परीक्षण (Lucas Test) - प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक ऐल्कोहॉल में विभेद के लिए:
- अभिकर्मक: ल्यूकास अभिकर्मक (सांद्र HCl और निर्जल ZnCl₂ का मिश्रण)
- प्रेक्षण:
- तृतीयक ऐल्कोहॉल: तुरंत धुंधलापन (टर्बिडिटी) आता है।
- द्वितीयक ऐल्कोहॉल: 5-10 मिनट में धुंधलापन आता है।
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल: सामान्य ताप पर कोई धुंधलापन नहीं (गर्म करने पर आ सकता है)।
- सिद्धांत: ऐल्कोहॉल, ल्यूकास अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके संगत ऐल्किल क्लोराइड बनाते हैं, जो जल में अघुलनशील होने के कारण धुंधलापन उत्पन्न करते हैं। तृतीयक ऐल्कोहॉल सबसे तेजी से अभिक्रिया करते हैं क्योंकि संबंधित कार्बोकैटायन सबसे स्थिर होता है।
- सोडियम धातु परीक्षण (Sodium Metal Test):
3. फ़ीनॉलिक समूह (-OH)
- परीक्षण:
- उदासीन फेरिक क्लोराइड परीक्षण (Neutral Ferric Chloride Test):
- अभिकर्मक: उदासीन FeCl₃ विलयन
- प्रेक्षण: बैंगनी, हरा या नीला रंग उत्पन्न होता है।
- सिद्धांत: फ़ीनॉल, FeCl₃ के साथ रंगीन संकुल (Complex) बनाते हैं।
- ब्रोमीन जल परीक्षण (Bromine Water Test):
- अभिकर्मक: ब्रोमीन जल
- प्रेक्षण: ब्रोमीन जल का रंग गायब हो जाता है और सफेद अवक्षेप (2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल) बनता है।
- सिद्धांत: फ़ीनॉल में -OH समूह के कारण वलय सक्रिय हो जाती है और ब्रोमीन के साथ आसानी से प्रतिस्थापन अभिक्रिया करती है।
- अभिक्रिया: फ़ीनॉल + 3Br₂ → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल (सफेद अवक्षेप) + 3HBr
- लिटमस परीक्षण: फ़ीनॉल दुर्बल अम्लीय होते हैं, नीले लिटमस को लाल करते हैं।
- उदासीन फेरिक क्लोराइड परीक्षण (Neutral Ferric Chloride Test):
4. ऐल्डिहाइड समूह (-CHO)
- परीक्षण:
- टॉलन अभिकर्मक परीक्षण (Tollens' Reagent Test):
- अभिकर्मक: टॉलन अभिकर्मक (अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन, [Ag(NH₃)₂]⁺OH⁻)
- प्रेक्षण: परखनली की आंतरिक सतह पर चमकदार रजत दर्पण (Silver Mirror) बनता है।
- सिद्धांत: ऐल्डिहाइड दुर्बल अपचायक होते हैं और टॉलन अभिकर्मक में Ag⁺ आयनों को धात्विक Ag में अपचयित कर देते हैं।
- अभिक्रिया: R-CHO + 2[Ag(NH₃)₂]⁺ + 3OH⁻ → R-COO⁻ + 2Ag↓ + 4NH₃ + 2H₂O
- नोट: कीटोन यह परीक्षण नहीं देते। फॉर्मिक अम्ल भी यह परीक्षण देता है।
- फेलिंग विलयन परीक्षण (Fehling's Solution Test):
- अभिकर्मक: फेलिंग विलयन A (कॉपर सल्फेट) और फेलिंग विलयन B (सोडियम पोटैशियम टार्ट्रेट) का मिश्रण।
- प्रेक्षण: लाल-भूरा अवक्षेप (क्यूप्रस ऑक्साइड, Cu₂O) बनता है।
- सिद्धांत: ऐल्डिहाइड फेलिंग विलयन में Cu²⁺ आयनों को Cu⁺ आयनों में अपचयित कर देते हैं।
- अभिक्रिया: R-CHO + 2Cu²⁺ + 5OH⁻ → R-COO⁻ + Cu₂O↓ + 3H₂O
- नोट: कीटोन और ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड (जैसे बेंज़ैल्डिहाइड) सामान्यतः यह परीक्षण नहीं देते।
- शिफ परीक्षण (Schiff's Test):
- अभिकर्मक: शिफ अभिकर्मक (सल्फ्यूरस अम्ल द्वारा रंगहीन किया गया फ़्यूशिन विलयन)
- प्रेक्षण: गुलाबी या मैजेंटा रंग पुनः प्रकट होता है।
- सिद्धांत: ऐल्डिहाइड शिफ अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके रंगीन यौगिक बनाते हैं।
- नोट: कीटोन यह परीक्षण नहीं देते।
- टॉलन अभिकर्मक परीक्षण (Tollens' Reagent Test):
5. कीटोन समूह (C=O)
- परीक्षण:
- 2,4-डाइनिट्रोफेनिलहाइड्रेज़ीन (2,4-DNP) परीक्षण:
- अभिकर्मक: 2,4-DNP अभिकर्मक
- प्रेक्षण: पीला, नारंगी या लाल अवक्षेप बनता है।
- सिद्धांत: ऐल्डिहाइड और कीटोन दोनों 2,4-DNP के साथ अभिक्रिया करके संगत 2,4-DNP व्युत्पन्न (हाइड्रेज़ोन) बनाते हैं, जो रंगीन होते हैं। यह कार्बोक्सिलिक समूह की उपस्थिति की पुष्टि करता है।
- अभिक्रिया: R₂C=O + H₂N-NH-C₆H₃(NO₂)₂ → R₂C=N-NH-C₆H₃(NO₂)₂ + H₂O
- आयोडोफॉर्म परीक्षण (Iodoform Test):
- अभिकर्मक: आयोडीन (I₂) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) विलयन
- प्रेक्षण: पीला अवक्षेप (आयोडोफॉर्म, CHI₃) बनता है।
- सिद्धांत: यह परीक्षण उन यौगिकों द्वारा दिया जाता है जिनमें CH₃CO- समूह या CH₃CH(OH)- समूह होता है।
- अभिक्रिया: CH₃COR + 3I₂ + 4NaOH → CHI₃↓ (पीला अवक्षेप) + RCOONa + 3NaI + 3H₂O
- नोट: एसीटोन, एथेनॉल, एसिटैल्डिहाइड और मेथिल कीटोन यह परीक्षण देते हैं।
- 2,4-डाइनिट्रोफेनिलहाइड्रेज़ीन (2,4-DNP) परीक्षण:
6. कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह (-COOH)
- परीक्षण:
- सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण (Sodium Bicarbonate Test):
- अभिकर्मक: संतृप्त सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) विलयन
- प्रेक्षण: तीव्र बुदबुदाहट (एफ़रवेसेंस) के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस निकलती है।
- सिद्धांत: कार्बोक्सिलिक अम्ल, सोडियम बाइकार्बोनेट से अधिक अम्लीय होते हैं, इसलिए CO₂ मुक्त करते हैं।
- अभिक्रिया: R-COOH + NaHCO₃ → R-COONa + H₂O + CO₂↑
- नोट: फ़ीनॉल यह परीक्षण नहीं देते (क्योंकि वे NaHCO₃ से दुर्बल अम्लीय होते हैं)।
- लिटमस परीक्षण: कार्बोक्सिलिक अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं।
- एस्टरीकरण परीक्षण: ऐल्कोहॉल की उपस्थिति में कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके एस्टर (फल जैसी गंध) बनाते हैं।
- सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण (Sodium Bicarbonate Test):
7. ऐमीन समूह (-NH₂)
- परीक्षण:
- लिटमस परीक्षण: ऐमीन क्षारीय होते हैं, लाल लिटमस को नीला करते हैं।
- कार्बिलऐमीन परीक्षण (Carbylamine Test) - प्राथमिक ऐमीन के लिए:
- अभिकर्मक: क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) और ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH)
- प्रेक्षण: अत्यंत अरुचिकर गंध (फाउल स्मेल) वाला आइसोसायनाइड (कार्बिलऐमीन) बनता है।
- सिद्धांत: केवल प्राथमिक ऐमीन यह परीक्षण देते हैं।
- अभिक्रिया: R-NH₂ + CHCl₃ + 3KOH (alc.) → R-NC (आइसोसायनाइड) + 3KCl + 3H₂O
- नोट: द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं देते।
- एज़ो रंजक परीक्षण (Azo Dye Test) - ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन के लिए:
- अभिकर्मक: NaNO₂/HCl (0-5°C) और β-नेफ्थॉल का क्षारीय विलयन
- प्रेक्षण: नारंगी-लाल रंजक (डाई) बनता है।
- सिद्धांत: ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन डाइऐज़ोटीकरण अभिक्रिया द्वारा डाइऐज़ोनियम लवण बनाते हैं, जो β-नेफ्थॉल के साथ युग्मन अभिक्रिया करके रंगीन एज़ो रंजक बनाते हैं।
8. नाइट्रो समूह (-NO₂)
- परीक्षण:
- लघुकरण परीक्षण (Reduction Test):
- अभिकर्मक: Sn/HCl या Fe/HCl
- प्रेक्षण: नाइट्रो समूह ऐमीन समूह में अपचयित हो जाता है, जिसे बाद में कार्बिलऐमीन परीक्षण से पहचाना जा सकता है।
- सिद्धांत: नाइट्रो यौगिकों का अम्लीय माध्यम में अपचयन करके ऐमीन बनाए जाते हैं।
- अभिक्रिया: R-NO₂ $\xrightarrow{\text{Sn/HCl}}$ R-NH₂
- लघुकरण परीक्षण (Reduction Test):
9. हैलोजन समूह (-X)
- परीक्षण:
- लसान परीक्षण (Lassaigne's Test) के बाद:
- सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण (Silver Nitrate Test):
- अभिकर्मक: नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) द्वारा अम्लीकृत सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) विलयन
- प्रेक्षण:
- क्लोरीन (Cl) के लिए: सफेद अवक्षेप (AgCl), जो अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH) में घुलनशील।
- ब्रोमीन (Br) के लिए: पीला अवक्षेप (AgBr), जो NH₄OH में आंशिक रूप से घुलनशील।
- आयोडीन (I) के लिए: गहरा पीला अवक्षेप (AgI), जो NH₄OH में अघुलनशील।
- सिद्धांत: कार्बनिक यौगिक में उपस्थित हैलोजन को सोडियम संलयन द्वारा आयनिक रूप में परिवर्तित किया जाता है। फिर AgNO₃ के साथ अभिक्रिया करके संगत सिल्वर हैलाइड का अवक्षेप बनता है।
- सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण (Silver Nitrate Test):
- लसान परीक्षण (Lassaigne's Test) के बाद:
सरकारी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:
- विभेदक परीक्षण: उन परीक्षणों पर विशेष ध्यान दें जो दो समान क्रियात्मक समूहों (जैसे ऐल्डिहाइड और कीटोन, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल, ऐल्कोहॉल और फ़ीनॉल, कार्बोक्सिलिक अम्ल और फ़ीनॉल) के बीच अंतर करने में मदद करते हैं।
- अभिकर्मक और प्रेक्षण: प्रत्येक परीक्षण के लिए उपयोग किए जाने वाले अभिकर्मकों और अपेक्षित प्रेक्षणों को अच्छी तरह से याद रखें।
- रासायनिक सिद्धांत: परीक्षणों के पीछे के रासायनिक सिद्धांतों और संबंधित अभिक्रियाओं को समझें।
- अपवाद और सीमाएँ: कुछ परीक्षणों के अपवादों और सीमाओं को जानें (जैसे ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड फेलिंग परीक्षण नहीं देते)।
- लसान परीक्षण: यह कार्बनिक यौगिकों में N, S और हैलोजन जैसे तत्वों की पहचान के लिए एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण परीक्षण है, जिसके बाद विशिष्ट परीक्षण किए जाते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।
1. निम्नलिखित में से कौन सा अभिकर्मक असंतृप्तता (कार्बन-कार्बन द्विबंध या त्रिबंध) की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है?
(a) ल्यूकास अभिकर्मक
(b) टॉलन अभिकर्मक
(c) बेयर अभिकर्मक
(d) सोडियम बाइकार्बोनेट
2. एक कार्बनिक यौगिक सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन के साथ तीव्र बुदबुदाहट उत्पन्न करता है। यह इंगित करता है कि यौगिक में कौन सा क्रियात्मक समूह उपस्थित है?
(a) ऐल्कोहॉलिक (-OH)
(b) फ़ीनॉलिक (-OH)
(c) ऐल्डिहाइड (-CHO)
(d) कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH)
3. टॉलन अभिकर्मक परीक्षण में, ऐल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया करने पर परखनली की आंतरिक सतह पर क्या बनता है?
(a) लाल-भूरा अवक्षेप
(b) चमकदार रजत दर्पण
(c) पीला अवक्षेप
(d) नीला रंग
4. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल के बीच विभेद करने के लिए किस परीक्षण का उपयोग किया जाता है?
(a) आयोडोफॉर्म परीक्षण
(b) ल्यूकास परीक्षण
(c) फेलिंग विलयन परीक्षण
(d) उदासीन फेरिक क्लोराइड परीक्षण
5. एक कार्बनिक यौगिक उदासीन फेरिक क्लोराइड विलयन के साथ बैंगनी रंग देता है। यह किस क्रियात्मक समूह की उपस्थिति को दर्शाता है?
(a) ऐल्कोहॉल
(b) फ़ीनॉल
(c) ऐमीन
(d) कीटोन
6. कार्बिलऐमीन परीक्षण किस प्रकार के ऐमीन की पहचान के लिए विशिष्ट है?
(a) प्राथमिक ऐमीन
(b) द्वितीयक ऐमीन
(c) तृतीयक ऐमीन
(d) सभी प्रकार के ऐमीन
7. आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा किस क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों की पहचान की जा सकती है?
(a) केवल CH₃CO- समूह
(b) केवल CH₃CH(OH)- समूह
(c) CH₃CO- या CH₃CH(OH)- समूह वाले यौगिक
(d) केवल -CHO समूह
8. फेलिंग विलयन परीक्षण में, ऐल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया करने पर बनने वाला लाल-भूरा अवक्षेप किसका होता है?
(a) Cu₂O
(b) CuO
(c) Ag₂O
(d) Ag
9. लसान परीक्षण के बाद, हैलोजन की पहचान के लिए नाइट्रिक अम्ल द्वारा अम्लीकृत सिल्वर नाइट्रेट विलयन मिलाया जाता है। यदि सफेद अवक्षेप बनता है जो अमोनियम हाइड्रॉक्साइड में घुलनशील है, तो कौन सा हैलोजन उपस्थित है?
(a) ब्रोमीन
(b) आयोडीन
(c) क्लोरीन
(d) फ्लोरीन
10. निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देगा?
(a) एथेनॉल
(b) प्रोपेन-2-ऑल
(c) प्रोपेनोन (एसीटोन)
(d) प्रोपेन-1-ऑल
MCQ उत्तर:
- (c)
- (d)
- (b)
- (b)
- (b)
- (a)
- (c)
- (a)
- (c)
- (d)
मुझे उम्मीद है कि यह विस्तृत जानकारी और प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो बेझिझक पूछें।