Class 12 Chemistry Notes Chapter 13 (Chapter 13) – Examplar Problems (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान के अध्याय 13 'एमीन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यानपूर्वक विचार करें।
अध्याय 13: एमीन (Amines)
एमीन अमोनिया के व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें अमोनिया के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को एल्किल या ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। ये कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं और प्रकृति में प्रोटीन, विटामिन, हार्मोन और क्षाराभ (alkaloids) में पाए जाते हैं। संश्लेषित बहुलकों, रंजकों और औषधियों के निर्माण में भी इनका व्यापक उपयोग होता है।
1. वर्गीकरण (Classification)
एमीनों को नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े एल्किल या ऐरिल समूहों की संख्या के आधार पर प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) और तृतीयक (3°) एमीनों में वर्गीकृत किया जाता है।
- प्राथमिक एमीन (Primary Amine, 1°): जब अमोनिया के एक हाइड्रोजन परमाणु को एल्किल या ऐरिल समूह से प्रतिस्थापित किया जाता है।
- उदाहरण: CH₃NH₂ (मेथेनेमीन), C₂H₅NH₂ (एथेनेमीन), C₆H₅NH₂ (एनिलीन)
- द्वितीयक एमीन (Secondary Amine, 2°): जब अमोनिया के दो हाइड्रोजन परमाणुओं को एल्किल या ऐरिल समूहों से प्रतिस्थापित किया जाता है।
- उदाहरण: (CH₃)₂NH (N-मेथिलमेथेनेमीन), C₂H₅NHCH₃ (N-मेथिलएथेनेमीन)
- तृतीयक एमीन (Tertiary Amine, 3°): जब अमोनिया के तीनों हाइड्रोजन परमाणुओं को एल्किल या ऐरिल समूहों से प्रतिस्थापित किया जाता है।
- उदाहरण: (CH₃)₃N (N,N-डाइमेथिलमेथेनेमीन)
2. नामकरण (Nomenclature)
एमीनों का नामकरण सामान्य नाम पद्धति और IUPAC पद्धति दोनों द्वारा किया जाता है।
- सामान्य नाम पद्धति: एल्किल समूह के नाम के अंत में 'एमीन' जोड़कर।
- CH₃NH₂: मेथिलएमीन
- (CH₃)₂NH: डाइमेथिलएमीन
- (CH₃)₃N: ट्राइमेथिलएमीन
- C₆H₅NH₂: एनिलीन (यह एक सामान्य नाम है जिसे IUPAC द्वारा भी स्वीकार किया गया है)
- IUPAC नाम पद्धति: एल्केन के 'e' को हटाकर 'एमीन' जोड़कर।
- CH₃NH₂: मेथेनेमीन
- CH₃CH₂NH₂: एथेनेमीन
- द्वितीयक और तृतीयक एमीनों में, सबसे बड़े एल्किल समूह को जनक एल्केन एमीन माना जाता है, और अन्य एल्किल समूहों को 'N-' उपसर्ग के साथ प्रतिस्थापी के रूप में दर्शाया जाता है।
- CH₃NHCH₂CH₃: N-मेथिलएथेनेमीन
- (CH₃)₃N: N,N-डाइमेथिलमेथेनेमीन
3. एमीनों की संरचना (Structure of Amines)
एमीनों में नाइट्रोजन परमाणु sp³ संकरित होता है। नाइट्रोजन पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) होता है। इसकी संरचना अमोनिया के समान पिरामिडीय होती है। C-N-H या C-N-C आबंध कोण 109.5° से थोड़े कम होते हैं (लगभग 108°), क्योंकि एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण आबंध युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण से अधिक होता है।
4. एमीनों के विरचन की विधियाँ (Methods of Preparation of Amines)
a) नाइट्रो यौगिकों का अपचयन (Reduction of Nitro Compounds):
नाइट्रोएल्केन और नाइट्रोऐरीन का अपचयन करके प्राथमिक एमीन बनाए जा सकते हैं।
- अभिकर्मक: H₂/Pd, Pt या Ni; या Sn/HCl, Fe/HCl.
- R-NO₂ + 3H₂ $\xrightarrow{\text{Pd}}$ R-NH₂ + 2H₂O
- C₆H₅-NO₂ + 6[H] $\xrightarrow{\text{Sn/HCl}}$ C₆H₅-NH₂ + 2H₂O
(Fe/HCl को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि अभिक्रिया में उत्पन्न FeCl₂ जल अपघटित होकर HCl का उत्पादन करता है, जिससे HCl की आवश्यकता कम हो जाती है।)
b) एल्किल हैलाइडों का अमोनिया अपघटन (Ammonolysis of Alkyl Halides):
एल्किल हैलाइडों की अमोनिया के साथ अभिक्रिया से प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एमीन और चतुष्क अमोनियम लवण का मिश्रण प्राप्त होता है।
- R-X + NH₃ $\xrightarrow{\text{373 K}}$ R-NH₃⁺X⁻ $\xrightarrow{\text{NaOH}}$ R-NH₂ (1°)
- R-NH₂ + R-X $\rightarrow$ R₂NH₂⁺X⁻ $\xrightarrow{\text{NaOH}}$ R₂NH (2°)
- R₂NH + R-X $\rightarrow$ R₃NH⁺X⁻ $\xrightarrow{\text{NaOH}}$ R₃N (3°)
- R₃N + R-X $\rightarrow$ R₄N⁺X⁻ (चतुष्क अमोनियम लवण)
- सीमा: यह विधि प्राथमिक एमीन के शुद्ध रूप में विरचन के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि मिश्रण प्राप्त होता है। प्राथमिक एमीन की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए अमोनिया को अधिक मात्रा में लिया जाता है।
c) नाइट्राइलों का अपचयन (Reduction of Nitriles):
नाइट्राइल (एल्केननाइट्राइल) का अपचयन LiAlH₄ या उत्प्रेरक हाइड्रोजनीकरण (Ni, Pt, Pd) द्वारा प्राथमिक एमीन में किया जा सकता है।
- R-C≡N + 4[H] $\xrightarrow{\text{LiAlH₄ या Ni/H₂}}$ R-CH₂-NH₂ (1°)
- यह एमीन श्रृंखला को एक कार्बन परमाणु से बढ़ाने के लिए उपयोगी है।
d) एमाइडों का अपचयन (Reduction of Amides):
एमाइडों का LiAlH₄ द्वारा अपचयन करने पर प्राथमिक एमीन प्राप्त होते हैं।
- R-CO-NH₂ + 4[H] $\xrightarrow{\text{LiAlH₄ / H₂O}}$ R-CH₂-NH₂ (1°)
e) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis):
यह विधि शुद्ध प्राथमिक एमीन (विशेषकर ऐलिफैटिक प्राथमिक एमीन) के विरचन के लिए बहुत उपयोगी है।
- चरण:
- थैलिमाइड की एथेनॉलिक KOH से अभिक्रिया कर पोटैशियम थैलिमाइड बनता है।
- पोटैशियम थैलिमाइड की एल्किल हैलाइड से अभिक्रिया कर N-एल्किलथैलिमाइड बनता है।
- N-एल्किलथैलिमाइड का क्षारीय जल अपघटन (NaOH या KOH) करने पर प्राथमिक एमीन और थैलिक अम्ल का सोडियम/पोटैशियम लवण प्राप्त होता है।
- महत्व: ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीन (जैसे एनिलीन) इस विधि से नहीं बनाए जा सकते, क्योंकि ऐरिल हैलाइड (C₆H₅X) थैलिमाइड से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं करते।
f) हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया (Hoffmann Bromamide Degradation Reaction):
इस अभिक्रिया में प्राथमिक एमीन का विरचन एमाइड से किया जाता है, जिसमें एमाइड की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम होता है।
- अभिकर्मक: Br₂ और NaOH (या KOH) का जलीय या एथेनॉलिक विलयन।
- R-CO-NH₂ + Br₂ + 4NaOH $\rightarrow$ R-NH₂ + Na₂CO₃ + 2NaBr + 2H₂O
- महत्व: यह कार्बन श्रृंखला को एक कार्बन परमाणु से कम करने की विधि है।
5. भौतिक गुणधर्म (Physical Properties)
- अवस्था और गंध: निम्नतर ऐलिफैटिक एमीन (C₁ से C₃) रंगहीन गैसें होती हैं, जिनकी गंध अमोनिया जैसी होती है। उच्चतर एमीन द्रव या ठोस होते हैं और मछली जैसी गंध वाले होते हैं। एनिलीन और अन्य ऐरिल एमीन रंगहीन होते हैं, लेकिन वायु में ऑक्सीकरण के कारण रंगीन हो जाते हैं।
- क्वथनांक (Boiling Points):
- एमीन ध्रुवीय यौगिक होते हैं और अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं।
- प्राथमिक और द्वितीयक एमीन हाइड्रोजन आबंध के कारण संगत हाइड्रोकार्बन की तुलना में उच्च क्वथनांक रखते हैं।
- तृतीयक एमीन में नाइट्रोजन से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता, इसलिए वे हाइड्रोजन आबंध नहीं बनाते। अतः उनके क्वथनांक संगत प्राथमिक और द्वितीयक एमीन से कम होते हैं।
- समान आणविक द्रव्यमान वाले यौगिकों का क्वथनांक क्रम: कार्बोक्सिलिक अम्ल > अल्कोहल > प्राथमिक एमीन > द्वितीयक एमीन > तृतीयक एमीन > ईथर > हाइड्रोकार्बन।
- विलेयता (Solubility):
- निम्नतर एमीन (C₁ से C₆) जल में विलेय होते हैं क्योंकि वे जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं।
- एल्किल समूह के आकार में वृद्धि के साथ जलविरागी भाग बढ़ता है, जिससे जल में विलेयता घटती है।
- एमीन कार्बनिक विलायकों जैसे ईथर, अल्कोहल, बेंजीन में विलेय होते हैं।
6. रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions)
एमीन में नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति और नाइट्रोजन-हाइड्रोजन आबंध की ध्रुवीयता के कारण अभिक्रियाएँ होती हैं।
a) क्षारकीय प्रकृति (Basic Character):
एमीन लुईस क्षार होते हैं क्योंकि इनमें नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जिसे वे प्रोटॉन या लुईस अम्ल को दान कर सकते हैं।
- R-NH₂ + H-X $\rightarrow$ R-NH₃⁺X⁻ (एमीन लवण)
- एमीन लवण प्रबल अम्लों के साथ अभिक्रिया करके बनते हैं। ये लवण जल में विलेय होते हैं लेकिन ईथर जैसे कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं।
- क्षारकता की तुलना:
- एल्किल एमीन बनाम अमोनिया: एल्किल एमीन अमोनिया से अधिक क्षारीय होते हैं। एल्किल समूह का +I प्रभाव नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है, जिससे एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
- प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक ऐलिफैटिक एमीन की क्षारकता (जलीय माध्यम में):
- द्वितीयक एमीन > प्राथमिक एमीन > तृतीयक एमीन > अमोनिया (जब एल्किल समूह CH₃ हो)
- द्वितीयक एमीन > तृतीयक एमीन > प्राथमिक एमीन > अमोनिया (जब एल्किल समूह C₂H₅ हो)
- कारण:
- +I प्रभाव: एल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दान करते हैं, नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे क्षारकता बढ़ती है।
- विलायकन प्रभाव (Solvation effect): जलीय विलयन में एमीन लवण जल के अणुओं द्वारा विलायकित होते हैं। जितनी अधिक हाइड्रोजन आबंध बनाने की क्षमता होती है, उतना ही अधिक विलायकन होता है, और उतना ही अधिक लवण स्थायी होता है, जिससे क्षारकता बढ़ती है। प्राथमिक एमीन लवण सबसे अधिक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं, फिर द्वितीयक, फिर तृतीयक।
- त्रिविम बाधा (Steric hindrance): बड़े एल्किल समूह नाइट्रोजन परमाणु को घेर लेते हैं, जिससे प्रोटॉन का उस तक पहुंचना कठिन हो जाता है, और क्षारकता घट जाती है।
- इन तीनों प्रभावों का संयुक्त परिणाम जलीय माध्यम में क्षारकता के क्रम को निर्धारित करता है।
- ऐरिल एमीन बनाम ऐलिफैटिक एमीन/अमोनिया: ऐरिल एमीन (जैसे एनिलीन) ऐलिफैटिक एमीन और अमोनिया से कम क्षारीय होते हैं।
- कारण: ऐरिल एमीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में होता है, जिससे यह इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने के लिए कम उपलब्ध होता है।
- अनुनाद संरचनाओं में, नाइट्रोजन पर धनात्मक आवेश आता है, जिससे इसकी प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है।
- प्रतिस्थापियों का प्रभाव:
- इलेक्ट्रॉन दान करने वाले समूह (+R, +I): (जैसे -OCH₃, -CH₃) ऐरिल एमीन की क्षारकता बढ़ाते हैं।
- इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह (-R, -I): (जैसे -NO₂, -COOH, -SO₃H, -X) ऐरिल एमीन की क्षारकता घटाते हैं।
b) एल्किलीकरण (Alkylation):
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीन एल्किल हैलाइडों के साथ अभिक्रिया करके क्रमशः द्वितीयक, तृतीयक एमीन और चतुष्क अमोनियम लवण बनाते हैं। (यह हॉफमैन अमोनिया अपघटन के समान है)।
c) एसिलीकरण (Acylation):
एमीन (प्राथमिक और द्वितीयक) अम्ल क्लोराइड, एनहाइड्राइड या एस्टर के साथ अभिक्रिया करके एमाइड बनाते हैं। इस अभिक्रिया में नाइट्रोजन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु का प्रतिस्थापन एसिल समूह (R-CO-) द्वारा होता है।
- R-NH₂ + R'-CO-Cl $\xrightarrow{\text{क्षार}}$ R-NH-CO-R' + HCl
- C₆H₅-NH₂ + CH₃COCl $\xrightarrow{\text{पिरिडीन}}$ C₆H₅-NH-COCH₃ (एसिटैनिलाइड) + HCl
- तृतीयक एमीन इस अभिक्रिया में भाग नहीं लेते क्योंकि उनमें नाइट्रोजन से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता।
d) कार्बिलएमीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction / आइसोसायनाइड परीक्षण):
यह प्राथमिक एमीन (ऐलिफैटिक और ऐरोमैटिक) के परीक्षण के लिए एक विशिष्ट अभिक्रिया है।
- प्राथमिक एमीन को क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) और एथेनॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड (कार्बिलएमीन) बनते हैं।
- R-NH₂ + CHCl₃ + 3KOH $\xrightarrow{\text{गर्म}}$ R-N≡C (आइसोसायनाइड) + 3KCl + 3H₂O
- द्वितीयक और तृतीयक एमीन यह अभिक्रिया नहीं देते।
e) नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया (Reaction with Nitrous Acid):
नाइट्रस अम्ल (NaNO₂ और HCl के मिश्रण से ताजा बनाया गया) एमीनों के साथ भिन्न-भिन्न प्रकार से अभिक्रिया करता है, जिसका उपयोग एमीनों को पहचानने में किया जाता है।
- प्राथमिक ऐलिफैटिक एमीन (1° R-NH₂): डाइएजोनियम लवण बनाते हैं, जो अत्यधिक अस्थिर होते हैं और तुरंत नाइट्रोजन गैस (N₂) मुक्त करते हुए अल्कोहल में अपघटित हो जाते हैं।
- R-NH₂ + HNO₂ (NaNO₂ + HCl) $\xrightarrow{\text{273-278 K}}$ [R-N₂⁺Cl⁻] $\rightarrow$ R-OH + N₂↑ + HCl
- प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन (1° Ar-NH₂): बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड जैसे स्थायी डाइएजोनियम लवण बनाते हैं (डाइएजोटीकरण)। ये लवण 273-278 K (0-5°C) पर स्थिर होते हैं।
- Ar-NH₂ + HNO₂ (NaNO₂ + HCl) $\xrightarrow{\text{273-278 K}}$ [Ar-N₂⁺Cl⁻] + 2H₂O
- द्वितीयक एमीन (2° R₂NH या Ar₂NH): नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके N-नाइट्रोसोएमीन बनाते हैं, जो पीले तैलीय यौगिक होते हैं।
- R₂NH + HNO₂ $\rightarrow$ R₂N-N=O (N-नाइट्रोसोएमीन) + H₂O
- तृतीयक ऐलिफैटिक एमीन (3° R₃N): नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके डाइएजोनियम लवण बनाते हैं, जो जल अपघटित होकर अल्कोहल और N-नाइट्रोसोएमीन देते हैं।
- तृतीयक ऐरोमैटिक एमीन (3° Ar₃N): पैरा-नाइट्रोसो यौगिक बनाते हैं।
f) एरीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया (Reaction with Arenesulphonyl chloride - Hinsberg's Reagent):
बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड (C₆H₅SO₂Cl) को हिंसबर्ग अभिकर्मक कहते हैं। यह प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीनों में विभेद करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- प्राथमिक एमीन (1°): बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके N-एल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं। इस सल्फोनैमाइड में नाइट्रोजन से जुड़ा एक अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु होता है, अतः यह KOH जैसे क्षार में विलेय होता है।
- R-NH₂ + C₆H₅SO₂Cl $\rightarrow$ C₆H₅SO₂NHR + HCl
- C₆H₅SO₂NHR + KOH $\rightarrow$ C₆H₅SO₂N⁻K⁺R + H₂O (जल में विलेय)
- द्वितीयक एमीन (2°): बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करके N,N-डाइएल्किलबेंजीनसल्फोनैमाइड बनाते हैं। इस सल्फोनैमाइड में नाइट्रोजन से जुड़ा कोई अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता, अतः यह KOH जैसे क्षार में अविलेय होता है।
- R₂NH + C₆H₅SO₂Cl $\rightarrow$ C₆H₅SO₂NR₂ + HCl (क्षार में अविलेय)
- तृतीयक एमीन (3°): बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करते क्योंकि नाइट्रोजन से जुड़ा कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता।
g) इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Electrophilic Substitution Reactions):
ऐरोमैटिक एमीन (जैसे एनिलीन) में -NH₂ समूह एक प्रबल ऑर्थो-पैरा निर्देशक और इलेक्ट्रॉन दान करने वाला समूह होता है, जो बेंजीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय करता है।
- ब्रोमीनीकरण (Bromination):
- एनिलीन की ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करने पर 2,4,6-ट्राइब्रोमोएनिलीन प्राप्त होता है, जो एक सफेद अवक्षेप है। (-NH₂ समूह की अत्यधिक सक्रियण क्षमता के कारण)।
- C₆H₅NH₂ + 3Br₂ (aq) $\rightarrow$ 2,4,6-Br₃C₆H₂NH₂ + 3HBr
- मोनो-प्रतिस्थापित उत्पाद प्राप्त करने के लिए, -NH₂ समूह का एसिटिलीकरण करके इसकी सक्रियण क्षमता को कम किया जाता है (जैसे एसिटैनिलाइड बनाना)।
- C₆H₅NH₂ $\xrightarrow{\text{CH₃COCl}}$ C₆H₅NHCOCH₃ $\xrightarrow{\text{Br₂/CH₃COOH}}$ p-ब्रोमोएसिटैनिलाइड $\xrightarrow{\text{H⁺/OH⁻}}$ p-ब्रोमोएनिलीन।
- नाइट्रीकरण (Nitration):
- एनिलीन का सीधा नाइट्रीकरण करने पर प्रबल अम्लीय माध्यम में एनिलीनियम आयन (C₆H₅NH₃⁺) बनता है, जो मेटा-निर्देशक होता है। इसलिए ऑर्थो, मेटा और पैरा-नाइट्रोएनिलीन का मिश्रण प्राप्त होता है (मेटा-उत्पाद भी महत्वपूर्ण मात्रा में)।
- मोनो-नाइट्रोएनिलीन प्राप्त करने के लिए, -NH₂ समूह का एसिटिलीकरण करके सक्रियण क्षमता को नियंत्रित किया जाता है।
- C₆H₅NH₂ $\xrightarrow{\text{CH₃COCl}}$ C₆H₅NHCOCH₃ $\xrightarrow{\text{Conc. HNO₃/Conc. H₂SO₄}}$ p-नाइट्रोएसिटैनिलाइड $\xrightarrow{\text{H⁺/OH⁻}}$ p-नाइट्रोएनिलीन।
- सल्फोनीकरण (Sulphonation):
- एनिलीन सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके एनिलीनियम हाइड्रोजन सल्फेट बनाता है, जिसे गर्म करने पर सल्फोनिलिक अम्ल (एक ज्विटर आयन) प्राप्त होता है।
- C₆H₅NH₂ + H₂SO₄ $\rightarrow$ [C₆H₅NH₃⁺HSO₄⁻] $\xrightarrow{\text{453-473 K}}$ p-NH₂C₆H₄SO₃H (सल्फोनिलिक अम्ल)
- फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रिया (Friedel-Crafts Reaction):
- एनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट एल्किलीकरण या एसिलीकरण अभिक्रिया नहीं देता।
- कारण: एनिलीन लुईस क्षार है और AlCl₃ (लुईस अम्ल) के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाता है (C₆H₅NH₂⁺AlCl₃⁻)। इस लवण में नाइट्रोजन पर धनात्मक आवेश होता है, जिससे यह प्रबल निष्क्रियकारी समूह की तरह कार्य करता है और बेंजीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति निष्क्रिय कर देता है।
डाइएजोनियम लवण (Diazonium Salts)
ऐरोमैटिक डाइएजोनियम लवण (Ar-N₂⁺X⁻) कार्बनिक संश्लेषण में बहुत महत्वपूर्ण मध्यवर्ती होते हैं।
1. विरचन (Preparation):
प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन (जैसे एनिलीन) का डाइएजोटीकरण (diazotisation) करके इन्हें बनाया जाता है।
- Ar-NH₂ + NaNO₂ + 2HCl $\xrightarrow{\text{273-278 K}}$ Ar-N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O
2. रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions):
a) नाइट्रोजन विस्थापन अभिक्रियाएँ (Reactions involving displacement of Nitrogen):
डाइएजोनियम समूह (-N₂⁺) एक बहुत अच्छा निष्कासन समूह है।
- हैलाइड या सायनाइड द्वारा प्रतिस्थापन (Sandmeyer Reaction):
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{CuCl/HCl}}$ Ar-Cl + N₂
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{CuBr/HBr}}$ Ar-Br + N₂
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{CuCN/KCN}}$ Ar-CN + N₂
- हैलाइड द्वारा प्रतिस्थापन (Gattermann Reaction):
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{Cu/HCl}}$ Ar-Cl + N₂
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{Cu/HBr}}$ Ar-Br + N₂
- (सैंडमेयर अभिक्रिया की तुलना में गटरमैन अभिक्रिया की उपज कम होती है।)
- आयोडाइड द्वारा प्रतिस्थापन:
- Ar-N₂⁺Cl⁻ + KI $\rightarrow$ Ar-I + N₂ + KCl
- फ्लोरोबोरेट द्वारा प्रतिस्थापन (Balz-Schiemann Reaction):
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{HBF₄}}$ Ar-N₂⁺BF₄⁻ $\xrightarrow{\text{गर्म}}$ Ar-F + BF₃ + N₂
- हाइड्रोजन द्वारा प्रतिस्थापन:
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{H₃PO₂/H₂O या CH₃CH₂OH}}$ Ar-H + N₂ + H₃PO₃ + HCl (या CH₃CHO + HCl)
- हाइड्रॉक्सिल समूह द्वारा प्रतिस्थापन:
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{H₂O/गर्म}}$ Ar-OH + N₂ + HCl
- नाइट्रो समूह द्वारा प्रतिस्थापन:
- Ar-N₂⁺Cl⁻ $\xrightarrow{\text{NaNO₂/Cu}}$ Ar-NO₂ + N₂ + NaCl
b) नाइट्रोजन प्रतिधारण अभिक्रियाएँ (Reactions involving retention of Diazo group):
- युग्मन अभिक्रियाएँ (Coupling Reactions):
- डाइएजोनियम लवण सक्रिय ऐरोमैटिक यौगिकों जैसे फिनोल या एनिलीन के साथ अभिक्रिया करके एजो यौगिक बनाते हैं, जिनमें -N=N- आबंध होता है। ये रंगीन यौगिक रंजक के रूप में उपयोग होते हैं।
- फिनोल के साथ: (पैरा-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन - नारंगी रंजक)
- Ar-N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅OH $\xrightarrow{\text{pH 9-10}}$ Ar-N=N-C₆H₄-OH(p) + HCl
- एनिलीन के साथ: (पैरा-एमिनोएजोबेंजीन - पीला रंजक)
- Ar-N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅NH₂ $\xrightarrow{\text{pH 4-5}}$ Ar-N=N-C₆H₄-NH₂(p) + HCl
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा नहीं बनाया जा सकता है?
a) एथेनेमीन
b) एनिलीन
c) 2-ब्रोमोप्रोपेनेमीन
d) मेथिलएमीन -
हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया में, एमाइड से एमीन में रूपांतरण के दौरान क्या होता है?
a) कार्बन श्रृंखला में एक कार्बन परमाणु की वृद्धि होती है।
b) कार्बन श्रृंखला में एक कार्बन परमाणु की कमी होती है।
c) कार्बन श्रृंखला अपरिवर्तित रहती है।
d) नाइट्रोजन परमाणु का प्रतिस्थापन होता है। -
जलीय विलयन में एमीनों की क्षारकता का सही क्रम है (जब एल्किल समूह CH₃ हो):
a) 3° > 2° > 1° > NH₃
b) 2° > 1° > 3° > NH₃
c) 2° > 3° > 1° > NH₃
d) 1° > 2° > 3° > NH₃ -
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीनों में विभेद करने के लिए कौन सा अभिकर्मक उपयोग किया जाता है?
a) नाइट्रस अम्ल (NaNO₂/HCl)
b) हिंसबर्ग अभिकर्मक (बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड)
c) क्लोरोफॉर्म और KOH
d) उपरोक्त सभी -
एनिलीन का सीधा नाइट्रीकरण करने पर मेटा-नाइट्रोएनिलीन भी महत्वपूर्ण मात्रा में क्यों बनता है?
a) -NH₂ समूह की प्रबल ऑर्थो-पैरा निर्देशक प्रकृति के कारण।
b) अम्लीय माध्यम में एनिलीनियम आयन के निर्माण के कारण, जो मेटा-निर्देशक होता है।
c) नाइट्रो समूह के -M प्रभाव के कारण।
d) नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की अनुपलब्धता के कारण। -
कार्बिलएमीन अभिक्रिया किसके परीक्षण के लिए उपयोग की जाती है?
a) प्राथमिक एमीन
b) द्वितीयक एमीन
c) तृतीयक एमीन
d) अल्कोहल -
बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड की CuCN/KCN के साथ अभिक्रिया क्या कहलाती है?
a) गटरमैन अभिक्रिया
b) सैंडमेयर अभिक्रिया
c) बाल्ज़-शिमन अभिक्रिया
d) युग्मन अभिक्रिया -
निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक जल में सबसे कम विलेय है?
a) CH₃NH₂
b) (CH₃)₂NH
c) (CH₃)₃N
d) C₆H₅NH₂ -
एनिलीन फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रिया क्यों नहीं देता है?
a) यह एक दुर्बल क्षार है।
b) यह एक प्रबल अम्ल है।
c) यह लुईस अम्ल AlCl₃ के साथ लवण बनाता है, जो वलय को निष्क्रिय कर देता है।
d) -NH₂ समूह मेटा-निर्देशक है। -
जब बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फिनोल के साथ क्षारीय माध्यम में अभिक्रिया कराई जाती है, तो क्या उत्पाद बनता है?
a) क्लोरोबेंजीन
b) नाइट्रोबेंजीन
c) पैरा-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन
d) बेंजीन
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- b) एनिलीन
- b) कार्बन श्रृंखला में एक कार्बन परमाणु की कमी होती है।
- c) 2° > 1° > 3° > NH₃ (जब एल्किल समूह CH₃ हो, 2° > 3° > 1° > NH₃ जब एल्किल समूह C₂H₅ हो)
- d) उपरोक्त सभी (प्रत्येक अभिकर्मक का उपयोग विशिष्ट प्रकार के एमीन के लिए किया जा सकता है)
- b) अम्लीय माध्यम में एनिलीनियम आयन के निर्माण के कारण, जो मेटा-निर्देशक होता है।
- a) प्राथमिक एमीन
- b) सैंडमेयर अभिक्रिया
- d) C₆H₅NH₂ (बड़ा जलविरागी ऐरिल समूह)
- c) यह लुईस अम्ल AlCl₃ के साथ लवण बनाता है, जो वलय को निष्क्रिय कर देता है।
- c) पैरा-हाइड्रॉक्सीएजोबेंजीन
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या प्रश्न के लिए, बेझिझक पूछें। शुभकामनाएँ!