Class 12 Chemistry Notes Chapter 2 (Chapter 2) – Lab Manual (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान की प्रायोगिक पुस्तिका (Lab Manual) के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय, आयतनमितीय विश्लेषण (Volumetric Analysis), पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए न केवल सैद्धांतिक रूप से बल्कि गणनाओं और अवधारणाओं के दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
अध्याय: आयतनमितीय विश्लेषण (Volumetric Analysis) - अनुमापन (Titrations)
1. परिचय (Introduction)
आयतनमितीय विश्लेषण रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें किसी अज्ञात सांद्रता वाले विलयन की सांद्रता को ज्ञात सांद्रता वाले विलयन की सहायता से निर्धारित किया जाता है। इस प्रक्रिया को अनुमापन (Titration) कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य एक रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारकों के आयतनों के आधार पर उनकी सांद्रता ज्ञात करना है।
2. मूल अवधारणाएँ (Basic Concepts)
- विलयन (Solution): दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण।
- अनुमापक (Titrant): ज्ञात सांद्रता वाला विलयन, जिसे ब्यूरेट में लिया जाता है।
- अनुमाप्य (Titrand/Analyte): अज्ञात सांद्रता वाला विलयन, जिसे कोनिकल फ्लास्क में लिया जाता है।
- सांद्रता की इकाइयाँ (Units of Concentration):
- मोलरता (Molarity, M): 1 लीटर विलयन में घुले विलेय के मोलों की संख्या।
- सूत्र: $M = \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}}$
- इकाई: mol/L या M
- नॉर्मलता (Normality, N): 1 लीटर विलयन में घुले विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या।
- सूत्र: $N = \frac{\text{विलेय के ग्राम तुल्यांक}}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}}$
- इकाई: Gram equivalent/L या N
- नॉर्मलता और मोलरता में संबंध: $N = M \times \text{संयोजकता कारक (n-कारक)}$
- तुल्यांकी द्रव्यमान (Equivalent Mass): वह द्रव्यमान जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में हाइड्रोजन के 1 भाग, ऑक्सीजन के 8 भाग या क्लोरीन के 35.5 भाग से संयोग करता है या उन्हें विस्थापित करता है।
- सूत्र: $\text{तुल्यांकी द्रव्यमान} = \frac{\text{मोलर द्रव्यमान}}{\text{संयोजकता कारक (n-कारक)}}$
- n-कारक:
- अम्ल के लिए: उसकी क्षारकता (एक अणु द्वारा दिए गए $H^+$ आयनों की संख्या)। जैसे $HCl$ के लिए 1, $H_2SO_4$ के लिए 2।
- क्षार के लिए: उसकी अम्लता (एक अणु द्वारा दिए गए $OH^-$ आयनों की संख्या)। जैसे $NaOH$ के लिए 1, $Ca(OH)_2$ के लिए 2।
- लवण के लिए: धनायन या ऋणायन पर कुल आवेश। जैसे $Na_2CO_3$ के लिए 2।
- ऑक्सीकारक/अपचायक के लिए: प्रति अणु इलेक्ट्रॉन परिवर्तन की संख्या।
- मोलरता (Molarity, M): 1 लीटर विलयन में घुले विलेय के मोलों की संख्या।
- प्राथमिक मानक पदार्थ (Primary Standard Substances): वे पदार्थ जिनका शुद्ध रूप में उपलब्ध होना, वायुमंडलीय नमी और कार्बन डाइऑक्साइड से अप्रभावित रहना, उच्च मोलर द्रव्यमान होना और विलयन में स्थिर रहना सुनिश्चित होता है। इनका उपयोग सीधे ज्ञात सांद्रता वाले विलयन बनाने के लिए किया जाता है।
- गुण: उच्च शुद्धता, वायु/नमी से अप्रभावित, स्थिर, उच्च तुल्यांकी द्रव्यमान।
- उदाहरण: ऑक्सेलिक अम्ल ($H_2C_2O_4 \cdot 2H_2O$), निर्जल सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3$), फेरस अमोनियम सल्फेट (मोर लवण)।
- द्वितीयक मानक पदार्थ (Secondary Standard Substances): वे पदार्थ जिनकी शुद्धता कम होती है, जो वायुमंडलीय नमी या कार्बन डाइऑक्साइड से प्रभावित हो सकते हैं, और जिनका विलयन समय के साथ अपनी सांद्रता बदल सकता है। इनकी सांद्रता को प्राथमिक मानक पदार्थ के विलयन के साथ अनुमापन करके निर्धारित किया जाता है।
- उदाहरण: सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$), पोटेशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$), सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$)।
- तुल्यांकी बिंदु (Equivalence Point): वह बिंदु जहाँ अनुमापन अभिक्रिया पूर्ण हो जाती है, अर्थात अभिकारकों के रासायनिक तुल्यांक एक-दूसरे के साथ पूरी तरह से अभिक्रिया कर लेते हैं। यह एक सैद्धांतिक बिंदु है।
- अंतिम बिंदु (End Point): वह बिंदु जहाँ सूचक अपना रंग बदलता है, जो अनुमापन के पूरा होने का संकेत देता है। यह एक प्रायोगिक बिंदु है।
- सूचक (Indicator): एक रासायनिक पदार्थ जो तुल्यांकी बिंदु के पास अपना रंग बदलकर अनुमापन के अंतिम बिंदु को दर्शाता है।
- अम्ल-क्षार सूचक: ये दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षार होते हैं जिनका आयनित और अन-आयनित रूप अलग-अलग रंग का होता है।
- उदाहरण:
- मेथिल ऑरेंज: अम्लीय माध्यम में लाल, क्षारीय माध्यम में पीला। pH परास: 3.1-4.4।
- फिनोल्फथेलिन: अम्लीय माध्यम में रंगहीन, क्षारीय माध्यम में गुलाबी। pH परास: 8.2-10.0।
- उदाहरण:
- अम्ल-क्षार सूचक: ये दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षार होते हैं जिनका आयनित और अन-आयनित रूप अलग-अलग रंग का होता है।
3. अनुमापन के प्रकार (Types of Titrations)
- अम्ल-क्षार अनुमापन (Acid-Base Titrations): इसमें एक ज्ञात सांद्रता वाले अम्ल या क्षार का उपयोग करके अज्ञात सांद्रता वाले क्षार या अम्ल की सांद्रता ज्ञात की जाती है।
- सिद्धांत: उदासीनीकरण अभिक्रिया ($H^+ + OH^- \rightarrow H_2O$)।
- सूचकों का चुनाव:
- प्रबल अम्ल - प्रबल क्षार (उदा. HCl vs NaOH): तुल्यांकी बिंदु pH 7 पर होता है। मेथिल ऑरेंज या फिनोल्फथेलिन दोनों का उपयोग किया जा सकता है।
- प्रबल अम्ल - दुर्बल क्षार (उदा. HCl vs NH₄OH): तुल्यांकी बिंदु pH 7 से कम (अम्लीय) होता है। मेथिल ऑरेंज उपयुक्त है।
- दुर्बल अम्ल - प्रबल क्षार (उदा. CH₃COOH vs NaOH): तुल्यांकी बिंदु pH 7 से अधिक (क्षारीय) होता है। फिनोल्फथेलिन उपयुक्त है।
- दुर्बल अम्ल - दुर्बल क्षार: इस प्रकार के अनुमापन में कोई भी सूचक ठीक से काम नहीं करता क्योंकि pH परिवर्तन बहुत धीमा होता है।
- रेडॉक्स अनुमापन (Redox Titrations): इसमें ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं का उपयोग करके अज्ञात सांद्रता वाले ऑक्सीकारक या अपचायक की सांद्रता ज्ञात की जाती है।
- पोटेशियम परमैंगनेट अनुमापन (KMnO₄ Titrations): $KMnO_4$ एक प्रबल ऑक्सीकारक है और स्वतः सूचक (self-indicator) के रूप में कार्य करता है। अम्लीय माध्यम में $MnO_4^-$ आयन रंगहीन $Mn^{2+}$ आयन में अपचयित होता है।
- अम्लीय माध्यम में: $MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O$ (n-कारक = 5)
- उदाहरण: ऑक्सेलिक अम्ल या फेरस अमोनियम सल्फेट (मोर लवण) के साथ अनुमापन।
- सावधानियाँ: $KMnO_4$ का विलयन प्रकाश और कार्बनिक पदार्थों से अपचयित हो सकता है, इसलिए इसे गहरे रंग की बोतल में रखा जाता है।
- पोटेशियम डाइक्रोमेट अनुमापन (K₂Cr₂O₇ Titrations): $K_2Cr_2O_7$ भी एक प्रबल ऑक्सीकारक है, लेकिन यह स्वतः सूचक नहीं है। इसके लिए बाह्य सूचक (जैसे डाइफेनिलएमीन) की आवश्यकता होती है। अम्लीय माध्यम में $Cr_2O_7^{2-}$ आयन हरे $Cr^{3+}$ आयन में अपचयित होता है।
- अम्लीय माध्यम में: $Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O$ (n-कारक = 6)
- उदाहरण: फेरस अमोनियम सल्फेट के साथ अनुमापन।
- आयोडोमेट्रिक और आयोडिमेट्रिक अनुमापन (Iodometric and Iodimetric Titrations):
- आयोडिमेट्रिक अनुमापन: इसमें सीधे आयोडीन ($I_2$) के मानक विलयन का उपयोग करके अपचायक पदार्थ (जैसे थायोसल्फेट) की सांद्रता ज्ञात की जाती है। स्टार्च को सूचक के रूप में उपयोग किया जाता है (आयोडीन के साथ नीला रंग)।
- आयोडोमेट्रिक अनुमापन: इसमें किसी ऑक्सीकारक पदार्थ (जैसे $Cu^{2+}$) की अभिक्रिया पोटेशियम आयोडाइड ($KI$) के साथ कराई जाती है, जिससे मुक्त हुई आयोडीन ($I_2$) की मात्रा को सोडियम थायोसल्फेट ($Na_2S_2O_3$) के मानक विलयन से अनुमापित किया जाता है। यह अप्रत्यक्ष अनुमापन है। स्टार्च सूचक के रूप में।
- पोटेशियम परमैंगनेट अनुमापन (KMnO₄ Titrations): $KMnO_4$ एक प्रबल ऑक्सीकारक है और स्वतः सूचक (self-indicator) के रूप में कार्य करता है। अम्लीय माध्यम में $MnO_4^-$ आयन रंगहीन $Mn^{2+}$ आयन में अपचयित होता है।
4. प्रयोगशाला उपकरण (Laboratory Apparatus)
- ब्यूरेट (Burette): ज्ञात आयतन के विलयन को सटीक रूप से मापने और वितरित करने के लिए।
- पिपेट (Pipette): अज्ञात आयतन के विलयन को सटीक रूप से मापने के लिए।
- कोनिकल फ्लास्क (Conical Flask): अनुमापन अभिक्रिया कराने के लिए।
- मापक फ्लास्क (Measuring Flask/Volumetric Flask): ज्ञात सांद्रता वाले विलयन बनाने के लिए।
- ब्यूरेट स्टैंड (Burette Stand): ब्यूरेट को स्थिर रखने के लिए।
5. गणनाएँ (Calculations)
तुल्यांकी बिंदु पर, अभिकारकों के ग्राम तुल्यांक बराबर होते हैं:
$N_1V_1 = N_2V_2$
जहाँ,
$N_1$ = पहले विलयन की नॉर्मलता
$V_1$ = पहले विलयन का आयतन
$N_2$ = दूसरे विलयन की नॉर्मलता
$V_2$ = दूसरे विलयन का आयतन
यदि मोलरता का उपयोग किया जाता है:
$\frac{M_1V_1}{n_1} = \frac{M_2V_2}{n_2}$ (जहाँ $n_1$ और $n_2$ अभिक्रिया में भाग लेने वाले आयनों की संख्या या स्टॉइकियोमेट्रिक गुणांक हैं, या n-कारक)
6. सावधानियाँ (Precautions)
- ब्यूरेट और पिपेट को हमेशा संबंधित विलयन से अंतिम बार धोना चाहिए।
- ब्यूरेट में हवा के बुलबुले नहीं होने चाहिए।
- ब्यूरेट का पाठ्यांक हमेशा आँख के स्तर पर लेना चाहिए।
- कोनिकल फ्लास्क को अनुमापन के दौरान लगातार हिलाते रहना चाहिए।
- सूचक की केवल 1-2 बूंदें ही डालनी चाहिए।
- अंतिम बिंदु पर रंग परिवर्तन स्थायी होना चाहिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करें।
-
निम्नलिखित में से कौन एक प्राथमिक मानक पदार्थ का उदाहरण है?
a) सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$)
b) पोटेशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$)
c) ऑक्सेलिक अम्ल ($H_2C_2O_4 \cdot 2H_2O$)
d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) -
अम्ल-क्षार अनुमापन में, तुल्यांकी बिंदु पर अभिकारकों के क्या बराबर होते हैं?
a) मोल
b) ग्राम तुल्यांक
c) द्रव्यमान
d) आयतन -
प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के अनुमापन के लिए कौन सा सूचक उपयुक्त है?
a) मेथिल ऑरेंज
b) फिनोल्फथेलिन
c) a और b दोनों
d) कोई नहीं -
पोटेशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) अनुमापन में, $KMnO_4$ किस रूप में कार्य करता है?
a) अपचायक
b) सूचक
c) ऑक्सीकारक और स्वतः सूचक
d) केवल ऑक्सीकारक -
$H_2SO_4$ का n-कारक (संयोजकता कारक) क्या है जब यह एक अम्ल के रूप में कार्य करता है?
a) 1
b) 2
c) 3
d) 4 -
यदि एक विलयन की मोलरता 0.5 M है और उसका n-कारक 2 है, तो उसकी नॉर्मलता क्या होगी?
a) 0.25 N
b) 0.5 N
c) 1.0 N
d) 2.0 N -
आयोडोमेट्रिक अनुमापन में, मुक्त हुई आयोडीन को किसके मानक विलयन से अनुमापित किया जाता है?
a) पोटेशियम आयोडाइड
b) सोडियम थायोसल्फेट
c) पोटेशियम परमैंगनेट
d) स्टार्च -
फिनोल्फथेलिन सूचक क्षारीय माध्यम में कौन सा रंग देता है?
a) लाल
b) पीला
c) गुलाबी
d) रंगहीन -
ब्यूरेट का उपयोग किस लिए किया जाता है?
a) अज्ञात आयतन के विलयन को सटीक रूप से मापने के लिए
b) ज्ञात आयतन के विलयन को सटीक रूप से मापने और वितरित करने के लिए
c) विलयन को गर्म करने के लिए
d) अभिकारकों को मिलाने के लिए -
दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के अनुमापन में तुल्यांकी बिंदु का pH क्या होगा?
a) 7 से कम (अम्लीय)
b) 7 (उदासीन)
c) 7 से अधिक (क्षारीय)
d) pH निर्धारित नहीं किया जा सकता
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) ऑक्सेलिक अम्ल ($H_2C_2O_4 \cdot 2H_2O$)
- b) ग्राम तुल्यांक
- c) a और b दोनों
- c) ऑक्सीकारक और स्वतः सूचक
- b) 2
- c) 1.0 N ($N = M \times n$-कारक = $0.5 \times 2 = 1.0$)
- b) सोडियम थायोसल्फेट
- c) गुलाबी
- b) ज्ञात आयतन के विलयन को सटीक रूप से मापने और वितरित करने के लिए
- c) 7 से अधिक (क्षारीय)
मुझे उम्मीद है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!