Class 12 Chemistry Notes Chapter 2 (विलयन) – Rasayan Vigyan Bhag-I Book

प्रिय विद्यार्थियों, रसायन विज्ञान के अध्याय-2 'विलयन' के विस्तृत नोट्स सरकारी परीक्षाओं की तैयारी हेतु यहाँ प्रस्तुत किए गए हैं। यह अध्याय रासायनिक सिद्धांतों की गहन समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते हैं। इन नोट्स में सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं, सूत्रों और अनुप्रयोगों को विस्तार से समझाया गया है।
अध्याय 2: विलयन (Solutions)
1. परिचय (Introduction)
विलयन दो या दो से अधिक घटकों का एक समांगी मिश्रण होता है। समांगी मिश्रण का अर्थ है कि विलयन का संघटन और गुणधर्म पूरे मिश्रण में एक समान होते हैं। विलयन में, जिस घटक की मात्रा अधिक होती है उसे विलायक (Solvent) कहते हैं, और जिसकी मात्रा कम होती है उसे विलेय (Solute) कहते हैं।
- उदाहरण: चीनी का पानी में विलयन (चीनी विलेय, पानी विलायक)।
विलयनों के प्रकार (Types of Solutions):
भौतिक अवस्था के आधार पर विलयनों को नौ प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो विलेय और विलायक की भौतिक अवस्था पर निर्भर करते हैं।
| विलेय | विलायक | विलयन का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| गैस | गैस | गैसीय विलयन | वायु (ऑक्सीजन और अन्य गैसें नाइट्रोजन में) |
| द्रव | गैस | गैसीय विलयन | क्लोरोफॉर्म नाइट्रोजन में मिश्रित |
| ठोस | गैस | गैसीय विलयन | कपूर नाइट्रोजन में |
| गैस | द्रव | द्रवीय विलयन | जल में ऑक्सीजन |
| द्रव | द्रव | द्रवीय विलयन | जल में एथेनॉल |
| ठोस | द्रव | द्रवीय विलयन | जल में ग्लूकोज |
| गैस | ठोस | ठोस विलयन | पैलेडियम में हाइड्रोजन का विलयन |
| द्रव | ठोस | ठोस विलयन | सोडियम में पारा (अमलगम) |
| ठोस | ठोस | ठोस विलयन | तांबा सोने में (मिश्र धातु) |
2. विलयन की सांद्रता को व्यक्त करना (Expressing Concentration of Solutions)
विलयन की सांद्रता को विभिन्न तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है, जो विलेय की मात्रा को विलायक या विलयन की कुल मात्रा के सापेक्ष दर्शाते हैं।
-
a) द्रव्यमान प्रतिशत (% w/w):
यह विलयन के 100 ग्राम में उपस्थित विलेय के ग्रामों की संख्या है।
$\text{द्रव्यमान प्रतिशत} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100$ -
b) आयतन प्रतिशत (% v/v):
यह विलयन के 100 mL में उपस्थित विleय के mL की संख्या है।
$\text{आयतन प्रतिशत} = \frac{\text{विलेय का आयतन}}{\text{विलयन का कुल आयतन}} \times 100$ -
c) द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (% w/v):
यह विलयन के 100 mL में उपस्थित विलेय के ग्रामों की संख्या है। (मुख्यतः औषधि और फार्मेसी में प्रयुक्त)
$\text{द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान (ग्राम में)}}{\text{विलयन का कुल आयतन (mL में)}} \times 100$ -
d) पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm):
जब विलेय बहुत कम मात्रा में उपस्थित होता है (जैसे प्रदूषक), तब ppm का उपयोग किया जाता है।
$\text{ppm} = \frac{\text{विलेय के घटकों की संख्या}}{\text{विलयन के सभी घटकों की कुल संख्या}} \times 10^6$
या
$\text{ppm} = \frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 10^6$ -
e) मोल अंश (Mole Fraction, $x$):
यह विलयन में किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन में सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या का अनुपात है।
यदि घटक A के मोल $n_A$ और घटक B के मोल $n_B$ हों, तो:
$x_A = \frac{n_A}{n_A + n_B}$
$x_B = \frac{n_B}{n_A + n_B}$
किसी विलयन में सभी घटकों के मोल अंशों का योग हमेशा 1 होता है ($x_A + x_B = 1$)। -
f) मोलरता (Molarity, M):
यह विलयन के प्रति लीटर (या प्रति $dm^3$) में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या है।
$\text{मोलरता (M)} = \frac{\text{विलेय के मोलों की संख्या}}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}}$
इकाई: mol/L या mol $dm^{-3}$।
मोलरता तापमान पर निर्भर करती है क्योंकि आयतन तापमान के साथ परिवर्तित होता है। -
g) मोललता (Molality, m):
यह विलायक के प्रति किलोग्राम में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या है।
$\text{मोललता (m)} = \frac{\text{विलेय के मोलों की संख्या}}{\text{विलायक का द्रव्यमान (किलोग्राम में)}}$
इकाई: mol/kg।
मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती क्योंकि द्रव्यमान तापमान के साथ परिवर्तित नहीं होता है। -
h) नॉर्मलता (Normality, N): (सरकारी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण)
यह विलयन के प्रति लीटर में उपस्थित विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या है।
$\text{नॉर्मलता (N)} = \frac{\text{विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या}}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}}$
ग्राम तुल्यांक = $\frac{\text{विलेय का द्रव्यमान}}{\text{तुल्यांकी द्रव्यमान}}$
तुल्यांकी द्रव्यमान = $\frac{\text{मोलर द्रव्यमान}}{\text{संयोजकता कारक}}$ (अम्लों के लिए क्षारकता, क्षारों के लिए अम्लता, लवणों के लिए कुल धनात्मक/ऋणात्मक आवेश, रेडॉक्स अभिक्रियाओं के लिए इलेक्ट्रॉन परिवर्तन)
इकाई: N या ग्राम तुल्यांक/लीटर।
नॉर्मलता भी तापमान पर निर्भर करती है।
3. विलेयता (Solubility)
विलेयता किसी विलेय की वह अधिकतम मात्रा है जो एक निश्चित तापमान पर एक निश्चित मात्रा के विलायक में घुल सकती है, जिससे एक संतृप्त विलयन बनता है।
-
a) ठोसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Solids in Liquids):
- विलेय और विलायक की प्रकृति: "समान समान को घोलता है" (Like dissolves like)। ध्रुवीय विलेय ध्रुवीय विलायकों में और अध्रुवीय विलेय अध्रुवीय विलायकों में अधिक घुलनशील होते हैं।
- तापमान का प्रभाव:
- ऊष्माशोषी प्रक्रिया (Endothermic): विलेयता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है (जैसे चीनी पानी में)।
- ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया (Exothermic): विleयता तापमान बढ़ने पर घटती है (जैसे Li₂CO₃ पानी में)।
- दाब का प्रभाव: ठोसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का नगण्य प्रभाव होता है क्योंकि ठोस और द्रव अत्यधिक असंपीड्य होते हैं।
-
b) गैसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Gases in Liquids):
- विलेय और विलायक की प्रकृति: जो गैसें रासायनिक रूप से विलायक के साथ अभिक्रिया करती हैं या हाइड्रोजन बंध बनाती हैं, वे अधिक घुलनशील होती हैं।
- तापमान का प्रभाव: गैसों की द्रवों में विलेयता तापमान बढ़ने पर हमेशा घटती है (एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया)।
- दाब का प्रभाव: दाब बढ़ने पर गैसों की द्रवों में विलेयता बढ़ती है। इसे हेनरी के नियम द्वारा समझाया गया है।
हेनरी का नियम (Henry's Law):
"स्थिर तापमान पर, किसी द्रव में गैस की विलेयता, द्रव की सतह पर गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है।"
या
"विलयन में गैस का मोल अंश ($x$) उस विलयन के ऊपर गैस के आंशिक दाब ($P$) के समानुपाती होता है।"
$P = K_H \cdot x$
जहाँ, $P$ = गैस का आंशिक दाब, $x$ = विलयन में गैस का मोल अंश, $K_H$ = हेनरी स्थिरांक।
$K_H$ का मान गैस की प्रकृति, विलायक की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है। उच्च $K_H$ मान का अर्थ है कम विलेयता।हेनरी के नियम के अनुप्रयोग (Applications of Henry's Law):
- शीतल पेय (सॉफ्ट ड्रिंक) की बोतलों को उच्च दाब पर सील करना ताकि CO₂ की विलेयता बढ़ जाए।
- गहरे समुद्र में गोताखोरों द्वारा नाइट्रोजन के रक्त में घुलने से बचने के लिए हीलियम मिश्रित वायु का उपयोग (बेंड्स से बचाव)।
- उच्च ऊंचाई पर रहने वाले लोगों या पर्वतारोहियों में ऑक्सीजन की कमी (एनोक्सिया) का कारण।
हेनरी के नियम की सीमाएँ (Limitations of Henry's Law):
- दाब बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।
- तापमान बहुत कम नहीं होना चाहिए।
- गैस विलायक में बहुत अधिक घुलनशील नहीं होनी चाहिए।
- गैस विलायक के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करनी चाहिए।
- गैस विलायक में संगुणित या वियोजित नहीं होनी चाहिए।
4. वाष्प दाब (Vapour Pressure)
किसी निश्चित तापमान पर, साम्यावस्था में, द्रव की सतह के ऊपर उपस्थित वाष्प द्वारा द्रव की सतह पर लगाया गया दाब वाष्प दाब कहलाता है।
-
द्रव-द्रव विलयनों का वाष्प दाब (Vapour Pressure of Liquid-Liquid Solutions):
राउल्ट का नियम (Raoult's Law):
"किसी निश्चित तापमान पर, एक वाष्पशील घटक वाले विलयन के लिए, प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके शुद्ध रूप में वाष्प दाब और विलयन में उसके मोल अंश के गुणनफल के बराबर होता है।"
यदि घटक 1 और 2 वाष्पशील द्रव हैं, तो:
$P_1 = P_1^0 \cdot x_1$
$P_2 = P_2^0 \cdot x_2$
जहाँ, $P_1$ और $P_2$ विलयन में घटकों 1 और 2 के आंशिक वाष्प दाब हैं।
$P_1^0$ और $P_2^0$ शुद्ध घटकों 1 और 2 के वाष्प दाब हैं।
$x_1$ और $x_2$ विलयन में घटकों 1 और 2 के मोल अंश हैं।
डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार, विलयन का कुल वाष्प दाब ($P_{कुल}$) होगा:
$P_{कुल} = P_1 + P_2 = P_1^0 \cdot x_1 + P_2^0 \cdot x_2$ -
ठोस-द्रव विलयनों का वाष्प दाब (Vapour Pressure of Solid-Liquid Solutions):
जब एक अवाष्पशील विलेय को एक विलायक में घोला जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक के वाष्प दाब से कम हो जाता है। इसका कारण यह है कि विलेय के कण सतह पर विलायक के कणों के कुछ स्थानों को घेर लेते हैं, जिससे वाष्पीकरण के लिए उपलब्ध सतह क्षेत्र कम हो जाता है।
इस स्थिति में, राउल्ट का नियम कहता है कि "किसी अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन में, विलायक का वाष्प दाब शुद्ध विलायक के वाष्प दाब और विलयन में उसके मोल अंश के गुणनफल के बराबर होता है।"
$P_A = P_A^0 \cdot x_A$
जहाँ, $P_A$ = विलयन में विलायक का वाष्प दाब, $P_A^0$ = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब, $x_A$ = विलयन में विलायक का मोल अंश। -
राउल्ट के नियम से विचलन (Deviations from Raoult's Law):
आदर्श विलयन (Ideal Solutions): वे विलयन जो सांद्रता और तापमान की सभी परास पर राउल्ट के नियम का पालन करते हैं।- $\Delta H_{मिश्रण} = 0$ (मिश्रण की एन्थैल्पी परिवर्तन शून्य)
- $\Delta V_{मिश्रण} = 0$ (मिश्रण का आयतन परिवर्तन शून्य)
- A-B अंतःक्रियाएँ A-A और B-B अंतःक्रियाओं के समान होती हैं।
- उदाहरण: बेंजीन और टोल्यूनि, n-हेक्सेन और n-हेप्टेन।
अनादर्श विलयन (Non-Ideal Solutions): वे विलयन जो राउल्ट के नियम का पालन नहीं करते हैं।
- धनात्मक विचलन (Positive Deviation):
- $P_{कुल} > P_1^0 x_1 + P_2^0 x_2$ (प्रेक्षित वाष्प दाब राउल्ट के नियम द्वारा अनुमानित से अधिक होता है)
- A-B अंतःक्रियाएँ A-A और B-B अंतःक्रियाओं से कमजोर होती हैं।
- $\Delta H_{मिश्रण} > 0$ (ऊष्माशोषी)
- $\Delta V_{मिश्रण} > 0$ (आयतन में वृद्धि)
- उदाहरण: एथेनॉल और एसीटोन, कार्बन डाइसल्फाइड और एसीटोन।
- ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation):
- $P_{कुल} < P_1^0 x_1 + P_2^0 x_2$ (प्रेक्षित वाष्प दाब राउल्ट के नियम द्वारा अनुमानित से कम होता है)
- A-B अंतःक्रियाएँ A-A और B-B अंतःक्रियाओं से मजबूत होती हैं।
- $\Delta H_{मिश्रण} < 0$ (ऊष्माक्षेपी)
- $\Delta V_{मिश्रण} < 0$ (आयतन में कमी)
- उदाहरण: क्लोरोफॉर्म और एसीटोन, नाइट्रिक अम्ल और जल।
-
स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropes):
ये ऐसे द्रव मिश्रण होते हैं जो एक निश्चित संघटन पर एक स्थिर तापमान पर उबलते हैं और बिना संघटन बदले आसवित होते हैं। इन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।- न्यूनतम क्वथनांक स्थिरक्वाथी (Minimum Boiling Azeotropes): धनात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयन बनाते हैं।
- उदाहरण: एथेनॉल (95.5%) + जल (4.5%)
- अधिकतम क्वथनांक स्थिरक्वाथी (Maximum Boiling Azeotropes): ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयन बनाते हैं।
- उदाहरण: नाइट्रिक अम्ल (68%) + जल (32%)
- न्यूनतम क्वथनांक स्थिरक्वाथी (Minimum Boiling Azeotropes): धनात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयन बनाते हैं।
5. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties)
ये विलयन के वे गुणधर्म होते हैं जो विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी प्रकृति पर। ये केवल तनु विलयनों के लिए मान्य होते हैं।
-
a) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure):
जब एक अवाष्पशील विलेय को विलायक में घोला जाता है, तो वाष्प दाब कम हो जाता है। वाष्प दाब में कमी ($\Delta P = P_A^0 - P_A$) को वाष्प दाब अवनमन कहते हैं।
राउल्ट के नियम के अनुसार, वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है।
$\frac{P_A^0 - P_A}{P_A^0} = x_B = \frac{n_B}{n_A + n_B}$
तनु विलयनों के लिए ($n_B \ll n_A$):
$\frac{P_A^0 - P_A}{P_A^0} \approx \frac{n_B}{n_A} = \frac{W_B/M_B}{W_A/M_A}$
जहाँ, $P_A^0$ = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब, $P_A$ = विलयन का वाष्प दाब, $x_B$ = विलेय का मोल अंश, $n_B$ = विलेय के मोल, $n_A$ = विलायक के मोल, $W_B$ = विलेय का द्रव्यमान, $M_B$ = विलेय का मोलर द्रव्यमान, $W_A$ = विलायक का द्रव्यमान, $M_A$ = विलायक का मोलर द्रव्यमान।
इस गुणधर्म का उपयोग अवाष्पशील विलेय के मोलर द्रव्यमान को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है। -
b) क्वथनांक का उन्नयन (Elevation in Boiling Point, $\Delta T_b$):
किसी द्रव का क्वथनांक वह तापमान होता है जिस पर उसका वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है। एक अवाष्पशील विलेय को घोलने पर, विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है, इसलिए इसे वायुमंडलीय दाब तक बढ़ाने के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है। अतः क्वथनांक बढ़ जाता है।
क्वथनांक का उन्नयन ($\Delta T_b$) सीधे विलेय की मोललता (m) के समानुपाती होता है।
$\Delta T_b = T_b - T_b^0 = K_b \cdot m$
जहाँ, $T_b$ = विलयन का क्वथनांक, $T_b^0$ = शुद्ध विलायक का क्वथनांक, $K_b$ = मोलल उन्नयन स्थिरांक (एबुलियोस्कोपिक स्थिरांक)। $K_b$ विलायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
मोललता $m = \frac{W_B/M_B}{W_A \text{ (kg में)}}$
तो, $\Delta T_b = K_b \cdot \frac{W_B \times 1000}{M_B \times W_A \text{ (ग्राम में)}}$
इससे $M_B$ ज्ञात किया जा सकता है। -
c) हिमांक का अवनमन (Depression in Freezing Point, $\Delta T_f$):
किसी द्रव का हिमांक वह तापमान होता है जिस पर उसकी ठोस अवस्था और द्रव अवस्था का वाष्प दाब बराबर हो जाता है। एक अवाष्पशील विलेय को घोलने पर, विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है, इसलिए हिमांक कम हो जाता है।
हिमांक का अवनमन ($\Delta T_f$) सीधे विलेय की मोललता (m) के समानुपाती होता है।
$\Delta T_f = T_f^0 - T_f = K_f \cdot m$
जहाँ, $T_f$ = विलयन का हिमांक, $T_f^0$ = शुद्ध विलायक का हिमांक, $K_f$ = मोलल अवनमन स्थिरांक (क्रायोस्कोपिक स्थिरांक)। $K_f$ विलायक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
तो, $\Delta T_f = K_f \cdot \frac{W_B \times 1000}{M_B \times W_A \text{ (ग्राम में)}}$
इससे $M_B$ ज्ञात किया जा सकता है। -
d) परासरण दाब (Osmotic Pressure, $\Pi$):
परासरण (Osmosis): विलायक के अणुओं का अर्धपारगम्य झिल्ली (Semi-Permeable Membrane, SPM) के माध्यम से कम सांद्रता वाले विलयन से उच्च सांद्रता वाले विलयन की ओर स्वतः प्रवाह।
परासरण दाब: वह अतिरिक्त दाब जो परासरण को रोकने के लिए विलयन की तरफ लगाना पड़ता है, या वह दाब जो अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलायक के प्रवाह को रोकता है।
वान्ट हॉफ समीकरण द्वारा दिया गया है:
$\Pi = CRT$
जहाँ, $\Pi$ = परासरण दाब (पास्कल या atm में), C = मोलर सांद्रता (Molarity, mol/L), R = गैस स्थिरांक ($0.0821 \text{ L atm mol}^{-1} \text{ K}^{-1}$ या $8.314 \text{ J mol}^{-1} \text{ K}^{-1}$), T = तापमान (केल्विन में)।
$C = \frac{n_B}{V}$ (जहाँ $n_B$ विलेय के मोल और $V$ विलयन का आयतन लीटर में है)
तो, $\Pi = \frac{n_B}{V} RT = \frac{W_B}{M_B V} RT$
इससे $M_B$ ज्ञात किया जा सकता है।परासरण दाब के अनुप्रयोग (Applications of Osmotic Pressure):
- समपरासरी विलयन (Isotonic Solutions): समान परासरण दाब वाले विलयन। जब कोशिकाओं को समपरासरी विलयन में रखा जाता है, तो कोई शुद्ध प्रवाह नहीं होता। (उदाहरण: 0.9% (w/v) NaCl विलयन, जिसे सामान्य सलाइन कहते हैं, रक्त कोशिकाओं के लिए समपरासरी होता है)।
- अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic Solutions): कम परासरण दाब वाले विलयन। जब कोशिकाओं को अल्पपरासरी विलयन में रखा जाता है, तो कोशिकाएँ फूल जाती हैं (एंडोऑस्मोसिस)।
- अतिपरासरी विलयन (Hypertonic Solutions): अधिक परासरण दाब वाले विलयन। जब कोशिकाओं को अतिपरासरी विलयन में रखा जाता है, तो कोशिकाएँ सिकुड़ जाती हैं (एक्सोऑस्मोसिस या प्लास्मोलिसिस)।
- रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) द्वारा जल का शुद्धिकरण।
6. असामान्य मोलर द्रव्यमान (Abnormal Molar Masses)
जब विलेय विलयन में वियोजित (dissociate) या संगुणित (associate) होता है, तो अणुसंख्यक गुणधर्मों के प्रेक्षित मान सामान्य मानों से भिन्न होते हैं। इसके परिणामस्वरूप विलेय का परिकलित मोलर द्रव्यमान भी असामान्य आता है।
-
वान्ट हॉफ गुणांक (Van't Hoff Factor, 'i'):
असामान्य मोलर द्रव्यमान की समस्या को दूर करने के लिए वान्ट हॉफ गुणांक (i) प्रस्तुत किया गया।
$i = \frac{\text{अणुसंख्यक गुणधर्म का प्रेक्षित मान}}{\text{अणुसंख्यक गुणधर्म का सामान्य मान}}$
$i = \frac{\text{विलेय के मोलों की प्रेक्षित संख्या}}{\text{विलेय के मोलों की सैद्धांतिक संख्या}}$
$i = \frac{\text{विलेय का सामान्य मोलर द्रव्यमान}}{\text{विलेय का असामान्य (प्रेक्षित) मोलर द्रव्यमान}}$वान्ट हॉफ गुणांक के साथ संशोधित अणुसंख्यक गुणधर्म सूत्र:
- वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन: $\frac{P_A^0 - P_A}{P_A^0} = i \cdot x_B$
- क्वथनांक का उन्नयन: $\Delta T_b = i \cdot K_b \cdot m$
- हिमांक का अवनमन: $\Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m$
- परासरण दाब: $\Pi = i \cdot CRT$
वियोजन के लिए (For Dissociation):
यदि एक विलेय 'n' आयनों में वियोजित होता है और वियोजन की मात्रा '$\alpha$' है, तो:
$i = 1 + (n-1)\alpha$- उदाहरण: NaCl (n=2), $K_2SO_4$ (n=3)। पूर्ण वियोजन के लिए ($\alpha=1$), $i=n$।
संगुणन के लिए (For Association):
यदि 'n' विलेय कण संगुणित होकर एक कण बनाते हैं और संगुणन की मात्रा '$\alpha$' है, तो:
$i = 1 + (\frac{1}{n}-1)\alpha$- उदाहरण: एथेनोइक अम्ल बेंजीन में द्विलक (dimer) बनाता है (n=2)। पूर्ण संगुणन के लिए ($\alpha=1$), $i = 1/n$।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
-
एक 18 g ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) को 178.2 g जल में घोला जाता है। 100°C पर जल के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन क्या होगा? (जल का मोलर द्रव्यमान = 18 g/mol)
a) 0.01
b) 0.001
c) 0.1
d) 0.05 -
हेनरी के नियम के अनुसार, किसी गैस की द्रव में विलेयता किस पर निर्भर करती है?
a) केवल तापमान पर
b) केवल दाब पर
c) तापमान और दाब दोनों पर
d) विलायक की प्रकृति पर -
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है?
a) बेंजीन और टोल्यूनि
b) क्लोरोफॉर्म और एसीटोन
c) एथेनॉल और एसीटोन
d) नाइट्रिक अम्ल और जल -
यदि 0.1 M यूरिया विलयन और 0.1 M ग्लूकोज विलयन को अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग किया जाए, तो क्या होगा?
a) यूरिया ग्लूकोज की ओर प्रवाहित होगा।
b) ग्लूकोज यूरिया की ओर प्रवाहित होगा।
c) विलायक दोनों दिशाओं में समान दर से प्रवाहित होगा।
d) विलायक एक दिशा में अधिक प्रवाहित होगा। -
क्वथनांक का उन्नयन सबसे अधिक किस विलयन में होगा?
a) 0.1 M ग्लूकोज
b) 0.1 M NaCl
c) 0.1 M $BaCl_2$
d) 0.1 M $Al_2(SO_4)_3$ -
एक विलयन में विलेय का मोल अंश 0.2 है। यदि शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 100 mmHg है, तो विलयन का वाष्प दाब क्या होगा? (विलेय अवाष्पशील है)
a) 20 mmHg
b) 80 mmHg
c) 100 mmHg
d) 120 mmHg -
मोललता की इकाई क्या है?
a) mol/L
b) mol/kg
c) g/L
d) g/kg -
एक स्थिरक्वाथी मिश्रण के बारे में कौन सा कथन सत्य है?
a) इसे प्रभाजी आसवन द्वारा अलग किया जा सकता है।
b) इसका क्वथनांक इसके घटकों के क्वथनांकों के बीच होता है।
c) यह एक निश्चित संघटन पर एक स्थिर तापमान पर उबलता है।
d) यह हमेशा राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है। -
निम्नलिखित में से कौन सा अणुसंख्यक गुणधर्म विलेय के मोलर द्रव्यमान को निर्धारित करने के लिए सबसे अच्छा है, खासकर जब विलेय उच्च मोलर द्रव्यमान वाला बहुलक हो?
a) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन
b) क्वथनांक का उन्नयन
c) हिमांक का अवनमन
d) परासरण दाब -
0.01 M $K_4[Fe(CN)_6]$ विलयन का वान्ट हॉफ गुणांक (i) क्या होगा, यदि यह 80% वियोजित होता है?
a) 1.8
b) 2.6
c) 3.4
d) 4.2
MCQ उत्तर कुंजी:
- a) 0.01
- c) तापमान और दाब दोनों पर
- c) एथेनॉल और एसीटोन
- c) विलायक दोनों दिशाओं में समान दर से प्रवाहित होगा। (दोनों समपरासरी हैं)
- d) 0.1 M $Al_2(SO_4)_3$ (यह अधिकतम आयन देगा, $Al_2(SO_4)_3 \rightarrow 2Al^{3+} + 3SO_4^{2-}$, कुल 5 आयन)
- b) 80 mmHg (विलायक का मोल अंश = $1 - 0.2 = 0.8$, $P_A = P_A^0 \cdot x_A = 100 \times 0.8 = 80$ mmHg)
- b) mol/kg
- c) यह एक निश्चित संघटन पर एक स्थिर तापमान पर उबलता है।
- d) परासरण दाब (उच्च मोलर द्रव्यमान वाले बहुलकों के लिए परासरण दाब सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह कमरे के तापमान पर मापा जा सकता है और $\Delta T_b$ तथा $\Delta T_f$ के मान बहुत कम होते हैं।)
- d) 4.2