Class 12 Chemistry Notes Chapter 3 (Chapter 3) – Lab Manual (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान की प्रायोगिक पुस्तिका के अध्याय 3, 'गुणात्मक अकार्बनिक लवण विश्लेषण' (Qualitative Inorganic Salt Analysis) पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें से प्रायोगिक अवधारणाओं और रासायनिक अभिक्रियाओं पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
अध्याय 3: गुणात्मक अकार्बनिक लवण विश्लेषण (Qualitative Inorganic Salt Analysis)
1. परिचय (Introduction):
गुणात्मक विश्लेषण का अर्थ है किसी दिए गए अकार्बनिक लवण में उपस्थित अम्लीय मूलक (Anions) और क्षारीय मूलक (Cations) की पहचान करना। यह विश्लेषण दो मुख्य चरणों में किया जाता है:
- अम्लीय मूलक (Anions) का विश्लेषण: लवण में उपस्थित ऋणात्मक आयनों की पहचान।
- क्षारीय मूलक (Cations) का विश्लेषण: लवण में उपस्थित धनात्मक आयनों की पहचान।
2. विश्लेषण के चरण (Steps of Analysis):
लवण के विश्लेषण में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
- प्रारंभिक परीक्षण (Preliminary Tests): लवण के भौतिक गुणों और कुछ प्रारंभिक रासायनिक अभिक्रियाओं के आधार पर कुछ मूलकों की संभावना का पता लगाना।
- अम्लीय मूलकों का व्यवस्थित विश्लेषण (Systematic Analysis of Anions): विभिन्न समूहों में अम्लीय मूलकों का पृथक्करण और पुष्टि।
- क्षारीय मूलकों का व्यवस्थित विश्लेषण (Systematic Analysis of Cations): विभिन्न समूहों में क्षारीय मूलकों का पृथक्करण और पुष्टि।
भाग अ: प्रारंभिक परीक्षण (Preliminary Tests)
प्रारंभिक परीक्षण हमें लवण के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं, जो आगे के विश्लेषण में सहायक होती है।
-
भौतिक अवस्था (Physical State):
- क्रिस्टलीय (Crystalline): अधिकांश लवण।
- अक्रिस्टलीय (Amorphous): कुछ विशेष लवण।
-
रंग (Colour):
- रंगहीन (Colourless): Na⁺, K⁺, Mg²⁺, Al³⁺, Pb²⁺, Zn²⁺, Ca²⁺, Ba²⁺, Sr²⁺, NH₄⁺, CO₃²⁻, SO₄²⁻, NO₃⁻, Cl⁻, Br⁻, I⁻ आदि।
- नीला (Blue): Cu²⁺ लवण (जैसे CuSO₄.5H₂O)
- हरा (Green): Ni²⁺ लवण (जैसे NiCl₂), Fe²⁺ लवण (जैसे FeSO₄.7H₂O)
- पीला/भूरा (Yellow/Brown): Fe³⁺ लवण (जैसे FeCl₃), PbI₂ (अवक्षेप)
- गुलाबी (Pink): Co²⁺ लवण (जैसे CoCl₂.6H₂O), Mn²⁺ लवण (बहुत हल्का गुलाबी)
- काला (Black): CuS, PbS, FeS, Ag₂S (अवक्षेप)
-
विलयता (Solubility):
- ठंडे पानी में विलयता।
- गर्म पानी में विलयता।
- तनु अम्लों में विलयता।
- सांद्र अम्लों में विलयता।
- अविलेय (Insoluble): BaSO₄, SrSO₄, PbSO₄, AgCl आदि।
-
गर्म करने का प्रभाव (Effect of Heating):
- क्रैक्लिंग ध्वनि (Crepitating sound): Pb(NO₃)₂
- जल वाष्प निकलना (Evolution of water vapour): हाइड्रेटेड लवण (Hydrated salts)
- गैसों का निकलना (Evolution of gases):
- CO₂ (चूने के पानी को दूधिया करना): कार्बोनेट (Carbonate)
- SO₂ (अम्लीय K₂Cr₂O₇ को हरा करना): सल्फाइट (Sulphite)
- NO₂ (लाल-भूरे रंग की गैस): नाइट्रेट (Nitrate), नाइट्राइट (Nitrite)
- H₂S (सफेद लेड एसीटेट पेपर को काला करना): सल्फाइड (Sulphide)
- NH₃ (लाल लिटमस को नीला करना): अमोनियम (Ammonium)
- अवशेष का रंग (Colour of residue):
- गर्म करने पर पीला, ठंडा होने पर सफेद: Zn²⁺
- गर्म करने पर लाल-भूरा, ठंडा होने पर पीला: Fe³⁺
- गर्म करने पर पीला, ठंडा होने पर पीला: Pb²⁺
- गर्म करने पर काला, ठंडा होने पर काला: Cu²⁺, Ni²⁺, Co²⁺
-
ज्वाला परीक्षण (Flame Test): (आमतौर पर क्षारीय मूलकों के लिए)
- एक प्लैटिनम तार को सांद्र HCl में डुबोकर साफ करें, फिर लवण के पेस्ट को लेकर बुन्सन बर्नर की ऑक्सीकारक ज्वाला में रखें।
- सुनहरा पीला (Golden Yellow): Na⁺
- बैंगनी (Lilac/Violet): K⁺
- ईंट जैसा लाल (Brick Red): Ca²⁺
- क्रिमसन लाल (Crimson Red): Sr²⁺
- सेब जैसा हरा (Apple Green): Ba²⁺
- नीला-हरा (Blue-Green): Cu²⁺
भाग ब: अम्लीय मूलकों का विश्लेषण (Analysis of Anions)
अम्लीय मूलकों को उनकी तनु या सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया के आधार पर तीन समूहों में वर्गीकृत किया जाता है।
समूह 1: तनु सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अभिक्रिया करने वाले मूलक (Anions reacting with Dil. H₂SO₄)
(CO₃²⁻, S²⁻, SO₃²⁻, NO₂⁻, CH₃COO⁻)
| मूलक | तनु H₂SO₄ के साथ क्रिया | पुष्टि परीक्षण (Confirmatory Test) |
|---|---|---|
| CO₃²⁻ (कार्बोनेट) | रंगहीन, गंधहीन गैस (CO₂) निकलती है, जो चूने के पानी (Ca(OH)₂) को दूधिया कर देती है। | 1. लवण + तनु H₂SO₄ → CO₂ गैस। CO₂ गैस को Ba(OH)₂ या Ca(OH)₂ विलयन में प्रवाहित करने पर सफेद अवक्षेप (BaCO₃ या CaCO₃) बनता है। 2. लवण + तनु HCl + AgNO₃ → कोई अवक्षेप नहीं (यदि कार्बोनेट हो)। |
| S²⁻ (सल्फाइड) | H₂S गैस निकलती है, जिसकी सड़े अंडे जैसी गंध होती है। यह लेड एसीटेट पेपर को काला कर देती है। | 1. लवण + तनु H₂SO₄ → H₂S गैस। H₂S गैस को लेड एसीटेट पेपर के पास लाने पर वह काला हो जाता है (PbS बनता है)। 2. लवण के जलीय विलयन में सोडियम नाइट्रोप्रुसाइड विलयन मिलाने पर बैंगनी रंग आता है। |
| SO₃²⁻ (सल्फाइट) | SO₂ गैस निकलती है, जिसकी जलती हुई सल्फर जैसी गंध होती है। यह अम्लीय पोटेशियम डाइक्रोमेट विलयन को हरा कर देती है। | 1. लवण + तनु H₂SO₄ → SO₂ गैस। SO₂ गैस को अम्लीय K₂Cr₂O₇ पेपर के पास लाने पर वह हरा हो जाता है। 2. लवण के जलीय विलयन + BaCl₂ → सफेद अवक्षेप (BaSO₃), जो तनु HCl में घुलनशील है। |
| NO₂⁻ (नाइट्राइट) | तनु H₂SO₄ के साथ गर्म करने पर लाल-भूरे रंग की NO₂ गैस निकलती है। | 1. लवण + तनु H₂SO₄ → NO₂ गैस (लाल-भूरा)। 2. वलय परीक्षण (Ring Test): लवण के जलीय विलयन में ताजा बना FeSO₄ विलयन मिलाकर, परखनली की दीवार के सहारे सांद्र H₂SO₄ धीरे-धीरे डालने पर दोनों परतों के संगम पर भूरे रंग का वलय बनता है। |
| CH₃COO⁻ (एसीटेट) | सिरके जैसी गंध आती है। | 1. लवण + तनु H₂SO₄ → सिरके जैसी गंध। 2. लवण + सांद्र H₂SO₄ + एथेनॉल को गर्म करने पर फलों जैसी गंध (एथिल एसीटेट) आती है। 3. उदासीन FeCl₃ विलयन के साथ लाल रंग का विलयन बनता है, जिसे गर्म करने पर लाल-भूरा अवक्षेप (क्षारीय फेरिक एसीटेट) देता है। |
समूह 2: सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अभिक्रिया करने वाले मूलक (Anions reacting with Conc. H₂SO₄)
(Cl⁻, Br⁻, I⁻, NO₃⁻, C₂O₄²⁻)
| मूलक | सांद्र H₂SO₄ के साथ क्रिया | पुष्टि परीक्षण (Confirmatory Test) |
|---|---|---|
| Cl⁻ (क्लोराइड) | रंगहीन, तीखी HCl गैस निकलती है, जो अमोनिया छड़ के पास लाने पर सफेद धुआँ देती है। | 1. लवण + सांद्र H₂SO₄ → HCl गैस। 2. लवण के जलीय विलयन + AgNO₃ → सफेद अवक्षेप (AgCl), जो NH₄OH में घुलनशील है। 3. क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण (Chromyl Chloride Test): लवण + K₂Cr₂O₇ + सांद्र H₂SO₄ को गर्म करने पर लाल-भूरे रंग की क्रोमिल क्लोराइड (CrO₂Cl₂) गैस निकलती है, जिसे NaOH में प्रवाहित करने पर पीला विलयन (Na₂CrO₄) बनता है। इस पीले विलयन में लेड एसीटेट मिलाने पर पीला अवक्षेप (PbCrO₄) बनता है। |
| Br⁻ (ब्रोमाइड) | लाल-भूरे रंग की Br₂ वाष्प निकलती है। | 1. लवण + सांद्र H₂SO₄ → लाल-भूरे रंग की Br₂ वाष्प। 2. लवण के जलीय विलयन + AgNO₃ → हल्का पीला अवक्षेप (AgBr), जो NH₄OH में आंशिक रूप से घुलनशील है। 3. लवण के जलीय विलयन + CCl₄/CHCl₃ + क्लोरीन जल → CCl₄ परत में नारंगी-भूरा रंग। |
| I⁻ (आयोडाइड) | बैंगनी रंग की I₂ वाष्प निकलती है। | 1. लवण + सांद्र H₂SO₄ → बैंगनी रंग की I₂ वाष्प। 2. लवण के जलीय विलयन + AgNO₃ → पीला अवक्षेप (AgI), जो NH₄OH में अविलेय है। 3. लवण के जलीय विलयन + CCl₄/CHCl₃ + क्लोरीन जल → CCl₄ परत में बैंगनी रंग। |
| NO₃⁻ (नाइट्रेट) | गर्म करने पर लाल-भूरे रंग की NO₂ गैस निकलती है। | 1. वलय परीक्षण (Ring Test): लवण के जलीय विलयन में ताजा बना FeSO₄ विलयन मिलाकर, परखनली की दीवार के सहारे सांद्र H₂SO₄ धीरे-धीरे डालने पर दोनों परतों के संगम पर भूरे रंग का वलय बनता है। 2. लवण + Cu छीलन + सांद्र H₂SO₄ को गर्म करने पर लाल-भूरे रंग की NO₂ गैस निकलती है। |
| C₂O₄²⁻ (ऑक्सालेट) | CO₂ और CO गैसें निकलती हैं। CO गैस जलती हुई माचिस की तीली को नीली लौ के साथ जलाती है। | 1. लवण + सांद्र H₂SO₄ को गर्म करने पर CO₂ और CO गैसें निकलती हैं। CO₂ चूने के पानी को दूधिया करती है, CO नीली लौ के साथ जलती है। 2. लवण के जलीय विलयन + CaCl₂ → सफेद अवक्षेप (CaC₂O₄), जो तनु HCl में घुलनशील है लेकिन एसिटिक अम्ल में अविलेय है। |
समूह 3: विशिष्ट परीक्षण वाले मूलक (Anions with Specific Tests)
(SO₄²⁻, PO₄³⁻, BO₃³⁻)
| मूलक | पुष्टि परीक्षण (Confirmatory Test) |
|---|---|
| SO₄²⁻ (सल्फेट) | 1. लवण के जलीय विलयन + BaCl₂ → सफेद अवक्षेप (BaSO₄), जो तनु HCl में अविलेय है। 2. लवण के जलीय विलयन + लेड एसीटेट → सफेद अवक्षेप (PbSO₄), जो अमोनियम एसीटेट में घुलनशील है। |
| PO₄³⁻ (फॉस्फेट) | 1. लवण के जलीय विलयन + सांद्र HNO₃ + अमोनियम मोलिब्डेट विलयन को गर्म करने पर पीला अवक्षेप (अमोनियम फॉस्फोमोलीब्डेट) बनता है। 2. लवण के जलीय विलयन + मैग्नीशिया मिश्रण (MgCl₂ + NH₄Cl + NH₄OH) → सफेद क्रिस्टलीय अवक्षेप (मैग्नीशियम अमोनियम फॉस्फेट)। |
| BO₃³⁻ (बोरेट) | 1. एथिल बोरेट परीक्षण (Ethyl Borate Test): लवण + सांद्र H₂SO₄ + एथेनॉल को गर्म करने पर एथिल बोरेट (C₂H₅)₃BO₃ बनता है, जो हरे किनारे वाली लौ के साथ जलता है। 2. लवण के जलीय विलयन + BaCl₂ → सफेद अवक्षेप (Ba(BO₂)₂), जो तनु HCl में घुलनशील है। |
भाग स: क्षारीय मूलकों का विश्लेषण (Analysis of Cations)
क्षारीय मूलकों को उनके समूह अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया के आधार पर छह समूहों में वर्गीकृत किया जाता है।
क्षारीय मूलकों का समूहीकरण (Grouping of Cations):
| समूह | मूलक | समूह अभिकर्मक (Group Reagent) | अवक्षेपण का कारण |
|---|---|---|---|
| समूह 0 | NH₄⁺ | - | - |
| समूह I | Pb²⁺, Ag⁺, Hg₂²⁺ | तनु HCl | क्लोराइड के रूप में अवक्षेपित (PbCl₂, AgCl, Hg₂Cl₂) |
| समूह II | Cu²⁺, Cd²⁺, Bi³⁺, As³⁺, Sb³⁺, Sn²⁺ | H₂S गैस (तनु HCl की उपस्थिति में) | सल्फाइड के रूप में अवक्षेपित (CuS, CdS, Bi₂S₃ आदि) |
| समूह III | Fe³⁺, Al³⁺, Cr³⁺ | NH₄Cl + NH₄OH | हाइड्रॉक्साइड के रूप में अवक्षेपित (Fe(OH)₃, Al(OH)₃, Cr(OH)₃) |
| समूह IV | Ni²⁺, Co²⁺, Mn²⁺, Zn²⁺ | NH₄Cl + NH₄OH + H₂S गैस | सल्फाइड के रूप में अवक्षेपित (NiS, CoS, MnS, ZnS) |
| समूह V | Ba²⁺, Sr²⁺, Ca²⁺ | NH₄Cl + NH₄OH + (NH₄)₂CO₃ | कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित (BaCO₃, SrCO₃, CaCO₃) |
| समूह VI | Mg²⁺ | - | - |
प्रत्येक समूह के लिए पुष्टि परीक्षण (Confirmatory Tests for Each Group):
समूह 0: अमोनियम आयन (NH₄⁺)
- परीक्षण: लवण + NaOH को गर्म करने पर NH₃ गैस निकलती है, जिसकी तीखी गंध होती है। यह लाल लिटमस पेपर को नीला कर देती है और नेसलर अभिकर्मक (Nessler's Reagent) के साथ भूरा अवक्षेप (या पीला रंग) देती है।
- अभिक्रिया: NH₄⁺ + OH⁻ → NH₃↑ + H₂O
2K₂[HgI₄] + NH₃ + 3KOH → H₂N.HgO.HgI + 7KI + 2H₂O (भूरा अवक्षेप)
समूह I: लेड (Pb²⁺), सिल्वर (Ag⁺), मर्क्यूरस (Hg₂²⁺)
- समूह अभिकर्मक: तनु HCl
- अवक्षेप: सफेद क्लोराइड (PbCl₂, AgCl, Hg₂Cl₂)
- पुष्टि परीक्षण:
- Pb²⁺: PbCl₂ गर्म पानी में घुलनशील है। विलयन में KI मिलाने पर पीला अवक्षेप (PbI₂) बनता है। K₂CrO₄ मिलाने पर पीला अवक्षेप (PbCrO₄) बनता है।
- Ag⁺: AgCl NH₄OH में घुलनशील है ([Ag(NH₃)₂]Cl बनता है)। इस विलयन में HNO₃ मिलाने पर पुनः सफेद AgCl अवक्षेप बनता है।
- Hg₂²⁺: Hg₂Cl₂ NH₄OH के साथ काला हो जाता है (Hg + HgNH₂Cl बनता है)।
समूह II: क्यूप्रिक (Cu²⁺), कैडमियम (Cd²⁺), बिस्मथ (Bi³⁺), आर्सेनिक (As³⁺), एंटीमनी (Sb³⁺), टिन (Sn²⁺)
- समूह अभिकर्मक: तनु HCl की उपस्थिति में H₂S गैस
- अवक्षेप: रंगीन सल्फाइड
- CuS: काला
- CdS: पीला
- Bi₂S₃: काला-भूरा
- As₂S₃: पीला
- Sb₂S₃: नारंगी
- SnS: भूरा
- पुष्टि परीक्षण (उदाहरण):
- Cu²⁺: अवक्षेप को HNO₃ में घोलकर NH₄OH मिलाने पर गहरा नीला रंग ([Cu(NH₃)₄]²⁺) आता है। KI मिलाने पर सफेद अवक्षेप (Cu₂I₂) और I₂ मुक्त होती है।
- Cd²⁺: अवक्षेप को HNO₃ में घोलकर NH₄OH मिलाने पर कोई रंग नहीं आता। H₂S गैस प्रवाहित करने पर पीला अवक्षेप (CdS) बनता है।
- Bi³⁺: अवक्षेप को HNO₃ में घोलकर पानी से तनु करने पर सफेद अवक्षेप (BiOCl) बनता है।
समूह III: फेरिक (Fe³⁺), एल्यूमीनियम (Al³⁺), क्रोमिक (Cr³⁺)
- समूह अभिकर्मक: NH₄Cl + NH₄OH
- अवक्षेप: हाइड्रॉक्साइड
- Fe(OH)₃: लाल-भूरा
- Al(OH)₃: सफेद जिलेटिनस
- Cr(OH)₃: हरा
- पुष्टि परीक्षण:
- Fe³⁺: अवक्षेप को HCl में घोलकर पोटेशियम फेरोसायनाइड (K₄[Fe(CN)₆]) मिलाने पर प्रशियन ब्लू (Prussian Blue) रंग ([Fe₄[Fe(CN)₆]₃]) आता है। पोटेशियम थायोसायनेट (KSCN) मिलाने पर रक्त-लाल रंग ([Fe(SCN)ₓ]³⁻ˣ) आता है।
- Al³⁺: अवक्षेप को HCl में घोलकर लिटमस विलयन और NH₄OH मिलाने पर नीला फ्लोटिंग लेक (Blue Floating Lake) बनता है।
- Cr³⁺: अवक्षेप को NaOH और H₂O₂ के साथ गर्म करने पर पीला विलयन (क्रोमेट) बनता है। इस विलयन में BaCl₂ मिलाने पर पीला अवक्षेप (BaCrO₄) बनता है।
समूह IV: निकेल (Ni²⁺), कोबाल्ट (Co²⁺), मैंगनीज (Mn²⁺), जिंक (Zn²⁺)
- समूह अभिकर्मक: NH₄Cl + NH₄OH + H₂S गैस
- अवक्षेप: सल्फाइड
- NiS: काला
- CoS: काला
- MnS: गुलाबी
- ZnS: सफेद
- पुष्टि परीक्षण:
- Ni²⁺: अवक्षेप को HCl में घोलकर DMG (डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम) और NH₄OH मिलाने पर लाल रंग का अवक्षेप बनता है।
- Co²⁺: अवक्षेप को HCl में घोलकर KNO₂ और एसिटिक अम्ल मिलाने पर पीला अवक्षेप (पोटेशियम कोबाल्टिनिट्राइट) बनता है।
- Mn²⁺: अवक्षेप को HNO₃ में घोलकर लेड परऑक्साइड (PbO₂) के साथ गर्म करने पर बैंगनी रंग (परमैंगनेट आयन) आता है।
- Zn²⁺: अवक्षेप को HCl में घोलकर पोटेशियम फेरोसायनाइड मिलाने पर सफेद अवक्षेप (Zn₂[Fe(CN)₆]) बनता है।
समूह V: बेरियम (Ba²⁺), स्ट्रोंटियम (Sr²⁺), कैल्शियम (Ca²⁺)
- समूह अभिकर्मक: NH₄Cl + NH₄OH + (NH₄)₂CO₃
- अवक्षेप: सफेद कार्बोनेट (BaCO₃, SrCO₃, CaCO₃)
- पुष्टि परीक्षण:
- Ba²⁺: ज्वाला परीक्षण में सेब जैसा हरा रंग। पोटेशियम क्रोमेट (K₂CrO₄) के साथ पीला अवक्षेप (BaCrO₄)।
- Sr²⁺: ज्वाला परीक्षण में क्रिमसन लाल रंग। अमोनियम सल्फेट ((NH₄)₂SO₄) के साथ सफेद अवक्षेप (SrSO₄)।
- Ca²⁺: ज्वाला परीक्षण में ईंट जैसा लाल रंग। अमोनियम ऑक्सालेट ((NH₄)₂C₂O₄) के साथ सफेद अवक्षेप (CaC₂O₄)।
समूह VI: मैग्नीशियम (Mg²⁺)
- समूह अभिकर्मक: कोई नहीं।
- पुष्टि परीक्षण:
- Mg²⁺: विलयन में NH₄Cl + NH₄OH + Na₂HPO₄ (डाईसोडियम हाइड्रोजन फॉस्फेट) मिलाने पर सफेद क्रिस्टलीय अवक्षेप (मैग्नीशियम अमोनियम फॉस्फेट, MgNH₄PO₄) बनता है।
महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points):
- विश्लेषण हमेशा अम्लीय मूलकों से शुरू करें, क्योंकि कुछ अम्लीय मूलक (जैसे ऑक्सालेट) क्षारीय मूलकों के विश्लेषण में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
- प्रत्येक परीक्षण के लिए अभिकर्मकों की शुद्धता और मात्रा का ध्यान रखें।
- समूह अभिकर्मकों को सही क्रम में उपयोग करें।
- अमोनियम कार्बोनेट समूह (V) के बाद अमोनियम आयन (NH₄⁺) का परीक्षण नहीं करना चाहिए, क्योंकि अमोनियम कार्बोनेट खुद अमोनिया देता है। NH₄⁺ का परीक्षण हमेशा मूल लवण से करें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।
1. निम्नलिखित में से कौन सा अम्लीय मूलक तनु H₂SO₄ के साथ अभिक्रिया करके सड़े अंडे जैसी गंध वाली गैस देता है?
a) कार्बोनेट (CO₃²⁻)
b) सल्फाइट (SO₃²⁻)
c) सल्फाइड (S²⁻)
d) नाइट्रेट (NO₃⁻)
2. क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण का उपयोग किस अम्लीय मूलक की पुष्टि के लिए किया जाता है?
a) ब्रोमाइड (Br⁻)
b) आयोडाइड (I⁻)
c) क्लोराइड (Cl⁻)
d) नाइट्रेट (NO₃⁻)
3. लेड एसीटेट पेपर को काला करने वाली गैस कौन सी है?
a) SO₂
b) CO₂
c) H₂S
d) NH₃
4. क्षारीय मूलकों के समूह III का समूह अभिकर्मक क्या है?
a) तनु HCl
b) H₂S गैस (तनु HCl की उपस्थिति में)
c) NH₄Cl + NH₄OH
d) NH₄Cl + NH₄OH + H₂S गैस
5. एक लवण के जलीय विलयन में DMG (डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम) और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड मिलाने पर लाल रंग का अवक्षेप बनता है। यह किस क्षारीय मूलक की उपस्थिति दर्शाता है?
a) Fe³⁺
b) Al³⁺
c) Ni²⁺
d) Co²⁺
6. ज्वाला परीक्षण में सेब जैसा हरा रंग कौन सा आयन देता है?
a) Ca²⁺
b) Sr²⁺
c) Ba²⁺
d) Na⁺
7. नेसलर अभिकर्मक का उपयोग किस आयन की पहचान के लिए किया जाता है?
a) Cu²⁺
b) Fe³⁺
c) NH₄⁺
d) Mg²⁺
8. भूरे वलय परीक्षण (Brown Ring Test) का उपयोग किस अम्लीय मूलक की पुष्टि के लिए किया जाता है?
a) नाइट्राइट (NO₂⁻) और नाइट्रेट (NO₃⁻)
b) सल्फेट (SO₄²⁻)
c) फॉस्फेट (PO₄³⁻)
d) क्लोराइड (Cl⁻)
9. एक अकार्बनिक लवण को गर्म करने पर लाल-भूरे रंग की गैस निकलती है, जो अम्लीय K₂Cr₂O₇ विलयन को हरा कर देती है। यह किस अम्लीय मूलक की उपस्थिति का संकेत है?
a) नाइट्रेट (NO₃⁻)
b) नाइट्राइट (NO₂⁻)
c) सल्फाइट (SO₃²⁻)
d) ब्रोमाइड (Br⁻)
10. मैग्नीशिया मिश्रण (Magnesia mixture) का उपयोग किस क्षारीय मूलक की पुष्टि के लिए किया जाता है?
a) Ca²⁺
b) Ba²⁺
c) Sr²⁺
d) Mg²⁺
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) सल्फाइड (S²⁻)
- c) क्लोराइड (Cl⁻)
- c) H₂S
- c) NH₄Cl + NH₄OH
- c) Ni²⁺
- c) Ba²⁺
- c) NH₄⁺
- a) नाइट्राइट (NO₂⁻) और नाइट्रेट (NO₃⁻)
- b) नाइट्राइट (NO₂⁻) (क्योंकि NO₂ गैस अम्लीय K₂Cr₂O₇ को हरा करती है, जबकि NO₃⁻ से निकलने वाली NO₂ गैस यह गुण नहीं दिखाती यदि SO₂ उपस्थित न हो)
- d) Mg²⁺
आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। शुभकामनाएँ!