Class 12 Chemistry Notes Chapter 3 (वैद्युतरसायन) – Rasayan Vigyan Bhag-I Book

Rasayan Vigyan Bhag-I
प्रिय विद्यार्थियों, वैद्युतरसायन रसायन विज्ञान की एक अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है जो रासायनिक ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा के अंतरा-रूपांतरण का अध्ययन करती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है। आइए, इस अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं का विस्तृत अध्ययन करें ताकि आप सरकारी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।


अध्याय 3: वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

1. परिचय (Introduction)
वैद्युतरसायन, रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो रासायनिक ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा के अंतरा-रूपांतरण से संबंधित है। इसमें रासायनिक अभिक्रियाओं से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने (जैसे गैल्वेनी सेल में) और विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके अस्वैच्छिक रासायनिक अभिक्रियाएँ कराने (जैसे वैद्युत अपघटनी सेल में) का अध्ययन किया जाता है।

2. वैद्युतरासायनिक सेल (Electrochemical Cells)
ये वे युक्तियाँ हैं जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में या विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं। इन्हें मुख्यतः दो प्रकारों में बांटा गया है:

A. गैल्वेनी सेल या वोल्टीय सेल (Galvanic or Voltaic Cells)

  • परिभाषा: ये ऐसे सेल होते हैं जो स्वतः प्रवर्तित रेडॉक्स अभिक्रियाओं से रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
  • कार्यप्रणाली:
    • इसमें दो अलग-अलग अर्ध-सेल होते हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक धातु इलेक्ट्रोड को उसके आयनों के विलयन में डुबोया जाता है।
    • एनोड (Anode): वह इलेक्ट्रोड जहाँ ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉनों का त्याग) होता है। यह ऋणात्मक ध्रुव होता है।
    • कैथोड (Cathode): वह इलेक्ट्रोड जहाँ अपचयन (इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण) होता है। यह धनात्मक ध्रुव होता है।
    • इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ में एनोड से कैथोड की ओर प्रवाहित होते हैं, जिससे विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
    • लवण सेतु (Salt Bridge): यह एक U-आकार की नली होती है जिसमें अक्रिय वैद्युत अपघट्य (जैसे KCl, KNO₃) का जेल होता है।
      • कार्य:
        • दोनों अर्ध-सेलों के विलयनों को मिश्रित किए बिना विद्युत उदासीनता बनाए रखता है।
        • परिपथ को पूरा करता है।
  • डेनियल सेल (Daniell Cell): यह एक विशिष्ट गैल्वेनी सेल है।
    • एनोड: जिंक इलेक्ट्रोड (Zn | Zn²⁺)
    • कैथोड: कॉपर इलेक्ट्रोड (Cu | Cu²⁺)
    • एनोड पर अभिक्रिया: Zn(s) → Zn²⁺(aq) + 2e⁻ (ऑक्सीकरण)
    • कैथोड पर अभिक्रिया: Cu²⁺(aq) + 2e⁻ → Cu(s) (अपचयन)
    • समग्र सेल अभिक्रिया: Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)
  • सेल निरूपण (Cell Representation): IUPAC कन्वेंशन के अनुसार:
    • एनोड (ऑक्सीकरण) को बाईं ओर और कैथोड (अपचयन) को दाईं ओर लिखा जाता है।
    • धातु और आयन के बीच एक एकल ऊर्ध्वाधर रेखा (इलेक्ट्रोड इंटरफ़ेस) होती है।
    • लवण सेतु को दोहरी ऊर्ध्वाधर रेखाओं (||) से दर्शाया जाता है।
    • उदाहरण: Zn(s) | Zn²⁺(aq, C₁) || Cu²⁺(aq, C₂) | Cu(s)
  • इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential): जब एक धातु को उसके आयनों के विलयन में डुबोया जाता है, तो धातु और विलयन के बीच एक विभवांतर उत्पन्न होता है, जिसे इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।
    • मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential, E°): 298 K पर, जब आयनों की सांद्रता 1 M हो और गैसों का दाब 1 atm हो, तब मापा गया इलेक्ट्रोड विभव।
    • मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (Standard Hydrogen Electrode, SHE): इसे संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग किया जाता है और इसका मानक अपचयन विभव शून्य (0.00 V) माना जाता है।
    • सेल विभव (Cell Potential, E_cell) या विद्युत वाहक बल (EMF): यह कैथोड और एनोड के इलेक्ट्रोड विभवों का अंतर होता है।
      • $E_{cell} = E_{cathode} - E_{anode}$ (दोनों अपचयन विभव के रूप में)
      • $E^0_{cell} = E^0_{cathode} - E^0_{anode}$ (मानक परिस्थितियों में)
      • धनात्मक $E_{cell}$ मान स्वतः प्रवर्तित अभिक्रिया को इंगित करता है।

3. नर्नस्ट समीकरण (Nernst Equation)
यह समीकरण इलेक्ट्रोड विभव और सेल विभव को आयनों की सांद्रता और तापमान से संबंधित करता है।

  • एक इलेक्ट्रोड के लिए:
    • अभिक्रिया: Mⁿ⁺(aq) + ne⁻ → M(s)
    • $E = E^0 - \frac{RT}{nF} \ln \frac{[M]}{[M^{n+}]}$
    • चूंकि [M] (ठोस) को इकाई माना जाता है, तो: $E = E^0 - \frac{RT}{nF} \ln \frac{1}{[M^{n+}]}$
    • 298 K पर (R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹, F = 96487 C mol⁻¹):
      • $E = E^0 - \frac{0.0592}{n} \log \frac{1}{[M^{n+}]}$ (वोल्ट में)
  • सेल विभव के लिए:
    • अभिक्रिया: aA + bB → cC + dD
    • $E_{cell} = E^0_{cell} - \frac{RT}{nF} \ln Q$
    • जहाँ Q = अभिक्रिया भागफल = $\frac{[C]c[D]d}{[A]a[B]b}$
    • 298 K पर: $E_{cell} = E^0_{cell} - \frac{0.0592}{n} \log Q$
  • संतुलन स्थिरांक (Equilibrium Constant, K) और नर्नस्ट समीकरण:
    • संतुलन पर, $E_{cell} = 0$ और $Q = K_c$
    • $0 = E^0_{cell} - \frac{0.0592}{n} \log K_c$
    • $\log K_c = \frac{n E^0_{cell}}{0.0592}$
  • गिब्स मुक्त ऊर्जा (Gibbs Free Energy, ΔG) और सेल विभव:
    • $\Delta G = -nFE_{cell}$
    • मानक परिस्थितियों में: $\Delta G^0 = -nFE^0_{cell}$
    • यदि $\Delta G$ ऋणात्मक है, तो अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है।

4. चालकत्व (Conductance)

  • धात्विक चालक (Metallic Conductors): इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के कारण विद्युत का संचालन करते हैं।
  • वैद्युत अपघटनी चालक (Electrolytic Conductors): आयनों की गति के कारण विद्युत का संचालन करते हैं।
  • प्रतिरोध (Resistance, R): विद्युत प्रवाह के मार्ग में बाधा। इकाई: ओम (Ω)।
    • $R = \rho \frac{l}{A}$ (जहाँ ρ = प्रतिरोधकता, l = लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल)
  • चालकत्व (Conductance, G): प्रतिरोध का व्युत्क्रम। इकाई: सीमेंस (S) या Ω⁻¹।
    • $G = \frac{1}{R}$
  • प्रतिरोधकता (Resistivity, ρ): इकाई: ओम-मीटर (Ω m) या ओम-सेमी (Ω cm)।
  • चालकता (Conductivity, κ): प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम। इकाई: सीमेंस प्रति मीटर (S m⁻¹) या सीमेंस प्रति सेमी (S cm⁻¹)।
    • $\kappa = \frac{1}{\rho} = G \times \frac{l}{A}$
  • सेल स्थिरांक (Cell Constant, G):* $\frac{l}{A}$ का अनुपात। इकाई: m⁻¹ या cm⁻¹।
    • $\kappa = G \times G^*$
  • मोलर चालकता (Molar Conductivity, Λ_m): V आयतन वाले विलयन में उपस्थित एक मोल वैद्युत अपघट्य द्वारा उत्पन्न चालकता।
    • $\Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{C}$ (जहाँ C = मोलरता, cm³ में)
    • इकाई: S cm² mol⁻¹ या S m² mol⁻¹
    • तनुता का प्रभाव: तनुता बढ़ाने पर मोलर चालकता बढ़ती है क्योंकि आयनों की गतिशीलता बढ़ती है। दुर्बल वैद्युत अपघट्यों के लिए यह प्रभाव अधिक होता है क्योंकि तनुता पर वियोजन की मात्रा बढ़ती है।

5. कोलराउश का नियम (Kohlrausch's Law)

  • नियम: अनंत तनुता पर, किसी वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके धनायनों और ऋणायनों की अनंत तनुता पर मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है।
    • $\Lambda^0_m = v_⁺ \lambda^0_⁺ + v_⁻ \lambda^0_⁻$
    • जहाँ $v_⁺$ और $v_⁻$ प्रति सूत्र इकाई धनायनों और ऋणायनों की संख्या हैं, और $\lambda^0_⁺$ और $\lambda^0_⁻$ आयनों की अनंत तनुता पर मोलर चालकताएँ हैं।
  • अनुप्रयोग (Applications):
    • दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात करने में।
    • वियोजन की मात्रा (Degree of Dissociation, α) ज्ञात करने में: $\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda^0_m}$
    • वियोजन स्थिरांक (Dissociation Constant, K) ज्ञात करने में: $K = \frac{C \alpha^2}{1-\alpha}$

6. वैद्युत अपघटनी सेल (Electrolytic Cells)

  • परिभाषा: ये ऐसे सेल होते हैं जो विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके अस्वैच्छिक रासायनिक अभिक्रियाएँ कराते हैं।
  • कार्यप्रणाली:
    • बाहरी विद्युत स्रोत से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
    • एनोड: धनात्मक ध्रुव, ऑक्सीकरण होता है।
    • कैथोड: ऋणात्मक ध्रुव, अपचयन होता है।
    • वैद्युत अपघटन (Electrolysis): वैद्युत अपघट्य के विलयन या गलित अवस्था में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर होने वाली रासायनिक वियोजन की प्रक्रिया।
    • उत्पादों का निर्धारण: इलेक्ट्रोड पर बनने वाले उत्पाद इलेक्ट्रोड विभव, आयनों की सांद्रता और अतिविभव (Overpotential) पर निर्भर करते हैं।
      • उदाहरण: NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन।
        • कैथोड पर: H₂O का अपचयन (H₂ गैस) या Na⁺ का अपचयन (Na धातु)। H₂O का मानक अपचयन विभव Na⁺ से अधिक होता है, इसलिए H₂ गैस बनती है।
        • एनोड पर: Cl⁻ का ऑक्सीकरण (Cl₂ गैस) या H₂O का ऑक्सीकरण (O₂ गैस)। Cl⁻ के लिए अतिविभव कम होता है, इसलिए Cl₂ गैस बनती है (यदि Cl⁻ की सांद्रता अधिक हो)।

7. फैराडे के वैद्युत अपघटन के नियम (Faraday's Laws of Electrolysis)

  • प्रथम नियम: वैद्युत अपघटन के दौरान किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त हुए या निक्षेपित हुए पदार्थ की मात्रा प्रवाहित की गई विद्युत की मात्रा (आवेश) के समानुपाती होती है।
    • $W \propto Q$ या $W = ZQ = ZIt$
    • जहाँ W = पदार्थ की मात्रा, Q = आवेश (कूलम्ब में), I = धारा (एम्पियर में), t = समय (सेकंड में), Z = वैद्युत रासायनिक तुल्यांक।
    • $Z = \frac{E}{F}$ (जहाँ E = तुल्यांकी भार, F = फैराडे स्थिरांक)
    • अतः, $W = \frac{E}{F} It$
  • द्वितीय नियम: जब विद्युत की समान मात्रा विभिन्न वैद्युत अपघट्यों के विलयनों से प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त या निक्षेपित पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों के समानुपाती होती हैं।
    • $\frac{W_1}{W_2} = \frac{E_1}{E_2}$
  • फैराडे स्थिरांक (Faraday Constant, F): 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश।
    • F = 96487 C mol⁻¹ (लगभग 96500 C mol⁻¹)

8. बैट्रियाँ (Batteries)
ये गैल्वेनी सेल होते हैं जिन्हें व्यावसायिक उपयोग के लिए श्रृंखला में जोड़ा जाता है।

A. प्राथमिक बैट्रियाँ (Primary Batteries): इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद फेंक दिया जाता है क्योंकि इनमें अभिक्रियाएँ अनुत्क्रमणीय होती हैं।

  • शुष्क सेल (Dry Cell) / लेक्लांशे सेल (Leclanché Cell):
    • एनोड: जिंक का डिब्बा
    • कैथोड: ग्रेफाइट की छड़
    • वैद्युत अपघट्य: NH₄Cl और ZnCl₂ का पेस्ट, MnO₂ और कार्बन पाउडर के साथ।
    • उपयोग: टॉर्च, ट्रांजिस्टर।
  • मर्करी सेल (Mercury Cell):
    • एनोड: जिंक-मर्करी अमलगम
    • कैथोड: मर्करी (II) ऑक्साइड और कार्बन का पेस्ट
    • वैद्युत अपघट्य: KOH और ZnO का पेस्ट
    • उपयोग: घड़ियाँ, श्रवण यंत्र।

B. द्वितीयक बैट्रियाँ (Secondary Batteries): इन्हें बार-बार चार्ज (आवेशित) और डिस्चार्ज (निरावेशित) किया जा सकता है।

  • सीसा-संचायक सेल (Lead-Acid Battery):
    • एनोड: सीसा (Pb)
    • कैथोड: लेड डाइऑक्साइड (PbO₂)
    • वैद्युत अपघट्य: 38% सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)
    • निरावेशण (Discharging):
      • एनोड: Pb(s) + SO₄²⁻(aq) → PbSO₄(s) + 2e⁻
      • कैथोड: PbO₂(s) + SO₄²⁻(aq) + 4H⁺(aq) + 2e⁻ → PbSO₄(s) + 2H₂O(l)
      • समग्र: Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq) → 2PbSO₄(s) + 2H₂O(l)
    • आवेशण (Charging): बाह्य स्रोत से विद्युत धारा प्रवाहित करके अभिक्रियाओं को उत्क्रमित किया जाता है।
    • उपयोग: ऑटोमोबाइल, इन्वर्टर।
  • निकेल-कैडमियम सेल (Nickel-Cadmium Cell):
    • एनोड: कैडमियम (Cd)
    • कैथोड: निकेल डाइऑक्साइड (NiO₂)
    • वैद्युत अपघट्य: KOH विलयन
    • लाभ: सीसा-संचायक सेल से अधिक लंबा जीवनकाल।
    • उपयोग: पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

9. ईंधन सेल (Fuel Cells)

  • परिभाषा: ये ऐसे गैल्वेनी सेल होते हैं जो ईंधन (जैसे H₂, CH₄, CH₃OH) और ऑक्सीकारक (जैसे O₂) की दहन ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
  • हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल (Hydrogen-Oxygen Fuel Cell):
    • एनोड: छिद्रित कार्बन इलेक्ट्रोड जिस पर प्लैटिनम या पैलेडियम उत्प्रेरक होता है, जहाँ H₂ गैस प्रवाहित की जाती है।
    • कैथोड: छिद्रित कार्बन इलेक्ट्रोड जिस पर प्लैटिनम या पैलेडियम उत्प्रेरक होता है, जहाँ O₂ गैस प्रवाहित की जाती है।
    • वैद्युत अपघट्य: गर्म सांद्र KOH या NaOH विलयन।
    • एनोड पर: 2H₂(g) + 4OH⁻(aq) → 4H₂O(l) + 4e⁻
    • कैथोड पर: O₂(g) + 2H₂O(l) + 4e⁻ → 4OH⁻(aq)
    • समग्र: 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
    • लाभ: उच्च दक्षता (60-70%), प्रदूषण रहित (उत्पाद जल है), निरंतर ऊर्जा उत्पादन।
    • उपयोग: अंतरिक्ष कार्यक्रम (अपोलो मिशन), भविष्य के वाहन।

10. संक्षारण (Corrosion)

  • परिभाषा: यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ अपने पर्यावरण में उपस्थित पदार्थों (जैसे नमी, ऑक्सीजन, अम्ल) के साथ अभिक्रिया करके अवांछित यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, सल्फाइड) में परिवर्तित हो जाती हैं। यह एक वैद्युतरासायनिक प्रक्रिया है।
  • लोहे का जंग लगना (Rusting of Iron):
    • जब लोहा हवा और नमी के संपर्क में आता है, तो यह जंग (हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड, Fe₂O₃.xH₂O) बनाता है।
    • तंत्र:
      • एनोडिक क्षेत्र (ऑक्सीकरण): Fe(s) → Fe²⁺(aq) + 2e⁻
      • कैथोडिक क्षेत्र (अपचयन): O₂(g) + 4H⁺(aq) + 4e⁻ → 2H₂O(l) (अम्लीय माध्यम में)
      • Fe²⁺ आयन आगे ऑक्सीकृत होकर Fe³⁺ बनाते हैं, जो जल के साथ मिलकर हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड (जंग) बनाता है।
  • संक्षारण से बचाव (Prevention of Corrosion):
    • बैरियर सुरक्षा (Barrier Protection): पेंट, तेल, ग्रीस या अन्य धातुओं (जैसे क्रोमियम, निकेल) की परत चढ़ाकर धातु को पर्यावरण से अलग करना।
    • बलिदानी सुरक्षा (Sacrificial Protection): अधिक सक्रिय धातु (जैसे जिंक, मैग्नीशियम) की परत चढ़ाकर। सक्रिय धातु स्वयं ऑक्सीकृत होती है और मूल धातु को बचाती है (उदाहरण: गैल्वनीकरण)।
    • वैद्युत सुरक्षा (Electrical Protection): धातु को बाहरी स्रोत से इलेक्ट्रॉनों की आपूर्ति करके कैथोडिक बनाना।
    • मिश्र धातु बनाना (Alloying): संक्षारण प्रतिरोधी मिश्र धातुएँ बनाना (जैसे स्टेनलेस स्टील)।
    • प्रतिसंक्षारक (Antirust Solutions): क्षारीय फॉस्फेट और क्रोमेट विलयन का उपयोग।

10 बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. डेनियल सेल में, यदि जिंक और कॉपर इलेक्ट्रोडों को मानक परिस्थितियों में रखा जाए, तो कैथोड पर कौन सी अभिक्रिया होगी?
    a) Zn(s) → Zn²⁺(aq) + 2e⁻
    b) Cu(s) → Cu²⁺(aq) + 2e⁻
    c) Cu²⁺(aq) + 2e⁻ → Cu(s)
    d) Zn²⁺(aq) + 2e⁻ → Zn(s)

  2. नर्नस्ट समीकरण के अनुसार, 298 K पर इलेक्ट्रोड विभव E के लिए सही सूत्र क्या है (अभिक्रिया Mⁿ⁺(aq) + ne⁻ → M(s) के लिए)?
    a) $E = E^0 - \frac{0.0592}{n} \log[M^{n+}] $
    b) $E = E^0 + \frac{0.0592}{n} \log[M^{n+}] $
    c) $E = E^0 - \frac{0.0592}{n} \log \frac{1}{[M^{n+}]}$
    d) $E = E^0 + \frac{0.0592}{n} \log \frac{1}{[M^{n+}]}$

  3. यदि किसी सेल का मानक EMF (E°_cell) धनात्मक है, तो गिब्स मुक्त ऊर्जा (ΔG°) और संतुलन स्थिरांक (K) के लिए सही संबंध क्या है?
    a) ΔG° > 0, K > 1
    b) ΔG° < 0, K > 1
    c) ΔG° < 0, K < 1
    d) ΔG° > 0, K < 1

  4. मोलर चालकता की इकाई क्या है?
    a) S cm⁻¹
    b) S cm² mol⁻¹
    c) Ω cm⁻¹
    d) S mol⁻¹

  5. अनंत तनुता पर, दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की मोलर चालकता ज्ञात करने के लिए किस नियम का उपयोग किया जाता है?
    a) फैराडे का नियम
    b) ओम का नियम
    c) कोलराउश का नियम
    d) नर्नस्ट समीकरण

  6. सीसा-संचायक सेल में निरावेशण के दौरान कैथोड पर कौन सा उत्पाद बनता है?
    a) Pb
    b) PbO₂
    c) PbSO₄
    d) H₂SO₄

  7. हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल का मुख्य उत्पाद क्या है?
    a) कार्बन डाइऑक्साइड
    b) जल
    c) मीथेन
    d) ऑक्सीजन

  8. वैद्युत अपघटन के फैराडे के प्रथम नियम के अनुसार, इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित पदार्थ की मात्रा (W) किसके समानुपाती होती है?
    a) धारा (I)
    b) समय (t)
    c) आवेश (Q)
    d) उपरोक्त सभी

  9. लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए गैल्वनीकरण में किस धातु का उपयोग किया जाता है?
    a) ताँबा
    b) टिन
    c) जिंक
    d) निकेल

  10. निम्नलिखित में से कौन सा एक प्राथमिक बैटरी का उदाहरण है?
    a) सीसा-संचायक सेल
    b) निकेल-कैडमियम सेल
    c) मर्करी सेल
    d) ईंधन सेल


उत्तर कुंजी (Answer Key):

  1. c)
  2. c)
  3. b)
  4. b)
  5. c)
  6. c)
  7. b)
  8. d)
  9. c)
  10. c)

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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