Class 12 Chemistry Notes Chapter 5 (Chapter 5) – Lab Manual (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान की प्रायोगिक पुस्तिका के अध्याय 5 पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय मुख्य रूप से आयतनमितीय विश्लेषण (Volumetric Analysis), विशेष रूप से रेडॉक्स अनुमापन (Redox Titration) पर केंद्रित है, जिसमें पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄) का उपयोग एक ऑक्सीकारक के रूप में किया जाता है। आइए, इस अध्याय के हर महत्वपूर्ण पहलू को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 5: आयतनमितीय विश्लेषण (रेडॉक्स अनुमापन)
1. परिचय:
आयतनमितीय विश्लेषण एक मात्रात्मक रासायनिक विश्लेषण विधि है जिसका उपयोग किसी अज्ञात सांद्रता के विलयन में एक विश्लेषक की सांद्रता निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसमें एक ज्ञात सांद्रता के अभिकर्मक (मानक विलयन) का उपयोग करके अभिक्रिया के पूर्ण होने के लिए आवश्यक आयतन को मापा जाता है।
2. रेडॉक्स अनुमापन (Redox Titration):
रेडॉक्स अनुमापन वे अनुमापन होते हैं जिनमें ऑक्सीकरण-अपचयन (Redox) अभिक्रियाएँ शामिल होती हैं। इसमें एक ऑक्सीकारक और एक अपचायक के बीच इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण होता है।
- ऑक्सीकरण: इलेक्ट्रॉनों का त्याग।
- अपचयन: इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण।
- तुल्यांकी बिंदु (Equivalence Point): वह बिंदु जहाँ ऑक्सीकारक द्वारा ग्रहण किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या अपचायक द्वारा त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, और अभिक्रिया पूर्ण हो जाती है।
- अंतिम बिंदु (End Point): वह बिंदु जिस पर सूचक रंग परिवर्तन दर्शाता है, जो अभिक्रिया के पूर्ण होने का संकेत देता है।
3. पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄) अनुमापन (Permanganometry):
पोटेशियम परमैंगनेट एक प्रबल ऑक्सीकारक है और इसका उपयोग विभिन्न अपचायकों (जैसे ऑक्सेलिक अम्ल, मोहर लवण) के अनुमापन में किया जाता है।
- KMnO₄ की विशेषताएँ:
- यह गहरा बैंगनी रंग का होता है।
- यह जल में विलेय है।
- यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है, विशेष रूप से अम्लीय माध्यम में।
- यह स्व-सूचक (self-indicator) के रूप में कार्य करता है क्योंकि MnO₄⁻ आयन (बैंगनी) अपचयित होकर Mn²⁺ आयन (रंगहीन) बनाते हैं। अंतिम बिंदु पर, एक अतिरिक्त बूंद KMnO₄ विलयन को हल्का गुलाबी रंग प्रदान करती है।
- माध्यम का महत्व:
KMnO₄ की ऑक्सीकरण क्षमता माध्यम पर निर्भर करती है। अम्लीय माध्यम में यह सबसे प्रबल ऑक्सीकारक होता है।- अम्लीय माध्यम में: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O
- यहाँ Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 से +2 में बदलती है (5 इलेक्ट्रॉनों का लाभ)।
- KMnO₄ का n-फैक्टर (प्रति मोल इलेक्ट्रॉनों की संख्या) = 5
- तुल्यांकी भार = आणविक भार / 5
- उदासीन या दुर्बल क्षारीय माध्यम में: MnO₄⁻ + 2H₂O + 3e⁻ → MnO₂ + 4OH⁻
- यहाँ Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 से +4 में बदलती है (3 इलेक्ट्रॉनों का लाभ)।
- KMnO₄ का n-फैक्टर = 3
- तुल्यांकी भार = आणविक भार / 3
- प्रबल क्षारीय माध्यम में: MnO₄⁻ + e⁻ → MnO₄²⁻
- यहाँ Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 से +6 में बदलती है (1 इलेक्ट्रॉन का लाभ)।
- KMnO₄ का n-फैक्टर = 1
- तुल्यांकी भार = आणविक भार / 1
- नोट: सरकारी परीक्षाओं के लिए अम्लीय माध्यम में KMnO₄ की अभिक्रिया सबसे महत्वपूर्ण है।
- अम्लीय माध्यम में: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O
4. मानक विलयन (Standard Solution):
- प्राथमिक मानक (Primary Standard): वे पदार्थ जिनकी शुद्धता बहुत अधिक होती है, जो वायुमंडलीय नमी या CO₂ से अप्रभावित रहते हैं, और जिनके रासायनिक सूत्र ज्ञात होते हैं। इनका उपयोग मानक विलयन बनाने के लिए सीधे किया जा सकता है। उदाहरण: ऑक्सेलिक अम्ल, मोहर लवण (फेरस अमोनियम सल्फेट)।
- द्वितीयक मानक (Secondary Standard): वे पदार्थ जिनकी शुद्धता कम होती है, जो वायुमंडलीय नमी या CO₂ से प्रभावित हो सकते हैं, या जो समय के साथ अपघटित हो सकते हैं। इनकी सांद्रता को किसी प्राथमिक मानक के विरुद्ध मानकीकृत (standardize) करना पड़ता है। उदाहरण: पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄), सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH)।
- KMnO₄ द्वितीयक मानक क्यों है?
- यह पूरी तरह से शुद्ध रूप में उपलब्ध नहीं होता है।
- यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा धीरे-धीरे अपघटित हो जाता है (4KMnO₄ + 2H₂O → 4MnO₂ + 4KOH + 3O₂)।
- यह कार्बनिक पदार्थों (जैसे रबर स्टॉपर) के संपर्क में आने पर अपचयित हो सकता है।
- इसलिए, KMnO₄ विलयन की सांद्रता को हमेशा एक प्राथमिक मानक (जैसे ऑक्सेलिक अम्ल या मोहर लवण) के विरुद्ध मानकीकृत किया जाता है।
5. मुख्य प्रयोग: पोटेशियम परमैंगनेट विलयन की मोलरता ज्ञात करना
प्रयोग 1: दिए गए पोटेशियम परमैंगनेट विलयन की मोलरता ज्ञात करना, जब मानक ऑक्सेलिक अम्ल विलयन दिया गया हो।
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सिद्धांत:
KMnO₄ (ऑक्सीकारक) ऑक्सेलिक अम्ल (H₂C₂O₄, अपचायक) को अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकृत करता है।- ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: C₂O₄²⁻ → 2CO₂ + 2e⁻ (ऑक्सेलिक अम्ल का n-फैक्टर = 2)
- अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O (KMnO₄ का n-फैक्टर = 5)
- संतुलित समग्र अभिक्रिया:
2KMnO₄ + 5H₂C₂O₄ + 3H₂SO₄ → K₂SO₄ + 2MnSO₄ + 10CO₂ + 8H₂O - गर्म करने का महत्व: यह अभिक्रिया कमरे के तापमान पर धीमी होती है। लगभग 60-70°C तक गर्म करने से अभिक्रिया दर बढ़ती है। अभिक्रिया में बनने वाले Mn²⁺ आयन एक स्व-उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।
- अम्लीय माध्यम के लिए H₂SO₄ का उपयोग: तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह स्वयं ऑक्सीकृत नहीं होता और अभिक्रिया में भाग नहीं लेता। HCl का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि यह KMnO₄ द्वारा Cl₂ में ऑक्सीकृत हो सकता है। HNO₃ का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि यह स्वयं एक ऑक्सीकारक है।
-
प्रक्रिया (संक्षेप में):
- ब्यूरेट को KMnO₄ विलयन से भरें।
- पिपेट से 20.0 mL (या 25.0 mL) मानक ऑक्सेलिक अम्ल विलयन को कोनिकल फ्लास्क में लें।
- इसमें लगभग 20 mL तनु H₂SO₄ मिलाएँ।
- फ्लास्क को लगभग 60-70°C तक गर्म करें।
- गर्म विलयन को ब्यूरेट से KMnO₄ विलयन की बूंद-बूंद करके तब तक मिलाएँ जब तक रंगहीन विलयन हल्का गुलाबी न हो जाए (अंतिम बिंदु)।
- ब्यूरेट की रीडिंग नोट करें और सुसंगत रीडिंग प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया को दोहराएँ।
-
गणना:
नॉर्मलता समीकरण का उपयोग करते हुए: N₁V₁ = N₂V₂
जहाँ,
N₁ = KMnO₄ की नॉर्मलता = M_KMnO₄ × n-फैक्टर (5)
N₂ = ऑक्सेलिक अम्ल की नॉर्मलता = M_ऑक्सेलिक अम्ल × n-फैक्टर (2)
V₁ = KMnO₄ का आयतन (सुसंगत आयतन)
V₂ = ऑक्सेलिक अम्ल का आयतन (पिपेट द्वारा लिया गया)(M_KMnO₄ × 5) × V_KMnO₄ = (M_ऑक्सेलिक अम्ल × 2) × V_ऑक्सेलिक अम्ल
M_KMnO₄ = (M_ऑक्सेलिक अम्ल × 2 × V_ऑक्सेलिक अम्ल) / (5 × V_KMnO₄) -
सावधानियाँ:
- ब्यूरेट और पिपेट को संबंधित विलयनों से खंगालें।
- ब्यूरेट से हवा के बुलबुले निकाल दें।
- अंतिम बिंदु को ध्यान से देखें (हल्का गुलाबी रंग जो 30 सेकंड तक बना रहे)।
- ऑक्सेलिक अम्ल विलयन को अनुमापन से पहले 60-70°C तक गर्म करें।
- कोनिकल फ्लास्क में H₂SO₄ मिलाना न भूलें।
प्रयोग 2: दिए गए पोटेशियम परमैंगनेट विलयन की मोलरता ज्ञात करना, जब मानक मोहर लवण विलयन दिया गया हो।
-
सिद्धांत:
मोहर लवण (फेरस अमोनियम सल्फेट, FeSO₄.(NH₄)₂SO₄.6H₂O) एक प्राथमिक मानक और अपचायक है। अम्लीय माध्यम में Fe²⁺ आयन Fe³⁺ आयन में ऑक्सीकृत होते हैं।- ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया: Fe²⁺ → Fe³⁺ + e⁻ (मोहर लवण का n-फैक्टर = 1)
- अपचयन अर्ध-अभिक्रिया: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O (KMnO₄ का n-फैक्टर = 5)
- संतुलित समग्र अभिक्रिया:
MnO₄⁻ + 5Fe²⁺ + 8H⁺ → Mn²⁺ + 5Fe³⁺ + 4H₂O - गर्म करने की आवश्यकता नहीं: यह अभिक्रिया कमरे के तापमान पर तेजी से होती है।
- H₂SO₄ का उपयोग: Fe²⁺ आयनों के वायुमंडलीय ऑक्सीकरण को रोकने और अम्लीय माध्यम प्रदान करने के लिए।
-
प्रक्रिया (संक्षेप में):
- ब्यूरेट को KMnO₄ विलयन से भरें।
- पिपेट से 20.0 mL (या 25.0 mL) मानक मोहर लवण विलयन को कोनिकल फ्लास्क में लें।
- इसमें लगभग 20 mL तनु H₂SO₄ मिलाएँ।
- विलयन को ब्यूरेट से KMnO₄ विलयन की बूंद-बूंद करके तब तक मिलाएँ जब तक रंगहीन विलयन हल्का गुलाबी न हो जाए (अंतिम बिंदु)।
- ब्यूरेट की रीडिंग नोट करें और सुसंगत रीडिंग प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया को दोहराएँ।
-
गणना:
नॉर्मलता समीकरण का उपयोग करते हुए: N₁V₁ = N₂V₂
जहाँ,
N₁ = KMnO₄ की नॉर्मलता = M_KMnO₄ × n-फैक्टर (5)
N₂ = मोहर लवण की नॉर्मलता = M_मोहर लवण × n-फैक्टर (1)
V₁ = KMnO₄ का आयतन (सुसंगत आयतन)
V₂ = मोहर लवण का आयतन (पिपेट द्वारा लिया गया)(M_KMnO₄ × 5) × V_KMnO₄ = (M_मोहर लवण × 1) × V_मोहर लवण
M_KMnO₄ = (M_मोहर लवण × 1 × V_मोहर लवण) / (5 × V_KMnO₄) -
सावधानियाँ:
- ब्यूरेट और पिपेट को संबंधित विलयनों से खंगालें।
- मोहर लवण के विलयन को हवा के संपर्क में ज्यादा देर तक न रखें।
- कोनिकल फ्लास्क में H₂SO₄ मिलाना न भूलें।
सरकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (सारांश):
- KMnO₄ का n-फैक्टर/तुल्यांकी भार:
- अम्लीय माध्यम में: n-फैक्टर = 5 (तुल्यांकी भार = आणविक भार / 5)
- उदासीन/दुर्बल क्षारीय माध्यम में: n-फैक्टर = 3 (तुल्यांकी भार = आणविक भार / 3)
- प्रबल क्षारीय माध्यम में: n-फैक्टर = 1 (तुल्यांकी भार = आणविक भार / 1)
- KMnO₄ स्व-सूचक है: MnO₄⁻ (बैंगनी) से Mn²⁺ (रंगहीन) में परिवर्तन के कारण। अंतिम बिंदु पर एक अतिरिक्त बूंद गुलाबी रंग देती है।
- अम्लीय माध्यम के लिए H₂SO₄ का उपयोग: यह स्वयं ऑक्सीकृत नहीं होता। HCl और HNO₃ का उपयोग नहीं करते क्योंकि वे या तो स्वयं ऑक्सीकृत हो जाते हैं या ऑक्सीकारक होते हैं।
- ऑक्सेलिक अम्ल अनुमापन में गर्म करना: अभिक्रिया दर बढ़ाने के लिए आवश्यक है क्योंकि यह धीमी होती है। Mn²⁺ आयन स्व-उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।
- मोहर लवण अनुमापन में गर्म करने की आवश्यकता नहीं: अभिक्रिया कमरे के तापमान पर तेजी से होती है।
- अंतिम बिंदु: रंगहीन से हल्का गुलाबी रंग।
- KMnO₄ द्वितीयक मानक है: क्योंकि यह पूरी तरह शुद्ध नहीं होता, वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा अपघटित होता है, और कार्बनिक पदार्थों से अभिक्रिया करता है।
- मोहर लवण और ऑक्सेलिक अम्ल प्राथमिक मानक हैं: क्योंकि वे उच्च शुद्धता वाले, स्थिर, और ज्ञात रासायनिक सूत्र वाले होते हैं।
- KMnO₄ विलयन को भूरी बोतल में क्यों रखते हैं? प्रकाश के संपर्क में आने पर KMnO₄ अपघटित हो सकता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।
-
पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄) अम्लीय माध्यम में एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है। इस माध्यम में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 से किसमें परिवर्तित होती है?
(a) +6
(b) +4
(c) +2
(d) +3 -
KMnO₄ अनुमापन में, अम्लीय माध्यम प्रदान करने के लिए आमतौर पर किस अम्ल का उपयोग किया जाता है?
(a) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
(b) नाइट्रिक अम्ल (HNO₃)
(c) सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)
(d) फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄) -
ऑक्सेलिक अम्ल और KMnO₄ के बीच अनुमापन के दौरान कोनिकल फ्लास्क में विलयन को गर्म करने का मुख्य कारण क्या है?
(a) अभिक्रिया को धीमा करना
(b) अभिक्रिया को तेज करना
(c) KMnO₄ को अपघटित करना
(d) ऑक्सेलिक अम्ल को वाष्पीकृत करना -
निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ प्राथमिक मानक के रूप में कार्य करता है?
(a) पोटेशियम परमैंगनेट
(b) सोडियम हाइड्रोक्साइड
(c) मोहर लवण
(d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल -
KMnO₄ अनुमापन में अंतिम बिंदु पर रंग परिवर्तन क्या होता है?
(a) गुलाबी से रंगहीन
(b) रंगहीन से गुलाबी
(c) नीला से लाल
(d) पीला से हरा -
KMnO₄ को द्वितीयक मानक क्यों माना जाता है?
(a) यह बहुत महंगा है।
(b) यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा अपघटित हो सकता है।
(c) यह जल में अघुलनशील है।
(d) इसकी ऑक्सीकरण क्षमता बहुत कम है। -
अम्लीय माध्यम में KMnO₄ का n-फैक्टर (प्रति मोल इलेक्ट्रॉनों की संख्या) क्या होता है?
(a) 1
(b) 3
(c) 5
(d) 2 -
मोहर लवण के साथ KMnO₄ अनुमापन में, मोहर लवण में Fe²⁺ आयन किसमें ऑक्सीकृत होते हैं?
(a) Fe
(b) Fe³⁺
(c) Fe⁴⁺
(d) FeO -
निम्नलिखित में से कौन सा आयन KMnO₄ अनुमापन में स्व-उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है?
(a) MnO₄⁻
(b) H⁺
(c) Mn²⁺
(d) C₂O₄²⁻ -
यदि 25 mL 0.1 M ऑक्सेलिक अम्ल विलयन को 20 mL KMnO₄ विलयन के साथ अनुमापित किया जाता है, तो KMnO₄ विलयन की मोलरता क्या होगी? (ऑक्सेलिक अम्ल के लिए n-फैक्टर=2, KMnO₄ के लिए n-फैक्टर=5)
(a) 0.05 M
(b) 0.025 M
(c) 0.125 M
(d) 0.04 M
उत्तर कुंजी:
- (c)
- (c)
- (b)
- (c)
- (b)
- (b)
- (c)
- (b)
- (c)
- (a)
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। किसी भी संदेह या प्रश्न के लिए, बेझिझक पूछें। शुभकामनाएँ!