Class 12 Chemistry Notes Chapter 7 (Chapter 7) – Lab Manual (Hindi) Book

Lab Manual (Hindi)
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम रसायन विज्ञान के प्रयोगशाला मैनुअल के अध्याय 7, 'गुणात्मक विश्लेषण (लवण विश्लेषण)' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें व्यावहारिक रसायन के मूलभूत सिद्धांतों और तकनीकों का समावेश है। हम इस विषय को गहराई से समझेंगे ताकि आप सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को आत्मसात कर सकें।


अध्याय 7: गुणात्मक विश्लेषण (लवण विश्लेषण)

परिचय:
गुणात्मक विश्लेषण रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें किसी अज्ञात पदार्थ में उपस्थित विभिन्न रासायनिक घटकों (आयनों या मूलकों) की पहचान की जाती है। अकार्बनिक लवणों के विश्लेषण में, हमारा मुख्य लक्ष्य उसमें उपस्थित एक अम्लीय मूलक (ऋणायन) और एक क्षारीय मूलक (धनायन) की पहचान करना होता है। यह पहचान विभिन्न अभिकर्मकों के साथ अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनने वाले अवक्षेपों, रंगीन विलयनों या उत्सर्जित गैसों के विशिष्ट गुणों के आधार पर की जाती है।

विश्लेषण के चरण:

  1. क्षारीय मूलकों (धनायनों) का विश्लेषण: इन्हें विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया जाता है।
  2. अम्लीय मूलकों (ऋणायनों) का विश्लेषण: इन्हें भी विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया जाता है।

I. क्षारीय मूलकों (धनायनों) का विश्लेषण

क्षारीय मूलकों को उनके समूह अभिकर्मकों के प्रति व्यवहार के आधार पर छह समूहों में वर्गीकृत किया गया है। विश्लेषण हमेशा समूह I से शुरू होकर समूह VI तक क्रमबद्ध तरीके से किया जाता है।

मूल विलयन (Original Solution - O.S.) बनाना:
सबसे पहले, दिए गए लवण को आसुत जल में घोलकर मूल विलयन तैयार किया जाता है। यदि लवण जल में अघुलनशील है, तो इसे तनु HCl, फिर सांद्र HCl, फिर तनु HNO₃, और अंत में सांद्र HNO₃ में घोलने का प्रयास किया जाता है।

समूहों का वर्गीकरण और पहचान:

समूह I:

  • समूह अभिकर्मक: तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Dilute HCl)
  • अवक्षेप का रूप: क्लोराइड (PbCl₂, AgCl, Hg₂Cl₂)
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण:
    • लेड (Pb²⁺): तनु HCl डालने पर सफ़ेद अवक्षेप (PbCl₂) बनता है। यह अवक्षेप गर्म जल में घुलनशील होता है और ठंडा करने पर पुनः अवक्षेपित हो जाता है। पोटेशियम क्रोमेट (K₂CrO₄) विलयन मिलाने पर पीला अवक्षेप (PbCrO₄) बनता है।
    • सिल्वर (Ag⁺): तनु HCl डालने पर सफ़ेद अवक्षेप (AgCl) बनता है। यह अवक्षेप अमोनिया विलयन में घुलनशील होता है और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) डालने पर पुनः अवक्षेपित हो जाता है।
    • मर्क्यूरस (Hg₂²⁺): तनु HCl डालने पर सफ़ेद अवक्षेप (Hg₂Cl₂) बनता है। यह अवक्षेप अमोनिया विलयन के साथ काला हो जाता है (Hg + HgNH₂Cl बनने के कारण)।

समूह II:

  • समूह अभिकर्मक: तनु HCl + हाइड्रोजन सल्फाइड गैस (H₂S gas)
  • अवक्षेप का रूप: सल्फाइड (CuS, CdS, Bi₂S₃, As₂S₃, Sb₂S₃, SnS, SnS₂)
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण: (समूह I के अवक्षेप को हटाने के बाद प्राप्त निस्पंद में परीक्षण करें)
    • कॉपर (Cu²⁺): काला अवक्षेप (CuS)। यह अवक्षेप नाइट्रिक अम्ल में घुलनशील होता है। अमोनिया विलयन मिलाने पर गहरा नीला विलयन (टेट्राएम्मीनकॉपर(II) सल्फेट, [Cu(NH₃)₄]SO₄) बनता है। पोटेशियम फेरोसायनाइड (K₄[Fe(CN)₆]) से चॉकलेट ब्राउन अवक्षेप।
    • कैडमियम (Cd²⁺): पीला अवक्षेप (CdS)। यह नाइट्रिक अम्ल में घुलनशील होता है। अमोनिया विलयन से कोई अवक्षेप नहीं बनता।
    • बिस्मथ (Bi³⁺): काला/भूरा अवक्षेप (Bi₂S₃)। NaOH से सफ़ेद अवक्षेप (Bi(OH)₃) बनता है।

समूह III:

  • समूह अभिकर्मक: अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl) + अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH)
  • अवक्षेप का रूप: हाइड्रॉक्साइड (Fe(OH)₃, Al(OH)₃, Cr(OH)₃)
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण: (समूह II के अवक्षेप को हटाने के बाद प्राप्त निस्पंद में परीक्षण करें)
    • फेरिक (Fe³⁺): लाल-भूरा जिलेटिनस अवक्षेप (Fe(OH)₃)। यह HCl में घुलनशील होता है। पोटेशियम फेरोसायनाइड (K₄[Fe(CN)₆]) से प्रशियन ब्लू रंग देता है। पोटेशियम थायोसायनेट (KCNS) से रक्त-लाल रंग देता है।
    • एल्यूमीनियम (Al³⁺): सफ़ेद जिलेटिनस अवक्षेप (Al(OH)₃)। यह NaOH में घुलनशील होता है। कोबाल्ट नाइट्रेट परीक्षण: अवक्षेप को फिल्टर पेपर पर रखकर कोबाल्ट नाइट्रेट विलयन मिलाकर गर्म करने पर नीला मनका (Thenard's blue) बनता है।
    • क्रोमियम (Cr³⁺): हरा अवक्षेप (Cr(OH)₃)। यह NaOH में घुलनशील होता है। H₂O₂ के साथ गर्म करने पर पीला विलयन (क्रोमेट आयन, CrO₄²⁻) बनता है।

समूह IV:

  • समूह अभिकर्मक: NH₄Cl + NH₄OH + हाइड्रोजन सल्फाइड गैस (H₂S gas)
  • अवक्षेप का रूप: सल्फाइड (NiS, CoS, MnS, ZnS)
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण: (समूह III के अवक्षेप को हटाने के बाद प्राप्त निस्पंद में परीक्षण करें)
    • निकेल (Ni²⁺): काला अवक्षेप (NiS)। डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम (DMG) अभिकर्मक के साथ लाल-गुलाबी अवक्षेप देता है।
    • कोबाल्ट (Co²⁺): काला अवक्षेप (CoS)। पोटेशियम नाइट्राइट (KNO₂) के साथ पीला अवक्षेप (पोटेशियम हेक्सानाइट्रिटोकोबाल्टेट(III), K₃[Co(NO₂)₆]) देता है।
    • मैंगनीज (Mn²⁺): हल्का गुलाबी/मांस के रंग का अवक्षेप (MnS)। लेड परॉक्साइड और नाइट्रिक अम्ल के साथ गर्म करने पर बैंगनी रंग (परमैंगनेट आयन, MnO₄⁻) देता है।
    • जिंक (Zn²⁺): सफ़ेद अवक्षेप (ZnS)। यह NaOH में घुलनशील होता है। पोटेशियम फेरोसायनाइड (K₄[Fe(CN)₆]) से सफ़ेद अवक्षेप देता है।

समूह V:

  • समूह अभिकर्मक: NH₄Cl + NH₄OH + अमोनियम कार्बोनेट ((NH₄)₂CO₃)
  • अवक्षेप का रूप: कार्बोनेट (BaCO₃, SrCO₃, CaCO₃)
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण: (समूह IV के अवक्षेप को हटाने के बाद प्राप्त निस्पंद में परीक्षण करें)
    • बेरियम (Ba²⁺): सफ़ेद अवक्षेप (BaCO₃)। यह एसिटिक अम्ल में घुलनशील होता है। पोटेशियम क्रोमेट (K₂CrO₄) से पीला अवक्षेप (BaCrO₄) देता है। ज्वाला परीक्षण: सेब के समान हरा रंग।
    • स्ट्रॉन्शियम (Sr²⁺): सफ़ेद अवक्षेप (SrCO₃)। यह एसिटिक अम्ल में घुलनशील होता है। अमोनियम सल्फेट से सफ़ेद अवक्षेप देता है। ज्वाला परीक्षण: सिंदूरी लाल रंग।
    • कैल्शियम (Ca²⁺): सफ़ेद अवक्षेप (CaCO₃)। यह एसिटिक अम्ल में घुलनशील होता है। अमोनियम ऑक्सलेट से सफ़ेद अवक्षेप (CaC₂O₄) देता है। ज्वाला परीक्षण: ईंट जैसा लाल रंग।

समूह VI:

  • समूह अभिकर्मक: कोई विशिष्ट समूह अभिकर्मक नहीं।
  • महत्वपूर्ण मूलक और उनके परीक्षण: (समूह V के अवक्षेप को हटाने के बाद प्राप्त निस्पंद में परीक्षण करें)
    • मैग्नीशियम (Mg²⁺): अमोनियम फॉस्फेट और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड मिलाने पर सफ़ेद अवक्षेप (मैग्नीशियम अमोनियम फॉस्फेट, MgNH₄PO₄) बनता है।
    • अमोनियम (NH₄⁺): इस आयन का परीक्षण हमेशा मूल लवण के साथ किया जाता है। नेसलर अभिकर्मक मिलाने पर भूरा अवक्षेप (आयोडाइड ऑफ मिलन्स बेस, NH₂Hg₂I₃) बनता है। NaOH के साथ गर्म करने पर अमोनिया गैस निकलती है जिसकी तीव्र गंध होती है और यह लाल लिटमस पेपर को नीला कर देती है।

II. अम्लीय मूलकों (ऋणायनों) का विश्लेषण

अम्लीय मूलकों को उनके तनु H₂SO₄, सांद्र H₂SO₄ और विशिष्ट परीक्षणों के प्रति व्यवहार के आधार पर तीन मुख्य समूहों में वर्गीकृत किया गया है।

समूह A: तनु H₂SO₄ से अभिक्रिया करने वाले मूलक (गैस उत्सर्जन)

  • कार्बोनेट (CO₃²⁻): तनु H₂SO₄ के साथ बुदबुदाहट के साथ रंगहीन, गंधहीन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस निकलती है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
  • सल्फाइड (S²⁻): तनु H₂SO₄ के साथ सड़े अंडे जैसी गंध वाली रंगहीन हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) गैस निकलती है, जो लेड एसीटेट पेपर को काला कर देती है।
  • सल्फाइट (SO₃²⁻): तनु H₂SO₄ के साथ जलती हुई सल्फर जैसी गंध वाली रंगहीन सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस निकलती है, जो अम्लीय पोटेशियम डाइक्रोमेट पेपर को हरा कर देती है।
  • नाइट्राइट (NO₂⁻): तनु H₂SO₄ के साथ भूरी गैस (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, NO₂) निकलती है। यह स्टार्च आयोडाइड पेपर को नीला करती है।

समूह B: सांद्र H₂SO₄ से अभिक्रिया करने वाले मूलक (गैस या वाष्प उत्सर्जन)

  • क्लोराइड (Cl⁻): सांद्र H₂SO₄ के साथ तीखी गंध वाली रंगहीन हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) गैस निकलती है, जो अमोनिया छड़ के पास सफ़ेद धुआँ देती है। मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) के साथ गर्म करने पर पीली-हरी क्लोरीन (Cl₂) गैस निकलती है।
  • ब्रोमाइड (Br⁻): सांद्र H₂SO₄ के साथ लाल-भूरे रंग की ब्रोमीन (Br₂) वाष्प निकलती है।
  • आयोडाइड (I⁻): सांद्र H₂SO₄ के साथ बैंगनी रंग की आयोडीन (I₂) वाष्प निकलती है। यह स्टार्च पेपर को नीला करती है।
  • नाइट्रेट (NO₃⁻): सांद्र H₂SO₄ के साथ भूरी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) गैस निकलती है। वलय परीक्षण: परखनली के मुहाने पर ताजे बने फेरस सल्फेट विलयन और सांद्र H₂SO₄ की सावधानीपूर्वक परत बनाने पर भूरा वलय बनता है।

समूह C: विशिष्ट परीक्षण वाले मूलक (तनु या सांद्र H₂SO₄ से अभिक्रिया नहीं करते)

  • सल्फेट (SO₄²⁻): बेरियम क्लोराइड (BaCl₂) विलयन मिलाने पर सफ़ेद अवक्षेप (BaSO₄) बनता है जो तनु HCl में अघुलनशील होता है।
  • फॉस्फेट (PO₄³⁻): अमोनियम मोलिब्डेट और सांद्र HNO₃ के साथ गर्म करने पर पीला अवक्षेप (अमोनियम फॉस्फोमोलीब्डेट) बनता है।

III. महत्वपूर्ण बिंदु और सावधानियाँ

  1. मूल विलयन की तैयारी: हमेशा आसुत जल का उपयोग करें। यदि लवण अघुलनशील हो, तो उपयुक्त विलायक (तनु HCl, सांद्र HCl, तनु HNO₃, सांद्र HNO₃) का उपयोग करें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि विलायक में उपस्थित आयन विश्लेषण में बाधा न डालें।
  2. अभिकर्मकों की शुद्धता: सुनिश्चित करें कि सभी अभिकर्मक शुद्ध हों और उनकी सांद्रता सही हो। दूषित अभिकर्मक गलत परिणाम दे सकते हैं।
  3. समूहों का क्रम: क्षारीय मूलकों का परीक्षण हमेशा समूह I से VI तक एक निश्चित क्रम में करें। एक समूह के अवक्षेप को पूरी तरह से हटाने के बाद ही अगले समूह के लिए निस्पंद (filtrate) का उपयोग करें।
  4. अमोनियम आयन (NH₄⁺): अमोनियम आयन का परीक्षण हमेशा मूल लवण के साथ किया जाना चाहिए, न कि मूल विलयन के साथ, क्योंकि समूह अभिकर्मकों (जैसे NH₄Cl, NH₄OH) में भी अमोनियम आयन उपस्थित हो सकते हैं।
  5. अम्लीय मूलकों का परीक्षण: पहले तनु H₂SO₄ समूह, फिर सांद्र H₂SO₄ समूह, और अंत में विशिष्ट परीक्षण वाले मूलकों का परीक्षण करें।
  6. पुष्टि परीक्षण: किसी भी मूलक की पहचान केवल एक प्रारंभिक परीक्षण के आधार पर न करें। हमेशा कम से कम एक पुष्टि परीक्षण (confirmatory test) अवश्य करें।
  7. हस्तक्षेप: कुछ आयन एक-दूसरे के परीक्षणों में हस्तक्षेप कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, ऑक्सलेट या फॉस्फेट की उपस्थिति में समूह III के बाद के धनायनों का अवक्षेपण)। ऐसे मामलों में, हस्तक्षेप करने वाले आयन को हटाने या उसके प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए विशेष प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. लेड (Pb²⁺) आयन के समूह अभिकर्मक के रूप में किसका उपयोग किया जाता है?
    a) तनु HCl
    b) H₂S गैस
    c) NH₄Cl + NH₄OH
    d) (NH₄)₂CO₃

  2. गुणात्मक विश्लेषण में फेरिक (Fe³⁺) आयन का समूह अभिकर्मक क्या है?
    a) तनु HCl
    b) NH₄Cl + NH₄OH
    c) NH₄Cl + NH₄OH + H₂S
    d) (NH₄)₂CO₃

  3. सल्फाइड (S²⁻) मूलक की पहचान के लिए कौन सी गैस उत्सर्जित होती है, जो लेड एसीटेट पेपर को काला कर देती है?
    a) CO₂
    b) SO₂
    c) H₂S
    d) NO₂

  4. अमोनियम (NH₄⁺) आयन के लिए नेसलर अभिकर्मक के साथ क्या प्रेक्षण होता है?
    a) सफ़ेद अवक्षेप
    b) काला अवक्षेप
    c) भूरा अवक्षेप
    d) कोई अवक्षेप नहीं

  5. कॉपर (Cu²⁺) आयन पोटेशियम फेरोसायनाइड (K₄[Fe(CN)₆]) के साथ कौन सा रंग देता है?
    a) प्रशियन ब्लू
    b) चॉकलेट ब्राउन
    c) रक्त लाल
    d) पीला

  6. निम्नलिखित में से कौन सा अम्लीय मूलक तनु H₂SO₄ के साथ प्रतिक्रिया करके जलती हुई सल्फर जैसी गंध वाली गैस देता है?
    a) कार्बोनेट (CO₃²⁻)
    b) सल्फाइड (S²⁻)
    c) सल्फाइट (SO₃²⁻)
    d) नाइट्रेट (NO₃⁻)

  7. क्लोराइड (Cl⁻) आयन की पुष्टि के लिए सांद्र H₂SO₄ के साथ मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) को गर्म करने पर कौन सी गैस निकलती है?
    a) HCl
    b) Cl₂
    c) SO₂
    d) NO₂

  8. मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयन किस समूह से संबंधित है?
    a) समूह IV
    b) समूह V
    c) समूह VI
    d) समूह III

  9. सल्फेट (SO₄²⁻) आयन के परीक्षण में BaCl₂ के साथ बनने वाला सफ़ेद अवक्षेप किसमें अघुलनशील होता है?
    a) तनु NaOH
    b) तनु HCl
    c) तनु HNO₃
    d) अमोनिया विलयन

  10. नाइट्रेट (NO₃⁻) आयन के वलय परीक्षण में भूरा वलय किसके कारण बनता है?
    a) FeSO₄
    b) Fe(NO₃)₂
    c) [Fe(H₂O)₅NO]SO₄
    d) Fe(OH)₃


उत्तरमाला (MCQs):

  1. a) समूह I
  2. b) NH₄Cl + NH₄OH
  3. c) H₂S
  4. c) भूरा अवक्षेप
  5. b) चॉकलेट ब्राउन
  6. c) सल्फाइट (SO₃²⁻)
  7. b) Cl₂
  8. c) समूह VI
  9. b) तनु HCl
  10. c) [Fe(H₂O)₅NO]SO₄

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'गुणात्मक विश्लेषण' की गहरी समझ प्रदान करेंगे और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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