Class 12 Chemistry Notes Chapter 7 (p-ब्लॉक तत्त्व) – Rasayan Vigyan Bhag-I Book

Rasayan Vigyan Bhag-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम रसायन विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'p-ब्लॉक तत्त्व' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। यह अध्याय तत्वों के गुणों और उनके यौगिकों की रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने के लिए आधार प्रदान करता है। ध्यानपूर्वक पढ़ें और महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करते चलें।


अध्याय 7: p-ब्लॉक तत्त्व (p-Block Elements)

परिचय:
p-ब्लॉक तत्त्व वे तत्त्व होते हैं जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के p-उपकोश में प्रवेश करता है। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns²np¹⁻⁶ होता है। ये आवर्त सारणी के वर्ग 13 से वर्ग 18 तक स्थित होते हैं। इस अध्याय में हम वर्ग 15, 16, 17 और 18 के तत्वों का अध्ययन करेंगे।


I. वर्ग 15 के तत्त्व (नाइट्रोजन परिवार)

तत्त्व: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), बिस्मथ (Bi)।

सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns²np³। बाह्यतम कोश में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  2. परमाणु त्रिज्या: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है (नए कोश जुड़ने के कारण)।
  3. आयनन एन्थैल्पी: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है। वर्ग 14 के संगत तत्वों से इनकी आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है (स्थाई अर्ध-पूरित p-उपकोश के कारण)।
  4. विद्युत ऋणात्मकता: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है।
  5. धात्विक गुण: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं (N, P अधातु; As, Sb उपधातु; Bi धातु)।
  6. अपररूपता: नाइट्रोजन के अतिरिक्त सभी तत्व अपररूपता दर्शाते हैं।
  7. ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: -3, +3, +5।
    • -3 ऑक्सीकरण अवस्था वर्ग में नीचे जाने पर घटती जाती है (Bi केवल -3 नहीं दर्शाता)।
    • +3 ऑक्सीकरण अवस्था नीचे जाने पर अधिक स्थिर होती है (अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण)।
    • +5 ऑक्सीकरण अवस्था नीचे जाने पर कम स्थिर होती है।

नाइट्रोजन (N₂):

  • बनाने की विधियाँ:
    • प्रयोगशाला विधि: अमोनियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्राइट के जलीय विलयन को गर्म करके।
      NH₄Cl(aq) + NaNO₂(aq) → N₂(g) + 2H₂O(l) + NaCl(aq)
    • अन्य विधियाँ:
      • बेरियम एजाइड (Ba(N₃)₂) या सोडियम एजाइड (NaN₃) के तापीय अपघटन से अति शुद्ध नाइट्रोजन प्राप्त होती है।
      • अमोनियम डाइक्रोमेट को गर्म करके।
  • गुणधर्म: रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन गैस, जल में कम घुलनशील, अक्रिय।
  • उपयोग: अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में, अक्रिय वातावरण बनाने में।

नाइट्रोजन के यौगिक:

  1. अमोनिया (NH₃):

    • बनाने की विधियाँ:
      • हैबर प्रक्रम (औद्योगिक विधि): N₂(g) + 3H₂(g) ⇌ 2NH₃(g)
        • उत्प्रेरक: Fe₂O₃ + K₂O + Al₂O₃ (या मोलीब्डेनम)
        • ताप: 700 K, दाब: 200 atm
        • यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, अतः कम ताप और उच्च दाब अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।
      • प्रयोगशाला विधि: अमोनियम लवणों को कास्टिक सोडा या बुझे हुए चूने के साथ गर्म करके।
        2NH₄Cl + Ca(OH)₂ → CaCl₂ + 2NH₃ + 2H₂O
    • गुणधर्म: तीखी गंध वाली गैस, जल में अत्यधिक घुलनशील (NH₄OH बनाता है), दुर्बल क्षार।
    • उपयोग: उर्वरक (यूरिया), नाइट्रिक अम्ल, सोडियम कार्बोनेट के निर्माण में।
  2. नाइट्रिक अम्ल (HNO₃):

    • बनाने की विधियाँ:
      • ओस्टवाल्ड प्रक्रम (औद्योगिक विधि):
        1. अमोनिया का उत्प्रेरकीय ऑक्सीकरण: 4NH₃(g) + 5O₂(g) $\xrightarrow{Pt/Rh\ gauze}$ 4NO(g) + 6H₂O(g)
        2. नाइट्रिक ऑक्साइड का ऑक्सीकरण: 2NO(g) + O₂(g) → 2NO₂(g)
        3. नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का जल में अवशोषण: 3NO₂(g) + H₂O(l) → 2HNO₃(aq) + NO(g)
    • गुणधर्म: प्रबल ऑक्सीकारक, प्रबल अम्ल।
      • धातुओं के साथ अभिक्रिया (सांद्र और तनु HNO₃ की भिन्न अभिक्रियाएँ)।
      • P, I, S के साथ अभिक्रिया।
    • उपयोग: उर्वरक, विस्फोटक (TNT, नाइट्रोग्लिसरीन), रॉकेट ईंधन के ऑक्सीकारक के रूप में।
  3. नाइट्रोजन के ऑक्साइड:

    • N₂O (नाइट्रस ऑक्साइड): उदासीन, 'लाफिंग गैस'।
    • NO (नाइट्रिक ऑक्साइड): उदासीन।
    • N₂O₃ (डाईनाइट्रोजन ट्राइऑक्साइड): अम्लीय, नीला ठोस।
    • NO₂ (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड): अम्लीय, भूरी गैस।
    • N₂O₄ (डाईनाइट्रोजन टेट्राऑक्साइड): अम्लीय, रंगहीन ठोस/द्रव।
    • N₂O₅ (डाईनाइट्रोजन पेंटाऑक्साइड): अम्लीय, रंगहीन ठोस।

फॉस्फोरस (P):

  • अपररूप:
    • श्वेत फॉस्फोरस (P₄): मोम जैसा ठोस, विषैला, जल में अघुलनशील, कार्बन डाइसल्फाइड में घुलनशील, अंधेरे में चमकता है (रसायन संदीप्ति), स्वतः प्रज्वलित होता है।
    • लाल फॉस्फोरस: श्वेत फॉस्फोरस को अक्रिय वातावरण में गर्म करने पर बनता है, अविषैला, जल और CS₂ में अघुलनशील, अधिक स्थिर।
    • काला फॉस्फोरस: दो रूप (α-काला और β-काला), सबसे स्थिर अपररूप।

फॉस्फोरस के यौगिक:

  1. फॉस्फीन (PH₃):

    • बनाने की विधियाँ:
      • कैल्शियम फॉस्फाइड की जल या तनु HCl से अभिक्रिया।
        Ca₃P₂ + 6H₂O → 3Ca(OH)₂ + 2PH₃
        Ca₃P₂ + 6HCl → 3CaCl₂ + 2PH₃
      • श्वेत फॉस्फोरस की NaOH के साथ अभिक्रिया।
        P₄ + 3NaOH + 3H₂O → PH₃ + 3NaH₂PO₂ (सोडियम हाइपोफॉस्फाइट)
    • गुणधर्म: सड़ी मछली जैसी गंध, विषैली गैस, दुर्बल क्षारीय।
    • उपयोग: होलम्स सिग्नल (समुद्री जहाजों पर)।
  2. फॉस्फोरस हैलाइड:

    • फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड (PCl₃):
      • बनाने की विधि: श्वेत फॉस्फोरस की थिऑनिल क्लोराइड (SOCl₂) से अभिक्रिया।
        P₄ + 8SOCl₂ → 4PCl₃ + 4SO₂ + 2S₂Cl₂
      • गुणधर्म: रंगहीन तैलीय द्रव, जल के साथ जल-अपघटन।
        PCl₃ + 3H₂O → H₃PO₃ + 3HCl
    • फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (PCl₅):
      • बनाने की विधि: श्वेत फॉस्फोरस की क्लोरीन की अधिकता से अभिक्रिया।
        P₄ + 10Cl₂ → 4PCl₅
      • गुणधर्म: पीलापन लिए हुए श्वेत ठोस, जल के साथ जल-अपघटन।
        PCl₅ + H₂O → POCl₃ + 2HCl
        POCl₃ + 3H₂O → H₃PO₄ + 3HCl
      • ठोस अवस्था में आयनिक (PCl₄⁺ PCl₆⁻) होता है।
  3. फॉस्फोरस के ऑक्सोअम्ल:

    • हाइपोफॉस्फोरस अम्ल (H₃PO₂): ऑक्सीकरण अवस्था +1, प्रबल अपचायक।
    • ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल (H₃PO₃): ऑक्सीकरण अवस्था +3, अपचायक, द्विभास्मिक।
    • ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄): ऑक्सीकरण अवस्था +5, त्रिभास्मिक।
    • पाइरोफॉस्फोरिक अम्ल (H₄P₂O₇): ऑक्सीकरण अवस्था +5।
    • इन सभी में कम से कम एक P=O बंध और एक P-OH बंध होता है। P-H बंध वाले अम्ल अपचायक होते हैं।

II. वर्ग 16 के तत्त्व (ऑक्सीजन परिवार/चैल्कोजन)

तत्त्व: ऑक्सीजन (O), सल्फर (S), सेलेनियम (Se), टेल्यूरियम (Te), पोलोनियम (Po)।

सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns²np⁴। बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  2. परमाणु त्रिज्या: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।
  3. आयनन एन्थैल्पी: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। वर्ग 15 के संगत तत्वों से इनकी आयनन एन्थैल्पी कम होती है।
  4. विद्युत ऋणात्मकता: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। ऑक्सीजन की विद्युत ऋणात्मकता फ्लोरीन के बाद सबसे अधिक होती है।
  5. धात्विक गुण: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं (O, S अधातु; Se, Te उपधातु; Po धातु)।
  6. अपररूपता: सभी तत्व अपररूपता दर्शाते हैं।
  7. ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: -2, +2, +4, +6।
    • ऑक्सीजन सामान्यतः -2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, लेकिन OF₂ में +2 और O₂F₂ में +1 दर्शाता है।
    • अन्य तत्व +2, +4, +6 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाते हैं, जहाँ +4 और +6 अधिक सामान्य हैं। नीचे जाने पर +4 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है (अक्रिय युग्म प्रभाव)।

ऑक्सीजन (O₂):

  • बनाने की विधियाँ:
    • प्रयोगशाला विधि: पोटेशियम क्लोरेट (KClO₃) को मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करके।
      2KClO₃(s) $\xrightarrow{MnO_2, \Delta}$ 2KCl(s) + 3O₂(g)
    • हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन (MnO₂ की उपस्थिति में)।
    • धातु ऑक्साइडों (Ag₂O, HgO, Pb₃O₄) को गर्म करके।
    • जल का विद्युत अपघटन।
  • गुणधर्म: रंगहीन, गंधहीन गैस, जल में कम घुलनशील, अनुचुंबकीय (अयुग्मित इलेक्ट्रॉन के कारण)।
  • उपयोग: श्वसन, ऑक्सी-एसिटिलीन वेल्डिंग, अस्पतालों में।

ओजोन (O₃):

  • बनाने की विधियाँ: ऑक्सीजन के शुष्क और ठंडे प्रवाह को साइलेंट विद्युत विसर्जन से गुजारने पर।
    3O₂(g) $\xrightarrow{Silent\ electric\ discharge}$ 2O₃(g) (यह एक एंडोथर्मिक प्रक्रिया है)
  • गुणधर्म: नीली गैस (कम सांद्रता), गहरे नीले रंग का द्रव, बैंगनी-काला ठोस, प्रबल ऑक्सीकारक।
  • संरचना: कोणीय (V-आकार), अनुनाद संरचनाएँ।
  • उपयोग: कीटाणुनाशक, जल के शुद्धिकरण में, विरंजक के रूप में।
  • ओजोन परत का क्षरण: CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) द्वारा।

सल्फर (S):

  • अपररूप:
    • विषमलम्बाक्ष सल्फर (α-सल्फर): सबसे स्थिर अपररूप, पीला ठोस, गलनांक 385.8 K।
    • एकनताक्ष सल्फर (β-सल्फर): गलनांक 392 K, 369 K से ऊपर स्थिर।
    • दोनों में S₈ अणु होते हैं (क्राउन आकार)।
    • प्लास्टिक सल्फर (अक्रिस्टलीय)।

सल्फर के यौगिक:

  1. सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂):

    • बनाने की विधियाँ:
      • सल्फर को वायु में जलाने पर: S(s) + O₂(g) → SO₂(g)
      • सल्फाइड अयस्कों के भर्जन से: 4FeS₂(s) + 11O₂(g) → 2Fe₂O₃(s) + 8SO₂(g)
    • गुणधर्म: तीखी गंध वाली गैस, जल में घुलनशील (सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है), अम्लीय, अपचायक (आर्द्र अवस्था में)।
    • उपयोग: सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में, विरंजक के रूप में, परिरक्षक।
  2. सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄):

    • बनाने की विधियाँ:
      • संपर्क प्रक्रम (औद्योगिक विधि):
        1. सल्फर या सल्फाइड अयस्क को जलाकर SO₂ बनाना।
        2. SO₂ का उत्प्रेरकीय ऑक्सीकरण: 2SO₂(g) + O₂(g) $\xrightarrow{V_2O_5}$ 2SO₃(g)
          • उत्प्रेरक: वैनेडियम पेंटाऑक्साइड (V₂O₅)
          • ताप: 720 K
        3. SO₃ का सांद्र H₂SO₄ में अवशोषण (ओलियम बनाने के लिए): SO₃ + H₂SO₄ → H₂S₂O₇ (ओलियम)
        4. ओलियम का जल-अपघटन: H₂S₂O₇ + H₂O → 2H₂SO₄
    • गुणधर्म: रंगहीन, गाढ़ा, तैलीय द्रव, प्रबल अम्ल, प्रबल निर्जलीकारक, प्रबल ऑक्सीकारक।
    • उपयोग: रसायनों का राजा, उर्वरक, पेट्रोलियम शोधन, डिटर्जेंट, रंजक।
  3. सल्फर के ऑक्सोअम्ल:

    • सल्फ्यूरस अम्ल (H₂SO₃), सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄), परॉक्सोडाइसल्फ्यूरिक अम्ल (H₂S₂O₈), थायोसल्फ्यूरिक अम्ल (H₂S₂O₃), ओलियम (H₂S₂O₇)।

III. वर्ग 17 के तत्त्व (हैलोजन)

तत्त्व: फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), एस्टेटीन (At)।

सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns²np⁵। बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  2. परमाणु त्रिज्या: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।
  3. आयनन एन्थैल्पी: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है।
  4. विद्युत ऋणात्मकता: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। फ्लोरीन आवर्त सारणी का सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।
  5. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी फ्लोरीन से अधिक होती है (फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण)।
  6. भौतिक अवस्था: F₂ (पीली गैस), Cl₂ (हरी-पीली गैस), Br₂ (लाल-भूरा द्रव), I₂ (बैंगनी ठोस)।
  7. ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: -1 (सबसे सामान्य), +1, +3, +5, +7। फ्लोरीन केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।
  8. ऑक्सीकारक क्षमता: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂ (प्रबल ऑक्सीकारक)।

हैलोजनों के यौगिक:

  1. हाइड्रोजन हैलाइड (HX): HF, HCl, HBr, HI।

    • अम्लीय शक्ति: HF < HCl < HBr < HI (बंध वियोजन एन्थैल्पी घटने के कारण)।
    • HF में हाइड्रोजन बंध के कारण इसका क्वथनांक अधिक होता है।
  2. क्लोरीन (Cl₂):

    • बनाने की विधियाँ:
      • डीकन प्रक्रम (औद्योगिक): HCl का वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकरण।
        4HCl(g) + O₂(g) $\xrightarrow{CuCl_2}$ 2Cl₂(g) + 2H₂O(g)
      • विद्युत अपघटनी प्रक्रम (कास्टनर-केलनर सेल): NaCl के जलीय विलयन (ब्राइन) के विद्युत अपघटन से।
      • प्रयोगशाला विधि: MnO₂ की HCl से अभिक्रिया।
        MnO₂ + 4HCl → MnCl₂ + Cl₂ + 2H₂O
    • गुणधर्म: हरी-पीली गैस, विषैली, जल में घुलनशील (क्लोरिन जल बनाती है), ऑक्सीकारक, विरंजक।
    • उपयोग: जल के शुद्धिकरण, विरंजक चूर्ण, PVC, DDT के निर्माण में।
  3. हैलोजनों के ऑक्सोअम्ल:

    • HClO (हाइपोक्लोरस अम्ल), HClO₂ (क्लोरस अम्ल), HClO₃ (क्लोरिक अम्ल), HClO₄ (परक्लोरिक अम्ल)।
    • अम्लीय शक्ति: HClO < HClO₂ < HClO₃ < HClO₄ (केंद्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ने के साथ अम्लीय शक्ति बढ़ती है)।
  4. अंतरा-हैलोजन यौगिक:

    • दो भिन्न हैलोजनों के बीच बने यौगिक (AX, AX₃, AX₅, AX₇)।
    • उदाहरण: ClF, BrF₃, IF₅, IF₇।
    • ये सहसंयोजक होते हैं।
    • ये अपने घटक हैलोजनों की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।

IV. वर्ग 18 के तत्त्व (उत्कृष्ट गैसें/अक्रिय गैसें)

तत्त्व: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), जीनॉन (Xe), रेडॉन (Rn)।

सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns²np⁶ (He का 1s²)। पूर्ण पूरित इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण ये अत्यधिक स्थिर होते हैं।
  2. परमाणु त्रिज्या: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।
  3. आयनन एन्थैल्पी: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। इनकी आयनन एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है।
  4. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: धनात्मक होती है (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति नहीं होती)।
  5. भौतिक अवस्था: सभी रंगहीन, गंधहीन गैसें हैं।
  6. रासायनिक अभिक्रियाशीलता: अत्यंत कम अभिक्रियाशील (अक्रिय)।
    • जीनॉन (Xe) कुछ यौगिक बनाता है क्योंकि इसकी आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है।

उत्कृष्ट गैसों के उपयोग:

  • He: गुब्बारों, गोताखोरों के सिलेंडरों में (O₂ के साथ), NMR स्पेक्ट्रोमीटर में अतिचालक चुंबकों के लिए निम्न ताप उत्पन्न करने में।
  • Ne: नियॉन बल्ब, विज्ञापन बोर्ड।
  • Ar: अक्रिय वातावरण बनाने में (वेल्डिंग, विद्युत बल्ब)।
  • Kr, Xe: विशेष प्रयोजन वाले बल्बों में।
  • Rn: कैंसर के उपचार में (रेडियोधर्मी)।

जीनॉन के यौगिक:

  • जीनॉन फ्लोराइड:
    • Xe + F₂ $\xrightarrow{673K, 1\ bar}$ XeF₂ (रैखिक)
    • Xe + 2F₂ $\xrightarrow{873K, 7\ bar}$ XeF₄ (वर्ग समतलीय)
    • Xe + 3F₂ $\xrightarrow{573K, 60-70\ bar}$ XeF₆ (विकृत अष्टफलकीय)
  • जीनॉन ऑक्सोयौगिक:
    • XeF₄ + 2H₂O → XeO₂F₂ + 4HF
    • XeF₆ + 3H₂O → XeO₃ + 6HF (XeO₃ पिरामिडीय)
    • XeF₆ + H₂O → XeOF₄ + 2HF (XeOF₄ वर्ग पिरामिडीय)
  • जीनॉन के यौगिकों में Xe की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +2, +4, +6, +8 हो सकती हैं।

यह p-ब्लॉक तत्वों का विस्तृत विवरण है। अब, आपकी तैयारी को परखने के लिए 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) प्रस्तुत हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व अपररूपता प्रदर्शित नहीं करता है?
    (a) नाइट्रोजन
    (b) फॉस्फोरस
    (c) ऑक्सीजन
    (d) सल्फर

  2. हैबर प्रक्रम में अमोनिया के उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ क्या हैं?
    (a) उच्च ताप, उच्च दाब
    (b) निम्न ताप, निम्न दाब
    (c) उच्च ताप, निम्न दाब
    (d) निम्न ताप, उच्च दाब

  3. निम्नलिखित में से कौन-सा नाइट्रोजन का ऑक्साइड उदासीन प्रकृति का है?
    (a) N₂O₃
    (b) NO₂
    (c) N₂O
    (d) N₂O₅

  4. फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (PCl₅) की ठोस अवस्था में संरचना क्या होती है?
    (a) त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय
    (b) वर्ग पिरामिडीय
    (c) आयनिक (PCl₄⁺ PCl₆⁻)
    (d) चतुष्फलकीय

  5. सल्फ्यूरिक अम्ल के औद्योगिक उत्पादन (संपर्क प्रक्रम) में किस उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है?
    (a) Fe₂O₃
    (b) Pt
    (c) V₂O₅
    (d) Ni

  6. निम्नलिखित में से किस हैलोजन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान सर्वाधिक होता है?
    (a) फ्लोरीन
    (b) क्लोरीन
    (c) ब्रोमीन
    (d) आयोडीन

  7. हैलोजनों के ऑक्सोअम्लों की अम्लीय शक्ति का सही बढ़ता क्रम क्या है?
    (a) HClO < HClO₂ < HClO₃ < HClO₄
    (b) HClO₄ < HClO₃ < HClO₂ < HClO
    (c) HClO < HClO₃ < HClO₂ < HClO₄
    (d) HClO₂ < HClO < HClO₃ < HClO₄

  8. गोताखोरों द्वारा गहरे समुद्र में श्वसन के लिए ऑक्सीजन के साथ किस उत्कृष्ट गैस का मिश्रण उपयोग किया जाता है?
    (a) नियॉन
    (b) आर्गन
    (c) क्रिप्टॉन
    (d) हीलियम

  9. जीनॉन टेट्राफ्लोराइड (XeF₄) की संरचना क्या है?
    (a) रैखिक
    (b) वर्ग समतलीय
    (c) पिरामिडीय
    (d) विकृत अष्टफलकीय

  10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ओजोन (O₃) के बारे में असत्य है?
    (a) यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है।
    (b) यह ऑक्सीजन के साइलेंट विद्युत विसर्जन से बनती है।
    (c) इसकी संरचना रैखिक होती है।
    (d) यह जल के शुद्धिकरण में उपयोग की जाती है।


उत्तर कुंजी:

  1. (a)
  2. (d)
  3. (c)
  4. (c)
  5. (c)
  6. (b)
  7. (a)
  8. (d)
  9. (b)
  10. (c)

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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