Class 12 Chemistry Notes Chapter 8 (d-एवं f-ब्लॉक के तत्त्व) – Rasayan Vigyan Bhag-I Book

Rasayan Vigyan Bhag-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम रसायन विज्ञान के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'd-एवं f-ब्लॉक के तत्त्व' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। इन तत्वों के अद्वितीय गुणधर्म और अनुप्रयोग इन्हें विशेष बनाते हैं। आइए, इन तत्वों की गहराइयों में उतरते हैं।


अध्याय 8: d-एवं f-ब्लॉक के तत्त्व

I. d-ब्लॉक के तत्त्व (संक्रमण तत्त्व)

A. परिभाषा: वे तत्व जिनमें परमाणु या उनके किसी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था वाले आयन में d-उपकोश अपूर्ण होता है, d-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं। इन्हें संक्रमण तत्त्व भी कहते हैं।
अपवाद: जिंक (Zn), कैडमियम (Cd), मर्करी (Hg) और कोपरनीशियम (Cn) को संक्रमण तत्त्व नहीं माना जाता क्योंकि इनके परमाणु और सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था (Zn²⁺, Cd²⁺, Hg²⁺) में d-उपकोश पूर्णतया भरा (d¹⁰) होता है।

B. सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: (n-1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻²
* (n-1)d उपकोश आंतरिक d-उपकोश को दर्शाता है।
* n, बाह्यतम कोश की मुख्य क्वांटम संख्या है।

C. संक्रमण तत्त्वों की श्रेणियाँ:
1. प्रथम संक्रमण श्रेणी (3d श्रेणी): स्कैंडियम (Sc, Z=21) से जिंक (Zn, Z=30) तक।
2. द्वितीय संक्रमण श्रेणी (4d श्रेणी): इट्रियम (Y, Z=39) से कैडमियम (Cd, Z=48) तक।
3. तृतीय संक्रमण श्रेणी (5d श्रेणी): लैंथेनम (La, Z=57), हॉफनियम (Hf, Z=72) से मर्करी (Hg, Z=80) तक। (लैंथेनम के बाद 14 लैंथेनॉइड आते हैं)।
4. चतुर्थ संक्रमण श्रेणी (6d श्रेणी): ऐक्टिनियम (Ac, Z=89), रदरफोर्डियम (Rf, Z=104) से कोपरनीशियम (Cn, Z=112) तक। (ऐक्टिनियम के बाद 14 ऐक्टिनॉइड आते हैं)।

D. सामान्य गुणधर्म:

  1. धात्विक गुण: सभी संक्रमण तत्त्व उत्कृष्ट धात्विक गुण प्रदर्शित करते हैं। ये कठोर, उच्च गलनांक व क्वथनांक वाले, उच्च तापीय व विद्युतीय चालकता वाले होते हैं। इनके धात्विक बंध में (n-1)d और ns इलेक्ट्रॉनों दोनों का योगदान होता है।
  2. परमाण्विक एवं आयनिक आकार:
    • किसी भी संक्रमण श्रेणी में, बाईं से दाईं ओर जाने पर परमाण्विक त्रिज्या पहले घटती है (अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है), फिर लगभग स्थिर हो जाती है (d-इलेक्ट्रॉनों की परिरक्षण प्रभाव से नाभिकीय आवेश का प्रभाव संतुलित होता है), और अंत में थोड़ी बढ़ जाती है (d-उपकोश के पूर्ण भरने से प्रतिकर्षण बढ़ता है)।
    • लैंथेनॉइड संकुचन का प्रभाव: 4d और 5d श्रेणियों के तत्वों के आकार लगभग समान होते हैं (उदाहरण: Zr और Hf, Nb और Ta)। ऐसा लैंथेनॉइड संकुचन के कारण होता है, जहाँ 4f इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण 5d श्रेणी के तत्वों में प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है, जिससे उनका आकार 4d श्रेणी के संगत तत्वों के समान हो जाता है।
  3. आयनन एन्थैल्पी:
    • संक्रमण श्रेणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
    • 3d से 4d और 4d से 5d श्रेणी में जाने पर आयनन एन्थैल्पी में वृद्धि होती है। 5d श्रेणी की आयनन एन्थैल्पी 4d श्रेणी से अधिक होती है, इसका मुख्य कारण लैंथेनॉइड संकुचन है।
  4. ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
    • संक्रमण तत्त्व परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि (n-1)d और ns इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जाएँ लगभग समान होती हैं, और दोनों ही रासायनिक बंध बनाने में भाग ले सकते हैं।
    • निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था ns इलेक्ट्रॉनों के त्याग से प्राप्त होती है, जबकि उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था सभी (n-1)d और ns इलेक्ट्रॉनों के त्याग से प्राप्त होती है।
    • मैंगनीज (Mn) सबसे अधिक ऑक्सीकरण अवस्था (+2 से +7) प्रदर्शित करता है।
    • उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (जैसे +6, +7) आमतौर पर ऑक्साइडों और फ्लोराइडों में अधिक स्थिर होती हैं।
    • Cr²⁺ (d⁴) एक प्रबल अपचायक है, जबकि Mn³⁺ (d⁴) और Co³⁺ (d⁶) प्रबल ऑक्सीकारक हैं।
    • Cu⁺ (d¹⁰) जलीय विलयन में अस्थिर होता है और असमानुपातन (disproportionation) दर्शाता है: 2Cu⁺(aq) → Cu²⁺(aq) + Cu(s)।
  5. मानक इलेक्ट्रोड विभव (E° मान):
    • M²⁺/M के लिए E° मान आमतौर पर ऋणात्मक होते हैं, जो दर्शाते हैं कि ये तत्व अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकते हैं।
    • Cu²⁺/Cu के लिए E° मान धनात्मक (+0.34 V) होता है, इसलिए कॉपर अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करता।
    • Mn²⁺, Ni²⁺ और Zn²⁺ के E° मान अपेक्षा से अधिक ऋणात्मक होते हैं, जो उनके आयनों के स्थायित्व को दर्शाते हैं।
  6. चुंबकीय गुण:
    • अनुचुंबकीय: वे पदार्थ जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, अनुचुंबकीय होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं। अनुचुंबकत्व अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है।
    • प्रतिचुंबकीय: वे पदार्थ जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, प्रतिचुंबकीय होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं।
    • चुंबकीय आघूर्ण (μ): μ = √n(n+2) BM (बोह्र मैग्नेटॉन), जहाँ n अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
  7. रंगीन आयन निर्माण:
    • संक्रमण तत्त्वों के आयन और यौगिक अक्सर रंगीन होते हैं। ऐसा d-d संक्रमण के कारण होता है।
    • जब d-उपकोश आंशिक रूप से भरा होता है, तो दृश्य प्रकाश क्षेत्र से ऊर्जा अवशोषित करके इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा वाले d-कक्षकों से उच्च ऊर्जा वाले d-कक्षकों में उत्तेजित होते हैं। जो प्रकाश उत्सर्जित होता है, वह पूरक रंग का होता है।
    • पूर्ण भरे (d¹⁰) या पूर्ण रिक्त (d⁰) d-उपकोश वाले आयन (जैसे Sc³⁺, Ti⁴⁺, Zn²⁺) रंगहीन होते हैं।
  8. उत्प्रेरकीय गुण:
    • संक्रमण तत्त्व और उनके यौगिक अपनी परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाओं और बड़े पृष्ठीय क्षेत्रफल के कारण उत्कृष्ट उत्प्रेरक होते हैं।
    • उदाहरण: V₂O₅ (संपर्क विधि में), Fe (हैबर विधि में), Ni (हाइड्रोजनीकरण में)।
  9. अंतराकाशी यौगिकों का निर्माण:
    • संक्रमण तत्त्वों के क्रिस्टल जालक में छोटे परमाणु (जैसे H, C, N, B) रिक्त स्थानों में फंसकर अंतराकाशी यौगिक बनाते हैं।
    • ये यौगिक कठोर होते हैं, उच्च गलनांक वाले होते हैं, और धात्विक चालकता बनाए रखते हैं।
  10. मिश्र धातुओं का निर्माण:
    • संक्रमण तत्त्वों के परमाण्विक आकार लगभग समान होने के कारण, वे आसानी से एक-दूसरे के क्रिस्टल जालक में प्रतिस्थापित होकर मिश्र धातुएँ बनाते हैं।
    • उदाहरण: पीतल (Cu-Zn), कांस्य (Cu-Sn), स्टेनलेस स्टील (Fe-Cr-Ni)।
  11. संकुल यौगिकों का निर्माण:
    • संक्रमण तत्त्वों में छोटे आकार, उच्च नाभिकीय आवेश और रिक्त d-कक्षकों की उपलब्धता के कारण ये आसानी से संकुल यौगिक बनाते हैं।

E. d-ब्लॉक के कुछ महत्वपूर्ण यौगिक:

  1. पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇):

    • विरचन: क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से।
      • 4FeCr₂O₄ + 8Na₂CO₃ + 7O₂ → 8Na₂CrO₄ + 2Fe₂O₃ + 8CO₂
      • 2Na₂CrO₄ + 2H⁺ → Na₂Cr₂O₇ + 2Na⁺ + H₂O
      • Na₂Cr₂O₇ + 2KCl → K₂Cr₂O₇ + 2NaCl
    • संरचना: क्रोमेट (CrO₄²⁻) आयन चतुष्फलकीय होता है, जबकि डाइक्रोमेट (Cr₂O₇²⁻) आयन में दो चतुष्फलक एक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े होते हैं।
    • गुणधर्म: यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है, विशेषकर अम्लीय माध्यम में।
      • Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O (E° = +1.33 V)
      • pH > 4 पर क्रोमेट आयन (पीला) डाइक्रोमेट आयन (नारंगी) में बदल जाता है, और pH < 4 पर डाइक्रोमेट क्रोमेट में।
      • 2CrO₄²⁻ (पीला) + 2H⁺ ⇌ Cr₂O₇²⁻ (नारंगी) + H₂O
    • उपयोग: आयतनमितीय विश्लेषण में ऑक्सीकारक के रूप में, चमड़ा उद्योग में।
  2. पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄):

    • विरचन: पाइरोलुसाइट अयस्क (MnO₂) से।
      • 2MnO₂ + 4KOH + O₂ → 2K₂MnO₄ (पोटैशियम मैंगनेट, हरा) + 2H₂O
      • 3K₂MnO₄ + 4H⁺ → 2KMnO₄ (पोटैशियम परमैंगनेट, बैंगनी) + MnO₂ + 2H₂O (अम्लीय माध्यम में असमानुपातन)
      • या विद्युत् अपघटनी ऑक्सीकरण द्वारा: K₂MnO₄ → KMnO₄
    • संरचना: परमैंगनेट आयन (MnO₄⁻) चतुष्फलकीय होता है।
    • गुणधर्म: यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है, और इसकी ऑक्सीकारक क्षमता माध्यम पर निर्भर करती है।
      • अम्लीय माध्यम: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O (E° = +1.52 V)
      • उदासीन/दुर्बल क्षारीय माध्यम: MnO₄⁻ + 2H₂O + 3e⁻ → MnO₂ + 4OH⁻ (E° = +1.23 V)
      • प्रबल क्षारीय माध्यम: MnO₄⁻ + e⁻ → MnO₄²⁻ (E° = +0.56 V)
    • उपयोग: आयतनमितीय विश्लेषण में ऑक्सीकारक के रूप में, कीटाणुनाशक के रूप में, जल के शुद्धिकरण में।

II. f-ब्लॉक के तत्त्व (आंतरिक संक्रमण तत्त्व)

A. लैंथेनॉइड (4f-ब्लॉक):
* परमाणु क्रमांक 58 (सीरियम, Ce) से 71 (लुटेटियम, Lu) तक के 14 तत्त्व। ये लैंथेनम (La, Z=57) के बाद आते हैं।
* सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Xe] 4f¹⁻¹⁴ 5d⁰⁻¹ 6s²
* ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +3 ऑक्सीकरण अवस्था सबसे सामान्य और स्थिर होती है। कुछ तत्व +2 और +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं (उदाहरण: Eu²⁺, Yb²⁺, Ce⁴⁺, Tb⁴⁺)।
* लैंथेनॉइड संकुचन: लैंथेनॉइड श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ परमाणु और आयनिक त्रिज्याओं में नियमित कमी आती है।
* कारण: 4f इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव। नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ 4f इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉनों को प्रभावी ढंग से परिरक्षित नहीं कर पाते, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बढ़ जाता है और आकार सिकुड़ जाता है।
* परिणाम:
* 5d श्रेणी के तत्वों के आकार 4d श्रेणी के संगत तत्वों के समान हो जाते हैं।
* लैंथेनॉइड हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीयता Ce(OH)₃ से Lu(OH)₃ तक घटती जाती है।
* लैंथेनॉइडों को अलग करना मुश्किल हो जाता है।
* रासायनिक अभिक्रियाशीलता: लैंथेनॉइड काफी अभिक्रियाशील होते हैं, विशेषकर Ce।
* उपयोग: मिश्रधातु (मिशधातु, जैसे मिशमेटल), उत्प्रेरक, लेजर, फॉस्फोरस।

B. ऐक्टिनॉइड (5f-ब्लॉक):
* परमाणु क्रमांक 90 (थोरियम, Th) से 103 (लॉरेन्सियम, Lr) तक के 14 तत्त्व। ये ऐक्टिनियम (Ac, Z=89) के बाद आते हैं।
* सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Rn] 5f¹⁻¹⁴ 6d⁰⁻¹ 7s²
* ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: लैंथेनॉइड की तुलना में अधिक परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं (उदाहरण: +3, +4, +5, +6, +7)। +3 ऑक्सीकरण अवस्था सबसे सामान्य है।
* ऐक्टिनॉइड संकुचन: लैंथेनॉइड संकुचन की तुलना में ऐक्टिनॉइड संकुचन अधिक प्रभावी होता है क्योंकि 5f इलेक्ट्रॉन 4f इलेक्ट्रॉनों की तुलना में और भी दुर्बल परिरक्षण प्रभाव दिखाते हैं।
* रासायनिक अभिक्रियाशीलता: लैंथेनॉइड की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।
* रेडियोधर्मिता: सभी ऐक्टिनॉइड रेडियोधर्मी होते हैं। यूरेनियम के बाद के तत्वों को परा-यूरेनियम तत्व कहते हैं और ये सभी मानव निर्मित होते हैं।
* उपयोग: नाभिकीय ऊर्जा, नाभिकीय हथियार, रेडियोधर्मी ट्रेसर।

C. लैंथेनॉइड और ऐक्टिनॉइड में अंतर:

गुणधर्म लैंथेनॉइड ऐक्टिनॉइड
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4f कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं। 5f कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं।
ऑक्सीकरण अवस्थाएँ मुख्य रूप से +3; कभी-कभी +2, +4। मुख्य रूप से +3; अधिक परिवर्तनशील (+4, +5, +6, +7)।
संकुचन लैंथेनॉइड संकुचन (कम प्रभावी)। ऐक्टिनॉइड संकुचन (अधिक प्रभावी)।
रेडियोधर्मिता प्रोमेथियम (Pm) को छोड़कर अधिकांश गैर-रेडियोधर्मी। सभी रेडियोधर्मी।
चुंबकीय गुण अयुग्मित 4f इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय। अयुग्मित 5f इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय।
संकुल निर्माण संकुल बनाने की प्रवृत्ति कम। संकुल बनाने की प्रवृत्ति अधिक।
प्रकृति कम अभिक्रियाशील। अधिक अभिक्रियाशील।

यह विस्तृत नोट्स आपको इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता करेगा।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. निम्नलिखित में से कौन सा तत्व संक्रमण तत्व नहीं है?
    (a) Fe
    (b) Cr
    (c) Zn
    (d) Mn

  2. लैंथेनॉइड संकुचन का मुख्य कारण क्या है?
    (a) 5d इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव
    (b) 4f इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव
    (c) उच्च आयनन एन्थैल्पी
    (d) उच्च इलेक्ट्रॉन बंधुता

  3. K₂Cr₂O₇ में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
    (a) +3
    (b) +4
    (c) +6
    (d) +7

  4. निम्नलिखित में से कौन सा आयन रंगीन नहीं होगा? (परमाणु क्रमांक: Sc=21, Ti=22, V=23, Cr=24, Mn=25, Fe=26, Co=27, Ni=28, Cu=29, Zn=30)
    (a) Ti³⁺
    (b) V³⁺
    (c) Sc³⁺
    (d) Co²⁺

  5. पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) अम्लीय माध्यम में किस रूप में कार्य करता है?
    (a) अपचायक
    (b) ऑक्सीकारक
    (c) अम्ल
    (d) क्षार

  6. संक्रमण तत्त्वों के उत्प्रेरकीय गुणधर्मों का मुख्य कारण क्या है?
    (a) उच्च घनत्व
    (b) परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ और बड़ा पृष्ठीय क्षेत्रफल
    (c) उच्च गलनांक
    (d) रंगीन यौगिक बनाने की प्रवृत्ति

  7. लैंथेनॉइड की सबसे सामान्य और स्थिर ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
    (a) +2
    (b) +3
    (c) +4
    (d) +5

  8. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म लैंथेनॉइड संकुचन के कारण लगभग समान परमाण्विक त्रिज्या दर्शाता है?
    (a) Ti और Zr
    (b) Zr और Hf
    (c) V और Nb
    (d) Cr और Mo

  9. किस आयन का चुंबकीय आघूर्ण अधिकतम होगा? (अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर)
    (a) Mn²⁺ (d⁵)
    (b) Fe²⁺ (d⁶)
    (c) Cr³⁺ (d³)
    (d) Ti³⁺ (d¹)

  10. ऐक्टिनॉइड लैंथेनॉइड की तुलना में अधिक परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दर्शाते हैं?
    (a) 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाओं में अधिक अंतर
    (b) 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाओं में कम अंतर
    (c) ऐक्टिनॉइड संकुचन की अनुपस्थिति
    (d) उनकी रेडियोधर्मी प्रकृति के कारण


उत्तरमाला:

  1. (c)
  2. (b)
  3. (c)
  4. (c)
  5. (b)
  6. (b)
  7. (b)
  8. (b)
  9. (a)
  10. (b)

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