Class 12 Chemistry Notes Chapter 9 (Chapter 9) – Examplar Problems (Hindi) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम रसायन विज्ञान के अध्याय 9, 'उपसहसंयोजक यौगिक' (Coordination Compounds) का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं, सिद्धांतों और अनुप्रयोगों को विस्तार से समझेंगे।
अध्याय 9: उपसहसंयोजक यौगिक (Coordination Compounds)
1. परिचय (Introduction)
उपसहसंयोजक यौगिक वे यौगिक होते हैं जिनमें एक केंद्रीय धातु परमाणु या आयन (अक्सर संक्रमण धातु) लिगेंड नामक आयनों या अणुओं के साथ उपसहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़ा होता है। ये यौगिक विलयन में अपनी पहचान बनाए रखते हैं।
- द्विक लवण (Double Salts) बनाम उपसहसंयोजक यौगिक (Coordination Compounds):
- द्विक लवण: ठोस अवस्था में स्थिर होते हैं, लेकिन विलयन में अपने घटक आयनों में पूरी तरह से वियोजित हो जाते हैं और अपने सभी आयनों के परीक्षण देते हैं।
- उदाहरण: कार्नेलाइट (KCl.MgCl₂.6H₂O), मोहर लवण (FeSO₄.(NH₄)₂SO₄.6H₂O)।
- उपसहसंयोजक यौगिक: ठोस और विलयन दोनों अवस्थाओं में अपनी पहचान बनाए रखते हैं। ये विलयन में अपने घटक आयनों में पूरी तरह से वियोजित नहीं होते हैं और कुछ आयनों के परीक्षण नहीं देते हैं।
- उदाहरण: [Fe(CN)₆]⁴⁻, [Cu(NH₃)₄]²⁺।
- द्विक लवण: ठोस अवस्था में स्थिर होते हैं, लेकिन विलयन में अपने घटक आयनों में पूरी तरह से वियोजित हो जाते हैं और अपने सभी आयनों के परीक्षण देते हैं।
2. महत्वपूर्ण पद (Important Terms)
- केंद्रीय धातु परमाणु/आयन (Central Metal Atom/Ion): यह एक लुईस अम्ल होता है जो लिगेंड से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है। यह आमतौर पर एक संक्रमण धातु होती है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₆]³⁺ में Co³⁺।
- लिगेंड (Ligands): ये आयन या अणु होते हैं जो केंद्रीय धातु परमाणु/आयन को इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं। ये लुईस क्षार के रूप में कार्य करते हैं।
- दंतुकता (Denticity): एक लिगेंड द्वारा केंद्रीय धातु परमाणु/आयन के साथ बनाए गए उपसहसंयोजक बंधों की संख्या।
- एकदंतुक लिगेंड (Monodentate): एक दाता परमाणु (उदा. H₂O, NH₃, Cl⁻, CN⁻)।
- द्विदंतुक लिगेंड (Bidentate): दो दाता परमाणु (उदा. एथिलीनडाइऐमीन (en), ऑक्सैलेटो (ox²⁻))।
- बहुदंतुक लिगेंड (Polydentate): दो से अधिक दाता परमाणु (उदा. EDTA⁴⁻ - षट्दंतुक)।
- कीलेट लिगेंड (Chelating Ligands): जब एक द्विदंतुक या बहुदंतुक लिगेंड दो या दो से अधिक दाता परमाणुओं के माध्यम से एक ही धातु आयन से बंधता है, तो एक वलय जैसी संरचना बनती है जिसे कीलेट वलय कहते हैं। ऐसे लिगेंड कीलेट लिगेंड कहलाते हैं, और इस प्रक्रिया को कीलेटन कहते हैं। कीलेट संकुल एकदंतुक लिगेंड वाले संकुलों की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं।
- उभयदंतुक लिगेंड (Ambidentate Ligands): वे लिगेंड जिनमें दो भिन्न दाता परमाणु होते हैं, लेकिन एक समय में केवल एक ही धातु से बंध बनाता है।
- उदाहरण: NO₂⁻ (N या O से बंध बना सकता है), SCN⁻ (S या N से बंध बना सकता है)।
- दंतुकता (Denticity): एक लिगेंड द्वारा केंद्रीय धातु परमाणु/आयन के साथ बनाए गए उपसहसंयोजक बंधों की संख्या।
- उपसहसंयोजन संख्या (Coordination Number - CN): केंद्रीय धातु परमाणु/आयन के साथ सीधे जुड़े हुए लिगेंड के दाता परमाणुओं की कुल संख्या।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₆]³⁺ में CN = 6, [Ag(CN)₂]⁻ में CN = 2।
- उपसहसंयोजन मंडल (Coordination Entity/Sphere): केंद्रीय धातु परमाणु/आयन और उससे सीधे जुड़े लिगेंड को एक बड़े कोष्ठक [ ] के भीतर लिखा जाता है। यह एक एकल इकाई के रूप में कार्य करता है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₆]³⁺।
- उपसहसंयोजन बहुफलक (Coordination Polyhedron): केंद्रीय धातु परमाणु/आयन के चारों ओर लिगेंड के दाता परमाणुओं की त्रिविम व्यवस्था। सामान्य ज्यामितियाँ अष्टफलकीय, चतुष्फलकीय और वर्ग समतलीय हैं।
- आवेश (Charge): उपसहसंयोजन मंडल पर कुल आवेश केंद्रीय धातु आयन के आवेश और सभी लिगेंड के आवेशों का योग होता है।
- होमोलैप्टिक और हेटेरोलैप्टिक यौगिक (Homoleptic and Heteroleptic Compounds):
- होमोलैप्टिक: वे संकुल जिनमें केंद्रीय धातु परमाणु/आयन केवल एक प्रकार के लिगेंड से जुड़ा होता है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₆]³⁺।
- हेटेरोलैप्टिक: वे संकुल जिनमें केंद्रीय धातु परमाणु/आयन एक से अधिक प्रकार के लिगेंड से जुड़ा होता है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺।
- होमोलैप्टिक: वे संकुल जिनमें केंद्रीय धातु परमाणु/आयन केवल एक प्रकार के लिगेंड से जुड़ा होता है।
3. उपसहसंयोजक यौगिकों का नामकरण (Nomenclature of Coordination Compounds - IUPAC)
- धनायन का नाम पहले, फिर ऋणायन का नाम: यदि संकुल आयनिक है।
- संकुल आयन के भीतर:
- पहले लिगेंड का नाम (वर्णमाला क्रम में), फिर केंद्रीय धातु आयन का नाम।
- लिगेंड के नाम:
- ऋणात्मक लिगेंड: नाम के अंत में 'o' लगाते हैं (उदा. क्लोराइडो (Cl⁻), साइनो (CN⁻), हाइड्रॉक्सो (OH⁻), ऑक्सैलेटो (ox²⁻))।
- उदासीन लिगेंड: उनके सामान्य नामों का उपयोग किया जाता है (उदा. एथिलीनडाइऐमीन (en), पिरीडीन (py))। कुछ विशेष नाम: एक्वा (H₂O), एम्मीन (NH₃), कार्बोनिल (CO), नाइट्रोसिल (NO)।
- संख्यात्मक उपसर्ग (Numerical Prefixes):
- एकदंतुक लिगेंड की संख्या के लिए: डाइ (di), ट्राइ (tri), टेट्रा (tetra), पेंटा (penta), हेक्सा (hexa)।
- जटिल लिगेंड (जिनके नाम में पहले से ही डाइ, ट्राइ आदि हों) की संख्या के लिए: बिस (bis), ट्रिस (tris), टेट्राकिस (tetrakis)।
- धातु का नाम:
- यदि संकुल धनायनिक या उदासीन है, तो धातु का नाम अपरिवर्तित रहता है।
- यदि संकुल ऋणायनिक है, तो धातु के नाम के अंत में 'एट' (ate) प्रत्यय लगाया जाता है (उदा. फेरेट (Fe), क्यूप्रेट (Cu), अर्जेंटेट (Ag), ऑरेट (Au), कोबाल्टेट (Co), निकलेट (Ni))।
- ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation State): केंद्रीय धातु परमाणु/आयन की ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन अंकों में कोष्ठक में लिखा जाता है।
उदाहरण:
- [Co(NH₃)₆]Cl₃: हेक्साएम्मीनकोबाल्ट(III) क्लोराइड
- K₄[Fe(CN)₆]: पोटैशियम हेक्सासाइनोफेरेट(II)
- [Cr(en)₃]Cl₃: ट्रिस(एथिलीनडाइऐमीन)क्रोमियम(III) क्लोराइड
4. समावयवता (Isomerism)
उपसहसंयोजक यौगिकों में दो या दो से अधिक यौगिकों का अणु सूत्र समान होता है लेकिन उनकी संरचना या त्रिविम व्यवस्था भिन्न होती है।
-
A. संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism):
- आयनन समावयवता (Ionisation Isomerism): संकुल आयन के भीतर और बाहर के आयनों के आदान-प्रदान से उत्पन्न होती है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₅Br]SO₄ (पेंटाएम्मीनब्रोमाइडोकोबाल्ट(III) सल्फेट) और [Co(NH₃)₅SO₄]Br (पेंटाएम्मीनसल्फेटोकोबाल्ट(III) ब्रोमाइड)।
- हाइड्रेट समावयवता (Hydrate Isomerism): जल के अणुओं की संख्या में भिन्नता के कारण होती है, जहाँ जल के अणु लिगेंड के रूप में या क्रिस्टलन जल के रूप में हो सकते हैं।
- उदाहरण: [Cr(H₂O)₆]Cl₃ (बैंगनी), [Cr(H₂O)₅Cl]Cl₂.H₂O (हल्का हरा), [Cr(H₂O)₄Cl₂]Cl.2H₂O (गहरा हरा)।
- बंधन समावयवता (Linkage Isomerism): उभयदंतुक लिगेंड के कारण होती है, जब लिगेंड केंद्रीय धातु परमाणु से भिन्न दाता परमाणु के माध्यम से बंधता है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₅NO₂]Cl₂ (पेंटाएम्मीननाइट्रिटो-N-कोबाल्ट(III) क्लोराइड) और [Co(NH₃)₅ONO]Cl₂ (पेंटाएम्मीननाइट्रिटो-O-कोबाल्ट(III) क्लोराइड)।
- उपसहसंयोजन समावयवता (Coordination Isomerism): यह तब उत्पन्न होती है जब धनायनिक और ऋणायनिक दोनों संकुल होते हैं और लिगेंड का आदान-प्रदान होता है।
- उदाहरण: [Co(NH₃)₆][Cr(CN)₆] और [Cr(NH₃)₆][Co(CN)₆]।
- आयनन समावयवता (Ionisation Isomerism): संकुल आयन के भीतर और बाहर के आयनों के आदान-प्रदान से उत्पन्न होती है।
-
B. त्रिविम समावयवता (Stereoisomerism):
- ज्यामितीय समावयवता (Geometrical Isomerism): लिगेंड की त्रिविम व्यवस्था में भिन्नता के कारण होती है। यह
cis-transसमावयवता के रूप में जानी जाती है।- वर्ग समतलीय संकुल (Square Planar Complexes): MA₂B₂, MA₂BC, MABCD प्रकार के संकुल।
cisसमावयव: समान लिगेंड एक-दूसरे के निकट (90° पर)।transसमावयव: समान लिगेंड एक-दूसरे के विपरीत (180° पर)।- उदाहरण: Pt(NH₃)₂Cl₂ (सिस-प्लैटिन और ट्रांस-प्लैटिन)।
- अष्टफलकीय संकुल (Octahedral Complexes): MA₄B₂, MA₃B₃ प्रकार के संकुल।
- MA₄B₂:
cisऔरtransरूप। - MA₃B₃:
facial(fac) औरmeridional(mer) रूप।
- MA₄B₂:
- वर्ग समतलीय संकुल (Square Planar Complexes): MA₂B₂, MA₂BC, MABCD प्रकार के संकुल।
- प्रकाशिक समावयवता (Optical Isomerism): ये वे समावयव होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं और अध्यारोपित नहीं हो सकते (अर्थात् चिराल होते हैं)। इन्हें एनैन्टिओमर कहते हैं। ये समतल ध्रुवित प्रकाश के तल को विपरीत दिशाओं में घुमाते हैं।
- अष्टफलकीय संकुलों में सामान्यतः पाई जाती है, विशेषकर कीलेट लिगेंड वाले संकुलों में (उदा. [Co(en)₃]³⁺)।
- वर्ग समतलीय संकुलों में सामान्यतः नहीं पाई जाती क्योंकि उनमें सममिति का तल होता है।
- ज्यामितीय समावयवता (Geometrical Isomerism): लिगेंड की त्रिविम व्यवस्था में भिन्नता के कारण होती है। यह
5. आबंध सिद्धांत (Bonding Theories)
-
A. वर्नर का सिद्धांत (Werner's Theory - 1893):
- केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ प्रदर्शित करता है:
- प्राथमिक संयोजकता (Primary Valency): यह धातु की ऑक्सीकरण अवस्था से मेल खाती है और आयनीकरणीय होती है (डॉटेड लाइन से दर्शाते हैं)।
- द्वितीयक संयोजकता (Secondary Valency): यह धातु की उपसहसंयोजन संख्या से मेल खाती है और गैर-आयनीकरणीय होती है (ठोस लाइन से दर्शाते हैं)। यह लिगेंड द्वारा संतुष्ट होती है और धातु आयन के चारों ओर एक निश्चित त्रिविम व्यवस्था को जन्म देती है।
- प्रत्येक धातु की एक निश्चित द्वितीयक संयोजकता होती है।
- केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ प्रदर्शित करता है:
-
B. संयोजकता आबंध सिद्धांत (Valence Bond Theory - VBT):
- यह सिद्धांत पॉलिंग द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
- केंद्रीय धातु परमाणु/आयन लिगेंड से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने के लिए अपने s, p और d कक्षकों का संकरण करता है।
- संकरण के प्रकार के आधार पर संकुल की ज्यामिति और चुंबकीय गुण निर्धारित होते हैं।
- संकरण और ज्यामिति:
- sp³: चतुष्फलकीय
- dsp²: वर्ग समतलीय
- sp³d²: बाह्य कक्षक अष्टफलकीय
- d²sp³: आंतरिक कक्षक अष्टफलकीय
- चुंबकीय गुण:
- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित: प्रतिचुंबकीय (diamagnetic)
- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित: अनुचुंबकीय (paramagnetic)
- आंतरिक कक्षक संकुल (Inner Orbital Complexes): जब धातु के (n-1)d कक्षक संकरण में भाग लेते हैं (उदा. d²sp³)। ये आमतौर पर प्रबल क्षेत्र लिगेंड के साथ बनते हैं।
- बाह्य कक्षक संकुल (Outer Orbital Complexes): जब धातु के nd कक्षक संकरण में भाग लेते हैं (उदा. sp³d²)। ये आमतौर पर दुर्बल क्षेत्र लिगेंड के साथ बनते हैं।
- सीमाएँ (Limitations):
- संक्रमण धातु संकुलों के रंग की व्याख्या नहीं करता।
- लिगेंड की प्रबलता को मात्रात्मक रूप से नहीं समझाता।
- चुंबकीय आघूर्णों की सटीक मात्रात्मक व्याख्या नहीं करता।
- ऊष्मागतिकीय या गतिकीय स्थायित्व की कोई जानकारी नहीं देता।
-
C. क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT):
- यह सिद्धांत धातु-लिगेंड आबंध को विशुद्ध रूप से आयनिक मानता है।
- लिगेंड को बिंदु आवेश (आयनों के लिए) या द्विध्रुव (उदासीन अणुओं के लिए) के रूप में माना जाता है।
- केंद्रीय धातु आयन के d-कक्षकों का ऊर्जा स्तर लिगेंड के विद्युत क्षेत्र के कारण विपाटित (split) हो जाता है।
- d-कक्षक विपाटन (d-orbital splitting):
- अष्टफलकीय क्षेत्र (Octahedral Field): पाँच d-कक्षक दो समूहों में विपाटित होते हैं:
- t₂g (dxy, dyz, dzx) - निम्न ऊर्जा (3/5 Δ₀ या 0.4 Δ₀ नीचे)
- eg (dx²-y², dz²) - उच्च ऊर्जा (2/5 Δ₀ या 0.6 Δ₀ ऊपर)
- Δ₀ (या 10 Dq) क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (Crystal Field Splitting Energy - CFSE) कहलाती है।
- चतुष्फलकीय क्षेत्र (Tetrahedral Field): अष्टफलकीय के विपरीत विपाटन होता है:
- eg (dx²-y², dz²) - निम्न ऊर्जा
- t₂ (dxy, dyz, dzx) - उच्च ऊर्जा
- Δt ≈ (4/9)Δ₀
- वर्ग समतलीय क्षेत्र (Square Planar Field): अष्टफलकीय से अधिक जटिल विपाटन।
- अष्टफलकीय क्षेत्र (Octahedral Field): पाँच d-कक्षक दो समूहों में विपाटित होते हैं:
- स्पेक्ट्रोरसायन श्रेणी (Spectrochemical Series): लिगेंड की एक श्रृंखला जो उनकी क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन क्षमता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित होती है:
I⁻ < Br⁻ < S²⁻ < SCN⁻ < Cl⁻ < NO₃⁻ < F⁻ < OH⁻ < C₂O₄²⁻ < H₂O < NCS⁻ < EDTA⁴⁻ < NH₃ < en < CN⁻ < CO- दुर्बल क्षेत्र लिगेंड (Weak Field Ligands): छोटे विपाटन (Δ₀) का कारण बनते हैं। इलेक्ट्रॉन हुंड के नियम का पालन करते हुए उच्च स्पिन संकुल बनाते हैं (उदा. हैलाइड, H₂O)।
- प्रबल क्षेत्र लिगेंड (Strong Field Ligands): बड़े विपाटन (Δ₀) का कारण बनते हैं। इलेक्ट्रॉन युग्मन करते हैं और निम्न स्पिन संकुल बनाते हैं (उदा. CN⁻, CO, NH₃, en)।
- चुंबकीय गुण और रंग (Magnetic Properties and Color):
- संक्रमण धातु संकुलों का रंग d-d संक्रमणों के कारण होता है, जहाँ इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा वाले t₂g कक्षक से उच्च ऊर्जा वाले eg कक्षक में उत्तेजित होते हैं।
- अवशोषित प्रकाश का रंग पूरक रंग के रूप में दिखाई देता है।
- सीमाएँ (Limitations):
- यह धातु-लिगेंड आबंध को विशुद्ध रूप से आयनिक मानता है, जबकि यह आंशिक रूप से सहसंयोजक भी होता है।
- यह CO और CN⁻ जैसे कुछ लिगेंड की प्रबलता की व्याख्या नहीं करता, जो π-आबंध बनाते हैं।
- यह लिगेंड को बिंदु आवेश मानता है, जो उदासीन लिगेंड के लिए उपयुक्त नहीं है।
6. उपसहसंयोजक यौगिकों का महत्व (Importance of Coordination Compounds)
- जैविक प्रणालियाँ (Biological Systems):
- हीमोग्लोबिन (Hemoglobin): आयरन (Fe²⁺) का संकुल, ऑक्सीजन परिवहन के लिए जिम्मेदार।
- क्लोरोफिल (Chlorophyll): मैग्नीशियम (Mg²⁺) का संकुल, प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक।
- विटामिन B₁₂ (Vitamin B₁₂): कोबाल्ट (Co³⁺) का संकुल, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण।
- विश्लेषणात्मक रसायन (Analytical Chemistry):
- EDTA (एथिलीनडाइऐमीनटेट्राएसीटेट): कठोर जल में Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों के आकलन के लिए उपयोग किया जाता है।
- नेसलेर अभिकर्मक (Nessler's Reagent): अमोनिया के परीक्षण के लिए उपयोग होता है ([HgI₄]²⁻)।
- धातु निष्कर्षण (Metallurgy):
- सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) का निष्कर्षण साइनाइड प्रक्रम (Cyanide Process) द्वारा, जहाँ [Ag(CN)₂]⁻ और [Au(CN)₂]⁻ संकुल बनते हैं।
- निकिल का शुद्धिकरण मॉन्ड प्रक्रम (Mond Process) द्वारा, Ni(CO)₄ संकुल बनता है।
- उत्प्रेरण (Catalysis):
- विल्किंसन उत्प्रेरक (Wilkinson's Catalyst): [RhCl(PPh₃)₃] - एल्कीनों के हाइड्रोजनीकरण में उपयोग होता है।
- जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक (Ziegler-Natta Catalyst) - पॉलिथीन के उत्पादन में।
- औषधि विज्ञान (Medicine):
- सिस-प्लैटिन (Cisplatin): Pt(NH₃)₂Cl₂ - कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी दवा के रूप में उपयोग होता है।
- EDTA का उपयोग लेड विषाक्तता (lead poisoning) के उपचार में कीलेटिंग एजेंट के रूप में किया जाता है।
- विद्युतलेपन (Electroplating): Ag और Au के विद्युतलेपन में उनके संकुलों (उदा. [Ag(CN)₂]⁻) का उपयोग किया जाता है, जिससे चिकनी और समान परत प्राप्त होती है।
- फोटोग्राफी (Photography): सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) को ठीक करने वाले विलयन (सोडियम थायोसल्फेट) में [Ag(S₂O₃)₂]³⁻ संकुल बनता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करें।
1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक द्विक लवण (Double Salt) है?
(a) K₄[Fe(CN)₆]
(b) [Cu(NH₃)₄]SO₄
(c) FeSO₄.(NH₄)₂SO₄.6H₂O
(d) Na₂[Fe(CN)₅NO]
सही उत्तर: (c)
2. [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂ का IUPAC नाम क्या है?
(a) पेंटाएम्मीनक्लोराइडोकोबाल्ट(III) क्लोराइड
(b) पेंटाएम्मीनक्लोरोकोबाल्ट(III) क्लोराइड
(c) क्लोरोपेंटाएम्मीनकोबाल्ट(III) क्लोराइड
(d) पेंटाएम्मीनक्लोराइडोकोबाल्ट(II) क्लोराइड
सही उत्तर: (a)
3. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक ज्यामितीय समावयवता (Geometrical Isomerism) प्रदर्शित करता है?
(a) [Co(NH₃)₅Cl]SO₄
(b) Pt(NH₃)₂Cl₂
(c) [Cr(en)₃]Cl₃
(d) Ni(CO)₄
सही उत्तर: (b)
4. [Fe(CN)₆]³⁻ में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण अवस्था और उपसहसंयोजन संख्या क्रमशः क्या है?
(a) +2, 6
(b) +3, 6
(c) +3, 4
(d) +2, 4
सही उत्तर: (b)
5. निम्नलिखित में से कौन-सा लिगेंड उभयदंतुक (Ambidentate) है?
(a) NH₃
(b) H₂O
(c) CN⁻
(d) en
सही उत्तर: (c)
6. क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (CFT) के अनुसार, अष्टफलकीय संकुल में d-कक्षकों का विपाटन किस प्रकार होता है?
(a) eg (उच्च ऊर्जा), t₂g (निम्न ऊर्जा)
(b) t₂g (उच्च ऊर्जा), eg (निम्न ऊर्जा)
(c) सभी d-कक्षक समान ऊर्जा पर रहते हैं
(d) dxy, dyz, dzx (उच्च ऊर्जा) और dx²-y², dz² (निम्न ऊर्जा)
सही उत्तर: (a)
7. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक कैंसर के उपचार में उपयोग होता है?
(a) विटामिन B₁₂
(b) सिस-प्लैटिन
(c) हीमोग्लोबिन
(d) क्लोरोफिल
सही उत्तर: (b)
8. Ni(CO)₄ में निकिल (Ni) का संकरण और चुंबकीय गुण क्या है? (परमाणु संख्या Ni = 28)
(a) sp³, प्रतिचुंबकीय
(b) dsp², अनुचुंबकीय
(c) sp³d², अनुचुंबकीय
(d) d²sp³, प्रतिचुंबकीय
सही उत्तर: (a) (CO एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है, जो इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करता है, जिससे सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं और संकरण sp³ होता है।)
9. हीमोग्लोबिन में कौन-सा केंद्रीय धातु आयन उपस्थित होता है?
(a) Mg²⁺
(b) Co³⁺
(c) Fe²⁺
(d) Cu²⁺
सही उत्तर: (c)
10. निम्नलिखित लिगेंड में से प्रबल क्षेत्र लिगेंड कौन-सा है?
(a) Cl⁻
(b) H₂O
(c) NH₃
(d) I⁻
सही उत्तर: (c) (स्पेक्ट्रोरसायन श्रेणी के अनुसार NH₃ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है।)
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं।