Class 12 Economics Notes Chapter 4 (आय निर्धारण) – Samashthy Arthshashtra ek Parichay Book

Samashthy Arthshashtra ek Parichay
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम समष्टि अर्थशास्त्र के अध्याय 4 'आय निर्धारण' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक अवधारणा को ध्यानपूर्वक समझें।


अध्याय 4: आय निर्धारण (Income Determination)

यह अध्याय एक अर्थव्यवस्था में आय और रोजगार के संतुलन स्तर के निर्धारण से संबंधित है। यह जॉन मेनार्ड कीन्स के विचारों पर आधारित है, जो बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में संतुलन पूर्ण रोजगार स्तर पर होना आवश्यक नहीं है।

1. समग्र माँग (Aggregate Demand - AD)

समग्र माँग (AD) एक लेखा वर्ष की अवधि में एक अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए की गई कुल नियोजित व्यय को संदर्भित करती है। यह वह कुल व्यय है जिसे लोग और फर्म विभिन्न आय स्तरों पर करने की योजना बनाते हैं।

  • घटक (Components): एक साधारण दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था (परिवार और फर्म) में, समग्र माँग के दो मुख्य घटक होते हैं:
    • उपभोग व्यय (Consumption Expenditure - C): परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर किया गया व्यय।
    • निवेश व्यय (Investment Expenditure - I): फर्मों द्वारा पूँजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन) पर किया गया व्यय।
      अतः, AD = C + I

2. उपभोग फलन (Consumption Function)

उपभोग फलन आय और उपभोग व्यय के बीच के कार्यात्मक संबंध को दर्शाता है। यह बताता है कि आय में परिवर्तन के साथ उपभोग व्यय कैसे बदलता है।

  • समीकरण: C = c₀ + cY
    • C: कुल उपभोग व्यय
    • c₀ (स्वायत्त उपभोग - Autonomous Consumption): यह वह उपभोग है जो आय के शून्य होने पर भी होता है (जैसे जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग)। यह आय से स्वतंत्र होता है।
    • c (सीमांत उपभोग प्रवृत्ति - Marginal Propensity to Consume - MPC): यह आय में एक इकाई परिवर्तन के कारण उपभोग में होने वाले परिवर्तन का अनुपात है। यह 0 और 1 के बीच होता है।
      • MPC = ΔC / ΔY
    • Y: राष्ट्रीय आय
  • औसत उपभोग प्रवृत्ति (Average Propensity to Consume - APC): यह कुल आय का वह अनुपात है जिसे उपभोग पर खर्च किया जाता है।
    • APC = C / Y

3. बचत फलन (Saving Function)

बचत फलन आय और बचत के बीच के कार्यात्मक संबंध को दर्शाता है। यह बताता है कि आय में परिवर्तन के साथ बचत कैसे बदलती है। चूंकि आय (Y) या तो उपभोग (C) की जाती है या बचाई (S) जाती है, इसलिए Y = C + S.

  • समीकरण: S = Y - C
    • C = c₀ + cY को प्रतिस्थापित करने पर:
    • S = Y - (c₀ + cY)
    • S = -c₀ + Y - cY
    • S = -c₀ + (1 - c)Y
    • -c₀: यह ऋणात्मक बचत को दर्शाता है जब आय शून्य होती है (यानी, स्वायत्त उपभोग को पूरा करने के लिए उधार लेना या पिछली बचत का उपयोग करना)।
    • (1 - c) (सीमांत बचत प्रवृत्ति - Marginal Propensity to Save - MPS): यह आय में एक इकाई परिवर्तन के कारण बचत में होने वाले परिवर्तन का अनुपात है।
      • MPS = ΔS / ΔY
  • MPC और MPS के बीच संबंध:
    • हम जानते हैं कि ΔY = ΔC + ΔS
    • दोनों पक्षों को ΔY से भाग देने पर: 1 = ΔC/ΔY + ΔS/ΔY
    • अतः, 1 = MPC + MPS या MPS = 1 - MPC
  • औसत बचत प्रवृत्ति (Average Propensity to Save - APS): यह कुल आय का वह अनुपात है जिसे बचाया जाता है।
    • APS = S / Y
  • APC और APS के बीच संबंध:
    • APC + APS = 1

4. निवेश फलन (Investment Function)

निवेश व्यय (I) वह व्यय है जो फर्मों द्वारा नई पूँजीगत वस्तुओं, जैसे मशीनरी, उपकरण, भवन आदि पर किया जाता है।

  • स्वायत्त निवेश (Autonomous Investment): किनेसियन मॉडल में, निवेश को अक्सर स्वायत्त माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह आय के स्तर से स्वतंत्र होता है। यह ब्याज दर, तकनीकी प्रगति, सरकार की नीतियों आदि जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
    • I = I₀ (जहाँ I₀ एक स्थिर मान है)

5. संतुलन आय का निर्धारण (Determination of Equilibrium Income)

संतुलन आय वह स्तर है जहाँ अर्थव्यवस्था में समग्र माँग (AD) समग्र पूर्ति (AS) के बराबर होती है, या जहाँ नियोजित बचत (S) नियोजित निवेश (I) के बराबर होती है।

अ) समग्र माँग (AD) और समग्र पूर्ति (AS) दृष्टिकोण:

  • समग्र पूर्ति (Aggregate Supply - AS): यह एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन को संदर्भित करती है। किनेसियन मॉडल में, अल्पकाल में, समग्र पूर्ति को राष्ट्रीय आय (Y) के समान माना जाता है, क्योंकि फर्मों द्वारा उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं को आय के रूप में वितरित किया जाता है।
    • AS = Y
  • संतुलन की शर्त: AD = AS
    • या, C + I = Y
  • स्पष्टीकरण:
    • जब AD > AS: अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की माँग उनके उत्पादन से अधिक होती है। इससे अनियोजित स्टॉक में कमी आती है, और फर्मों को भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है। उत्पादन में वृद्धि से आय बढ़ती है, जिससे संतुलन बहाल होता है।
    • जब AD < AS: अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की माँग उनके उत्पादन से कम होती है। इससे अनियोजित स्टॉक में वृद्धि होती है, और फर्मों को भविष्य में उत्पादन कम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। उत्पादन में कमी से आय घटती है, जिससे संतुलन बहाल होता है।
    • संतुलन तब प्राप्त होता है जब नियोजित उत्पादन (AS) नियोजित व्यय (AD) के बराबर होता है।

ब) बचत (S) और निवेश (I) दृष्टिकोण:

  • संतुलन की शर्त: S = I
  • स्पष्टीकरण:
    • हम जानते हैं कि Y = C + S (आय या तो उपभोग की जाती है या बचाई जाती है)
    • और संतुलन पर Y = C + I (समग्र माँग समग्र पूर्ति के बराबर है)
    • दोनों समीकरणों की तुलना करने पर: C + S = C + I
    • अतः, S = I
  • स्पष्टीकरण:
    • जब S > I: परिवार जितना बचाना चाहते हैं, वह फर्मों द्वारा नियोजित निवेश से अधिक है। इसका मतलब है कि लोग उपभोग पर कम खर्च कर रहे हैं, जिससे समग्र माँग (AD) समग्र पूर्ति (AS) से कम हो जाती है। परिणामस्वरूप, स्टॉक जमा हो जाता है, फर्म उत्पादन कम करती हैं, और आय घटती है, जिससे बचत भी घटती है जब तक कि S = I न हो जाए।
    • जब S < I: परिवार जितना बचाना चाहते हैं, वह फर्मों द्वारा नियोजित निवेश से कम है। इसका मतलब है कि लोग उपभोग पर अधिक खर्च कर रहे हैं, जिससे समग्र माँग (AD) समग्र पूर्ति (AS) से अधिक हो जाती है। परिणामस्वरूप, स्टॉक कम हो जाता है, फर्म उत्पादन बढ़ाती हैं, और आय बढ़ती है, जिससे बचत भी बढ़ती है जब तक कि S = I न हो जाए।

6. निवेश गुणक (Investment Multiplier)

निवेश गुणक (k) वह अनुपात है जो निवेश में प्रारंभिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप आय में होने वाले कुल परिवर्तन को दर्शाता है। यह बताता है कि निवेश में एक इकाई वृद्धि से आय में कितनी गुना वृद्धि होगी।

  • सूत्र:
    • k = ΔY / ΔI
    • k = 1 / (1 - MPC)
    • k = 1 / MPS
  • कार्यप्रणाली: जब अर्थव्यवस्था में निवेश में वृद्धि होती है, तो यह केवल प्रारंभिक निवेश के बराबर आय में वृद्धि नहीं करती है, बल्कि एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू करती है। निवेश से प्राप्त आय का एक हिस्सा उपभोग पर खर्च किया जाता है (MPC के अनुसार), जो दूसरे व्यक्ति की आय बन जाता है। वह व्यक्ति भी अपनी आय का एक हिस्सा उपभोग पर खर्च करता है, और यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि आय में कुल वृद्धि प्रारंभिक निवेश के गुणक के बराबर न हो जाए।
  • उदाहरण: यदि MPC = 0.8, तो k = 1 / (1 - 0.8) = 1 / 0.2 = 5. इसका मतलब है कि निवेश में ₹1 की वृद्धि से आय में ₹5 की वृद्धि होगी।
  • गुणक का महत्व: यह बताता है कि सरकार या निजी क्षेत्र द्वारा किया गया एक छोटा सा निवेश अर्थव्यवस्था में आय और रोजगार के स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

7. पूर्ण रोजगार संतुलन और अल्प रोजगार संतुलन (Full Employment Equilibrium and Underemployment Equilibrium)

  • पूर्ण रोजगार (Full Employment): यह वह स्थिति है जहाँ अर्थव्यवस्था में सभी उपलब्ध संसाधन (विशेषकर श्रम) का पूरी तरह से उपयोग किया जा रहा है और अनैच्छिक बेरोजगारी शून्य है।
  • अनैच्छिक बेरोजगारी (Involuntary Unemployment): यह तब होती है जब लोग प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने को तैयार होते हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल पाता।
  • किनेसियन मॉडल की विशेषता: कीन्स ने तर्क दिया कि एक अर्थव्यवस्था संतुलन में हो सकती है, लेकिन यह संतुलन पूर्ण रोजगार स्तर पर होना आवश्यक नहीं है। इसे अल्प रोजगार संतुलन (Underemployment Equilibrium) कहा जाता है, जहाँ अर्थव्यवस्था में अभी भी अनैच्छिक बेरोजगारी मौजूद है, लेकिन समग्र माँग समग्र पूर्ति के बराबर है। इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था अपनी पूरी क्षमता से कम पर काम कर रही है।

8. अधिशेष माँग (Excess Demand) और अभाव माँग (Deficient Demand)

ये दोनों स्थितियाँ पूर्ण रोजगार संतुलन के संदर्भ में समग्र माँग और समग्र पूर्ति के बीच असंतुलन को दर्शाती हैं।

  • अधिशेष माँग (Excess Demand): यह वह स्थिति है जहाँ पूर्ण रोजगार स्तर पर समग्र माँग, समग्र पूर्ति से अधिक होती है।
    • कारण: सरकारी व्यय में वृद्धि, निवेश में वृद्धि, उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि, निर्यात में वृद्धि, करों में कमी।
    • प्रभाव: उत्पादन में वृद्धि संभव नहीं होती (क्योंकि पूर्ण रोजगार है), इसलिए कीमतें बढ़ती हैं (मुद्रास्फीति), मजदूरी बढ़ती है, और आय का वास्तविक मूल्य घटता है।
  • अभाव माँग (Deficient Demand): यह वह स्थिति है जहाँ पूर्ण रोजगार स्तर पर समग्र माँग, समग्र पूर्ति से कम होती है।
    • कारण: सरकारी व्यय में कमी, निवेश में कमी, उपभोग प्रवृत्ति में कमी, निर्यात में कमी, करों में वृद्धि।
    • प्रभाव: उत्पादन में कमी आती है, कीमतें घटती हैं (अवस्फीति), बेरोजगारी बढ़ती है, और आय घटती है।
  • सुधार के उपाय (संक्षिप्त उल्लेख):
    • राजकोषीय नीति (Fiscal Policy): सरकारी व्यय में परिवर्तन (वृद्धि/कमी) और करों में परिवर्तन (वृद्धि/कमी)।
    • मौद्रिक नीति (Monetary Policy): बैंक दर, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR), वैधानिक तरलता अनुपात (SLR), खुले बाजार की क्रियाओं के माध्यम से मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

  1. एक दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में, समग्र माँग (AD) के घटक क्या हैं?
    a) C + I + G
    b) C + I
    c) C + I + G + (X - M)
    d) C + S
    उत्तर: b) C + I

  2. यदि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) 0.75 है, तो सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) क्या होगी?
    a) 0.25
    b) 0.75
    c) 1
    d) 0
    उत्तर: a) 0.25 (क्योंकि MPS = 1 - MPC)

  3. निवेश गुणक (k) का सूत्र क्या है?
    a) 1 / MPC
    b) 1 / (1 + MPC)
    c) 1 / (1 - MPC)
    d) 1 / MPS
    उत्तर: c) 1 / (1 - MPC) या d) 1 / MPS (दोनों सही हैं, विकल्प में एक ही चुनना हो तो जो पहले दिया हो या अधिक सामान्य हो)

  4. संतुलन आय का निर्धारण किस स्थिति में होता है?
    a) AD > AS
    b) AD < AS
    c) AD = AS
    d) C = S
    उत्तर: c) AD = AS

  5. यदि अर्थव्यवस्था में AD > AS है, तो इसका क्या परिणाम होगा?
    a) स्टॉक में वृद्धि होगी और उत्पादन कम होगा।
    b) स्टॉक में कमी होगी और उत्पादन बढ़ेगा।
    c) कीमतें घटेंगी।
    d) बेरोजगारी बढ़ेगी।
    उत्तर: b) स्टॉक में कमी होगी और उत्पादन बढ़ेगा।

  6. स्वायत्त उपभोग क्या है?
    a) आय के साथ बदलने वाला उपभोग।
    b) आय के शून्य होने पर भी होने वाला उपभोग।
    c) निवेश पर निर्भर उपभोग।
    d) बचत पर निर्भर उपभोग।
    उत्तर: b) आय के शून्य होने पर भी होने वाला उपभोग।

  7. यदि MPC = 0.5 है, तो निवेश गुणक का मान क्या होगा?
    a) 1
    b) 2
    c) 0.5
    d) 5
    उत्तर: b) 2 (k = 1 / (1 - 0.5) = 1 / 0.5 = 2)

  8. किनेसियन मॉडल में, अल्प रोजगार संतुलन का क्या अर्थ है?
    a) अर्थव्यवस्था पूर्ण रोजगार पर है।
    b) अर्थव्यवस्था संतुलन में है लेकिन अनैच्छिक बेरोजगारी मौजूद है।
    c) अर्थव्यवस्था में कोई संतुलन नहीं है।
    d) केवल पूर्ण रोजगार पर ही संतुलन संभव है।
    उत्तर: b) अर्थव्यवस्था संतुलन में है लेकिन अनैच्छिक बेरोजगारी मौजूद है।

  9. अधिशेष माँग की स्थिति में, अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    a) उत्पादन में कमी
    b) बेरोजगारी में वृद्धि
    c) मुद्रास्फीति का दबाव
    d) कीमतों में कमी
    उत्तर: c) मुद्रास्फीति का दबाव

  10. बचत-निवेश दृष्टिकोण के अनुसार, संतुलन की शर्त क्या है?
    a) C = I
    b) S = I
    c) S = C
    d) Y = I
    उत्तर: b) S = I


मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'आय निर्धारण' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं।

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