Class 12 Economics Notes Chapter 5 (सरकारः कार्य और विषय-क्षेत्र) – Samashthy Arthshashtra ek Parichay Book

Samashthy Arthshashtra ek Parichay
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम समष्टि अर्थशास्त्र की पुस्तक 'समष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय' के अध्याय 5 'सरकार: कार्य और विषय-क्षेत्र' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम सरकार की भूमिका, उसके बजट और विभिन्न राजकोषीय अवधारणाओं को गहराई से समझेंगे।


अध्याय 5: सरकार: कार्य और विषय-क्षेत्र

1. परिचय: सरकार की भूमिका
एक आधुनिक अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण को अधिकतम करना है। इसके लिए सरकार विभिन्न नीतियां बनाती है, जिनमें राजकोषीय नीति (सरकारी व्यय और राजस्व से संबंधित) प्रमुख है।

2. सरकारी बजट (Government Budget)
सरकारी बजट एक वार्षिक वित्तीय विवरण है जिसमें सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (आय) और अनुमानित व्यय का विवरण होता है, जो आगामी वित्तीय वर्ष (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए होता है।

2.1. बजट के उद्देश्य:
सरकार बजट के माध्यम से निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करती है:

  • संसाधनों का पुनर्वितरण (Reallocation of Resources): सरकार करों और सब्सिडी के माध्यम से संसाधनों के आवंटन को प्रभावित करती है।
    • उदाहरण: हानिकारक वस्तुओं (जैसे शराब, सिगरेट) पर उच्च कर लगाकर उनके उत्पादन को हतोत्साहित करना। आवश्यक वस्तुओं (जैसे खादी) पर सब्सिडी देकर उनके उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
  • आय और धन का पुनर्वितरण (Redistribution of Income and Wealth): सरकार आय असमानता को कम करने के लिए प्रगतिशील कराधान (अमीरों पर अधिक कर) और सार्वजनिक व्यय (गरीबों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सब्सिडी) का उपयोग करती है।
    • उदाहरण: आयकर की उच्च दरें, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), वृद्धावस्था पेंशन।
  • आर्थिक स्थिरता (Economic Stability): सरकार अर्थव्यवस्था को मंदी और मुद्रास्फीति के चक्रों से बचाने के लिए राजकोषीय नीति का उपयोग करती है।
    • मंदी के दौरान: सरकारी व्यय बढ़ाना और करों को कम करना ताकि कुल मांग बढ़े।
    • मुद्रास्फीति के दौरान: सरकारी व्यय कम करना और करों को बढ़ाना ताकि कुल मांग कम हो।
  • आर्थिक वृद्धि (Economic Growth): सरकार सार्वजनिक निवेश (बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य) को बढ़ावा देकर और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनाकर आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देती है।
    • उदाहरण: सड़कों, रेलवे, बिजली संयंत्रों का निर्माण, कर प्रोत्साहन।
  • सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन (Management of Public Enterprises): सरकार उन क्षेत्रों में सार्वजनिक उद्यम स्थापित करती है जहाँ निजी क्षेत्र निवेश करने में अनिच्छुक होता है (जैसे रेलवे, रक्षा) या जहाँ सामाजिक कल्याण प्राथमिकता होती है।

3. बजट के घटक (Components of Budget)
सरकारी बजट के मुख्य रूप से दो घटक होते हैं:

  1. राजस्व बजट (Revenue Budget)
  2. पूंजी बजट (Capital Budget)

3.1. राजस्व बजट (Revenue Budget):
इसमें सरकार की राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय शामिल होते हैं। ये वे मदें हैं जो सरकार की संपत्ति या देनदारियों में कोई बदलाव नहीं करती हैं।

  • राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts): ये वे प्राप्तियाँ हैं जो न तो सरकार के लिए कोई देनदारी उत्पन्न करती हैं और न ही उसकी परिसंपत्तियों को कम करती हैं।

    • कर राजस्व (Tax Revenue):
      • प्रत्यक्ष कर (Direct Tax): ये कर सीधे व्यक्तियों और कंपनियों पर लगाए जाते हैं और इनका भार दूसरों पर टाला नहीं जा सकता। (उदाहरण: आयकर, निगम कर, संपत्ति कर, विरासत कर)।
      • अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax): ये कर वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं और इनका भार दूसरों पर टाला जा सकता है। (उदाहरण: वस्तु एवं सेवा कर (GST), सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क)।
    • गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue): ये करों के अलावा सरकार की अन्य प्राप्तियाँ हैं। (उदाहरण: ब्याज प्राप्तियाँ, लाभांश और लाभ, फीस, जुर्माना, लाइसेंस शुल्क, सरकार द्वारा प्रदान की गई सेवाओं से प्राप्तियाँ)।
  • राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): यह वह व्यय है जो न तो सरकार के लिए कोई परिसंपत्ति बनाता है और न ही उसकी देनदारियों को कम करता है। यह सामान्य सरकारी कार्यों और सेवाओं के लिए होता है।

    • उदाहरण: सरकारी कर्मचारियों का वेतन और पेंशन, ब्याज भुगतान, विभिन्न योजनाओं पर सब्सिडी, कानून और व्यवस्था पर खर्च, रक्षा सेवाओं पर सामान्य खर्च।

3.2. पूंजी बजट (Capital Budget):
इसमें सरकार की पूंजी प्राप्तियाँ और पूंजी व्यय शामिल होते हैं। ये वे मदें हैं जो सरकार की संपत्ति या देनदारियों में बदलाव लाती हैं।

  • पूंजी प्राप्तियाँ (Capital Receipts): ये वे प्राप्तियाँ हैं जो या तो सरकार के लिए देनदारी उत्पन्न करती हैं या उसकी परिसंपत्तियों को कम करती हैं।

    • उदाहरण:
      • ऋणों की वसूली (Recovery of Loans): राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए ऋणों की वसूली।
      • उधार और अन्य देयताएँ (Borrowings and Other Liabilities): घरेलू बाजार से (जैसे ट्रेजरी बिल, सरकारी बांड), भारतीय रिजर्व बैंक से, या विदेशी सरकारों/अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से उधार।
      • विनिवेश (Disinvestment): सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में सरकारी शेयरों की बिक्री।
      • लघु बचतें (Small Savings): पोस्ट ऑफिस बचत, राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र आदि।
  • पूंजी व्यय (Capital Expenditure): यह वह व्यय है जो सरकार के लिए परिसंपत्तियों का निर्माण करता है या उसकी देनदारियों को कम करता है।

    • उदाहरण:
      • सड़कें, पुल, रेलवे, भवन, मशीनरी आदि जैसी परिसंपत्तियों का निर्माण।
      • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए ऋण और अग्रिम।
      • विदेशी सरकारों को दिए गए ऋण।
      • पुराने ऋणों का पुनर्भुगतान।
      • शेयरों में निवेश।

4. बजट घाटे के माप (Measures of Budget Deficit)
घाटा तब होता है जब सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों से अधिक हो जाता है। विभिन्न प्रकार के घाटे अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिति के बारे में अलग-अलग जानकारी देते हैं।

4.1. राजस्व घाटा (Revenue Deficit):

  • परिभाषा: यह सरकार के कुल राजस्व व्यय का उसकी कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक्य है।
  • सूत्र: राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
  • निहितार्थ:
    • यह दर्शाता है कि सरकार अपने दिन-प्रतिदिन के सामान्य कार्यों को पूरा करने के लिए भी उधार ले रही है।
    • यह भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ डालता है क्योंकि सरकार उपभोग व्यय के लिए उधार ले रही है।
    • यह सरकार की बचत में कमी और भविष्य में परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए कम धन की उपलब्धता को दर्शाता है।

4.2. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit):

  • परिभाषा: यह सरकार के कुल व्यय (राजस्व + पूंजी) का उसकी कुल प्राप्तियों (राजस्व + पूंजी, उधार को छोड़कर) से अधिक्य है। यह सरकार की कुल उधार आवश्यकताओं को दर्शाता है।
  • सूत्र: राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियाँ + पूंजी प्राप्तियाँ उधार को छोड़कर)
    • वैकल्पिक सूत्र: राजकोषीय घाटा = सरकार की कुल उधार आवश्यकताएँ
  • निहितार्थ:
    • यह सरकार की उधार लेने की आवश्यकता का सबसे व्यापक माप है।
    • मुद्रास्फीति का दबाव: यदि सरकार अपने घाटे को भारतीय रिजर्व बैंक से उधार लेकर (मुद्रा छापकर) वित्तपोषित करती है, तो इससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है और मुद्रास्फीति का दबाव उत्पन्न हो सकता है।
    • ऋण जाल (Debt Trap): उच्च राजकोषीय घाटा भविष्य में ब्याज भुगतान के बोझ को बढ़ाता है, जिससे सरकार को और अधिक उधार लेना पड़ सकता है, जिससे एक ऋण जाल बन सकता है।
    • निजी निवेश पर प्रभाव (Crowding Out): यदि सरकार घरेलू बाजार से बड़ी मात्रा में उधार लेती है, तो निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता कम हो सकती है और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे निजी निवेश हतोत्साहित होता है।
    • विदेशी निर्भरता: यदि सरकार विदेशी स्रोतों से उधार लेती है, तो यह देश की विदेशी निर्भरता को बढ़ाता है।

4.3. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit):

  • परिभाषा: यह राजकोषीय घाटे और ब्याज भुगतान के बीच का अंतर है। यह वर्तमान वर्ष के व्यय और प्राप्तियों के बीच के अंतर को दर्शाता है, जिसमें पिछले उधारों पर ब्याज भुगतान शामिल नहीं होता है।
  • सूत्र: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
  • निहितार्थ:
    • यह इंगित करता है कि सरकार को ब्याज भुगतान को छोड़कर, वर्तमान वर्ष के खर्चों को पूरा करने के लिए कितनी उधार लेने की आवश्यकता है।
    • यदि प्राथमिक घाटा शून्य है, तो इसका मतलब है कि सरकार ब्याज भुगतान को छोड़कर, अपने वर्तमान खर्चों को अपनी प्राप्तियों से पूरा कर पा रही है।

5. घाटे का वित्तपोषण (Financing of Deficits):
सरकार अपने घाटे को मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से वित्तपोषित करती है:

  • घरेलू उधार: जनता से (ट्रेजरी बिल, बांड जारी करके)।
  • विदेशी उधार: विदेशी सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF, विश्व बैंक) से।
  • भारतीय रिजर्व बैंक से उधार (Deficit Financing): RBI से उधार लेना, जिससे नई मुद्रा छपती है। इसे 'घाटे का मुद्रीकरण' भी कहते हैं।

6. राजकोषीय नीति (Fiscal Policy):
यह सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए अपने व्यय और राजस्व (कराधान) नीतियों का उपयोग है। इसका उद्देश्य आर्थिक स्थिरता, वृद्धि और आय का पुनर्वितरण प्राप्त करना होता है।

  • विस्तारवादी राजकोषीय नीति (Expansionary Fiscal Policy): मंदी के दौरान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकारी व्यय बढ़ाना और/या करों को कम करना।
  • संकुचनकारी राजकोषीय नीति (Contractionary Fiscal Policy): मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सरकारी व्यय कम करना और/या करों को बढ़ाना।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकारी बजट का उद्देश्य नहीं है?
    a) संसाधनों का पुनर्वितरण
    b) आय और धन का पुनर्वितरण
    c) आर्थिक स्थिरता
    d) निजी क्षेत्र के लाभ को अधिकतम करना

  2. सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अपने शेयरों की बिक्री से प्राप्त आय को क्या कहा जाता है?
    a) राजस्व प्राप्तियाँ
    b) पूंजी प्राप्तियाँ
    c) गैर-कर राजस्व
    d) राजस्व व्यय

  3. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यक्ष कर का उदाहरण है?
    a) वस्तु एवं सेवा कर (GST)
    b) सीमा शुल्क
    c) आयकर
    d) उत्पाद शुल्क

  4. राजस्व घाटा क्या दर्शाता है?
    a) सरकार की कुल उधार आवश्यकताएँ
    b) सरकार अपने दिन-प्रतिदिन के खर्चों को पूरा करने के लिए उधार ले रही है
    c) सरकार की परिसंपत्तियों में वृद्धि
    d) सरकार की देनदारियों में कमी

  5. राजकोषीय घाटा किसके बराबर होता है?
    a) राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
    b) कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियाँ + पूंजी प्राप्तियाँ उधार को छोड़कर)
    c) राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
    d) कुल प्राप्तियाँ - कुल व्यय

  6. यदि प्राथमिक घाटा शून्य है, तो इसका अर्थ है कि:
    a) राजकोषीय घाटा भी शून्य है।
    b) सरकार का ब्याज भुगतान शून्य है।
    c) राजकोषीय घाटा ब्याज भुगतान के बराबर है।
    d) सरकार को वर्तमान खर्चों के लिए उधार लेने की आवश्यकता नहीं है।

  7. निम्नलिखित में से कौन-सा पूंजी व्यय का उदाहरण है?
    a) सरकारी कर्मचारियों का वेतन
    b) सब्सिडी का भुगतान
    c) सड़कों और पुलों का निर्माण
    d) ब्याज का भुगतान

  8. सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से उधार लेकर घाटे का वित्तपोषण करने से क्या परिणाम हो सकता है?
    a) मुद्रास्फीति का दबाव
    b) ब्याज दरों में कमी
    c) निजी निवेश में वृद्धि
    d) विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि

  9. राजकोषीय नीति का उद्देश्य क्या है?
    a) केवल मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना
    b) केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना
    c) आर्थिक स्थिरता, वृद्धि और आय का पुनर्वितरण प्राप्त करना
    d) केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना

  10. निम्नलिखित में से कौन-सी राजस्व प्राप्तियाँ हैं?
    a) ऋणों की वसूली
    b) विनिवेश से प्राप्तियाँ
    c) आयकर और निगम कर
    d) बाजार से उधार

उत्तरमाला:

  1. d
  2. b
  3. c
  4. b
  5. b
  6. c
  7. c
  8. a
  9. c
  10. c

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। इस अध्याय की अवधारणाओं को अच्छी तरह से समझें और नियमित अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!

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