Class 12 Economics Notes Chapter 6 (खुली अर्थव्यवस्थाः समष्टि अर्थशास्त्र) – Samashthy Arthshashtra ek Parichay Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम समष्टि अर्थशास्त्र के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय, 'खुली अर्थव्यवस्थाः समष्टि अर्थशास्त्र' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए, बल्कि विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें कई अवधारणाएँ हैं जिन्हें ध्यानपूर्वक समझना आवश्यक है।
अध्याय 6: खुली अर्थव्यवस्थाः समष्टि अर्थशास्त्र
1. खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy) का परिचय
एक खुली अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था होती है जो विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक संबंध रखती है। इसके विपरीत, एक बंद अर्थव्यवस्था (Closed Economy) वह होती है जिसका अन्य देशों के साथ कोई आर्थिक संबंध नहीं होता। वास्तविक दुनिया में, सभी अर्थव्यवस्थाएँ खुली होती हैं।
खुली अर्थव्यवस्था में तीन मुख्य आर्थिक संबंध होते हैं:
- वस्तु बाज़ार संबंध (Goods Market Linkages): देश वस्तुओं और सेवाओं का आयात और निर्यात करते हैं।
- वित्तीय बाज़ार संबंध (Financial Market Linkages): देश वित्तीय परिसंपत्तियों (जैसे शेयर, बॉन्ड) का आयात और निर्यात करते हैं।
- श्रम बाज़ार संबंध (Labor Market Linkages): लोग काम करने के लिए एक देश से दूसरे देश में जाते हैं (श्रम का अंतर्राष्ट्रीय आवागमन)।
2. खुली अर्थव्यवस्था में समग्र माँग (Aggregate Demand in Open Economy)
एक बंद अर्थव्यवस्था में समग्र माँग (AD) का सूत्र C + I + G होता है, जहाँ C उपभोग, I निवेश और G सरकारी व्यय है।
एक खुली अर्थव्यवस्था में, इसमें शुद्ध निर्यात (Net Exports) भी जुड़ जाता है।
AD = C + I + G + (X - M)
जहाँ:
- X (निर्यात): घरेलू वस्तुओं और सेवाओं की विदेशी माँग।
- M (आयात): विदेशी वस्तुओं और सेवाओं की घरेलू माँग।
- (X - M) = शुद्ध निर्यात (Net Exports - NX): निर्यात और आयात का अंतर। यदि X > M, तो शुद्ध निर्यात धनात्मक है (व्यापार अधिशेष); यदि X < M, तो शुद्ध निर्यात ऋणात्मक है (व्यापार घाटा)।
3. भुगतान संतुलन (Balance of Payments - BoP)
भुगतान संतुलन एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान एक देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच सभी आर्थिक लेन-देनों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड होता है। यह दोहरी प्रविष्टि प्रणाली (double-entry system) पर आधारित होता है, जिसका अर्थ है कि हर डेबिट के लिए एक क्रेडिट प्रविष्टि होती है।
भुगतान संतुलन के मुख्य घटक:
A. चालू खाता (Current Account):
चालू खाता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश आय और एकतरफा हस्तांतरण से संबंधित लेन-देन को रिकॉर्ड करता है।
- वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods): इसे 'दृश्य मदें' (visible items) भी कहते हैं। इसमें सभी भौतिक वस्तुओं का निर्यात और आयात शामिल होता है।
- व्यापार संतुलन (Balance of Trade - BoT): वस्तुओं के निर्यात और आयात का अंतर।
- BoT = वस्तुओं का निर्यात - वस्तुओं का आयात।
- यदि निर्यात > आयात, तो व्यापार अधिशेष (Trade Surplus)।
- यदि निर्यात < आयात, तो व्यापार घाटा (Trade Deficit)।
- व्यापार संतुलन (Balance of Trade - BoT): वस्तुओं के निर्यात और आयात का अंतर।
- सेवाओं का व्यापार (Trade in Services): इसे 'अदृश्य मदें' (invisible items) भी कहते हैं। इसमें बैंकिंग, शिपिंग, बीमा, पर्यटन, सॉफ्टवेयर सेवाएँ आदि शामिल हैं।
- आय (Income): इसमें निवेश से प्राप्त आय (जैसे ब्याज, लाभांश, लाभ) और कर्मचारियों का पारिश्रमिक शामिल होता है।
- एकतरफा हस्तांतरण (Unilateral Transfers): ये वे हस्तांतरण होते हैं जिनके बदले में कोई प्रतिपूर्ति नहीं होती। इसमें उपहार, दान, प्रेषण (remittances) आदि शामिल हैं।
चालू खाता संतुलन (Current Account Balance):
चालू खाते का अधिशेष तब होता है जब चालू खाते पर प्राप्तियाँ भुगतान से अधिक होती हैं। चालू खाते का घाटा तब होता है जब भुगतान प्राप्तियों से अधिक होते हैं।
B. पूँजी खाता (Capital Account):
पूँजी खाता उन सभी लेन-देनों को रिकॉर्ड करता है जो किसी देश की परिसंपत्तियों और देनदारियों की स्थिति को बदलते हैं।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment - FDI): जब कोई विदेशी निवेशक किसी घरेलू कंपनी में स्वामित्व और नियंत्रण प्राप्त करने के इरादे से निवेश करता है (जैसे किसी कंपनी के शेयर खरीदना या नई इकाई स्थापित करना)।
- पोर्टफोलियो निवेश (Portfolio Investment): इसमें विदेशी संस्थागत निवेश (FII) या विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) शामिल है, जहाँ निवेशक वित्तीय परिसंपत्तियों (जैसे शेयर, बॉन्ड) में निवेश करते हैं, लेकिन उन्हें कंपनी का नियंत्रण नहीं मिलता।
- बाह्य उधार (External Borrowings):
- वाणिज्यिक उधार (Commercial Borrowings): बाजार दरों पर विदेशी संस्थाओं से लिए गए ऋण।
- बाह्य सहायता (External Assistance): रियायती दरों पर या अनुदान के रूप में प्राप्त ऋण।
- बैंकिंग पूँजी (Banking Capital): इसमें अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा जमा और वाणिज्यिक बैंकों की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में परिवर्तन शामिल हैं।
पूँजी खाता संतुलन (Capital Account Balance):
पूँजी खाते का अधिशेष तब होता है जब पूँजी का शुद्ध अंतर्प्रवाह (inflow) होता है। पूँजी खाते का घाटा तब होता है जब पूँजी का शुद्ध बहिर्प्रवाह (outflow) होता है।
C. भुगतान संतुलन में संतुलन और असंतुलन (BoP Balance and Imbalance):
- लेखांकन अर्थ में संतुलन: भुगतान संतुलन हमेशा लेखांकन अर्थ में संतुलित रहता है क्योंकि हर क्रेडिट प्रविष्टि के लिए एक डेबिट प्रविष्टि होती है।
- स्वायत्त और समायोजक मदें (Autonomous and Accommodating Items):
- स्वायत्त मदें (Autonomous Items): ये वे लेन-देन होते हैं जो लाभ के उद्देश्य से किए जाते हैं, जैसे निर्यात, आयात, विदेशी निवेश। इन्हें 'रेखा के ऊपर' (above the line) मदें भी कहा जाता है।
- समायोजक मदें (Accommodating Items): ये वे लेन-देन होते हैं जो भुगतान संतुलन के स्वायत्त मदों के कारण होने वाले घाटे या अधिशेष को कवर करने के लिए किए जाते हैं। इन्हें 'रेखा के नीचे' (below the line) मदें भी कहा जाता है। इसमें केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग शामिल है।
- भुगतान संतुलन घाटा (BoP Deficit): जब स्वायत्त प्राप्तियाँ स्वायत्त भुगतानों से कम होती हैं। इसे विदेशी मुद्रा भंडार में कमी या विदेशी उधार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है।
- भुगतान संतुलन अधिशेष (BoP Surplus): जब स्वायत्त प्राप्तियाँ स्वायत्त भुगतानों से अधिक होती हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है।
- आधिकारिक आरक्षित लेनदेन (Official Reserve Transactions): केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार में की गई खरीद या बिक्री। ये समायोजक मदें हैं और भुगतान संतुलन को संतुलित करने में मदद करती हैं।
4. विदेशी विनिमय दर (Foreign Exchange Rate)
विदेशी विनिमय दर वह दर है जिस पर एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा के साथ विनिमय किया जाता है। यह एक मुद्रा की कीमत को दूसरी मुद्रा के संदर्भ में व्यक्त करता है।
A. विनिमय दर प्रणालियाँ (Exchange Rate Systems):
-
स्थिर विनिमय दर प्रणाली (Fixed Exchange Rate System):
- इस प्रणाली में, सरकार या केंद्रीय बैंक विनिमय दर को एक निश्चित स्तर पर निर्धारित करता है और उसे बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करता है।
- सोना मानक (Gold Standard): एक ऐतिहासिक प्रणाली जहाँ प्रत्येक मुद्रा का मूल्य सोने की एक निश्चित मात्रा में परिभाषित किया गया था।
- ब्रेटन वुड्स प्रणाली (Bretton Woods System): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की प्रणाली जहाँ अमेरिकी डॉलर को सोने से जोड़ा गया था, और अन्य मुद्राओं को डॉलर से जोड़ा गया था।
- अवमूल्यन (Devaluation): सरकार द्वारा अपनी मुद्रा के बाहरी मूल्य को जानबूझकर कम करना।
- अधिमूल्यन (Revaluation): सरकार द्वारा अपनी मुद्रा के बाहरी मूल्य को जानबूझकर बढ़ाना।
-
लचीली/प्रवाहमयी विनिमय दर प्रणाली (Flexible/Floating Exchange Rate System):
- इस प्रणाली में, विनिमय दर बाजार की शक्तियों (विदेशी मुद्रा की माँग और आपूर्ति) द्वारा निर्धारित होती है।
- विदेशी मुद्रा की माँग (Demand for Foreign Exchange):
- आयात के लिए भुगतान।
- विदेश यात्रा और पर्यटन।
- विदेशों में निवेश (FDI, पोर्टफोलियो)।
- विदेशों को उपहार/प्रेषण।
- जब विनिमय दर बढ़ती है, तो विदेशी वस्तुएँ सस्ती हो जाती हैं, जिससे आयात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ती है (माँग वक्र ऋणात्मक ढलान वाला होता है)।
- विदेशी मुद्रा की आपूर्ति (Supply of Foreign Exchange):
- निर्यात से प्राप्तियाँ।
- विदेशियों द्वारा घरेलू पर्यटन।
- विदेशियों द्वारा घरेलू निवेश।
- विदेशों से उपहार/प्रेषण।
- जब विनिमय दर बढ़ती है, तो घरेलू वस्तुएँ विदेशियों के लिए सस्ती हो जाती हैं, जिससे निर्यात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा की आपूर्ति बढ़ती है (आपूर्ति वक्र धनात्मक ढलान वाला होता है)।
- विनिमय दर का निर्धारण: माँग और आपूर्ति वक्र के प्रतिच्छेदन बिंदु पर संतुलन विनिमय दर निर्धारित होती है।
- मूल्यह्रास (Depreciation): बाजार की शक्तियों (माँग में वृद्धि या आपूर्ति में कमी) के कारण मुद्रा के बाहरी मूल्य में कमी।
- मूल्यवृद्धि (Appreciation): बाजार की शक्तियों (माँग में कमी या आपूर्ति में वृद्धि) के कारण मुद्रा के बाहरी मूल्य में वृद्धि।
-
प्रबंधित तैरती विनिमय दर प्रणाली (Managed Floating Exchange Rate System):
- यह लचीली और स्थिर विनिमय दर प्रणालियों का मिश्रण है। विनिमय दर मुख्य रूप से बाजार की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है, लेकिन केंद्रीय बैंक (जैसे भारत में RBI) अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है। भारत में यही प्रणाली प्रचलित है। इसे 'डर्टी फ्लोटिंग' (Dirty Floating) भी कहते हैं।
B. वास्तविक विनिमय दर (Real Exchange Rate - RER):
वास्तविक विनिमय दर घरेलू वस्तुओं के सापेक्ष विदेशी वस्तुओं की सापेक्ष कीमत को मापती है। यह दो देशों के बीच वस्तुओं की क्रय शक्ति का अनुपात है।
RER = (नाममात्र विनिमय दर × विदेशी कीमत स्तर) / घरेलू कीमत स्तर
RER = (e × P*) / P
जहाँ e = नाममात्र विनिमय दर, P* = विदेशी कीमत स्तर, P = घरेलू कीमत स्तर।
यदि RER > 1, तो घरेलू वस्तुएँ विदेशियों के लिए महंगी हैं, और विदेशी वस्तुएँ घरेलू लोगों के लिए सस्ती हैं, जिससे निर्यात कम और आयात अधिक हो सकता है।
5. खुली अर्थव्यवस्था में आय का निर्धारण (Income Determination in Open Economy)
खुली अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय का निर्धारण घरेलू और विदेशी दोनों कारकों से प्रभावित होता है। एक महत्वपूर्ण पहचान है जो बचत, निवेश, सरकारी बजट और व्यापार संतुलन को जोड़ती है:
S + T + M = I + G + X
(जहाँ S = बचत, T = कर, M = आयात, I = निवेश, G = सरकारी व्यय, X = निर्यात)
इसे पुनर्व्यवस्थित करने पर:
(S - I) + (T - G) = (X - M)
- (S - I): निजी बचत और निवेश का अंतर।
- (T - G): सरकारी बजट संतुलन (राजकोषीय अधिशेष या घाटा)।
- (X - M): व्यापार संतुलन (शुद्ध निर्यात)।
यह पहचान दर्शाती है कि निजी बचत, सरकारी बचत (T-G) और व्यापार अधिशेष (X-M) के बीच सीधा संबंध है।
- यदि किसी देश में निजी बचत (S) निवेश (I) से अधिक है और सरकार का बजट संतुलित है (T=G), तो देश में व्यापार अधिशेष (X>M) होगा।
- जुड़वाँ घाटे (Twin Deficits): यदि किसी देश में बड़ा राजकोषीय घाटा (T < G) है और निजी बचत निवेश के बराबर है (S=I), तो इससे व्यापार घाटा (X < M) हो सकता है। यह दर्शाता है कि एक देश का सरकारी घाटा अक्सर उसके व्यापार घाटे के साथ जुड़ा होता है।
10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - सरकारी परीक्षा की तैयारी हेतु
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।
-
खुली अर्थव्यवस्था में समग्र माँग का सूत्र क्या है?
a) C + I + G
b) C + I + G + M
c) C + I + G + (X - M)
d) C + I + G - X -
भुगतान संतुलन के चालू खाते में निम्नलिखित में से कौन सी मद शामिल नहीं होती?
a) वस्तुओं का व्यापार
b) सेवाओं का व्यापार
c) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
d) एकतरफा हस्तांतरण -
जब सरकार जानबूझकर अपनी मुद्रा का बाहरी मूल्य कम करती है, तो उसे क्या कहते हैं?
a) मूल्यह्रास (Depreciation)
b) अवमूल्यन (Devaluation)
c) मूल्यवृद्धि (Appreciation)
d) अधिमूल्यन (Revaluation) -
विदेशी मुद्रा की माँग किसके लिए उत्पन्न होती है?
a) निर्यात
b) विदेशियों द्वारा घरेलू निवेश
c) आयात
d) विदेशियों द्वारा घरेलू पर्यटन -
भारत में कौन सी विनिमय दर प्रणाली प्रचलित है?
a) स्थिर विनिमय दर प्रणाली
b) लचीली विनिमय दर प्रणाली
c) प्रबंधित तैरती विनिमय दर प्रणाली
d) सोना मानक प्रणाली -
भुगतान संतुलन के पूँजी खाते में निम्नलिखित में से कौन सी मद शामिल होती है?
a) सॉफ्टवेयर सेवाओं का निर्यात
b) ब्याज भुगतान
c) पोर्टफोलियो निवेश
d) विदेशियों को उपहार -
यदि किसी देश का व्यापार संतुलन घाटे में है, तो इसका अर्थ है:
a) निर्यात > आयात
b) निर्यात < आयात
c) निर्यात = आयात
d) सेवाओं का निर्यात > वस्तुओं का निर्यात -
जब बाजार की शक्तियों (माँग और आपूर्ति) के कारण किसी मुद्रा का मूल्य बढ़ता है, तो उसे क्या कहते हैं?
a) अवमूल्यन (Devaluation)
b) अधिमूल्यन (Revaluation)
c) मूल्यह्रास (Depreciation)
d) मूल्यवृद्धि (Appreciation) -
भुगतान संतुलन में 'स्वायत्त मदें' क्या होती हैं?
a) जो घाटे को कवर करने के लिए की जाती हैं।
b) जो लाभ के उद्देश्य से की जाती हैं।
c) जो केंद्रीय बैंक द्वारा की जाती हैं।
d) जो केवल पूँजी खाते से संबंधित होती हैं। -
जुड़वाँ घाटे की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
a) जब सरकार का बजट अधिशेष होता है और व्यापार अधिशेष होता है।
b) जब सरकार का बजट घाटा होता है और व्यापार घाटा होता है।
c) जब निजी बचत निवेश से अधिक होती है।
d) जब निर्यात आयात से अधिक होता है।
उत्तरमाला (Answer Key):
- c
- c
- b
- c
- c
- c
- b
- d
- b
- b
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह या अतिरिक्त स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!