Class 12 Economics Notes Chapter 6 (प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार) – Vyashthi Arthshashtra Book

Vyashthi Arthshashtra
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्याय 6 'प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय विभिन्न बाज़ार संरचनाओं को समझने और उनके आर्थिक निहितार्थों को जानने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए।


अध्याय 6: प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार

1. परिचय
बाज़ार संरचनाएँ, वे स्थितियाँ हैं जो किसी उद्योग में फर्मों के व्यवहार को निर्धारित करती हैं। पूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार की एक आदर्श स्थिति है जहाँ कोई भी अकेली फर्म बाज़ार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती। प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार वे स्थितियाँ हैं जहाँ फर्मों के पास बाज़ार कीमत को प्रभावित करने की कुछ शक्ति होती है। इस अध्याय में, हम मुख्य रूप से एकाधिकार (Monopoly) और एकाधिकारिक प्रतियोगिता (Monopolistic Competition) का अध्ययन करेंगे, साथ ही अल्पाधिकार (Oligopoly) का संक्षिप्त परिचय भी देखेंगे।

2. एकाधिकार (Monopoly)

2.1. अर्थ एवं परिभाषा
एकाधिकार बाज़ार की वह स्थिति है जहाँ किसी वस्तु या सेवा का केवल एक ही विक्रेता होता है और उस वस्तु का कोई निकट प्रतिस्थापन (close substitute) उपलब्ध नहीं होता। एकाधिकार फर्म उद्योग की एकमात्र फर्म होती है।

2.2. विशेषताएँ

  • एकल विक्रेता: बाज़ार में वस्तु का केवल एक ही उत्पादक या विक्रेता होता है।
  • निकट प्रतिस्थापन का अभाव: एकाधिकार फर्म द्वारा उत्पादित वस्तु का कोई निकट प्रतिस्थापन उपलब्ध नहीं होता, जिससे उपभोक्ता के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं।
  • प्रवेश पर प्रतिबंध: नई फर्मों के उद्योग में प्रवेश पर विभिन्न प्रकार की बाधाएँ होती हैं, जैसे कानूनी, तकनीकी या प्राकृतिक बाधाएँ।
  • कीमत निर्धारक (Price Maker): एकाधिकार फर्म बाज़ार में कीमत निर्धारित करने की शक्ति रखती है, क्योंकि वह उद्योग की एकमात्र आपूर्तिकर्ता होती है।
  • मांग वक्र का ऋणात्मक ढलान: एकाधिकार फर्म का मांग वक्र (जो उद्योग का मांग वक्र भी होता है) नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जिसका अर्थ है कि अधिक मात्रा बेचने के लिए फर्म को कीमत कम करनी होगी।

2.3. एकाधिकार के कारण (Sources of Monopoly)
एकाधिकार के उदय के कई कारण हो सकते हैं:

  • सरकारी लाइसेंस/पेटेंट: सरकार किसी विशिष्ट फर्म को किसी वस्तु का उत्पादन करने का विशेष अधिकार दे सकती है (जैसे पेटेंट, लाइसेंस)।
  • संसाधनों पर नियंत्रण: किसी महत्वपूर्ण कच्चे माल या संसाधन पर किसी एक फर्म का पूर्ण नियंत्रण होना।
  • बड़े पैमाने की मितव्ययिताएँ (प्राकृतिक एकाधिकार): जब किसी वस्तु का उत्पादन इतनी बड़ी मात्रा में होता है कि एक अकेली फर्म ही पूरे बाज़ार की मांग को न्यूनतम औसत लागत पर पूरा कर सकती है, तो इसे प्राकृतिक एकाधिकार कहते हैं (जैसे बिजली वितरण, जल आपूर्ति)।
  • तकनीकी श्रेष्ठता: किसी फर्म के पास विशिष्ट उत्पादन तकनीक या ज्ञान होना जिसका अन्य फर्मों के पास अभाव हो।
  • उच्च प्रवेश लागत: उद्योग में प्रवेश के लिए बहुत अधिक प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होना।

2.4. एकाधिकार में फर्म का संतुलन (लाभ अधिकतमकरण)
एकाधिकार फर्म का मुख्य उद्देश्य लाभ को अधिकतम करना होता है। यह दो शर्तों को पूरा करके प्राप्त किया जाता है:

  • MR = MC: सीमांत आगम (Marginal Revenue) सीमांत लागत (Marginal Cost) के बराबर होनी चाहिए।
  • MC वक्र MR वक्र को नीचे से काटे: MC वक्र MR वक्र को नीचे से काटते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहा हो।

मांग वक्र (AR) और MR वक्र का संबंध:
एकाधिकार में, औसत आगम (AR) वक्र ही मांग वक्र होता है। चूंकि अधिक मात्रा बेचने के लिए कीमत कम करनी पड़ती है, AR वक्र नीचे की ओर ढलान वाला होता है। MR वक्र भी नीचे की ओर ढलान वाला होता है और AR वक्र के नीचे स्थित होता है। MR वक्र की ढलान AR वक्र की ढलान से दोगुनी होती है।

अल्पकाल और दीर्घकाल में लाभ:

  • असामान्य लाभ (Supernormal Profit): यदि संतुलन कीमत औसत लागत (AC) से अधिक है (P > AC), तो फर्म असामान्य लाभ अर्जित करती है।
  • सामान्य लाभ (Normal Profit): यदि संतुलन कीमत औसत लागत के बराबर है (P = AC), तो फर्म सामान्य लाभ अर्जित करती है।
  • हानि (Loss): यदि संतुलन कीमत औसत परिवर्तनीय लागत (AVC) से अधिक है लेकिन औसत लागत (AC) से कम है (AVC < P < AC), तो फर्म हानि उठाती है लेकिन उत्पादन जारी रख सकती है। यदि P < AVC, तो फर्म को उत्पादन बंद कर देना चाहिए।
  • दीर्घकाल में: एकाधिकार फर्म दीर्घकाल में भी असामान्य लाभ अर्जित कर सकती है क्योंकि नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है।

2.5. एकाधिकार में पूर्ति वक्र का अभाव (Absence of Supply Curve)
एकाधिकार में कोई विशिष्ट पूर्ति वक्र नहीं होता। पूर्ण प्रतियोगिता के विपरीत, एकाधिकार फर्म कीमत निर्धारक होती है और कीमत तथा मात्रा के बीच एक अद्वितीय संबंध नहीं होता। एक ही कीमत पर अलग-अलग मात्राएँ या अलग-अलग कीमतों पर एक ही मात्रा बेची जा सकती है, यह मांग की लोच पर निर्भर करता है।

2.6. कीमत विभेद (Price Discrimination)

  • अर्थ: कीमत विभेद तब होता है जब एक एकाधिकार फर्म एक ही वस्तु को अलग-अलग ग्राहकों से अलग-अलग कीमतों पर बेचती है, जबकि उत्पादन लागत समान रहती है।
  • शर्तें:
    • बाज़ार का विभाजन: फर्म बाज़ार को विभिन्न उप-बाज़ारों में विभाजित करने में सक्षम हो।
    • मांग की लोच में अंतर: विभिन्न उप-बाज़ारों में मांग की कीमत लोच भिन्न होनी चाहिए।
    • पुनर्विक्रय की असंभवता: ग्राहकों द्वारा सस्ती कीमत पर खरीदी गई वस्तु को महंगी कीमत वाले बाज़ार में पुनर्विक्रय करना संभव न हो।
  • प्रकार:
    • प्रथम डिग्री (सही कीमत विभेद): एकाधिकार फर्म प्रत्येक उपभोक्ता से उसकी अधिकतम भुगतान करने की इच्छा के अनुसार कीमत वसूल करती है।
    • द्वितीय डिग्री: मात्रा के आधार पर कीमत विभेद, जैसे थोक में खरीदने पर कम कीमत।
    • तृतीय डिग्री: बाज़ार को समूहों में विभाजित करके कीमत विभेद, जैसे छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग कीमतें।
  • उद्देश्य: लाभ अधिकतमकरण।

2.7. एकाधिकार और समाज कल्याण (Monopoly and Social Welfare)

  • उच्च कीमत और कम उत्पादन: एकाधिकार फर्म पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में उच्च कीमत वसूल करती है और कम उत्पादन करती है, जिससे उपभोक्ता अधिशेष कम हो जाता है।
  • क्षमता का अभाव:
    • उत्पादक अक्षमता: एकाधिकार फर्म न्यूनतम औसत लागत बिंदु पर उत्पादन नहीं करती।
    • आबंटनात्मक अक्षमता: कीमत सीमांत लागत से अधिक होती है (P > MC), जो संसाधनों के अक्षम आबंटन को दर्शाता है।
  • मृत भार हानि (Deadweight Loss): एकाधिकार के कारण समाज को होने वाली शुद्ध हानि को मृत भार हानि कहते हैं, जो उत्पादन में कमी और उच्च कीमत के कारण होती है।
  • सरकारी हस्तक्षेप: सरकार एकाधिकार को नियंत्रित करने के लिए कीमत नियंत्रण, कर लगाना या एकाधिकार विरोधी कानून जैसे उपाय कर सकती है।

3. एकाधिकारिक प्रतियोगिता (Monopolistic Competition)

3.1. अर्थ एवं परिभाषा
एकाधिकारिक प्रतियोगिता बाज़ार की वह स्थिति है जहाँ बड़ी संख्या में विक्रेता होते हैं, जो एक-दूसरे से थोड़े भिन्न (विभेदित) उत्पाद बेचते हैं। यह पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार के बीच की स्थिति है।

3.2. विशेषताएँ

  • बड़ी संख्या में विक्रेता और क्रेता: बाज़ार में कई विक्रेता और क्रेता होते हैं, लेकिन पूर्ण प्रतियोगिता जितनी बड़ी संख्या नहीं होती।
  • उत्पाद विभेदन (Product Differentiation): यह एकाधिकारिक प्रतियोगिता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। उत्पाद गुणवत्ता, ब्रांड नाम, पैकेजिंग, डिज़ाइन, बिक्री के बाद की सेवाओं आदि के आधार पर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
  • प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता: नई फर्मों के उद्योग में प्रवेश और मौजूदा फर्मों के निकास पर कोई बाधा नहीं होती।
  • गैर-कीमत प्रतियोगिता (Non-Price Competition): फर्मों के बीच कीमत के बजाय विज्ञापन, बिक्री संवर्धन, बेहतर ग्राहक सेवा आदि के माध्यम से प्रतिस्पर्धा होती है।
  • मांग वक्र का ऋणात्मक ढलान: उत्पाद विभेदन के कारण, प्रत्येक फर्म का अपना विशिष्ट मांग वक्र होता है, जो नीचे की ओर ढलान वाला होता है (लेकिन एकाधिकार की तुलना में अधिक लोचदार)।
  • कीमत पर कुछ नियंत्रण: उत्पाद विभेदन के कारण प्रत्येक फर्म के पास अपनी वस्तु की कीमत पर कुछ नियंत्रण होता है।

3.3. एकाधिकारिक प्रतियोगिता में फर्म का संतुलन

  • अल्पकाल:
    • लाभ अधिकतमकरण की शर्त: MR = MC।
    • फर्म अल्पकाल में असामान्य लाभ, सामान्य लाभ या हानि अर्जित कर सकती है, ठीक एकाधिकार की तरह।
  • दीर्घकाल:
    • प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता के कारण, दीर्घकाल में फर्म केवल सामान्य लाभ अर्जित करती है।
    • यदि फर्म असामान्य लाभ कमा रही होती है, तो नई फर्मों का प्रवेश होता है, जिससे मौजूदा फर्मों की मांग कम हो जाती है और लाभ सामान्य हो जाता है।
    • यदि फर्म हानि उठा रही होती है, तो कुछ फर्म उद्योग छोड़ देती हैं, जिससे शेष फर्मों की मांग बढ़ जाती है और हानि समाप्त होकर सामान्य लाभ में बदल जाती है।
    • दीर्घकाल में, AR वक्र AC वक्र को स्पर्श करता है (P = AC), लेकिन P > MC होता है।
    • अतिरिक्त क्षमता (Excess Capacity): दीर्घकाल में एकाधिकारिक प्रतिस्पर्धी फर्म न्यूनतम औसत लागत बिंदु पर उत्पादन नहीं करती। वह न्यूनतम औसत लागत से कम उत्पादन करती है, जिससे अतिरिक्त क्षमता बनी रहती है। यह उत्पाद विभेदन और विज्ञापन की लागत के कारण होता है।

3.4. एकाधिकारिक प्रतियोगिता और दक्षता

  • पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में एकाधिकारिक प्रतियोगिता कम कुशल होती है क्योंकि इसमें अतिरिक्त क्षमता होती है और P > MC होता है।
  • विज्ञापन और बिक्री संवर्धन पर खर्च से कुल लागत बढ़ जाती है।
  • हालांकि, यह उपभोक्ताओं को उत्पादों की विविधता और विकल्प प्रदान करती है, जो एक लाभ है।

4. अल्पाधिकार (Oligopoly)

4.1. अर्थ एवं परिभाषा
अल्पाधिकार बाज़ार की वह स्थिति है जहाँ किसी वस्तु के कुछ बड़े विक्रेता होते हैं और वे एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भर होते हैं।

4.2. विशेषताएँ

  • कुछ बड़े विक्रेता: बाज़ार में फर्मों की संख्या कम होती है, लेकिन वे आकार में बड़ी होती हैं।
  • परस्पर निर्भरता (Interdependence): यह अल्पाधिकार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। एक फर्म द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय (जैसे कीमत या उत्पादन में बदलाव) अन्य फर्मों के निर्णयों को सीधे प्रभावित करता है और उन्हें प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करता है।
  • उत्पाद की प्रकृति: उत्पाद समरूप (जैसे सीमेंट) या विभेदित (जैसे ऑटोमोबाइल) हो सकते हैं।
  • प्रवेश पर प्रतिबंध: नई फर्मों के प्रवेश पर कुछ बाधाएँ होती हैं, जो एकाधिकार जितनी कठोर नहीं होतीं, लेकिन पूर्ण प्रतियोगिता या एकाधिकारिक प्रतियोगिता जितनी आसान भी नहीं होतीं।
  • गैर-कीमत प्रतियोगिता: कीमत युद्ध से बचने के लिए फर्म अक्सर विज्ञापन, बिक्री संवर्धन आदि के माध्यम से गैर-कीमत प्रतियोगिता में संलग्न होती हैं।
  • कीमत दृढ़ता (Price Rigidity): अल्पाधिकार में कीमतें अक्सर स्थिर रहती हैं क्योंकि किसी भी फर्म द्वारा कीमत में कमी या वृद्धि से अन्य फर्मों की प्रतिक्रिया की अनिश्चितता होती है (किंक्ड डिमांड कर्व मॉडल इसका एक उदाहरण है)।

4.3. प्रकार

  • सहयोगी अल्पाधिकार (Collusive Oligopoly): जब अल्पाधिकार फर्म एक साथ मिलकर काम करती हैं, जैसे कार्टेल (Cartel) बनाकर कीमत या उत्पादन को नियंत्रित करती हैं (जैसे OPEC)।
  • गैर-सहयोगी अल्पाधिकार (Non-Collusive Oligopoly): जब फर्म स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं, लेकिन एक-दूसरे के निर्णयों पर प्रतिक्रिया देती हैं।

5. बाज़ार संरचनाओं का तुलनात्मक अध्ययन (सारांश)

विशेषताएँ पूर्ण प्रतियोगिता एकाधिकार एकाधिकारिक प्रतियोगिता अल्पाधिकार
फर्मों की संख्या बहुत अधिक एक अधिक कुछ (2-10)
उत्पाद की प्रकृति समरूप अद्वितीय विभेदित समरूप या विभेदित
प्रवेश/निकास स्वतंत्र प्रतिबंधित स्वतंत्र प्रतिबंधित
कीमत पर नियंत्रण नहीं पूर्ण कुछ कुछ (परस्पर निर्भर)
मांग वक्र पूर्ण लोचदार (क्षैतिज) कम लोचदार (नीचे की ओर) अधिक लोचदार (नीचे की ओर) अनिश्चित (किंक्ड)
दीर्घकाल में लाभ सामान्य लाभ असामान्य लाभ सामान्य लाभ असामान्य लाभ या सामान्य लाभ
विज्ञापन नहीं नहीं (आवश्यकता नहीं) हाँ हाँ
दक्षता सर्वाधिक कुशल अक्षम कम कुशल (अतिरिक्त क्षमता) अक्षम

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. निम्नलिखित में से कौन-सी एकाधिकार की विशेषता नहीं है?
    a) एकल विक्रेता
    b) निकट प्रतिस्थापन का अभाव
    c) प्रवेश पर प्रतिबंध
    d) कीमत स्वीकारक (Price Taker)

  2. एकाधिकार में फर्म का मांग वक्र कैसा होता है?
    a) पूर्ण लोचदार
    b) पूर्ण बेलोचदार
    c) नीचे की ओर ढलान वाला
    d) ऊपर की ओर ढलान वाला

  3. एकाधिकार फर्म के लाभ अधिकतमकरण की शर्त क्या है?
    a) AR = AC
    b) MR = MC
    c) AR = MR
    d) P = MC

  4. एकाधिकारिक प्रतियोगिता में फर्म दीर्घकाल में क्या अर्जित करती है?
    a) असामान्य लाभ
    b) सामान्य लाभ
    c) हानि
    d) इनमें से कोई नहीं

  5. उत्पाद विभेदन किस बाज़ार संरचना की मुख्य विशेषता है?
    a) पूर्ण प्रतियोगिता
    b) एकाधिकार
    c) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
    d) अल्पाधिकार

  6. "अतिरिक्त क्षमता" (Excess Capacity) की स्थिति किस बाज़ार संरचना में पाई जाती है?
    a) पूर्ण प्रतियोगिता
    b) एकाधिकार
    c) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
    d) अल्पाधिकार

  7. कीमत विभेद के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त आवश्यक नहीं है?
    a) बाज़ार का विभाजन संभव हो।
    b) विभिन्न बाज़ारों में मांग की लोच भिन्न हो।
    c) पुनर्विक्रय संभव न हो।
    d) उत्पाद समरूप हो।

  8. अल्पाधिकार बाज़ार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता क्या है?
    a) उत्पाद विभेदन
    b) प्रवेश की स्वतंत्रता
    c) परस्पर निर्भरता
    d) एकल विक्रेता

  9. एकाधिकार के कारण समाज को होने वाली शुद्ध हानि को क्या कहते हैं?
    a) उपभोक्ता अधिशेष
    b) उत्पादक अधिशेष
    c) मृत भार हानि (Deadweight Loss)
    d) असामान्य लाभ

  10. यदि किसी फर्म का AR वक्र AC वक्र को स्पर्श करता है, तो फर्म क्या अर्जित कर रही है?
    a) असामान्य लाभ
    b) सामान्य लाभ
    c) हानि
    d) अधिकतम संभव लाभ


उत्तरमाला:

  1. d) कीमत स्वीकारक (Price Taker)
  2. c) नीचे की ओर ढलान वाला
  3. b) MR = MC
  4. b) सामान्य लाभ
  5. c) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
  6. c) एकाधिकारिक प्रतियोगिता
  7. d) उत्पाद समरूप हो। (उत्पाद भिन्न भी हो सकते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि कीमत अलग-अलग हो)
  8. c) परस्पर निर्भरता
  9. c) मृत भार हानि (Deadweight Loss)
  10. b) सामान्य लाभ

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं।

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