Class 12 Geography Notes Chapter 1 (आंकडे़: स्रोत और संकलन) – Bhugol me Peryojnatmak Karya Book

प्रिय विद्यार्थियों, भूगोल में प्रायोगिक कार्य की इस महत्वपूर्ण कक्षा में आपका स्वागत है। आज हम अध्याय 1 'आंकड़े: स्रोत और संकलन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में हम आंकड़ों के महत्व, उनके विभिन्न प्रकारों और उन्हें एकत्रित करने के विभिन्न स्रोतों व विधियों को समझेंगे।
अध्याय 1: आंकड़े: स्रोत और संकलन
1. आंकड़े क्या हैं? (What are Data?)
आंकड़े (Data) किसी भी विषय या घटना से संबंधित वे तथ्य, संख्याएँ, माप या अवलोकन होते हैं जिन्हें एकत्रित, विश्लेषण और व्याख्या करने के लिए उपयोग किया जाता है। भूगोल में, आंकड़े स्थानिक पैटर्न, प्रक्रियाओं और संबंधों को समझने के लिए आधार प्रदान करते हैं।
2. आंकड़ों की आवश्यकता (Need for Data)
भूगोल में आंकड़ों की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
- विश्लेषण और व्याख्या: विभिन्न भौगोलिक घटनाओं (जैसे जनसंख्या वितरण, जलवायु परिवर्तन, कृषि उत्पादन) का विश्लेषण और व्याख्या करने के लिए।
- योजना निर्माण: क्षेत्रीय विकास, शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए प्रभावी योजनाएँ बनाने हेतु।
- समस्या समाधान: किसी क्षेत्र विशेष की समस्याओं (जैसे गरीबी, प्रदूषण, जल संकट) की पहचान करने और उनके समाधान खोजने के लिए।
- निर्णय लेना: सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्तियों द्वारा सूचित निर्णय लेने के लिए।
3. आंकड़ों के प्रकार (Types of Data)
आंकड़ों को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
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गुणात्मक आंकड़े (Qualitative Data):
- ये आंकड़े किसी वस्तु या व्यक्ति के गुणों, विशेषताओं या श्रेणियों का वर्णन करते हैं। इन्हें सीधे संख्यात्मक रूप में मापा नहीं जा सकता।
- उदाहरण: धर्म, लिंग, व्यवसाय, शिक्षा का स्तर, जीवन शैली, लोगों की राय, किसी स्थान की सुंदरता।
- विशेषता: ये अक्सर वर्णनात्मक होते हैं और गहन समझ प्रदान करते हैं।
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मात्रात्मक आंकड़े (Quantitative Data):
- ये आंकड़े संख्यात्मक होते हैं और इन्हें मापा या गिना जा सकता है।
- उदाहरण: जनसंख्या का आकार, आय, तापमान, वर्षा की मात्रा, साक्षरता दर, कृषि उत्पादन।
- विशेषता: इन्हें सांख्यिकीय विधियों का उपयोग करके विश्लेषण किया जा सकता है।
4. आंकड़ों के स्रोत (Sources of Data)
आंकड़ों को एकत्रित करने के मुख्य रूप से दो स्रोत होते हैं:
A. प्राथमिक स्रोत (Primary Sources):
प्राथमिक आंकड़े वे होते हैं जिन्हें शोधकर्ता या अन्वेषक द्वारा पहली बार किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए सीधे क्षेत्र से एकत्रित किया जाता है। ये 'कच्चे' आंकड़े होते हैं।
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विशेषताएँ:
- मौलिक और अप्रकाशित।
- शोधकर्ता के विशिष्ट उद्देश्य के अनुरूप।
- संकलन में अधिक समय, प्रयास और लागत लगती है।
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प्राथमिक आंकड़े संकलन की विधियाँ (Methods of Primary Data Collection):
- व्यक्तिगत प्रेक्षण (Personal Observation):
- शोधकर्ता स्वयं मौके पर जाकर घटनाओं, व्यवहारों या भौतिक विशेषताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करता है और उन्हें रिकॉर्ड करता है।
- उदाहरण: किसी बाजार में ग्राहकों के व्यवहार का अवलोकन, किसी क्षेत्र में भूमि उपयोग पैटर्न का अध्ययन।
- साक्षात्कार (Interview):
- शोधकर्ता सीधे व्यक्तियों से आमने-सामने बातचीत करके जानकारी प्राप्त करता है। यह संरचित (निश्चित प्रश्न) या असंरचित (खुली चर्चा) हो सकता है।
- उदाहरण: किसानों से उनकी कृषि पद्धतियों के बारे में पूछना, निवासियों से उनकी समस्याओं पर चर्चा करना।
- प्रश्नावली (Questionnaire):
- यह प्रश्नों की एक सूची होती है जिसे उत्तरदाताओं को स्वयं भरकर वापस भेजना होता है। इसमें अक्सर बहुविकल्पीय, हां/नहीं या खुले प्रश्न होते हैं।
- उपयोग: बड़े पैमाने पर सर्वेक्षणों के लिए उपयुक्त, जहां व्यक्तिगत संपर्क संभव न हो।
- अनुसूची (Schedule):
- यह भी प्रश्नों की एक सूची होती है, लेकिन इसे उत्तरदाता स्वयं नहीं भरते। इसके बजाय, एक प्रशिक्षित प्रगणक (शोधकर्ता का सहायक) उत्तरदाताओं से प्रश्न पूछता है और उनके उत्तरों को अनुसूची में दर्ज करता है।
- उपयोग: निरक्षर या कम पढ़े-लिखे लोगों से जानकारी एकत्रित करने के लिए अधिक प्रभावी।
- व्यक्तिगत प्रेक्षण (Personal Observation):
B. द्वितीयक स्रोत (Secondary Sources):
द्वितीयक आंकड़े वे होते हैं जिन्हें पहले से ही किसी अन्य उद्देश्य के लिए किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्रित और प्रकाशित या अप्रकाशित किया जा चुका है। शोधकर्ता इन आंकड़ों का उपयोग अपने वर्तमान अध्ययन के लिए करता है।
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विशेषताएँ:
- पहले से उपलब्ध और संसाधित।
- संकलन में कम समय और लागत लगती है।
- मौजूदा आंकड़ों की विश्वसनीयता का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है।
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द्वितीयक आंकड़ों के स्रोत (Sources of Secondary Data):
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प्रकाशित स्रोत (Published Sources):
- सरकारी प्रकाशन (Government Publications):
- भारत की जनगणना (Census of India) - प्रत्येक 10 वर्ष में।
- राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) की रिपोर्टें।
- भारत के महापंजीयक (Registrar General of India - RGI) के प्रकाशन।
- विभिन्न मंत्रालयों (जैसे कृषि मंत्रालय, वित्त मंत्रालय) की वार्षिक रिपोर्टें।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के बुलेटिन।
- अर्ध-सरकारी प्रकाशन (Semi-Government Publications):
- नगर निगमों, जिला परिषदों और शहरी विकास प्राधिकरणों की रिपोर्टें।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन (International Publications):
- संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के विभिन्न अंग (जैसे UNDP, UNICEF)।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)।
- विश्व बैंक (World Bank)।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।
- यूनेस्को (UNESCO)।
- निजी प्रकाशन (Private Publications):
- व्यापार संघों, शोध संस्थानों (जैसे NCERT, ICSSR) और निजी कंपनियों की रिपोर्टें।
- समाचार पत्र (जैसे द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड) और पत्रिकाएँ (जैसे योजना, कुरुक्षेत्र)।
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (Electronic Media):
- इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न वेबसाइटें, डेटाबेस और ऑनलाइन जर्नल।
- सरकारी प्रकाशन (Government Publications):
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अप्रकाशीत स्रोत (Unpublished Sources):
- सरकारी विभागों के आंतरिक रिकॉर्ड।
- शोधकर्ताओं और विद्वानों द्वारा अप्रकाशित शोध रिपोर्टें और पांडुलिपियाँ।
- निजी संगठनों के आंतरिक दस्तावेज।
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5. जनगणना (Census)
- जनगणना एक देश या एक परिभाषित क्षेत्र की जनसंख्या के बारे में व्यवस्थित रूप से जानकारी एकत्र करने, संकलित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने की प्रक्रिया है।
- भारत में, जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है और यह जनसंख्या, साक्षरता, व्यवसाय, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, आवास आदि से संबंधित विस्तृत आंकड़े प्रदान करती है।
- यह द्वितीयक आंकड़ों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है और राष्ट्रीय स्तर पर योजना निर्माण एवं नीति निर्धारण के लिए आधार प्रदान करती है।
6. प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Sample Survey)
- प्रतिदर्श सर्वेक्षण में, पूरी आबादी (समष्टि) का अध्ययन करने के बजाय, आबादी के एक छोटे, प्रतिनिधि भाग (प्रतिदर्श) से आंकड़े एकत्र किए जाते हैं।
- इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब पूरी आबादी का अध्ययन करना बहुत महंगा, समय लेने वाला या अव्यावहारिक हो।
- लाभ: समय और लागत की बचत, गहन अध्ययन संभव।
- सीमा: यदि प्रतिदर्श प्रतिनिधि नहीं है, तो परिणाम भ्रामक हो सकते हैं।
- यह जनगणना का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक है।
निष्कर्ष:
आंकड़ों का सही चयन और संकलन किसी भी भौगोलिक अध्ययन या योजना का आधार होता है। प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों की समझ हमें अपने अध्ययन के उद्देश्यों के लिए सबसे उपयुक्त आंकड़ों का चयन करने में मदद करती है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - 10 प्रश्न
निर्देश: सही विकल्प का चयन करें।
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निम्नलिखित में से कौन-सा गुणात्मक आंकड़ों का एक उदाहरण है?
a) किसी शहर की जनसंख्या
b) वार्षिक वर्षा की मात्रा
c) लोगों का धर्म
d) प्रति व्यक्ति आय -
जब शोधकर्ता स्वयं मौके पर जाकर जानकारी एकत्र करता है, तो यह किस प्रकार के आंकड़े संकलन की विधि है?
a) प्रश्नावली
b) साक्षात्कार
c) व्यक्तिगत प्रेक्षण
d) अनुसूची -
प्रश्नों की वह सूची जिसे उत्तरदाता स्वयं भरकर वापस भेजता है, क्या कहलाती है?
a) अनुसूची
b) प्रश्नावली
c) रिपोर्ट
d) प्रेक्षण पत्र -
भारत में जनगणना कितने वर्षों के अंतराल पर आयोजित की जाती है?
a) 5 वर्ष
b) 10 वर्ष
c) 2 वर्ष
d) 15 वर्ष -
निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक आंकड़ों का एक अंतर्राष्ट्रीय स्रोत है?
a) भारत की जनगणना रिपोर्ट
b) राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO)
c) विश्व बैंक (World Bank)
d) नगर निगम रिपोर्ट -
निम्नलिखित में से कौन-सा प्राथमिक आंकड़ों का स्रोत नहीं है?
a) व्यक्तिगत प्रेक्षण
b) साक्षात्कार
c) प्रकाशित सरकारी रिपोर्टें
d) अनुसूची -
प्रतिदर्श सर्वेक्षण का मुख्य लाभ क्या है?
a) यह हमेशा 100% सटीक परिणाम देता है।
b) यह समय और लागत की बचत करता है।
c) यह पूरी आबादी का अध्ययन करता है।
d) यह केवल गुणात्मक आंकड़े एकत्र करता है। -
वह विधि जिसमें एक प्रशिक्षित प्रगणक उत्तरदाताओं से प्रश्न पूछता है और उत्तरों को दर्ज करता है, कहलाती है:
a) प्रश्नावली
b) व्यक्तिगत प्रेक्षण
c) अनुसूची
d) टेलीफोन सर्वेक्षण -
भारत में जनगणना संबंधी आंकड़े कौन-सा संगठन प्रकाशित करता है?
a) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
b) राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO)
c) भारत के महापंजीयक (Registrar General of India - RGI)
d) योजना आयोग -
निम्नलिखित में से कौन-सा मात्रात्मक आंकड़ों का उदाहरण है?
a) लोगों की जीवन शैली
b) किसी क्षेत्र की जलवायु का प्रकार
c) साक्षरता दर
d) राजनीतिक संबद्धता
उत्तर कुंजी (Answer Key):
- c) लोगों का धर्म
- c) व्यक्तिगत प्रेक्षण
- b) प्रश्नावली
- b) 10 वर्ष
- c) विश्व बैंक (World Bank)
- c) प्रकाशित सरकारी रिपोर्टें
- b) यह समय और लागत की बचत करता है।
- c) अनुसूची
- c) भारत के महापंजीयक (Registrar General of India - RGI)
- c) साक्षरता दर