Class 12 Geography Notes Chapter 11 (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol)
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी भूगोल की पाठ्यपुस्तक 'भारत लोग और अर्थव्यवस्था' के अध्याय 11 'अंतर्राष्ट्रीय व्यापार' का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के व्यापारिक संबंधों की गहरी समझ प्रदान करता है।


अध्याय 11: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का परिचय
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से तात्पर्य दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय से है। यह व्यापार विभिन्न देशों के बीच संसाधनों के असमान वितरण, उत्पादन लागत में भिन्नता और तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत पर आधारित होता है। कोई भी देश अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं नहीं कर सकता, इसलिए उसे अन्य देशों के साथ व्यापार करना पड़ता है।

2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:

  • संसाधनों में भिन्नता: विश्व के विभिन्न देशों में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे खनिज, वन, जल, भूमि) का वितरण असमान है। कुछ देशों में कुछ संसाधन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जबकि अन्य में उनकी कमी होती है।
  • उत्पादन लागत में भिन्नता: विभिन्न देशों में भूमि, श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी की उपलब्धता तथा लागत में अंतर होता है। इससे वस्तुओं के उत्पादन की लागत अलग-अलग होती है, जिससे देश उन वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनमें उन्हें तुलनात्मक रूप से कम लागत आती है।
  • तुलनात्मक लाभ का सिद्धांत: यह सिद्धांत बताता है कि एक देश को उन वस्तुओं का उत्पादन और निर्यात करना चाहिए, जिनके उत्पादन में उसे अन्य देशों की तुलना में अधिक दक्षता या कम अवसर लागत होती है।
  • अस्तित्व का सिद्धांत: कोई भी देश उन सभी वस्तुओं का उत्पादन नहीं कर सकता जिनकी उसे आवश्यकता होती है।
  • हस्तांतरणीयता: वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की क्षमता।

3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्वपूर्ण पक्ष
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को समझने के लिए तीन महत्वपूर्ण पक्ष होते हैं:

  • व्यापार का परिमाण (Volume of Trade): यह व्यापार की गई वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है। यह एक देश की आर्थिक गतिविधियों का सूचक होता है।
  • व्यापार संयोजन (Composition of Trade): यह उन वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार को संदर्भित करता है जिनका व्यापार किया जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, प्राथमिक उत्पाद (कृषि, खनिज) प्रमुख थे, लेकिन अब विनिर्मित उत्पाद और सेवाएं (जैसे सॉफ्टवेयर, पर्यटन) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • व्यापार की दिशा (Direction of Trade): यह उन देशों को संदर्भित करता है जिनके साथ कोई देश व्यापार करता है। ऐतिहासिक रूप से, विकासशील देश विकसित देशों के साथ व्यापार करते थे, लेकिन अब एशिया के देशों (जैसे भारत, चीन) का उदय व्यापार की दिशा को बदल रहा है।

4. व्यापार संतुलन (Balance of Trade)
व्यापार संतुलन एक देश के निर्यात और आयात के मौद्रिक मूल्य के बीच का अंतर है।

  • सकारात्मक/अनुकूल व्यापार संतुलन: जब किसी देश का निर्यात मूल्य उसके आयात मूल्य से अधिक होता है (निर्यात > आयात)। यह देश के लिए आर्थिक रूप से अच्छा माना जाता है।
  • नकारात्मक/प्रतिकूल व्यापार संतुलन: जब किसी देश का आयात मूल्य उसके निर्यात मूल्य से अधिक होता है (आयात > निर्यात)। यह देश के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

5. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकार

  • द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade): जब दो देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करने के लिए सहमत होते हैं, जिसमें वे विशिष्ट वस्तुओं का व्यापार करते हैं।
  • बहुपक्षीय व्यापार (Multilateral Trade): जब एक देश कई अन्य देशों के साथ व्यापार करता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बढ़ावा देता है, जिसमें 'सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN)' का सिद्धांत लागू होता है।

6. मुक्त व्यापार (Free Trade)
मुक्त व्यापार का अर्थ है अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से सभी बाधाओं (जैसे टैरिफ, कोटा, सब्सिडी) को हटाना या कम करना। इसका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय प्रवाह को आसान बनाना है ताकि वैश्विक दक्षता और प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

  • लाभ: संसाधनों का कुशल उपयोग, उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प और कम कीमतें, नवाचार को बढ़ावा।
  • हानि/चुनौतियाँ: घरेलू उद्योगों को नुकसान, विकासशील देशों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल, आर्थिक अस्थिरता।

7. डंपिंग (Dumping)
डंपिंग एक अनुचित व्यापार प्रथा है, जिसमें एक देश किसी वस्तु को उसके घरेलू बाजार मूल्य से कम कीमत पर किसी विदेशी बाजार में बेचता है। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर निकालना या बाजार हिस्सेदारी हासिल करना होता है।

8. विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO)

  • स्थापना: 1 जनवरी 1995 को, 'प्रशुल्क एवं व्यापार संबंधी सामान्य समझौता (GATT)' के स्थान पर।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
  • उद्देश्य:
    • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना।
    • व्यापार बाधाओं को कम करना।
    • व्यापार नीतियों में पारदर्शिता लाना।
    • व्यापार संबंधी विवादों का निपटारा करना।
    • बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का प्रबंधन करना।
  • कार्यप्रणाली: WTO के सदस्य देश 'सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN)' सिद्धांत का पालन करते हैं, जिसका अर्थ है कि एक सदस्य देश द्वारा दूसरे सदस्य देश को दिया गया कोई भी व्यापारिक लाभ सभी सदस्य देशों को समान रूप से दिया जाना चाहिए।

9. प्रादेशिक व्यापार समूह (Regional Trade Blocs)
ये ऐसे समूह हैं जो सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए बनाए गए हैं।

  • प्रमुख उदाहरण:
    • यूरोपीय संघ (EU): सबसे सफल प्रादेशिक समूह, जिसमें एकल बाजार और एकल मुद्रा (यूरो) है।
    • आसियान (ASEAN): दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ।
    • साफटा (SAFTA): दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (सार्क देशों के बीच)।
    • नाफ्टा (NAFTA): उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (अब USMCA)।
    • ओपेक (OPEC): पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन।
    • एपेक (APEC): एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग।
  • लाभ: सदस्य देशों के बीच व्यापार में वृद्धि, आर्थिक एकीकरण, राजनीतिक स्थिरता।
  • चुनौतियाँ: गैर-सदस्य देशों के लिए व्यापार बाधाएँ, व्यापार विचलन।

10. भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार स्वतंत्रता के बाद से लगातार बढ़ा है और इसकी संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

  • व्यापार संयोजन में बदलाव:
    • निर्यात: पहले प्राथमिक वस्तुएं (जैसे कृषि उत्पाद, खनिज) प्रमुख थीं। अब विनिर्मित वस्तुएं (इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, रसायन, वस्त्र) और सेवाएं (जैसे सॉफ्टवेयर, आईटीईएस) प्रमुख निर्यातक वस्तुएं बन गई हैं।
    • आयात: पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन, उर्वरक और सोना प्रमुख आयातक वस्तुएं हैं।
  • व्यापार की दिशा में बदलाव:
    • पहले भारत का अधिकांश व्यापार ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ जैसे देशों के साथ होता था।
    • अब भारत के प्रमुख व्यापारिक भागीदार एशिया (चीन, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर), यूरोप (जर्मनी, बेल्जियम), उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के देश हैं।
  • प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक प्रवेश द्वार (पत्तन):
    • पश्चिमी तट: कांडला, मुंबई, जवाहरलाल नेहरू पत्तन (न्हावा शेवा), मर्मगाँव, न्यू मंगलौर, कोचीन।
    • पूर्वी तट: कोलकाता, हल्दिया, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई, एन्नोर, तूतीकोरिन।
    • इन पत्तनों के माध्यम से भारत का अधिकांश व्यापार होता है। हवाई अड्डों के माध्यम से भी उच्च मूल्य वाली और कम मात्रा वाली वस्तुओं का व्यापार होता है।

11. समुद्री पत्तन - अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार
समुद्री पत्तन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मुख्य प्रवेश द्वार होते हैं। वे वस्तुओं और यात्रियों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं।

  • पत्तनों के प्रकार:
    • औद्योगिक पत्तन: भारी मात्रा में औद्योगिक उत्पादों जैसे अयस्क, तेल, रसायन आदि का संचालन करते हैं।
    • वाणिज्यिक पत्तन: सामान्य कार्गो, कंटेनर और यात्री यातायात को संभालते हैं।
    • व्यापक पत्तन: ये बड़े पैमाने पर थोक कार्गो (बल्क कार्गो) और सामान्य कार्गो दोनों का संचालन करते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का मुख्य आधार क्या है?
    अ) संसाधनों में असमान वितरण
    ब) उत्पादन लागत में भिन्नता
    स) तुलनात्मक लाभ का सिद्धांत
    द) उपरोक्त सभी

  2. जब किसी देश का निर्यात मूल्य उसके आयात मूल्य से अधिक होता है, तो उसे क्या कहा जाता है?
    अ) नकारात्मक व्यापार संतुलन
    ब) सकारात्मक व्यापार संतुलन
    स) व्यापार घाटा
    द) व्यापार अधिशेष

  3. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
    अ) 1948
    ब) 1971
    स) 1995
    द) 2001

  4. WTO का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
    अ) न्यूयॉर्क
    ब) जिनेवा
    स) पेरिस
    द) वियना

  5. निम्न में से कौन-सा एक प्रादेशिक व्यापार समूह नहीं है?
    अ) यूरोपीय संघ (EU)
    ब) आसियान (ASEAN)
    स) नाफ्टा (NAFTA)
    द) संयुक्त राष्ट्र (UN)

  6. जब कोई देश किसी वस्तु को उसके घरेलू बाजार मूल्य से कम कीमत पर विदेशी बाजार में बेचता है, तो उसे क्या कहते हैं?
    अ) मुक्त व्यापार
    ब) डंपिंग
    स) व्यापार उदारीकरण
    द) कोटा

  7. भारत के पश्चिमी तट पर स्थित सबसे बड़ा पत्तन कौन-सा है?
    अ) चेन्नई
    ब) विशाखापत्तनम
    स) मुंबई
    द) हल्दिया

  8. भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्वतंत्रता के बाद से किस प्रकार की वस्तुओं का निर्यात बढ़ा है?
    अ) प्राथमिक वस्तुएं
    ब) कृषि उत्पाद
    स) विनिर्मित वस्तुएं और सेवाएं
    द) खनिज

  9. 'सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN)' का सिद्धांत किस संगठन से संबंधित है?
    अ) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
    ब) विश्व बैंक
    स) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
    द) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

  10. भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक प्रमुख पत्तन कौन-सा है जो एक स्थलबद्ध पत्तन है?
    अ) कोलकाता
    ब) चेन्नई
    स) विशाखापत्तनम
    द) पारादीप


MCQs के उत्तर:

  1. द) उपरोक्त सभी
  2. ब) सकारात्मक व्यापार संतुलन
  3. स) 1995
  4. ब) जिनेवा
  5. द) संयुक्त राष्ट्र (UN)
  6. ब) डंपिंग
  7. स) मुंबई (या जवाहरलाल नेहरू पत्तन, जो मुंबई के पास है और भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पत्तन है)
  8. स) विनिर्मित वस्तुएं और सेवाएं
  9. स) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
  10. स) विशाखापत्तनम

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।

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