Class 12 Geography Notes Chapter 12 (भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एव समस्याएँ) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol)
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 भूगोल की पुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के अध्याय 12, 'भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय भारत के समक्ष उपस्थित कुछ गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर प्रकाश डालता है, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


अध्याय 12: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एव समस्याएँ

परिचय:
मानव और पर्यावरण का संबंध अत्यंत जटिल है। जहाँ एक ओर मानव ने अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है, वहीं दूसरी ओर इस दोहन ने अनेक पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है। इस अध्याय में हम भारत के संदर्भ में कुछ प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं जैसे प्रदूषण, नगरीय अपशिष्ट निपटान, ग्रामीण-नगरीय प्रवास, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ और भूमि निम्नीकरण का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।


1. पर्यावरणीय प्रदूषण

परिभाषा: पर्यावरण में अवांछित पदार्थों का प्रवेश जो मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक होता है, प्रदूषण कहलाता है।

प्रदूषण के प्रकार, कारण, प्रभाव और नियंत्रण:

a) जल प्रदूषण:

  • परिभाषा: जल में ऐसे पदार्थों का मिलना जो उसकी गुणवत्ता को कम कर दें और उसे उपयोग के अयोग्य बना दें।
  • प्रमुख स्रोत/कारण:
    • उद्योग: औद्योगिक बहिःस्राव (रसायन, भारी धातुएँ)।
    • कृषि: रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, शाकनाशी का अत्यधिक उपयोग।
    • नगरीय अपशिष्ट: घरेलू सीवेज, ठोस अपशिष्ट का जल निकायों में निपटान।
    • धार्मिक अनुष्ठान: मूर्तियों का विसर्जन, पूजा सामग्री।
    • खनन: खनन क्षेत्रों से निकलने वाला प्रदूषित जल।
  • प्रमुख प्रभाव:
    • स्वास्थ्य: हैजा, टाइफाइड, पीलिया, डायरिया जैसी जल-जनित बीमारियाँ।
    • जलीय जीवन: ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवों की मृत्यु, जैव विविधता का नुकसान।
    • आर्थिक: कृषि और मत्स्य पालन पर नकारात्मक प्रभाव।
    • पर्यावरणीय: भूजल का प्रदूषण, मृदा की उर्वरता में कमी।
  • भारत में स्थिति: गंगा और यमुना जैसी प्रमुख नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हैं।
  • नियंत्रण के उपाय:
    • अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (STPs) का निर्माण और उचित संचालन।
    • औद्योगिक बहिःस्राव का उपचार अनिवार्य करना।
    • जैविक खेती को बढ़ावा देना।
    • जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी।
    • सरकार द्वारा 'नमामि गंगे' जैसी परियोजनाएँ।

b) वायु प्रदूषण:

  • परिभाषा: वायुमंडल में हानिकारक गैसों, धूल कणों और सूक्ष्म कणों की उपस्थिति जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है।
  • प्रमुख स्रोत/कारण:
    • जीवाश्म ईंधन का दहन: ताप विद्युत संयंत्र, औद्योगिक भट्टियाँ।
    • परिवहन: वाहनों से निकलने वाला धुआँ (कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड)।
    • उद्योग: सीमेंट, इस्पात, रसायन उद्योगों से उत्सर्जन।
    • कृषि: पराली जलाना, कृषि अपशिष्ट का दहन।
    • धूल: निर्माण कार्य, सड़क परिवहन से उत्पन्न धूल।
  • प्रमुख प्रदूषक: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), निलंबित कण पदार्थ (SPM), PM2.5, PM10, लेड (Pb), अमोनिया (NH3)।
  • प्रमुख प्रभाव:
    • स्वास्थ्य: श्वसन संबंधी बीमारियाँ (अस्थमा, ब्रोंकाइटिस), हृदय रोग, कैंसर।
    • पर्यावरणीय: अम्लीय वर्षा (SO2, NOx के कारण), ओजोन परत का क्षरण, ग्लोबल वार्मिंग।
    • दृश्यता: धुंध और कोहरे में वृद्धि।
  • नियंत्रण के उपाय:
    • स्वच्छ ईंधन (CNG, LPG) का उपयोग।
    • सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना।
    • औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर, स्क्रबर) लगाना।
    • पुनर्वनारोपण और हरित पट्टी का विकास।
    • वाहनों के लिए उत्सर्जन मानक (BS-VI) लागू करना।

c) भू-प्रदूषण (मृदा प्रदूषण):

  • परिभाषा: मृदा में हानिकारक पदार्थों का मिलना जिससे उसकी गुणवत्ता और उत्पादकता में कमी आती है।
  • प्रमुख स्रोत/कारण:
    • औद्योगिक अपशिष्ट: ठोस और तरल औद्योगिक कचरा।
    • कृषि: रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग।
    • नगरीय अपशिष्ट: ठोस कचरा, प्लास्टिक, ई-कचरा।
    • खनन: खनन गतिविधियों से निकलने वाला अपशिष्ट।
    • अम्लीय वर्षा: मृदा की रासायनिक संरचना को बदलती है।
  • प्रमुख प्रभाव:
    • मृदा की उर्वरता में कमी: कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव।
    • खाद्य श्रृंखला में विषाक्तता: मृदा से पौधों और फिर मानव में हानिकारक रसायनों का प्रवेश।
    • भूजल प्रदूषण: प्रदूषित मृदा से रिसकर भूजल का दूषित होना।
    • जैव विविधता का नुकसान: मृदा में रहने वाले सूक्ष्मजीवों और जीवों पर नकारात्मक प्रभाव।
  • नियंत्रण के उपाय:
    • जैविक खेती और जैविक उर्वरकों का उपयोग।
    • औद्योगिक और नगरीय अपशिष्ट का उचित प्रबंधन और पुनर्चक्रण।
    • प्लास्टिक और ई-कचरे का सुरक्षित निपटान।
    • वनारोपण और मृदा संरक्षण।

d) ध्वनि प्रदूषण:

  • परिभाषा: वातावरण में अवांछित और अत्यधिक उच्च स्तर की ध्वनि जो मानव स्वास्थ्य और शांति को बाधित करती है।
  • प्रमुख स्रोत/कारण:
    • उद्योग: मशीनों का शोर।
    • परिवहन: वाहनों के हॉर्न, इंजन का शोर, हवाई जहाज।
    • निर्माण कार्य: ड्रिलिंग, तोड़फोड़ का शोर।
    • मनोरंजन: लाउडस्पीकर, डीजे, पटाखे।
  • प्रमुख प्रभाव:
    • स्वास्थ्य: तनाव, उच्च रक्तचाप, नींद न आना, बहरापन, चिड़चिड़ापन।
    • मानसिक: एकाग्रता में कमी, कार्य क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव।
  • नियंत्रण के उपाय:
    • ध्वनि अवरोधक लगाना।
    • वाहनों में साइलेंसर का उपयोग।
    • औद्योगिक क्षेत्रों को आवासीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना।
    • शोर-शराबे वाले उपकरणों पर प्रतिबंध या नियमन।
    • शांत क्षेत्रों का निर्धारण।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB):

  • भारत सरकार का एक सांविधिक संगठन है जो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कार्य करता है।
  • इसका मुख्य कार्य पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार करना और उन्हें क्रियान्वित करना है।

2. नगरीय अपशिष्ट निपटान

समस्या: तीव्र नगरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण शहरों में ठोस अपशिष्ट (कचरा) की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका उचित निपटान एक बड़ी चुनौती है।

  • अपशिष्ट के प्रकार:
    • घरेलू अपशिष्ट: घरों से निकलने वाला कचरा (खाद्य अपशिष्ट, प्लास्टिक, कागज, धातु)।
    • औद्योगिक अपशिष्ट: उद्योगों से निकलने वाला कचरा (राख, धातु के टुकड़े, रसायन)।
    • वाणिज्यिक अपशिष्ट: दुकानों, कार्यालयों से निकलने वाला कचरा।
    • जैव-चिकित्सा अपशिष्ट: अस्पतालों से निकलने वाला कचरा (सुई, पट्टियाँ, दवाएँ)।
  • अपशिष्ट निपटान की समस्याएँ:
    • खुले में फेंकना: दुर्गंध, बीमारियों का फैलना, कीटों का प्रजनन स्थल।
    • भराव क्षेत्र (Landfill): शहरों के पास भूमि की कमी, भूजल प्रदूषण, मीथेन गैस का उत्सर्जन।
    • भस्मीकरण (Incineration): वायु प्रदूषण (हानिकारक गैसों का उत्सर्जन)।
    • पुनर्चक्रण का अभाव: कचरे का सही ढंग से पृथक्करण न होने से पुनर्चक्रण कठिन।
  • नियंत्रण और समाधान के उपाय:
    • कचरा पृथक्करण: घरों में ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना।
    • पुनर्चक्रण (Recycling): प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच का पुनर्चक्रण।
    • खाद बनाना (Composting): जैविक कचरे से खाद बनाना।
    • ऊर्जा उत्पादन: कचरे से बिजली बनाना (Waste-to-Energy Plants)।
    • कचरा कम करना (Reduce), पुनः उपयोग (Reuse), पुनर्चक्रण (Recycle) - 3R सिद्धांत का पालन।
    • स्वच्छ भारत अभियान: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर।

3. ग्रामीण-नगरीय प्रवास

परिभाषा: ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का शहरों की ओर स्थायी या अस्थायी रूप से स्थानांतरण ग्रामीण-नगरीय प्रवास कहलाता है।

  • प्रवास के कारण:
    • प्रतिकर्ष कारक (Push Factors - ग्रामीण क्षेत्रों से धकेलने वाले):
      • गरीबी और बेरोजगारी।
      • निम्न जीवन स्तर और सुविधाओं का अभाव (शिक्षा, स्वास्थ्य)।
      • प्राकृतिक आपदाएँ (सूखा, बाढ़)।
      • भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता दबाव।
      • सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ।
    • अपकर्ष कारक (Pull Factors - नगरीय क्षेत्रों की ओर खींचने वाले):
      • रोजगार के बेहतर अवसर।
      • उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ।
      • उच्च जीवन स्तर और बेहतर आय।
      • मनोरंजन और आधुनिक सुविधाएँ।
      • सामाजिक गतिशीलता के अवसर।
  • प्रवास के परिणाम:
    • नगरीय क्षेत्रों पर प्रभाव (नकारात्मक):
      • झुग्गी-झोपड़ी का विकास: आवास की कमी और उच्च किराये के कारण।
      • संसाधनों पर दबाव: जल, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक दबाव।
      • भीड़भाड़ और प्रदूषण: वाहनों की संख्या में वृद्धि, वायु और ध्वनि प्रदूषण।
      • अपराध में वृद्धि: सामाजिक तनाव और बेरोजगारी के कारण।
      • सामाजिक विघटन: परिवार से अलगाव, अज्ञात वातावरण।
    • ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव (मिश्रित):
      • सकारात्मक: प्रेषण (Remittances) के माध्यम से आय में वृद्धि, जीवन स्तर में सुधार।
      • नकारात्मक: लिंग असंतुलन (पुरुषों का पलायन), कृषि श्रम शक्ति में कमी, वृद्धों और बच्चों की देखभाल की समस्या।

4. झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ

परिभाषा: अनियोजित, भीड़भाड़ वाली, निम्न गुणवत्ता वाले आवासों का क्षेत्र जहाँ मूलभूत सुविधाओं (स्वच्छता, पेयजल, बिजली) का अभाव होता है, झुग्गी-झोपड़ी बस्ती कहलाती है।

  • विशेषताएँ:
    • अत्यधिक भीड़भाड़ और संकरी गलियाँ।
    • अस्थायी और निम्न गुणवत्ता वाले आवास (कच्चे मकान, टिन, प्लास्टिक)।
    • पेयजल, शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं का गंभीर अभाव।
    • बिजली और जल निकासी की व्यवस्था का अभाव।
    • उच्च अपराध दर और सामाजिक असुरक्षा।
    • स्वास्थ्य समस्याएँ (कुपोषण, बीमारियाँ)।
  • कारण:
    • ग्रामीण-नगरीय प्रवास के कारण शहरों में आवास की कमी।
    • आवास की उच्च लागत।
    • गरीबी और आय का निम्न स्तर।
    • अनियोजित नगरीय विकास।
  • उदाहरण: मुंबई की धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में से एक है। यहाँ लाखों लोग अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में रहते हैं।
  • सरकारी प्रयास:
    • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)।
    • झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास कार्यक्रम।
    • स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालयों का निर्माण।
    • बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान।

5. भूमि निम्नीकरण

परिभाषा: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा भूमि की उत्पादकता, उर्वरता और जैविक क्षमता में कमी आती है, भूमि निम्नीकरण कहलाती है।

  • भारत में स्थिति: भारत में लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर भूमि निम्नीकृत है, जिसमें से लगभग 28% वनों के अंतर्गत, 56% कृषि योग्य भूमि और शेष बंजर व गैर-कृषि भूमि है।
  • भूमि निम्नीकरण के कारण:
    • प्राकृतिक कारण:
      • मृदा अपरदन: जल (अत्यधिक वर्षा, बाढ़) और वायु (रेगिस्तानी क्षेत्रों में) द्वारा मृदा की ऊपरी परत का हटना।
      • लवणता और क्षारीयता: अत्यधिक सिंचाई और खराब जल निकासी के कारण मृदा में लवणों का जमाव।
      • जल-जमाव: खराब जल निकासी के कारण मृदा में पानी का जमाव।
      • मरुस्थलीकरण: शुष्क क्षेत्रों में मृदा की उर्वरता का नुकसान।
    • मानवीय कारण:
      • वनों की कटाई: मृदा अपरदन को बढ़ाता है।
      • अत्यधिक चराई: वनस्पति आवरण को हटाता है।
      • खनन और उत्खनन: भूमि की ऊपरी परत को नष्ट करता है।
      • अनुपयुक्त कृषि पद्धतियाँ: रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, गहन कृषि।
      • औद्योगिक अपशिष्ट: हानिकारक रसायनों का मृदा में मिलना।
      • नगरीय अपशिष्ट: ठोस कचरे का अनुचित निपटान।
  • प्रमुख प्रभाव:
    • कृषि उत्पादकता में कमी और खाद्य असुरक्षा।
    • जैव विविधता का नुकसान।
    • जलवायु परिवर्तन में योगदान (कार्बन पृथक्करण क्षमता में कमी)।
    • ग्रामीण गरीबी में वृद्धि।
  • नियंत्रण के उपाय:
    • वनारोपण और सामाजिक वानिकी: वनस्पति आवरण को बढ़ाना।
    • मृदा संरक्षण तकनीकें: समोच्च जुताई, वेदिका कृषि, पट्टीदार खेती।
    • जल प्रबंधन: उचित सिंचाई पद्धतियाँ (ड्रिप, स्प्रिंकलर), जल निकासी में सुधार।
    • जैविक खेती: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग।
    • खनन विनियमन: खनन के बाद भूमि का पुनर्वास।
    • अपशिष्ट प्रबंधन: औद्योगिक और नगरीय अपशिष्ट का उचित निपटान।

निष्कर्ष:
भारत में ये पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। तीव्र आर्थिक विकास की दौड़ में हमने अपने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचाया है। इन समस्याओं का समाधान केवल एकीकृत दृष्टिकोण, जनभागीदारी और सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाकर ही संभव है। सरकार, समुदाय और व्यक्तियों को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और समृद्ध भारत सुनिश्चित किया जा सके।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

1. निम्नलिखित में से कौन सा जल प्रदूषण का एक प्रमुख मानवीय स्रोत है?
a) अम्लीय वर्षा
b) ज्वालामुखी विस्फोट
c) औद्योगिक बहिःस्राव
d) समुद्री तूफान

2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का मुख्य कार्य क्या है?
a) केवल वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना
b) केवल जल प्रदूषण को नियंत्रित करना
c) पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार करना
d) नगरीय अपशिष्ट का निपटान करना

3. ग्रामीण-नगरीय प्रवास का एक प्रमुख 'प्रतिकर्ष कारक' (Push Factor) क्या है?
a) शहरों में बेहतर शिक्षा सुविधाएँ
b) ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी
c) शहरों में उच्च वेतन
d) शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ

4. 'धारावी' झुग्गी-झोपड़ी बस्ती भारत के किस शहर में स्थित है?
a) दिल्ली
b) कोलकाता
c) चेन्नई
d) मुंबई

5. निम्नलिखित में से कौन सा वायु प्रदूषण का एक प्रमुख प्रदूषक नहीं है?
a) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
b) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2)
c) ऑक्सीजन (O2)
d) निलंबित कण पदार्थ (SPM)

6. भूमि निम्नीकरण का एक प्रमुख मानवीय कारण क्या है?
a) मृदा अपरदन
b) लवणता
c) वनों की कटाई
d) जल-जमाव

7. नगरीय अपशिष्ट निपटान की 3R रणनीति में 'R' का सही क्रम क्या है?
a) Reduce, Reuse, Recycle
b) Recreate, Remove, Rebuild
c) Restore, Repair, Reclaim
d) Replant, Reorganize, Restrict

8. अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से किन गैसों के कारण होती है?
a) मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड
b) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
c) ऑक्सीजन और ओजोन
d) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन

9. 'नमामि गंगे' परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) गंगा नदी में पर्यटन को बढ़ावा देना
b) गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाना
c) गंगा नदी पर नए बाँध बनाना
d) गंगा नदी के किनारे औद्योगिक विकास करना

10. झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
a) उच्च जीवन स्तर
b) पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएँ
c) पेयजल और स्वच्छता का अभाव
d) सुनियोजित शहरी विकास


उत्तर कुंजी:

  1. c) औद्योगिक बहिःस्राव
  2. c) पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार करना
  3. b) ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी
  4. d) मुंबई
  5. c) ऑक्सीजन (O2)
  6. c) वनों की कटाई
  7. a) Reduce, Reuse, Recycle
  8. b) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
  9. b) गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाना
  10. c) पेयजल और स्वच्छता का अभाव

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए आप पूछ सकते हैं।

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