Class 12 Geography Notes Chapter 2 (प्रवास: प्रकार; कारण और परिणाम) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम भूगोल विषय की पुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के अध्याय 2 'प्रवास: प्रकार, कारण और परिणाम' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यानपूर्वक विचार करें।
अध्याय 2: प्रवास: प्रकार, कारण और परिणाम
1. प्रवास का परिचय
प्रवास (Migration) लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बसना है। यह जनसंख्या परिवर्तन के तीन मुख्य घटकों (जन्म, मृत्यु और प्रवास) में से एक है। प्रवास केवल जनसंख्या के आकार को ही नहीं, बल्कि उसके वितरण और संरचना को भी प्रभावित करता है।
2. प्रवास संबंधी आँकड़ों के स्रोत
भारत में प्रवास संबंधी आँकड़े भारत की जनगणना द्वारा एकत्रित किए जाते हैं। जनगणना में प्रवास की गणना दो आधारों पर की जाती है:
- जन्म का स्थान (Place of Birth): यदि जन्म का स्थान गणना के स्थान से भिन्न है, तो उसे प्रवासी माना जाता है।
- निवास का पिछला स्थान (Place of Last Residence): यदि व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी भी निवास का स्थान बदला है, तो उसे प्रवासी माना जाता है।
- जनगणना 2011 के अनुसार: निवास के पिछले स्थान के आधार पर 45.6 करोड़ लोग प्रवासी थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 37.7% है।
3. प्रवास के प्रकार
प्रवास को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
A. उद्गम और गंतव्य स्थान के आधार पर:
- अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration): जब लोग एक देश से दूसरे देश में प्रवास करते हैं।
- भारत के संदर्भ में: पड़ोसी देशों (नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान) से भारत में प्रवास और भारत से विदेशों (खाड़ी देश, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन आदि) में प्रवास।
- आंतरिक प्रवास (Internal Migration): जब लोग देश की सीमाओं के भीतर ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते हैं।
- अंतर-राज्यीय प्रवास (Inter-state Migration): एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवास (जैसे उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र)।
- अंतरा-राज्यीय प्रवास (Intra-state Migration): एक ही राज्य के भीतर प्रवास (जैसे उत्तर प्रदेश के एक जिले से दूसरे जिले में)।
B. ग्रामीण-नगरीय प्रवास धाराओं के आधार पर (भारत में):
भारत की जनगणना में आंतरिक प्रवास की चार धाराओं की पहचान की गई है:
- ग्रामीण से ग्रामीण (Rural to Rural - R-R): ग्रामीण क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास।
- विशेषता: यह धारा महिलाओं में अधिक प्रमुख है, जिसका मुख्य कारण विवाह है।
- ग्रामीण से नगरीय (Rural to Urban - R-U): ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में प्रवास।
- विशेषता: यह धारा पुरुषों में अधिक प्रमुख है, जिसका मुख्य कारण रोजगार की तलाश है। यह भारत में आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
- नगरीय से नगरीय (Urban to Urban - U-U): शहरी क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में प्रवास।
- विशेषता: बेहतर सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की तलाश में होता है।
- नगरीय से ग्रामीण (Urban to Rural - U-R): शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास।
- विशेषता: यह धारा कम प्रमुख है, लेकिन सेवानिवृत्ति या बेहतर जीवनशैली की तलाश में हो सकती है।
4. भारत में प्रवास की प्रवृत्तियाँ
- महिलाओं में प्रवास: निवास के पिछले स्थान के आधार पर, महिलाएँ आंतरिक प्रवास की प्रमुख भागीदार हैं (लगभग 75% प्रवासी महिलाएँ हैं)। इसका मुख्य कारण विवाह है, विशेषकर ग्रामीण से ग्रामीण धारा में।
- पुरुषों में प्रवास: पुरुषों में प्रवास का मुख्य कारण काम और रोजगार है, विशेषकर ग्रामीण से नगरीय धारा में।
- प्रमुख प्रवास धाराएँ (जनगणना 2011):
- ग्रामीण से ग्रामीण: कुल प्रवासियों का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 38%)। महिलाओं में सबसे प्रमुख धारा।
- ग्रामीण से नगरीय: कुल प्रवासियों का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 33%)। पुरुषों में सबसे प्रमुख धारा।
- प्रमुख प्रवास गलियारे (Corridors):
- उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्य उद्गम क्षेत्र (source regions) हैं।
- महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्य गंतव्य क्षेत्र (destination regions) हैं।
- मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता जैसे महानगर प्रवासियों को आकर्षित करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रवास:
- भारत से बाहर: भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीय) दुनिया के लगभग 110 देशों में फैले हुए हैं। 2001 में लगभग 2 करोड़ भारतीय विदेशों में रहते थे।
- भारत में: पड़ोसी देशों (बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका) से बड़ी संख्या में लोग भारत में प्रवास करते हैं।
5. प्रवास के कारण
प्रवास के कारणों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
A. प्रतिकर्ष कारक (Push Factors): वे कारक जो लोगों को उद्गम स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।
- गरीबी और बेरोजगारी: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी।
- निम्न जीवन स्तर: शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
- प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़, सूखा, भूकंप, सुनामी, चक्रवात आदि।
- सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष: जातीय संघर्ष, युद्ध, सांप्रदायिक दंगे।
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: कृषि का अलाभकारी होना।
- भूमिहीनता: ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन मजदूरों की बड़ी संख्या।
B. अपकर्ष कारक (Pull Factors): वे कारक जो लोगों को गंतव्य स्थान की ओर आकर्षित करते हैं।
- बेहतर रोजगार के अवसर: शहरी क्षेत्रों में अधिक और विविध रोजगार।
- उच्च मजदूरी: ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरों में अधिक आय।
- बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ: उच्च शिक्षा और विशिष्ट चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता।
- बेहतर जीवन स्तर: शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएँ और जीवनशैली।
- सुरक्षा और स्थिरता: कुछ मामलों में, बेहतर कानून-व्यवस्था।
6. प्रवास के परिणाम
प्रवास के उद्गम और गंतव्य दोनों क्षेत्रों पर विभिन्न प्रकार के परिणाम होते हैं:
A. आर्थिक परिणाम:
- प्रेषित धन (Remittances): प्रवासी अपने मूल स्थान पर धन भेजते हैं, जो उद्गम क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह गरीबी कम करने, भोजन, ऋण चुकाने, निवेश (शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि) में सहायक होता है।
- भारत दुनिया में प्रेषित धन का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है (2018 में 79 अरब अमेरिकी डॉलर)।
- श्रम बाजार पर प्रभाव: गंतव्य क्षेत्र में श्रम की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे मजदूरी कम हो सकती है। उद्गम क्षेत्र में श्रम की कमी हो सकती है, जिससे कृषि या अन्य गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- कौशल विकास: प्रवासी नए कौशल सीखते हैं और उन्हें अपने मूल स्थान पर वापस ला सकते हैं।
- मस्तिष्क पलायन (Brain Drain): उच्च शिक्षित और कुशल लोग बेहतर अवसरों के लिए विदेशों में प्रवास कर जाते हैं, जिससे मूल देश को नुकसान होता है।
- अधोविकास: ग्रामीण क्षेत्रों से युवा और कुशल लोगों के प्रवास से उन क्षेत्रों का विकास बाधित होता है।
B. जनांकिकीय परिणाम:
- जनसंख्या संरचना में परिवर्तन:
- उद्गम क्षेत्र: युवा, कार्यशील आयु वर्ग और पुरुषों की कमी होती है, जिससे जनसंख्या वृद्ध और महिला-प्रधान हो जाती है।
- गंतव्य क्षेत्र: युवा और कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या बढ़ती है, जिससे लिंगानुपात असंतुलित हो सकता है (पुरुषों की संख्या अधिक)।
- जनसंख्या वृद्धि: गंतव्य क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि दर बढ़ जाती है।
- आयु और लिंग चयनात्मकता: प्रवास अक्सर विशिष्ट आयु वर्ग (युवा वयस्क) और लिंग (पुरुष काम के लिए, महिला विवाह के लिए) को लक्षित करता है।
C. सामाजिक परिणाम:
- संस्कृति का मिश्रण: प्रवासियों के आने से विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और विचारों का आदान-प्रदान होता है, जिससे एक मिश्रित संस्कृति का विकास होता है।
- नवीनता का प्रसार: नए विचार, प्रौद्योगिकियाँ और सामाजिक प्रथाएँ एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैलती हैं।
- सामाजिक समस्याएँ:
- गंतव्य क्षेत्र: भीड़भाड़, अपराध, सामाजिक अलगाव, नशीले पदार्थों का सेवन, पहचान का संकट, झोपड़पट्टियों का विकास।
- उद्गम क्षेत्र: परिवार से अलगाव, अकेलापन, महिलाओं पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ।
- महिलाओं का सशक्तिकरण: कुछ मामलों में, पुरुष प्रवासियों द्वारा भेजे गए धन से महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं और घर के निर्णय लेने में अधिक भूमिका निभाती हैं।
D. पर्यावरणीय परिणाम:
- शहरी क्षेत्रों में दबाव: प्रवासियों की अधिक संख्या से शहरों में संसाधनों (पानी, आवास, परिवहन) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
- प्रदूषण: अनियोजित शहरीकरण, अपशिष्ट निपटान की समस्या और प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि) में वृद्धि।
- झोपड़पट्टियों का विकास: आवास की कमी के कारण अवैध बस्तियों और झोपड़पट्टियों का निर्माण।
- प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण: वनों की कटाई, जल निकायों का प्रदूषण।
E. अन्य परिणाम:
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ: भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में संक्रामक रोगों का प्रसार बढ़ सकता है। प्रवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है।
- मनोवैज्ञानिक समस्याएँ: प्रवासियों को नए वातावरण में समायोजन में कठिनाई, अकेलापन और तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
भारत में प्रवास संबंधी आँकड़े किस संस्था द्वारा एकत्रित किए जाते हैं?
a) नीति आयोग
b) भारतीय सर्वेक्षण विभाग
c) भारत की जनगणना
d) राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) -
जनगणना 2011 के अनुसार, निवास के पिछले स्थान के आधार पर भारत में कुल कितने लोग प्रवासी थे?
a) लगभग 25 करोड़
b) लगभग 35 करोड़
c) लगभग 45.6 करोड़
d) लगभग 55 करोड़ -
भारत में आंतरिक प्रवास की किस धारा में महिलाएँ सबसे अधिक प्रमुख हैं?
a) ग्रामीण से नगरीय
b) नगरीय से नगरीय
c) ग्रामीण से ग्रामीण
d) नगरीय से ग्रामीण -
पुरुषों में प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
a) विवाह
b) शिक्षा
c) काम और रोजगार
d) प्राकृतिक आपदाएँ -
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रवास का एक 'प्रतिकर्ष कारक' (Push Factor) है?
a) उच्च मजदूरी
b) बेहतर शिक्षा सुविधाएँ
c) बेरोजगारी
d) बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ -
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रवास का एक 'अपकर्ष कारक' (Pull Factor) है?
a) प्राकृतिक आपदाएँ
b) गरीबी
c) बेहतर रोजगार के अवसर
d) सामाजिक संघर्ष -
प्रवास के कारण उद्गम क्षेत्र में जनसंख्या की संरचना पर क्या प्रभाव पड़ता है?
a) युवा पुरुषों की संख्या बढ़ती है।
b) जनसंख्या वृद्ध और महिला-प्रधान हो जाती है।
c) लिंगानुपात संतुलित हो जाता है।
d) जनसंख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। -
प्रवासी अपने मूल स्थान पर जो धन भेजते हैं, उसे क्या कहते हैं?
a) निवेश
b) ऋण
c) प्रेषित धन (Remittances)
d) अनुदान -
भारत में प्रेषित धन का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता कौन है?
a) उत्तर प्रदेश
b) बिहार
c) महाराष्ट्र
d) भारत (वैश्विक स्तर पर) -
प्रवास के कारण शहरी क्षेत्रों में होने वाली पर्यावरणीय समस्या क्या है?
a) कृषि उत्पादन में वृद्धि
b) वनों का विस्तार
c) झोपड़पट्टियों का विकास और प्रदूषण
d) भूजल स्तर में वृद्धि
उत्तरमाला:
- c
- c
- c
- c
- c
- c
- b
- c
- d
- c
आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी संदेह की स्थिति में, आप पूछ सकते हैं।