Class 12 Geography Notes Chapter 3 (मानव विकास) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol)
प्रिय विद्यार्थियों, आज हम आपकी भूगोल पाठ्यपुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के अध्याय 3 'मानव विकास' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यान देना आवश्यक है।


अध्याय 3: मानव विकास

1. मानव विकास की अवधारणा:

  • परिभाषा: मानव विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोगों के विकल्पों में वृद्धि की जाती है ताकि वे एक स्वस्थ, लंबा और सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।
  • उद्गम: मानव विकास की अवधारणा डॉ. महबूब-उल-हक (पाकिस्तान) द्वारा प्रस्तुत की गई थी और प्रो. अमर्त्य सेन (भारत) ने इसका समर्थन किया।
  • लक्ष्य: लोगों के लिए विकल्पों का विस्तार करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, संसाधनों तक पहुँच, राजनीतिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।

2. मानव विकास के प्रमुख स्तंभ (घटक):
मानव विकास के चार मुख्य स्तंभ हैं जो इसे एक समग्र और न्यायसंगत प्रक्रिया बनाते हैं:

  • क. समता (Equity): इसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों तक समान पहुँच मिलनी चाहिए, चाहे वह लिंग, जाति, आय या भौगोलिक स्थिति के आधार पर कोई भी भेदभाव न हो।
  • ख. सतत पोषणीयता (Sustainability): इसका तात्पर्य है कि अवसरों की उपलब्धता वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी बनी रहनी चाहिए। संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वे भविष्य के लिए भी उपलब्ध रहें।
  • ग. उत्पादकता (Productivity): इसका अर्थ है मानव श्रम उत्पादकता में वृद्धि। लोगों को सक्षम और सशक्त बनाकर उनकी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करना ताकि वे राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
  • घ. सशक्तीकरण (Empowerment): इसका अर्थ है लोगों को अपने विकल्प चुनने की शक्ति प्रदान करना। इसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाना शामिल है ताकि वे समाज में अपनी भूमिका निभा सकें।

3. मानव विकास के उपागम (दृष्टिकोण):
मानव विकास को मापने और समझने के लिए विभिन्न उपागमों का उपयोग किया जाता है:

  • क. आय उपागम (Income Approach): यह मानव विकास का सबसे पुराना उपागम है। इसमें मानव विकास को आय के साथ जोड़ा जाता है। माना जाता है कि आय का उच्च स्तर मानव विकास के उच्च स्तर को दर्शाता है, क्योंकि अधिक आय से व्यक्ति अधिक विकल्पों तक पहुँच सकता है।
  • ख. कल्याण उपागम (Welfare Approach): यह उपागम मानव को सभी विकास गतिविधियों के लाभार्थी के रूप में देखता है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सुरक्षा पर अधिक व्यय करके मानव कल्याण को बढ़ाने का प्रयास करती है। लोग इसमें निष्क्रिय प्राप्तकर्ता होते हैं।
  • ग. आधारभूत आवश्यकता उपागम (Basic Needs Approach): इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित किया था। इसमें छह न्यूनतम आवश्यकताओं (स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जल आपूर्ति, स्वच्छता और आवास) की पहचान की गई है। इस उपागम में मानव विकल्पों के प्रश्न की उपेक्षा की जाती है।
  • घ. क्षमता उपागम (Capability Approach): इसे प्रो. अमर्त्य सेन ने प्रस्तुत किया था। इस उपागम में मानव क्षमताओं (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, संसाधनों तक पहुँच) के निर्माण पर जोर दिया जाता है। लोगों की क्षमताओं का विस्तार करके ही वे अपने विकल्पों का चयन कर सकते हैं।

4. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI):

  • परिचय: यह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी किया जाता है। यह मानव विकास को मापने का एक प्रमुख उपकरण है।
  • मापन के संकेतक: HDI तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है, जिनमें से प्रत्येक को 0 से 1 के बीच भार दिया जाता है:
    • क. स्वास्थ्य (Health): इसे जन्म के समय जीवन प्रत्याशा द्वारा मापा जाता है।
    • ख. शिक्षा (Education): इसे वयस्क साक्षरता दर और सकल नामांकन अनुपात (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा) द्वारा मापा जाता है।
    • ग. संसाधनों तक पहुँच (Access to Resources): इसे प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) द्वारा मापा जाता है, जो क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर डॉलर में व्यक्त की जाती है।
  • मूल्य सीमा: HDI का मान 0 से 1 के बीच होता है। 1 के जितना करीब मान होता है, मानव विकास का स्तर उतना ही उच्च होता है।

5. मानव गरीबी सूचकांक (Human Poverty Index - HPI):

  • परिचय: यह मानव विकास में कमी को मापता है। यह गैर-आय मापदंडों पर आधारित है।
  • मापन के संकेतक:
    • लंबी और स्वस्थ जीवन न जी पाना (जन्म के समय जीवन प्रत्याशा)।
    • ज्ञान का अभाव (वयस्क निरक्षरता दर)।
    • संसाधनों तक पहुँच का अभाव (स्वच्छ जल तक पहुँच न होना, अल्पपोषित बच्चों का अनुपात)।

6. भारत में मानव विकास:
भारत में मानव विकास के स्तर में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भिन्नताएँ पाई जाती हैं।

  • मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत की स्थिति:
    • भारत का HDI मूल्य वैश्विक औसत से कम रहा है, हालांकि इसमें लगातार सुधार हो रहा है।
    • स्वास्थ्य: जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है, लेकिन शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर अभी भी चिंता का विषय है।
    • शिक्षा: साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल साक्षरता दर 74.04% थी (पुरुष: 82.14%, महिला: 65.46%)। महिला साक्षरता दर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, लेकिन लैंगिक अंतर अभी भी मौजूद है।
    • संसाधनों तक पहुँच: प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है, लेकिन आय असमानता और गरीबी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ:
    • केरल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गोवा जैसे राज्यों का HDI उच्च है।
    • बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का HDI अपेक्षाकृत निम्न है।
    • केरल का HDI उच्च होने का मुख्य कारण इसकी उच्च साक्षरता दर, विशेषकर महिला साक्षरता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ हैं।
  • प्रमुख चुनौतियाँ:
    • लिंग असमानता: महिला साक्षरता, स्वास्थ्य और आर्थिक भागीदारी में अंतर।
    • क्षेत्रीय असमानताएँ: राज्यों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के बीच विकास के स्तर में भारी अंतर।
    • सामाजिक असमानताएँ: जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर अवसरों तक पहुँच में असमानता।
    • पर्यावरण संबंधी चिंताएँ: प्रदूषण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
    • गरीबी और कुपोषण: एक बड़ी आबादी अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है और कुपोषण का शिकार है।

7. भारत सरकार की पहलें (मानव विकास को बढ़ावा देने हेतु):
भारत सरकार ने मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं:

  • स्वच्छ भारत मिशन: स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार।
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना: वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM): ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।
  • सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA): शिक्षा के सार्वभौमीकरण के लिए।
  • कौशल विकास योजनाएं: युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करना।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

  1. मानव विकास की अवधारणा को किसने प्रस्तुत किया था?
    क) प्रो. अमर्त्य सेन
    ख) डॉ. महबूब-उल-हक
    ग) एलन सी. सैंपल
    घ) ग्रिफिथ टेलर

  2. निम्नलिखित में से कौन-सा मानव विकास का एक स्तंभ नहीं है?
    क) समता
    ख) सतत पोषणीयता
    ग) उत्पादकता
    घ) जनसंख्या वृद्धि

  3. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा प्रस्तावित मानव विकास का उपागम कौन-सा है?
    क) आय उपागम
    ख) कल्याण उपागम
    ग) आधारभूत आवश्यकता उपागम
    घ) क्षमता उपागम

  4. मानव विकास सूचकांक (HDI) के मापन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा संकेतक उपयोग नहीं किया जाता है?
    क) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा
    ख) प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय
    ग) सामाजिक असमानता
    घ) वयस्क साक्षरता दर

  5. मानव विकास सूचकांक (HDI) का मान किस सीमा के बीच होता है?
    क) 0 से 100
    ख) 0 से 1
    ग) 1 से 10
    घ) -1 से 1

  6. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल साक्षरता दर लगभग कितनी थी?
    क) 65.46%
    ख) 74.04%
    ग) 82.14%
    घ) 90.00%

  7. भारत में किस राज्य का मानव विकास सूचकांक (HDI) अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है?
    क) बिहार
    ख) उत्तर प्रदेश
    ग) केरल
    घ) ओडिशा

  8. मानव विकास में सशक्तीकरण का क्या अर्थ है?
    क) लोगों की आय में वृद्धि करना
    ख) लोगों को अपने विकल्प चुनने की शक्ति प्रदान करना
    ग) सरकार द्वारा अधिक कल्याणकारी योजनाएँ चलाना
    घ) केवल पुरुषों को सशक्त करना

  9. मानव गरीबी सूचकांक (HPI) किस पर आधारित है?
    क) केवल आय मापदंडों पर
    ख) गैर-आय मापदंडों पर
    ग) केवल शिक्षा मापदंडों पर
    घ) केवल स्वास्थ्य मापदंडों पर

  10. प्रो. अमर्त्य सेन ने मानव विकास के किस उपागम का समर्थन किया था?
    क) आय उपागम
    ख) कल्याण उपागम
    ग) आधारभूत आवश्यकता उपागम
    घ) क्षमता उपागम


उत्तरमाला:

  1. ख) डॉ. महबूब-उल-हक
  2. घ) जनसंख्या वृद्धि
  3. ग) आधारभूत आवश्यकता उपागम
  4. ग) सामाजिक असमानता
  5. ख) 0 से 1
  6. ख) 74.04%
  7. ग) केरल
  8. ख) लोगों को अपने विकल्प चुनने की शक्ति प्रदान करना
  9. ख) गैर-आय मापदंडों पर
  10. घ) क्षमता उपागम

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें!

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