Class 12 Geography Notes Chapter 5 (भूसंसाधन तथा कृषि) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम भूगोल के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'भूसंसाधन तथा कृषि' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल हमारी पृथ्वी के संसाधनों के उपयोग को समझने में सहायक है, बल्कि सरकारी परीक्षाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण खंड है। आइए, इसके हर पहलू को गहराई से समझते हैं।
अध्याय 5: भूसंसाधन तथा कृषि
1. भू-उपयोग (Land Use)
भू-उपयोग से तात्पर्य भूमि का विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग करने से है। भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है। हालाँकि, इसके केवल 93% भाग के ही भू-उपयोग संबंधी आँकड़े उपलब्ध हैं, क्योंकि पूर्वोत्तर राज्यों (असम को छोड़कर) और जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों का सर्वेक्षण नहीं किया गया है।
राजस्व विभाग द्वारा भू-उपयोग वर्गीकरण (9 श्रेणियाँ):
भू-उपयोग के आँकड़े भू-राजस्व विभाग द्वारा तैयार किए जाते हैं और इसे 9 वर्गों में वर्गीकृत किया गया है:
- वन क्षेत्र: वह भूमि जो वनों के अंतर्गत वर्गीकृत की गई है। इसमें वास्तविक वन क्षेत्र के साथ-साथ कानूनी रूप से आरक्षित वन भी शामिल होते हैं। भारत में राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार कुल क्षेत्रफल का 33% वन होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह लगभग 23.4% (2019) है।
- गैर-कृषि कार्यों में प्रयुक्त भूमि: इसमें बस्तियाँ, सड़कें, रेलमार्ग, उद्योग, दुकानें आदि शामिल हैं। यह शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण बढ़ रहा है।
- बंजर व व्यर्थ भूमि: इसमें पहाड़ी भू-भाग, मरुस्थल, खड्ड (रेवाइंस) आदि शामिल हैं, जिन्हें वर्तमान तकनीक से कृषि योग्य बनाना संभव नहीं है।
- स्थायी चारागाह व अन्य गोचर भूमि: यह भूमि पशुधन के चरने के लिए उपयोग की जाती है। पिछले कुछ दशकों में इस श्रेणी की भूमि में कमी आई है, जिससे पशुधन पर दबाव बढ़ा है।
- विविध वृक्षों, वृक्ष-फसलों व उपवनों के अधीन क्षेत्र: इसमें वे भूमि शामिल हैं जिन पर फलदार वृक्ष, बागान आदि लगे हैं और जो निवल बोए गए क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।
- कृषि योग्य बंजर भूमि: वह भूमि जिस पर पाँच कृषि वर्षों या उससे अधिक समय से खेती नहीं की गई है, लेकिन जिसे कृषि योग्य बनाया जा सकता है।
- वर्तमान परती भूमि: वह भूमि जिस पर पिछले एक कृषि वर्ष या उससे कम समय से खेती नहीं की गई है। भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए इसे परती छोड़ा जाता है।
- पुरातन परती भूमि: वह भूमि जिस पर एक कृषि वर्ष से अधिक लेकिन पाँच कृषि वर्षों से कम समय से खेती नहीं की गई है।
- निवल बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area - NSA): वह भूमि जिस पर फसलें बोई और काटी जाती हैं। यह भारत में कृषि भूमि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 45-46% है।
2. भारत में भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Changes in India)
भारत में भू-उपयोग में समय के साथ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जिनके मुख्य कारण हैं:
- अर्थव्यवस्था का आकार: जनसंख्या वृद्धि, बढ़ती आय और जीवन स्तर में सुधार के कारण संसाधनों की मांग बढ़ी है।
- अर्थव्यवस्था की संरचना: कृषि पर निर्भरता कम होकर उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर बदलाव आया है, जिससे गैर-कृषि कार्यों में प्रयुक्त भूमि में वृद्धि हुई है।
- कृषि क्षेत्र का विस्तार/संकुचन: हरित क्रांति के बाद कृषि भूमि का विस्तार हुआ, लेकिन शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग भी बढ़ा है।
प्रमुख प्रवृत्तियाँ:
- वन क्षेत्र: सरकारी नीतियों (जैसे राष्ट्रीय वन नीति) के कारण वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है।
- गैर-कृषि कार्यों में प्रयुक्त भूमि: शहरीकरण, सड़कों, रेलवे और उद्योगों के विस्तार के कारण इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।
- बंजर व व्यर्थ भूमि: प्रौद्योगिकी के विकास और सरकारी प्रयासों से इस भूमि के कुछ हिस्से को कृषि योग्य बनाया गया है, जिससे इसमें कमी आई है।
- स्थायी चारागाह: इस श्रेणी में कमी आई है, जो पशुधन के लिए एक चुनौती है।
- निवल बोया गया क्षेत्र (NSA): कुल NSA में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में इसमें कमी भी आई है।
3. साझा संपत्ति संसाधन (Common Property Resources - CPRs)
साझा संपत्ति संसाधन वे संसाधन हैं जिन पर समुदाय का साझा स्वामित्व होता है और जिनका उपयोग समुदाय के सभी सदस्य करते हैं।
- उदाहरण: गाँव के चारागाह, वन, जल निकाय, सामुदायिक वन आदि।
- महत्व: ये ग्रामीण आजीविका, विशेषकर गरीबों और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये ईंधन, चारा, लघु वन उत्पाद और पानी उपलब्ध कराते हैं।
- गिरावट: जनसंख्या दबाव, निजीकरण और अतिक्रमण के कारण CPRs में कमी आई है, जिससे ग्रामीण समुदायों, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले वर्गों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
4. कृषि भू-उपयोग (Agricultural Land Use)
- निवल बोया गया क्षेत्र (NSA): वह भूमि जिस पर वर्ष में कम से कम एक बार फसल बोई जाती है।
- सकल फसली क्षेत्र (Gross Cropped Area - GCA): यह निवल बोए गए क्षेत्र और उस भूमि को जोड़कर प्राप्त होता है जिस पर वर्ष में एक से अधिक बार फसल बोई जाती है।
- फसल गहनता (Cropping Intensity - CI): यह किसी क्षेत्र में भूमि के कृषि उपयोग की तीव्रता को दर्शाता है।
फसल गहनता = (सकल फसली क्षेत्र / निवल बोया गया क्षेत्र) × 100
जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा अधिक होती है (जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश), वहाँ फसल गहनता अधिक होती है।
5. भारत में कृषि की समस्याएँ (Problems of Agriculture in India)
- भूमि संसाधनों का निम्नीकरण:
- मृदा अपरदन: जल और वायु द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत का हटना।
- लवणीकरण और क्षारीकरण: अत्यधिक सिंचाई और खराब जल निकासी के कारण मिट्टी में लवण और क्षार का जमाव।
- जल जमाव: अत्यधिक सिंचाई और खराब जल निकासी के कारण खेतों में पानी का भर जाना।
- रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग: मृदा की प्राकृतिक उर्वरता को कम करना और भूजल को प्रदूषित करना।
- मरुस्थलीकरण: शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भूमि का रेगिस्तान में बदलना।
- कृषि उत्पादकता:
- भारत में प्रति हेक्टेयर कृषि उत्पादकता विकसित देशों की तुलना में कम है।
- प्रादेशिक भिन्नताएँ: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता अधिक है, जबकि पूर्वी भारत (जैसे बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल) में यह अपेक्षाकृत कम है।
- कारण: सिंचाई सुविधाओं का अभाव, निम्न गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरकों का कम उपयोग, छोटे और खंडित खेत, पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ।
6. भू-निम्नीकरण और संरक्षण (Land Degradation and Conservation)
भू-निम्नीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें भूमि की उत्पादकता और गुणवत्ता कम हो जाती है।
- कारण:
- प्राकृतिक: मृदा अपरदन (जल, वायु), भूस्खलन।
- मानवीय: वनों की कटाई, अत्यधिक चराई, खनन, शहरीकरण, अनुचित कृषि पद्धतियाँ (जैसे झूम कृषि, रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग), अत्यधिक सिंचाई।
- नियंत्रण के उपाय:
- वनीकरण और चारागाह प्रबंधन: वृक्षारोपण और चारागाहों का उचित प्रबंधन।
- समोच्च जुताई: ढलानों पर समोच्च रेखाओं के समानांतर जुताई।
- पट्टीदार कृषि: फसलों को पट्टियों में उगाना और बीच में घास की पट्टियाँ छोड़ना।
- सीढ़ीदार खेत बनाना: पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकने के लिए।
- रासायनिक उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग: जैविक खादों को बढ़ावा देना।
- जलसंभर प्रबंधन: जल और भूमि संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन।
7. जलसंभर प्रबंधन (Watershed Management)
जलसंभर प्रबंधन एक भौगोलिक इकाई (जलसंभर) के भीतर भूमि, जल और वनस्पति जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पुनरुत्थान और विवेकपूर्ण उपयोग की प्रक्रिया है।
- उद्देश्य:
- सतही जल और भूजल की उपलब्धता बढ़ाना।
- जल संचयन, भूजल पुनर्भरण।
- मृदा अपरदन को रोकना।
- जैव विविधता में वृद्धि।
- ग्रामीण समुदायों की आजीविका में सुधार।
- सरकारी पहल:
- हरियाली: केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित यह परियोजना ग्राम पंचायतों के माध्यम से चलाई जाती है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई, मत्स्य पालन और वनीकरण के लिए जल संचयन संरचनाओं का निर्माण करना है।
- नीरू-मीरू (जल और आप): आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा चलाया गया कार्यक्रम।
- अरावली जल संसद: राजस्थान सरकार द्वारा चलाया गया कार्यक्रम।
- जलागम विकास परियोजनाएँ: विभिन्न राज्यों में चलाई जा रही हैं।
- सफलता का उदाहरण: महाराष्ट्र का रालेगण सिद्धि गाँव जलसंभर प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने जल संचयन और वृक्षारोपण के माध्यम से अपनी पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया।
8. सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development)
सतत पोषणीय विकास का अर्थ है संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी वे उपलब्ध रहें। भूसंसाधन और कृषि के संदर्भ में, इसका अर्थ है ऐसी कृषि पद्धतियों और भूमि प्रबंधन को अपनाना जो पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ हों, आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों और सामाजिक रूप से न्यायसंगत हों।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल कितना है?
a) 30.8 लाख वर्ग किमी
b) 32.8 लाख वर्ग किमी
c) 34.8 लाख वर्ग किमी
d) 36.8 लाख वर्ग किमी -
राजस्व विभाग द्वारा भू-उपयोग के कितने वर्गों में वर्गीकरण किया जाता है?
a) 7
b) 8
c) 9
d) 10 -
निम्नलिखित में से कौन-सा साझा संपत्ति संसाधन (CPR) का उदाहरण नहीं है?
a) सामुदायिक वन
b) चारागाह भूमि
c) निजी खेत
d) गाँव का तालाब -
'हरियाली' परियोजना का संबंध किससे है?
a) वायु प्रदूषण नियंत्रण
b) जलसंभर विकास
c) शहरीकरण को बढ़ावा
d) औद्योगिक विकास -
निवल बोया गया क्षेत्र (NSA) और सकल फसली क्षेत्र (GCA) के अनुपात को क्या कहते हैं?
a) कृषि उत्पादकता
b) फसल विविधता
c) फसल गहनता
d) भूमि उपयोग दक्षता -
निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भारत में भू-निम्नीकरण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार नहीं है?
a) वनों की कटाई
b) अत्यधिक सिंचाई
c) सौर ऊर्जा का उपयोग
d) अत्यधिक चराई -
भारत में किस राज्य में 'नीरू-मीरू' कार्यक्रम चलाया गया?
a) राजस्थान
b) महाराष्ट्र
c) आंध्र प्रदेश
d) गुजरात -
किस पंचवर्षीय योजना में जलसंभर विकास को प्राथमिकता दी गई थी?
a) पहली
b) सातवीं
c) नौवीं
d) दसवीं (NCERT में दसवीं पंचवर्षीय योजना का उल्लेख है, जिसमें जलसंभर विकास को प्राथमिकता दी गई थी।) -
भारत में किस क्षेत्र में कृषि उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है?
a) पंजाब और हरियाणा
b) पश्चिमी उत्तर प्रदेश
c) पूर्वी भारत
d) तमिलनाडु -
'वर्तमान परती भूमि' का अर्थ क्या है?
a) वह भूमि जिस पर 5 वर्ष से अधिक समय से खेती न की गई हो।
b) वह भूमि जिस पर पिछले एक कृषि वर्ष या उससे कम समय से खेती न की गई हो।
c) वह भूमि जो कृषि के लिए अनुपयुक्त हो।
d) वह भूमि जो स्थायी चारागाह के लिए आरक्षित हो।