Class 12 Geography Notes Chapter 5 (प्राथमिक क्रियाएँ) – Manav Bhugol ke Mool Sidhant Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम मानव भूगोल के मूल सिद्धांत पुस्तक के अध्याय 5 'प्राथमिक क्रियाएँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मानव की उन आधारभूत आर्थिक गतिविधियों का वर्णन है जो सीधे प्रकृति से जुड़ी हैं। इन क्रियाओं को समझना आपके लिए न केवल विषय की गहरी समझ विकसित करेगा, बल्कि परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन में सहायक होगा।
अध्याय 5: प्राथमिक क्रियाएँ (Primary Activities)
परिचय:
प्राथमिक क्रियाएँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जो सीधे पर्यावरण पर निर्भर करती हैं, क्योंकि इनमें पृथ्वी के संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति, भवन निर्माण सामग्री और खनिजों का उपयोग किया जाता है। इनमें आखेट (शिकार), भोजन संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वन कटाई, कृषि और खनन शामिल हैं।
1. भोजन संग्रह (Gathering) और आखेट (Hunting):
- सबसे प्राचीन आर्थिक क्रिया: यह मानव की सबसे प्राचीन ज्ञात आर्थिक क्रिया है।
- निर्भरता: लोग अपने जीवन-निर्वाह के लिए पौधों और पशुओं पर निर्भर रहते हैं।
- तकनीक और पूंजी: इसमें कम पूंजी और निम्न स्तरीय तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है।
- उत्पाद: एकत्रित उत्पाद का उपयोग भोजन, वस्त्र और आश्रय के लिए किया जाता है।
- आधुनिक समय में महत्व: विश्व के कुछ भागों में अभी भी यह क्रिया की जाती है, लेकिन इसका महत्व लगातार घट रहा है।
- क्षेत्र:
- उच्च अक्षांश क्षेत्र: उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया और दक्षिणी चिली।
- निम्न अक्षांश क्षेत्र: अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया के आंतरिक भाग।
- व्यावसायिक संग्रह: कुछ क्षेत्रों में मूल्यवान पौधों के हिस्सों जैसे छाल, पत्तियाँ, फल और औषधीय पौधों का संग्रह कर उन्हें बाजारों में बेचा जाता है। ये उत्पाद प्रसंस्करण के बाद उपयोग में लाए जाते हैं (जैसे च्युइंग गम के लिए चिकल, चमड़ा शोधन के लिए टैनिन, कॉर्क)।
2. पशुचारण (Pastoralism):
मानव ने जब यह महसूस किया कि आखेट से जीवन-निर्वाह कठिन है, तो उसने पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया।
अ) चलवासी पशुचारण (Nomadic Herding/Pastoral Nomadism):
- विशेषताएँ:
- पशुचारक अपने पशुओं के साथ चारागाहों और पानी की उपलब्धता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं।
- यह एक प्राचीन जीवन-निर्वाह गतिविधि है।
- पशुओं का झुंड आमतौर पर एक निश्चित मार्ग का अनुसरण करता है।
- पशुओं में भेड़, बकरी, ऊँट, याक और रेनडियर शामिल होते हैं, जो क्षेत्र की जलवायु के अनुसार भिन्न होते हैं।
- क्षेत्र:
- उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप होते हुए मध्य एशिया और मंगोलिया तक।
- सहारा और दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका के कुछ भाग।
- उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में टुंड्रा प्रदेश।
- आधुनिक स्थिति: राजनीतिक सीमाओं के निर्धारण और नए बस्तियों के विकास के कारण चलवासी पशुचारकों के मार्गों में कमी आई है और इनकी संख्या घट रही है।
ब) वाणिज्यिक पशुधन पालन (Commercial Livestock Rearing):
- विशेषताएँ:
- यह चलवासी पशुचारण की तुलना में अधिक व्यवस्थित और पूंजी-गहन है।
- पशुओं को स्थायी बाड़ों (रेंच) में पाला जाता है।
- एक ही प्रकार के पशुओं जैसे भेड़, गाय-बैल, बकरी या घोड़े पाले जाते हैं।
- मुख्य उद्देश्य मांस, ऊन, खाल और डेयरी उत्पादों का उत्पादन और बिक्री करना है।
- वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाता है (पशु प्रजनन, रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य)।
- क्षेत्र: न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रेयरी क्षेत्र।
3. कृषि (Agriculture):
कृषि विश्व के विभिन्न भागों में अलग-अलग तरीकों से की जाती है।
अ) निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture):
- उद्देश्य: स्थानीय उपभोग के लिए उत्पादन।
- प्रकार:
- आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture):
- स्थानांतरणशील कृषि (Shifting Cultivation/Slash and Burn):
- किसान जंगल के एक छोटे टुकड़े को साफ करते हैं, पेड़ों को काटते और जलाते हैं। राख का उपयोग उर्वरक के रूप में होता है।
- कुछ वर्षों तक खेती करने के बाद, जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो वे नए क्षेत्र में चले जाते हैं।
- उपकरण: साधारण औजार जैसे लकड़ी का हल, कुदाल।
- फसलें: मक्का, कसावा, शकरकंद, दालें।
- स्थानीय नाम: झूमिंग (उत्तर-पूर्वी भारत), मिल्पा (मध्य अमेरिका और मैक्सिको), लदांग (इंडोनेशिया और मलेशिया), रे (वियतनाम)।
- समस्याएँ: वनोन्मूलन, मृदा अपरदन, पर्यावरण असंतुलन।
- स्थानांतरणशील कृषि (Shifting Cultivation/Slash and Burn):
- गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture):
- विशेषताएँ: अधिक जनसंख्या वाले मानसूनी एशिया में प्रचलित।
- उद्देश्य: प्रति इकाई भूमि से अधिक उत्पादन प्राप्त करना।
- श्रम: मानव श्रम का अत्यधिक उपयोग।
- पूंजी: सीमित पूंजी निवेश।
- उर्वरक: गोबर की खाद और हरी खाद का उपयोग।
- प्रकार:
- चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि: मानसूनी एशिया के अधिकांश भागों में चावल मुख्य फसल है। खेत छोटे होते हैं, और परिवार का पूरा श्रम लगता है।
- चावल रहित गहन निर्वाह कृषि: उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया और उत्तरी जापान में जहाँ जलवायु चावल के लिए उपयुक्त नहीं है, वहाँ गेहूँ, जौ, सोयाबीन और बाजरा जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
- आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture):
ब) रोपण कृषि (Plantation Agriculture):
- विशेषताएँ:
- यूरोपीय उपनिवेशवादियों द्वारा उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शुरू की गई।
- बड़े बागान या फार्म, एकल फसल (मोनोकल्चर)।
- फसलें: चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले, अनानास।
- उच्च पूंजी निवेश, वैज्ञानिक विधियों का उपयोग, कुशल प्रबंधन, तकनीकी सहायता।
- सस्ते श्रम की आवश्यकता।
- उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए कारखानों का विकास।
- उत्पाद सीधे बाजार में बेचे जाते हैं।
- उदाहरण:
- फ्रांसीसी: पश्चिम अफ्रीका में कॉफी और कोको।
- ब्रिटिश: भारत और श्रीलंका में चाय, मलेशिया में रबड़, वेस्टइंडीज में गन्ना और केले।
- स्पेनिश और अमेरिकी: फिलीपींस में नारियल और गन्ना।
- इंडोनेशिया में डच: गन्ना।
- ब्राजील: कॉफी के बड़े बागान (फेजेंडा)।
स) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि (Extensive Commercial Grain Cultivation):
- विशेषताएँ:
- कम जनसंख्या वाले अर्ध-शुष्क आंतरिक प्रदेशों में प्रचलित।
- बड़े फार्म (सैकड़ों हेक्टेयर)।
- मशीनीकरण (हल चलाने से लेकर कटाई तक)।
- मुख्य फसल: गेहूँ, साथ में मक्का, जौ, राई और जई भी उगाई जाती हैं।
- प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक, लेकिन प्रति एकड़ उत्पादन कम।
- क्षेत्र: यूरेशिया के स्टेपीज़, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेंटीना के पंपाज़, ऑस्ट्रेलिया के डाउंस, दक्षिण अफ्रीका के वेल्ड्स और न्यूजीलैंड के कैंटरबरी के मैदान।
द) मिश्रित कृषि (Mixed Farming):
- विशेषताएँ:
- फसल उत्पादन और पशुपालन दोनों को समान महत्व दिया जाता है।
- फसलें: गेहूँ, जौ, राई, मक्का, जई, और चारा फसलें।
- चारा फसलें कृषि का महत्वपूर्ण घटक हैं।
- पशु: गाय, भेड़, सूअर, मुर्गी।
- उच्च पूंजी निवेश, गहन कृषि, कुशल किसान।
- क्षेत्र: उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, पूर्वी उत्तरी अमेरिका, यूरेशिया के कुछ भाग और दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश।
य) डेयरी कृषि (Dairy Farming):
- विशेषताएँ:
- दुधारू पशुओं के पालन-पोषण पर विशेष ध्यान।
- श्रम और पूंजी गहन।
- पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और पशु चिकित्सा पर अधिक खर्च।
- ताजे दूध और डेयरी उत्पादों की शहरी बाजारों में उच्च मांग।
- परिवहन (रेफ्रिजरेटर, पाश्चुरीकरण) का महत्व।
- क्षेत्र:
- सबसे बड़ा क्षेत्र: उत्तरी-पश्चिमी यूरोप।
- दूसरा क्षेत्र: कनाडा।
- तीसरा क्षेत्र: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और तस्मानिया।
र) भूमध्यसागरीय कृषि (Mediterranean Agriculture):
- विशेषताएँ:
- भूमध्यसागरीय जलवायु वाले क्षेत्रों में अत्यधिक विशिष्ट कृषि।
- खट्टे फलों (अंगूर, संतरे, अंजीर, जैतून) की खेती।
- अंगूर की खेती (विटिकल्चर) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे विश्व के बेहतरीन शराब का उत्पादन होता है।
- शुष्क ग्रीष्मकाल में सिंचाई का उपयोग।
- सर्दियों में सब्जियां और फूल उगाए जाते हैं।
- क्षेत्र: भूमध्य सागर के दोनों ओर के देश (दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका), कैलिफोर्निया (संयुक्त राज्य अमेरिका), मध्य चिली, दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका और दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया।
ल) बाजार के लिए सब्जी व बागवानी कृषि (Market Gardening and Horticulture):
- विशेषताएँ:
- उच्च मूल्य वाली फसलें जैसे सब्जियां, फल और फूल।
- शहरी बाजारों के पास की जाती है।
- छोटे खेत, गहन कृषि, पूंजी और श्रम गहन।
- उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई का अधिक उपयोग।
- ट्रक कृषि (Truck Farming): जहाँ किसान सब्जियां उगाते हैं और उन्हें रात में ट्रकों द्वारा बाजार तक पहुँचाते हैं (एक रात में तय की जा सकने वाली दूरी)।
- पुष्प कृषि (Floriculture): नीदरलैंड फूलों की खेती के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर ट्यूलिप।
- क्षेत्र: पश्चिमी यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तर-पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र।
व) सहकारी कृषि (Co-operative Farming):
- विशेषताएँ:
- किसानों का एक समूह स्वेच्छा से अधिक लाभ के लिए एक सहकारी संस्था बनाता है।
- व्यक्तिगत भूमि बनी रहती है, लेकिन कृषि के कुछ या सभी कार्य सामूहिक रूप से किए जाते हैं।
- सामूहिक रूप से कृषि आदानों की खरीद और उत्पादों की बिक्री।
- डेनमार्क में यह सबसे सफल है, जहाँ लगभग हर किसान एक सहकारी सदस्य है।
- क्षेत्र: डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, इटली।
श) सामूहिक कृषि (Collective Farming/Kolkoz):
- विशेषताएँ:
- सोवियत संघ में शुरू की गई (कोल्खोज)।
- कृषि के सभी संसाधनों (भूमि, पशुधन, उपकरण) का स्वामित्व समाज के पास होता है।
- किसान अपनी भूमि, पशुधन और उपकरण समूह को सौंप देते हैं।
- किसान सामूहिक श्रम करते हैं और उत्पादन में हिस्सा प्राप्त करते हैं।
- इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि और खाद्य आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था, लेकिन यह सफल नहीं रही।
4. खनन (Mining):
- परिचय: पृथ्वी की सतह से खनिजों को निकालने की प्रक्रिया।
- खनन को प्रभावित करने वाले कारक:
- भौतिक कारक: खनिज निक्षेप का आकार, श्रेणी (गुणवत्ता), और उपस्थिति की अवस्था (गहराई)।
- आर्थिक कारक: खनिज की मांग, उपलब्ध तकनीक, पूंजी निवेश, परिवहन और श्रम लागत।
- खनन की विधियाँ:
- धरातलीय खनन (Surface Mining/Open-cast Mining):
- जब खनिज सतह के करीब होते हैं।
- सबसे सस्ती और आसान विधि।
- सुरक्षित, कम पूंजी की आवश्यकता।
- भूमिगत खनन (Underground Mining/Shaft Mining):
- जब खनिज गहराई में होते हैं।
- खड़ी शाफ्ट (गहरे कुएँ) खोदकर खनिजों तक पहुँचा जाता है।
- लिफ्ट, वेंटिलेशन प्रणाली, सुरक्षा उपकरण और मशीनरी की आवश्यकता।
- महंगी और जोखिम भरी विधि (गैस, आग, बाढ़, छत गिरने का खतरा)।
- धरातलीय खनन (Surface Mining/Open-cast Mining):
- खनन का बढ़ता महत्व: औद्योगीकरण के साथ खनिजों की मांग बढ़ी है।
- विकासशील देशों में खनन: श्रम सस्ता होने के कारण कई विकासशील देश खनन कार्यों में लगे हुए हैं।
- विकसित देशों में खनन: उच्च श्रम लागत के कारण विकसित देश अब अपने खनन कार्यों को कम कर रहे हैं, लेकिन उच्च यांत्रिकृत खनन जारी है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs):
-
निम्नलिखित में से कौन-सी एक प्राथमिक क्रिया नहीं है?
अ) आखेट
ब) कृषि
स) विनिर्माण
द) खनन -
'झूमिंग' कृषि का संबंध किस देश/क्षेत्र से है?
अ) इंडोनेशिया
ब) मध्य अमेरिका
स) उत्तर-पूर्वी भारत
द) वियतनाम -
विश्व में वाणिज्यिक पशुधन पालन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है:
अ) अमेजन बेसिन
ब) सहारा मरुस्थल
स) न्यूजीलैंड
द) आर्कटिक प्रदेश -
'फेजेंडा' नामक बड़े कॉफी बागान किस देश में पाए जाते हैं?
अ) भारत
ब) ब्राजील
स) मलेशिया
द) श्रीलंका -
भूमध्यसागरीय कृषि की मुख्य विशेषता क्या है?
अ) चावल की गहन खेती
ब) खट्टे फलों की कृषि
स) विस्तृत अनाज उत्पादन
द) डेयरी उत्पादों का उत्पादन -
'ट्रक कृषि' किस प्रकार की कृषि से संबंधित है?
अ) रोपण कृषि
ब) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि
स) बाजार के लिए सब्जी व बागवानी कृषि
द) गहन निर्वाह कृषि -
निम्नलिखित में से किस देश में सहकारी कृषि सबसे अधिक सफल रही है?
अ) रूस
ब) भारत
स) डेनमार्क
द) संयुक्त राज्य अमेरिका -
जब खनिज पृथ्वी की सतह के करीब होते हैं, तो किस खनन विधि का उपयोग किया जाता है?
अ) भूमिगत खनन
ब) शाफ्ट खनन
स) धरातलीय खनन
द) कूपकी खनन -
निम्नलिखित में से कौन-सा एक चलवासी पशुचारण का पशु नहीं है?
अ) भेड़
ब) बकरी
स) याक
द) सूअर -
'मिल्पा' किस प्रकार की कृषि का स्थानीय नाम है?
अ) गहन निर्वाह कृषि
ब) रोपण कृषि
स) स्थानांतरणशील कृषि
द) मिश्रित कृषि
उत्तरमाला:
- स) विनिर्माण
- स) उत्तर-पूर्वी भारत
- स) न्यूजीलैंड
- ब) ब्राजील
- ब) खट्टे फलों की कृषि
- स) बाजार के लिए सब्जी व बागवानी कृषि
- स) डेनमार्क
- स) धरातलीय खनन
- द) सूअर
- स) स्थानांतरणशील कृषि
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको अध्याय 5 की तैयारी में अत्यधिक सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई को जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!