Class 12 Geography Notes Chapter 6 (जल-संयाधन) – Bharat Log aur Arthvyavstha (Bhugol) Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी भूगोल की पाठ्यपुस्तक 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' के अध्याय 6 'जल-संसाधन' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जल संसाधन भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है। हम इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं, आंकड़ों और अवधारणाओं को गहराई से समझेंगे ताकि आपकी तैयारी पुख्ता हो सके।
अध्याय 6: जल-संसाधन (विस्तृत नोट्स)
1. जल एक महत्वपूर्ण संसाधन
- जल एक चक्रीय संसाधन है, जिसका उपयोग किया जा सकता है और पुनः उपयोग भी।
- पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है, लेकिन इसमें से अधिकांश (97%) खारा जल है।
- मीठा जल केवल 3% है, जिसमें से भी 2% बर्फ की चोटियों और ग्लेशियरों में जमा है।
- मानव उपयोग के लिए वास्तव में केवल 1% मीठा जल ही उपलब्ध है।
2. भारत में जल संसाधन
- भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का 2.45%, विश्व की जनसंख्या का 16% और जल संसाधनों का 4% है।
- भारत में कुल नवीकरणीय जल संसाधन 1,869 घन किलोमीटर प्रति वर्ष अनुमानित है।
- हालांकि, उपलब्ध जल का केवल 60% ही उपयोग किया जा सकता है (लगभग 1,122 घन किमी), क्योंकि स्थलाकृति, तकनीकी और आर्थिक बाधाओं के कारण शेष जल अनुपयोगी है।
अ) सतही जल संसाधन (Surface Water Resources)
- भारत में सतही जल के मुख्य स्रोत नदियाँ, झीलें, तालाब और जलाशय हैं।
- भारत में लगभग 10,360 नदियाँ और उनकी सहायक नदियाँ हैं, जिनकी लंबाई 1.6 किमी से अधिक है।
- इन नदियों का औसत वार्षिक प्रवाह 1,869 घन किमी अनुमानित है।
- प्रमुख नदी बेसिन: गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, नर्मदा, तापी।
- गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी बेसिन में भारत के कुल सतही जल संसाधनों का लगभग एक-तिहाई भाग है।
- जल उपलब्धता: उत्तरी भारत की नदियाँ (हिमालयी नदियाँ) बारहमासी होती हैं, जबकि दक्षिणी भारत की नदियाँ (प्रायद्वीपीय नदियाँ) मौसमी होती हैं।
ब) भौम जल संसाधन (Groundwater Resources)
- भारत में कुल पुनः पूरित योग्य भौम जल संसाधन लगभग 432 घन किमी प्रति वर्ष है।
- इसका लगभग 46% गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन में पाया जाता है।
- उपयोग: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भौम जल का उपयोग बहुत अधिक है।
- कुछ राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल आदि में भौम जल का उपयोग कम है।
- गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा और महाराष्ट्र में भौम जल उपयोग मध्यम है।
स) लैगून और पश्च जल (Lagoons and Backwaters)
- भारत की लंबी तटरेखा पर कई लैगून और पश्च जल क्षेत्र हैं, विशेषकर केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में।
- इनमें खारा जल होता है, लेकिन इनका उपयोग मछली पालन और चावल की कुछ किस्मों (जो खारे जल को सहन कर सकती हैं) की सिंचाई के लिए किया जाता है।
- उदाहरण: केरल में कयाल।
3. जल की माँग और उपयोग (Water Demand and Utilization)
- भारत में जल की माँग मुख्य रूप से कृषि, घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों से आती है।
- क्षेत्रीय उपयोग:
- कृषि (सिंचाई): भारत में कुल जल उपयोग का लगभग 89% कृषि में होता है।
- घरेलू उपयोग: लगभग 9%।
- औद्योगिक उपयोग: लगभग 2%।
- सिंचाई की आवश्यकता:
- भारत में वर्षा का स्थानिक और सामयिक वितरण अत्यधिक असमान है।
- कुछ क्षेत्र सूखे की चपेट में आते हैं।
- उच्च उत्पादकता वाली फसलों के लिए नियमित जल आपूर्ति आवश्यक है।
- हरित क्रांति की सफलता सिंचाई पर निर्भर थी।
- सिंचाई के प्रमुख क्षेत्र:
- पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल बोए गए क्षेत्र का 85% से अधिक सिंचित है।
- दक्कन के पठार, राजस्थान और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों में भी सिंचाई महत्वपूर्ण है।
4. जल गुणवत्ता का ह्रास (Degradation of Water Quality)
- जल की गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता से है, अर्थात इसमें अवांछित बाहरी पदार्थों का न होना।
- भारत में जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या है।
- प्रदूषण के स्रोत:
- औद्योगिक अपशिष्ट: उद्योगों से निकलने वाले विषैले रसायन, भारी धातुएँ, निलंबित कण जल को प्रदूषित करते हैं।
- कृषि अपशिष्ट: उर्वरक, कीटनाशक, शाकनाशी जल निकायों में रिसकर यूट्रोफिकेशन (सुपोषण) और प्रदूषण का कारण बनते हैं।
- घरेलू अपशिष्ट (शहरी अपशिष्ट): सीवेज, ठोस कचरा, डिटर्जेंट आदि जल को जैविक और रासायनिक रूप से प्रदूषित करते हैं।
- अन्य स्रोत: धार्मिक गतिविधियाँ, कृषि बहाव, खनन।
- नदियों का प्रदूषण: गंगा और यमुना भारत की सबसे प्रदूषित नदियों में से हैं, विशेषकर शहरी और औद्योगिक केंद्रों के पास।
- भौम जल प्रदूषण:
- फ्लोराइड (राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार)।
- नाइट्रेट (कृषि अपशिष्ट)।
- आर्सेनिक (पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड)।
- जल जनित रोग: हैजा, टाइफाइड, पीलिया, दस्त आदि।
5. जल संरक्षण और प्रबंधन (Water Conservation and Management)
-
जल एक सीमित संसाधन है, इसलिए इसका संरक्षण और विवेकपूर्ण प्रबंधन आवश्यक है।
-
जल संरक्षण के उपाय:
अ) जल संभर विकास (Watershed Development):
- छोटे प्राकृतिक जल विभाजक क्षेत्रों में जल और मृदा संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन।
- इसमें वर्षा जल संग्रहण, वनरोपण, बागवानी, चरागाह विकास और मृदा संरक्षण शामिल है।
- केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं (जैसे हरियाली, नीरू-मीरू, अरवारी पानी संसद)।
ब) वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting):
- वर्षा के जल को भविष्य में उपयोग के लिए एकत्र करना और भंडारण करना।
- लाभ:
- भौम जल का पुनर्भरण।
- जल की उपलब्धता बढ़ाना।
- बाढ़ को नियंत्रित करना।
- जल की गुणवत्ता में सुधार।
- शहरी क्षेत्रों में जल की कमी को पूरा करना।
- तरीके:
- छत पर वर्षा जल संग्रहण (रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग)।
- पारंपरिक विधियाँ (टांके, कुंड, बावड़ियाँ, जोहड़)।
- उदाहरण: राजस्थान में टांके, तमिलनाडु में अनिवार्य वर्षा जल संग्रहण संरचनाएँ।
स) जल का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग (Water Recycling and Reuse):
- उपचारित अपशिष्ट जल का गैर-पीने योग्य उद्देश्यों जैसे बागवानी, शौचालय फ्लशिंग, औद्योगिक शीतलन आदि के लिए उपयोग करना।
- यह ताजे जल संसाधनों पर दबाव कम करता है।
द) जल प्रदूषण नियंत्रण:
- औद्योगिक अपशिष्टों का उपचार।
- घरेलू सीवेज का उपचार।
- कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम उपयोग।
- जन जागरूकता।
6. राष्ट्रीय जल नीति (National Water Policy - 2002, 2012)
- मुख्य उद्देश्य:
- जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन सुनिश्चित करना।
- जल को एक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में मान्यता देना।
- जल आवंटन में पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
- सिंचाई, जलविद्युत, नेविगेशन, औद्योगिक और अन्य उपयोगों को प्राथमिकता देना।
- भौम जल के अत्यधिक दोहन को रोकना।
- जल की गुणवत्ता में सुधार।
- जल संरक्षण के लिए जन जागरूकता पैदा करना।
- वर्षा जल संग्रहण और कृत्रिम पुनर्भरण को बढ़ावा देना।
- अंतर्राज्यीय जल विवादों का समाधान।
7. अंतर्राज्यीय जल विवाद (Inter-State Water Disputes)
- नदी जल के बँटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद एक बड़ी चुनौती है।
- प्रमुख विवाद:
- कावेरी जल विवाद (कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी)।
- कृष्णा जल विवाद (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश)।
- व्यास और रावी जल विवाद (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान)।
- इन विवादों को सुलझाने के लिए जल विवाद न्यायाधिकरणों का गठन किया जाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर का चयन करें।
-
भारत में विश्व के कुल जल संसाधनों का कितना प्रतिशत पाया जाता है?
अ) 2.45%
ब) 4%
स) 16%
द) 20% -
भारत में कुल नवीकरणीय जल संसाधन प्रति वर्ष कितना अनुमानित है?
अ) 1,122 घन किमी
ब) 1,869 घन किमी
स) 432 घन किमी
द) 2,000 घन किमी -
भारत में कुल उपयोग किए जा सकने वाले जल संसाधन का लगभग कितना प्रतिशत कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है?
अ) 60%
ब) 75%
स) 89%
द) 95% -
निम्नलिखित में से कौन सा राज्य भौम जल के अत्यधिक उपयोग वाले राज्यों में शामिल नहीं है?
अ) पंजाब
ब) हरियाणा
स) छत्तीसगढ़
द) राजस्थान -
लैगून और पश्च जल का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
अ) पीने के पानी के लिए
ब) मछली पालन और चावल की कुछ किस्मों की सिंचाई के लिए
स) औद्योगिक उपयोग के लिए
द) जलविद्युत उत्पादन के लिए -
निम्नलिखित में से कौन सा जल प्रदूषण का एक गैर-बिंदु स्रोत (Non-point source) है?
अ) औद्योगिक अपशिष्ट का पाइप
ब) सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का बहिःस्राव
स) कृषि बहाव (कृषि क्षेत्रों से उर्वरक और कीटनाशक का बहना)
द) शहर के नाले का सीधा निकास -
'हरियाली' एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका संबंध है:
अ) ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास से
ब) वनरोपण और वन्यजीव संरक्षण से
स) जल संभर विकास से
द) तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से -
निम्नलिखित में से कौन सा राज्य आर्सेनिक प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित है?
अ) राजस्थान
ब) महाराष्ट्र
स) पश्चिम बंगाल
द) गुजरात -
राष्ट्रीय जल नीति (2002/2012) के अनुसार, जल आवंटन में सर्वोच्च प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए?
अ) सिंचाई
ब) जलविद्युत उत्पादन
स) पीने का पानी
द) औद्योगिक उपयोग -
राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण की एक पारंपरिक विधि कौन सी है?
अ) कयाल
ब) टांके
स) जोहड़
द) बावड़ी
उत्तर कुंजी:
- ब) 4%
- ब) 1,869 घन किमी
- स) 89%
- स) छत्तीसगढ़
- ब) मछली पालन और चावल की कुछ किस्मों की सिंचाई के लिए
- स) कृषि बहाव (कृषि क्षेत्रों से उर्वरक और कीटनाशक का बहना)
- स) जल संभर विकास से
- स) पश्चिम बंगाल
- स) पीने का पानी
- ब) टांके
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'जल-संसाधन' अध्याय को गहराई से समझने और सरकारी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें। शुभकामनाएँ!