Class 12 Geography Notes Chapter 6 (स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी) – Bhugol me Peryojnatmak Karya Book

Bhugol me Peryojnatmak Karya
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 की भूगोल की प्रायोगिक पुस्तक 'भूगोल में प्रायोजनात्मक कार्य' के अध्याय 6, 'स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः हम प्रत्येक बिंदु को गहनता से समझेंगे।


अध्याय 6: स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी (Spatial Information Technology)

1. परिचय (Introduction)

स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी (Spatial Information Technology - SIT) उन तकनीकों और उपकरणों का एक समूह है जो भौगोलिक डेटा (स्थानिक डेटा) के अधिग्रहण, भंडारण, प्रबंधन, विश्लेषण, प्रदर्शन और वितरण से संबंधित हैं। यह हमें पृथ्वी की सतह पर वस्तुओं, घटनाओं और विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने और उनका विश्लेषण करने में सक्षम बनाती है।

इसके मुख्य घटकों में शामिल हैं:

  • भौगोलिक सूचना तंत्र (Geographic Information System - GIS)
  • वैश्विक स्थिति निर्धारण तंत्र (Global Positioning System - GPS)
  • सुदूर संवेदन (Remote Sensing)

भूगोल में SIT का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह स्थानिक पैटर्न, प्रक्रियाओं और संबंधों को समझने, योजना बनाने और निर्णय लेने में सहायता करती है।

2. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी के घटक (Components of Spatial Information Technology)

2.1. भौगोलिक सूचना तंत्र (Geographic Information System - GIS)

  • परिभाषा: GIS एक कंप्यूटर-आधारित प्रणाली है जो पृथ्वी की सतह पर वस्तुओं, घटनाओं और विशेषताओं के बारे में स्थानिक और गैर-स्थानिक (विशेषता) डेटा को कैप्चर, स्टोर, जांच, एकीकृत, विश्लेषण और प्रदर्शित करती है। यह डेटा को मानचित्रों, ग्राफों और रिपोर्टों के रूप में प्रस्तुत करती है।

  • कार्यप्रणाली/घटक:

    1. हार्डवेयर (Hardware): कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, डिजिटाइजर आदि।
    2. सॉफ्टवेयर (Software): GIS सॉफ्टवेयर पैकेज (जैसे ArcGIS, QGIS)।
    3. डेटा (Data): स्थानिक और विशेषता डेटा।
    4. लोग (People): GIS विशेषज्ञ, उपयोगकर्ता।
    5. प्रक्रियाएँ (Procedures): डेटा अधिग्रहण, प्रबंधन, विश्लेषण और प्रदर्शन के चरण।
  • GIS के मुख्य कार्य:

    • डेटा अधिग्रहण (Data Acquisition): मौजूदा मानचित्रों का डिजिटलीकरण, सुदूर संवेदन डेटा, GPS डेटा, सर्वेक्षण डेटा।
    • डेटा भंडारण और प्रबंधन (Data Storage & Management): स्थानिक और विशेषता डेटा को डेटाबेस में व्यवस्थित रूप से संग्रहीत करना और बनाए रखना।
    • डेटा विश्लेषण (Data Analysis): स्थानिक संबंधों, पैटर्न और प्रवृत्तियों को समझने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करना।
    • डेटा प्रदर्शन (Data Display): मानचित्रों, ग्राफों, तालिकाओं और रिपोर्टों के रूप में विश्लेषण के परिणामों को प्रस्तुत करना।
  • GIS के लाभ:

    • बेहतर निर्णय लेने में सहायता।
    • लागत में कमी और दक्षता में वृद्धि।
    • संचार और सहयोग में सुधार।
    • जटिल स्थानिक समस्याओं का समाधान।
  • अनुप्रयोग (Applications):

    • शहरी और क्षेत्रीय नियोजन: मास्टर प्लान बनाना, भूमि उपयोग मानचित्रण, अवसंरचना विकास।
    • आपदा प्रबंधन: जोखिम क्षेत्र मानचित्रण, निकासी मार्ग योजना, राहत कार्यों का समन्वय।
    • पर्यावरण प्रबंधन: प्रदूषण निगरानी, वनस्पति मानचित्रण, वन्यजीव आवास विश्लेषण।
    • कृषि: मृदा मानचित्रण, फसल स्वास्थ्य निगरानी, उपज अनुमान।
    • परिवहन: मार्ग अनुकूलन, यातायात प्रबंधन, परिवहन नेटवर्क योजना।
    • जल संसाधन प्रबंधन: जलग्रहण क्षेत्र विश्लेषण, बाढ़ पूर्वानुमान।
    • रक्षा और सुरक्षा: सामरिक योजना, निगरानी।

2.2. वैश्विक स्थिति निर्धारण तंत्र (Global Positioning System - GPS)

  • परिभाषा: GPS उपग्रहों के एक नेटवर्क का उपयोग करके पृथ्वी पर किसी भी स्थान पर सटीक स्थिति (अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई) और समय की जानकारी प्रदान करने वाली एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है। मूल रूप से यह अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा विकसित की गई थी।

  • कार्यप्रणाली (त्रिकोणीयकरण - Trilateration):

    • GPS रिसीवर कम से कम चार उपग्रहों से संकेत प्राप्त करता है।
    • प्रत्येक संकेत में उपग्रह की पहचान और संकेत भेजने का सटीक समय होता है।
    • रिसीवर संकेत के आगमन के समय और भेजने के समय के अंतर से उपग्रह से अपनी दूरी की गणना करता है।
    • इन दूरियों का उपयोग करके, रिसीवर अपनी सटीक 3D स्थिति (अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई) का निर्धारण करता है।
  • GPS के घटक:

    1. अंतरिक्ष खंड (Space Segment): इसमें पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 24-32 उपग्रहों का एक समूह होता है (NAVSTAR GPS के लिए वर्तमान में 31 सक्रिय उपग्रह)। ये उपग्रह 6 विभिन्न कक्षाओं में लगभग 20,200 किमी की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। प्रत्येक उपग्रह दिन में दो बार पृथ्वी का चक्कर लगाता है और लगातार रेडियो संकेत प्रसारित करता है।
    2. नियंत्रण खंड (Control Segment): इसमें पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन शामिल होते हैं जो उपग्रहों की निगरानी, ट्रैकिंग करते हैं और उनके संकेतों को समायोजित करते हैं। इसमें एक मास्टर कंट्रोल स्टेशन, मॉनिटर स्टेशन और ग्राउंड एंटीना शामिल हैं। यह उपग्रहों की घड़ियों को सिंक्रनाइज़ करता है और उनकी कक्षा संबंधी जानकारी (एफेमेरिस डेटा) को अपडेट करता है।
    3. उपयोगकर्ता खंड (User Segment): इसमें GPS रिसीवर शामिल होते हैं जो उपग्रहों से संकेत प्राप्त करते हैं और स्थिति की गणना करते हैं। ये रिसीवर विभिन्न रूपों में आते हैं, जैसे स्मार्टफोन, वाहन नेविगेशन सिस्टम, सर्वेक्षण उपकरण, आदि।
  • अनुप्रयोग (Applications):

    • नेविगेशन: वाहनों, पैदल यात्रियों, समुद्री जहाजों और विमानों के लिए मार्ग-दर्शन।
    • मानचित्रण और सर्वेक्षण: उच्च सटीकता वाले भू-संदर्भित डेटा का अधिग्रहण।
    • वाहन ट्रैकिंग और बेड़ा प्रबंधन: परिवहन और लॉजिस्टिक्स में वाहनों की निगरानी।
    • आपदा प्रतिक्रिया: खोज एवं बचाव अभियान, आपदा प्रभावित क्षेत्रों का मानचित्रण।
    • समय सिंक्रनाइज़ेशन: दूरसंचार नेटवर्क और वैज्ञानिक उपकरणों के लिए सटीक समय प्रदान करना।
    • कृषि: सटीक कृषि (Precision Agriculture) में ट्रैक्टरों का मार्गदर्शन।

2.3. सुदूर संवेदन (Remote Sensing)

  • परिभाषा: सुदूर संवेदन पृथ्वी की सतह या वायुमंडल के बारे में जानकारी प्राप्त करने की कला और विज्ञान है, बिना उसके सीधे संपर्क में आए, विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा (Electromagnetic Energy) का उपयोग करके।

  • सिद्धांत:

    1. ऊर्जा स्रोत (Energy Source): यह या तो सूर्य (निष्क्रिय संवेदन) हो सकता है या सेंसर द्वारा स्वयं उत्पन्न ऊर्जा (सक्रिय संवेदन)।
    2. ऊर्जा का संचरण (Radiation & Atmosphere): ऊर्जा वायुमंडल से होकर गुजरती है, जहाँ यह अवशोषित या प्रकीर्णित हो सकती है।
    3. वस्तु के साथ अंतःक्रिया (Interaction with Target): वस्तु द्वारा ऊर्जा का अवशोषण, परावर्तन या उत्सर्जन होता है।
    4. ऊर्जा का अभिग्रहण (Recording of Energy by Sensor): सेंसर द्वारा परावर्तित या उत्सर्जित ऊर्जा को रिकॉर्ड किया जाता है।
    5. डेटा का प्रसंस्करण और विश्लेषण (Processing & Analysis): रिकॉर्ड किए गए डेटा को छवियों या अन्य रूपों में संसाधित और व्याख्या किया जाता है।
  • विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum - EMS): यह रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक की ऊर्जा की पूरी श्रृंखला है। सुदूर संवेदन में आमतौर पर दृश्य (Visible), अवरक्त (Infrared) और माइक्रोवेव (Microwave) बैंड का उपयोग किया जाता है।

  • सुदूर संवेदन के प्रकार:

    1. निष्क्रिय संवेदन (Passive Remote Sensing): यह सूर्य से परावर्तित या पृथ्वी से उत्सर्जित प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग करता है। उदाहरण: ऑप्टिकल सेंसर जो दृश्य और अवरक्त प्रकाश को रिकॉर्ड करते हैं।
    2. सक्रिय संवेदन (Active Remote Sensing): इसमें सेंसर स्वयं ऊर्जा उत्सर्जित करता है और वस्तु से परावर्तित होकर वापस आने वाली ऊर्जा को रिकॉर्ड करता है। उदाहरण: रडार (Radar), लिडार (Lidar)।
  • प्लेटफार्म (Platforms): सेंसर को ले जाने वाले वाहन।

    1. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellites): ये पृथ्वी के घूर्णन की गति से मेल खाते हैं और लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर भूमध्य रेखा के ऊपर एक ही भौगोलिक क्षेत्र पर लगातार नज़र रखते हैं। उदाहरण: INSAT श्रृंखला।
    2. सूर्य-तुल्यकाली उपग्रह (Sun-Synchronous Satellites): ये पृथ्वी के चारों ओर इस तरह से परिक्रमा करते हैं कि वे हमेशा स्थानीय सौर समय के अनुसार एक ही क्षेत्र को एक ही कोण से देखते हैं (लगभग 700-900 किमी की ऊँचाई पर)। ये वैश्विक कवरेज प्रदान करते हैं। उदाहरण: IRS, Landsat।
    3. अन्य प्लेटफार्म: विमान, ड्रोन, गुब्बारे।
  • सेंसर (Sensors): ऊर्जा को रिकॉर्ड करने वाले उपकरण।

    • फोटोग्राफिक सेंसर: पारंपरिक कैमरे (एनालॉग/डिजिटल)।
    • नॉन-फोटोग्राफिक सेंसर: स्कैनर, रेडियोमीटर, रडार।
  • अनुप्रयोग (Applications):

    • भूमि उपयोग/भूमि आवरण मानचित्रण: शहरी विस्तार, वन आवरण, कृषि भूमि का मानचित्रण और निगरानी।
    • आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा, जंगल की आग, भूकंप के बाद के नुकसान का आकलन।
    • कृषि: फसल स्वास्थ्य निगरानी, रोग का पता लगाना, उपज अनुमान।
    • जल संसाधन: जल निकायों का मानचित्रण, भूजल अन्वेषण, आर्द्रभूमि की निगरानी।
    • मौसम विज्ञान और जलवायु अध्ययन: बादल आवरण, तापमान, वर्षा की निगरानी।
    • भूवैज्ञानिक मानचित्रण: खनिज अन्वेषण, भू-आकृति विज्ञान अध्ययन।
    • महासागरीय अध्ययन: समुद्री सतह का तापमान, समुद्री धाराएँ।

3. स्थानिक डेटा के प्रकार (Types of Spatial Data)

GIS में स्थानिक डेटा को मुख्य रूप से दो मॉडलों में दर्शाया जाता है:

3.1. वेक्टर डेटा मॉडल (Vector Data Model)

  • आधार: यह ज्यामितीय आकृतियों (बिंदु, रेखा, बहुभुज) का उपयोग करके भौगोलिक विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
  • बिंदु (Point): अक्षांश और देशांतर के एक एकल X, Y निर्देशांक जोड़ी द्वारा एक स्थान को दर्शाता है। उदाहरण: कुएँ, पेड़, शहर।
  • रेखा (Line/Arc): दो या दो से अधिक बिंदुओं को जोड़कर बनाई गई एक श्रृंखला। उदाहरण: सड़कें, नदियाँ, सीमाएँ।
  • बहुभुज (Polygon): एक बंद रेखा खंड जो एक क्षेत्र को घेरता है। उदाहरण: झीलें, वन क्षेत्र, प्रशासनिक इकाइयाँ।
  • लाभ: उच्च स्थानिक सटीकता, टोपोलॉजिकल संबंध (जैसे निकटता, कनेक्टिविटी) बनाए रख सकता है, छोटे फ़ाइल आकार।
  • हानि: जटिल स्थानिक विश्लेषण के लिए कुछ हद तक अनुपयुक्त, निरंतर डेटा (जैसे तापमान) के लिए कम प्रभावी।

3.2. रास्टर डेटा मॉडल (Raster Data Model)

  • आधार: यह ग्रिड या पिक्सेल की एक नियमित सरणी का उपयोग करके भौगोलिक डेटा का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक पिक्सेल एक विशिष्ट मान (जैसे रंग, ऊँचाई, तापमान) धारण करता है।
  • उदाहरण: सुदूर संवेदन छवियाँ, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM), स्कैन किए गए मानचित्र।
  • लाभ: निरंतर डेटा (जैसे तापमान, ऊँचाई, ढलान) के लिए अत्यंत उपयुक्त, जटिल स्थानिक विश्लेषण (जैसे ओवरले, बफर) के लिए आसान।
  • हानि: स्थानिक सटीकता पिक्सेल आकार पर निर्भर करती है (बड़े पिक्सेल = कम सटीकता), बड़े फ़ाइल आकार, टोपोलॉजिकल संबंध बनाए रखना मुश्किल।

4. स्थानिक डेटा विश्लेषण (Spatial Data Analysis)

GIS विभिन्न प्रकार के स्थानिक विश्लेषण उपकरण प्रदान करता है:

  • ओवरले विश्लेषण (Overlay Analysis): विभिन्न स्थानिक परतों (जैसे भूमि उपयोग, मिट्टी, ढलान) को एक साथ जोड़कर एक नई परत बनाना ताकि उनके संयुक्त गुणों का विश्लेषण किया जा सके। उदाहरण: कृषि के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान।
  • बफर विश्लेषण (Buffer Analysis): एक चयनित विशेषता (बिंदु, रेखा, बहुभुज) के चारों ओर एक निश्चित दूरी के भीतर एक क्षेत्र (बफर) बनाना। उदाहरण: सड़क के 500 मीटर के भीतर के क्षेत्र की पहचान करना।
  • नेटवर्क विश्लेषण (Network Analysis): सड़कों, नदियों या पाइपलाइनों जैसे जुड़े हुए नेटवर्क पर विश्लेषण करना। उदाहरण: सबसे छोटा मार्ग खोजना, सेवा क्षेत्र का निर्धारण, आपातकालीन सेवाओं के लिए इष्टतम स्थान।
  • सतह विश्लेषण (Surface Analysis): निरंतर सतहों (जैसे डिजिटल एलिवेशन मॉडल) पर विश्लेषण करना। उदाहरण: ढलान, पहलू (दिशा), दृश्यता विश्लेषण, जल निकासी पैटर्न।
  • निकटता विश्लेषण (Proximity Analysis): वस्तुओं के बीच की दूरी का माप।

5. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी का एकीकरण (Integration of SIT)

GIS, GPS और सुदूर संवेदन स्वतंत्र तकनीकें नहीं हैं, बल्कि एक दूसरे की पूरक हैं।

  • सुदूर संवेदन से प्राप्त डेटा (उपग्रह चित्र) GIS में इनपुट के रूप में उपयोग होता है।
  • GPS डेटा GIS में सटीक भू-संदर्भ प्रदान करता है और फील्ड डेटा संग्रह में मदद करता है।
  • GIS इन सभी डेटा को एकीकृत करता है, उनका विश्लेषण करता है और उन्हें उपयोगी जानकारी में परिवर्तित करता है।
    यह एक एकीकृत दृष्टिकोण अधिक व्यापक और सटीक स्थानिक समाधान प्रदान करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है।

6. भारत में स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी (SIT in India)

भारत ने स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है:

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO): भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और सुदूर संवेदन उपग्रहों (IRS श्रृंखला) के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता है। IRS उपग्रहों ने भारत को विश्व के अग्रणी सुदूर संवेदन देशों में से एक बनाया है।
  • राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद: ISRO का एक प्रमुख केंद्र है जो सुदूर संवेदन डेटा अधिग्रहण, प्रसंस्करण, प्रसार और अनुप्रयोगों के लिए जिम्मेदार है।
  • भुवन (Bhuvan): ISRO द्वारा विकसित एक भू-पोर्टल है जो भारतीय भूभाग की स्थानिक जानकारी प्रदान करता है, जिसमें विभिन्न विषयों पर मानचित्र और डेटा शामिल हैं। यह Google Earth के समान है लेकिन भारतीय संदर्भ में अधिक विस्तृत डेटा प्रदान करता है।
  • अनुप्रयोग:
    • राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रणाली (NNRMS): देश के प्राकृतिक संसाधनों की योजना और प्रबंधन में SIT का उपयोग।
    • ग्रामीण विकास: मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रमों में नियोजन और निगरानी।
    • शहरी नियोजन: स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भूमि उपयोग, अवसंरचना और सेवाओं की योजना।
    • आपदा निगरानी और प्रबंधन: बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात जैसी आपदाओं की निगरानी और राहत कार्यों का समन्वय।
    • कृषि: फसल क्षेत्र और उत्पादन अनुमान, सूखा निगरानी, मृदा स्वास्थ्य कार्ड।
    • जल संसाधन: जल निकायों का मानचित्रण, भूजल अन्वेषण, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:

  1. निम्नलिखित में से कौन स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी (SIT) का एक घटक नहीं है?
    क) भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS)
    ख) वैश्विक स्थिति निर्धारण तंत्र (GPS)
    ग) सुदूर संवेदन (Remote Sensing)
    घ) ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR)

  2. GIS में, सड़कों और नदियों को सामान्यतः किस प्रकार के स्थानिक डेटा मॉडल द्वारा दर्शाया जाता है?
    क) बिंदु
    ख) रेखा
    ग) बहुभुज
    घ) रास्टर

  3. वैश्विक स्थिति निर्धारण तंत्र (GPS) में, पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों का खंड क्या कहलाता है?
    क) नियंत्रण खंड
    ख) अंतरिक्ष खंड
    ग) उपयोगकर्ता खंड
    घ) भू-स्थिर खंड

  4. सुदूर संवेदन में, यदि सेंसर स्वयं ऊर्जा उत्सर्जित करता है और वस्तु से परावर्तित ऊर्जा को रिकॉर्ड करता है, तो यह किस प्रकार का संवेदन है?
    क) निष्क्रिय संवेदन
    ख) सक्रिय संवेदन
    ग) ऑप्टिकल संवेदन
    घ) थर्मल संवेदन

  5. निम्नलिखित में से कौन सा उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की गति से मेल खाता है और एक ही भौगोलिक क्षेत्र पर लगातार नज़र रखता है?
    क) सूर्य-तुल्यकाली उपग्रह
    ख) ध्रुवीय उपग्रह
    ग) भू-स्थिर उपग्रह
    घ) निम्न पृथ्वी कक्षा उपग्रह

  6. GIS में, विभिन्न स्थानिक परतों को एक साथ जोड़कर एक नई परत बनाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
    क) बफर विश्लेषण
    ख) नेटवर्क विश्लेषण
    ग) ओवरले विश्लेषण
    घ) सतह विश्लेषण

  7. रास्टर डेटा मॉडल में, भौगोलिक विशेषताओं को कैसे दर्शाया जाता है?
    क) बिंदुओं और रेखाओं के रूप में
    ख) बहुभुजों के रूप में
    ग) ग्रिड या पिक्सेल की सरणी के रूप में
    घ) टोपोलॉजिकल संबंधों के रूप में

  8. भारत में सुदूर संवेदन डेटा अधिग्रहण, प्रसंस्करण और अनुप्रयोगों के लिए जिम्मेदार ISRO का प्रमुख केंद्र कौन सा है?
    क) विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC)
    ख) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC)
    ग) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)
    घ) अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC)

  9. GPS रिसीवर अपनी स्थिति का निर्धारण करने के लिए कम से कम कितने उपग्रहों से संकेत प्राप्त करता है?
    क) 2
    ख) 3
    ग) 4
    घ) 5

  10. निम्नलिखित में से कौन सा स्थानिक डेटा विश्लेषण का एक उदाहरण है जिसका उपयोग एक सड़क के 500 मीटर के भीतर के क्षेत्र को पहचानने के लिए किया जा सकता है?
    क) ओवरले विश्लेषण
    ख) बफर विश्लेषण
    ग) नेटवर्क विश्लेषण
    घ) सतह विश्लेषण


उत्तर कुंजी:

  1. घ) ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR)
  2. ख) रेखा
  3. ख) अंतरिक्ष खंड
  4. ख) सक्रिय संवेदन
  5. ग) भू-स्थिर उपग्रह
  6. ग) ओवरले विश्लेषण
  7. ग) ग्रिड या पिक्सेल की सरणी के रूप में
  8. ग) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC)
  9. ग) 4
  10. ख) बफर विश्लेषण

यह विस्तृत नोट्स आपको 'स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी' के इस महत्वपूर्ण अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में निश्चित रूप से सहायता करेंगे।

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