Class 12 Geography Notes Chapter 9 (अंतरराष्ट्रीय व्यापार) – Manav Bhugol ke Mool Sidhant Book

Manav Bhugol ke Mool Sidhant
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम मानव भूगोल के मूल सिद्धांत पुस्तक के अध्याय 9 'अंतरराष्ट्रीय व्यापार' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपकी बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए, इस विषय की गहन समझ विकसित करें।


अध्याय 9: अंतरराष्ट्रीय व्यापार (International Trade)

1. परिचय
अंतरराष्ट्रीय व्यापार से तात्पर्य विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान से है। यह एक देश की अर्थव्यवस्था को शेष विश्व से जोड़ता है। कोई भी देश उन सभी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन नहीं कर सकता जिनकी उसे आवश्यकता होती है, इसलिए वह उन वस्तुओं का आयात करता है जिनकी उसे कमी होती है और उन वस्तुओं का निर्यात करता है जिनका उसके पास अधिशेष होता है।

2. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का आधार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:

  • संसाधनों में भिन्नता:
    • भौगोलिक संरचना: विभिन्न देशों में भूवैज्ञानिक संरचना भिन्न होती है, जिससे खनिज संसाधनों की उपलब्धता में अंतर आता है।
    • जलवायु: जलवायु भिन्नता के कारण विभिन्न कृषि उत्पाद (जैसे कॉफी, चाय, कपास) अलग-अलग क्षेत्रों में उगाए जाते हैं।
    • जनसंख्या कारक: जनसंख्या का आकार, वितरण और विविधता भी संसाधनों की उपलब्धता और मांग को प्रभावित करती है।
  • उत्पादन लागत में भिन्नता:
    • विभिन्न देशों में भूमि, श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और लागत में अंतर होता है। एक देश उन वस्तुओं के उत्पादन में विशेषज्ञता हासिल करता है जिन्हें वह अन्य देशों की तुलना में कम लागत पर उत्पादित कर सकता है (तुलनात्मक लाभ का सिद्धांत)।
  • अस्तित्व: कुछ वस्तुएँ केवल विशिष्ट स्थानों पर ही पाई जाती हैं (जैसे कुछ खनिज), जिससे उनका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आवश्यक हो जाता है।
  • विकास के विभिन्न चरण: विभिन्न देशों के आर्थिक विकास के चरण अलग-अलग होते हैं, जिससे उनकी वस्तुओं और सेवाओं की मांग और आपूर्ति में अंतर आता है।
  • परिवहन लागत: परिवहन लागत भी व्यापार की दिशा और मात्रा को प्रभावित करती है। कम परिवहन लागत वाले देशों के बीच व्यापार अधिक सुगम होता है।
  • सरकारी नीतियां: सरकारें टैरिफ, कोटा और अन्य व्यापारिक नीतियों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित और प्रभावित करती हैं।

3. व्यापार का इतिहास

  • प्राचीन काल: रेशम मार्ग (Silk Route) जैसे मार्गों से वस्तुओं का व्यापार होता था।
  • मध्यकाल: समुद्री मार्गों की खोज ने व्यापार को बढ़ावा दिया।
  • औद्योगिक क्रांति: बड़े पैमाने पर उत्पादन और मांग में वृद्धि ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को एक नया आयाम दिया।
  • आधुनिक काल: वैश्वीकरण, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और क्षेत्रीय व्यापार समूहों के उदय ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को और अधिक उदार और जटिल बना दिया है।

4. अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः दो प्रकार का होता है:

  • द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade): यह दो देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है। दोनों देश एक-दूसरे के साथ विशिष्ट वस्तुओं के व्यापार के लिए समझौता करते हैं।
  • बहुपक्षीय व्यापार (Multilateral Trade): यह अनेक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है। इसमें एक देश कई अन्य देशों के साथ व्यापार कर सकता है। विश्व व्यापार संगठन बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देता है।

5. मुक्त व्यापार (Free Trade)

  • मुक्त व्यापार का अर्थ है व्यापारिक अवरोधों (जैसे टैरिफ, कोटा, सब्सिडी) को कम करना या हटाना, ताकि वस्तुओं और सेवाओं का स्वतंत्र रूप से आदान-प्रदान हो सके।
  • लाभ: विशेषज्ञता को बढ़ावा, उत्पादन में वृद्धि, कीमतों में कमी, जीवन स्तर में सुधार, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि।
  • हानि/चुनौतियाँ: घरेलू उद्योगों को नुकसान, विकासशील देशों के लिए प्रतिस्पर्धी बने रहना मुश्किल, कुछ देशों की आर्थिक निर्भरता बढ़ सकती है।

6. विश्व व्यापार संगठन (WTO - World Trade Organization)

  • स्थापना: 1 जनवरी 1995 को GATT (प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता) के उत्तराधिकारी के रूप में।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
  • उद्देश्य:
    • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना और व्यापारिक अवरोधों को कम करना।
    • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए नियमों का एक सेट स्थापित करना और उन्हें लागू करना।
    • व्यापार नीतियों की समीक्षा करना।
    • व्यापार विवादों का निपटारा करना।
    • विकासशील देशों को वैश्विक व्यापार प्रणाली में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने में मदद करना।
  • कार्यप्रणाली: सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं के माध्यम से।

7. डंपिंग (Dumping)

  • डंपिंग एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक देश अपने घरेलू बाजार की तुलना में किसी दूसरे देश में वस्तु को कम कीमत पर बेचता है।
  • उद्देश्य: दूसरे देश के बाजार पर कब्जा करना, प्रतिस्पर्धियों को बाहर करना।
  • परिणाम: जिस देश में डंपिंग होती है, उसके घरेलू उद्योगों को भारी नुकसान होता है।
  • निवारण: डंपिंग से बचने के लिए आयात करने वाला देश अक्सर 'एंटी-डंपिंग शुल्क' लगाता है।

8. व्यापार संतुलन (Balance of Trade)

  • यह एक देश द्वारा एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में निर्यात की गई वस्तुओं के मूल्य और आयात की गई वस्तुओं के मूल्य के बीच का अंतर है।
  • व्यापार अधिशेष (Trade Surplus): जब निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से अधिक होता है (निर्यात > आयात)।
  • व्यापार घाटा (Trade Deficit): जब आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक होता है (आयात > निर्यात)।
  • यह केवल वस्तुओं के व्यापार को दर्शाता है, सेवाओं और पूंजी के हस्तांतरण को नहीं।

9. भुगतान संतुलन (Balance of Payments - BoP)

  • यह एक देश और शेष विश्व के बीच एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में सभी आर्थिक लेनदेन का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड है।
  • इसमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, पूंजी हस्तांतरण, आय और वर्तमान हस्तांतरण सभी शामिल होते हैं।
  • मुख्य घटक:
    • चालू खाता (Current Account): इसमें वस्तुओं का व्यापार (दृश्य व्यापार), सेवाओं का व्यापार (अदृश्य व्यापार), आय (जैसे निवेश पर लाभ, मजदूरी) और वर्तमान हस्तांतरण (जैसे उपहार, प्रेषण) शामिल होते हैं।
    • पूंजी खाता (Capital Account): इसमें निवेश (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश - FDI, पोर्टफोलियो निवेश), ऋण, और विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन शामिल होते हैं।
  • भुगतान संतुलन हमेशा सैद्धांतिक रूप से संतुलित रहता है, क्योंकि किसी भी असंतुलन को विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन द्वारा समायोजित किया जाता है।

10. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार - पत्तन (बंदरगाह)

  • पत्तन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मुख्य बिंदु होते हैं, जो समुद्री मार्गों के माध्यम से देशों को जोड़ते हैं।
  • ये कार्गो हैंडलिंग, भंडारण, जहाजों को ईंधन और अन्य सुविधाएं प्रदान करते हैं।
  • पत्तन के प्रकार (विशिष्ट कार्यों के आधार पर):
    • औद्योगिक पत्तन (Industrial Ports): ये मुख्य रूप से थोक कार्गो जैसे अनाज, चीनी, तेल, रसायन और खनिजों के संचालन में विशेषज्ञता रखते हैं।
    • वाणिज्यिक पत्तन (Commercial Ports): ये सामान्य कार्गो और निर्मित वस्तुओं के संचालन के साथ-साथ यात्री यातायात को भी संभालते हैं।
    • व्यापक पत्तन (Comprehensive Ports): ये औद्योगिक और वाणिज्यिक दोनों प्रकार के कार्गो को संभालते हैं और बड़े पैमाने पर व्यापार करते हैं।
    • तेल पत्तन (Oil Ports): कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के प्रसंस्करण और शिपिंग के लिए विशिष्ट। जैसे वेनेजुएला में मारकाइबो, ईरान में अबदान।
    • पैकेट स्टेशन (Packet Stations): यात्री और मेल ट्रैफिक के लिए विशिष्ट, कम दूरी के समुद्री मार्गों पर।
    • नौसैनिक पत्तन (Naval Ports): युद्धपोतों और नौसैनिक जहाजों के लिए सुविधाएं प्रदान करते हैं।
    • अंतर्देशीय पत्तन (Inland Ports): नदियों या नहरों द्वारा समुद्र से जुड़े होते हैं। जैसे मैनचेस्टर (इंग्लैंड), मेम्फिस (यूएसए)।
    • एन्ट्रेपोट पत्तन (Entrepot Ports): ये ऐसे पत्तन होते हैं जहाँ वस्तुओं को आयात किया जाता है और फिर अन्य देशों को निर्यात करने के लिए संग्रहीत किया जाता है। जैसे सिंगापुर, कोपेनहेगन।

11. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में हाल के रुझान

  • क्षेत्रीय व्यापार समूह (Regional Trade Blocs):
    • कई देशों ने अपने बीच व्यापार को बढ़ावा देने और व्यापारिक अवरोधों को कम करने के लिए क्षेत्रीय समूह बनाए हैं।
    • उदाहरण:
      • यूरोपीय संघ (EU): यूरोप के अधिकांश देश।
      • आसियान (ASEAN): दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ।
      • नाफ्टा (NAFTA): उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (अब USMCA)।
      • ओपेक (OPEC): पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन।
      • सार्क (SAARC): दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन।
      • कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS)
      • लैटिन अमेरिकी एकीकरण संघ (LAIA)
      • अफ्रीकी एकता संगठन (OAU)
    • इन समूहों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, आर्थिक एकीकरण को मजबूत करना और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को बेहतर बनाना है।
  • वैश्वीकरण का प्रभाव: सूचना प्रौद्योगिकी और परिवहन के विकास ने वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की मात्रा और जटिलता बढ़ी है।
  • डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स: इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार तेजी से बढ़ रहा है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
    a) 1948
    b) 1971
    c) 1995
    d) 2001

  2. जब एक देश अपने घरेलू बाजार की तुलना में किसी दूसरे देश में वस्तु को कम कीमत पर बेचता है, तो इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
    a) मुक्त व्यापार
    b) डंपिंग
    c) व्यापार अधिशेष
    d) बहुपक्षीय व्यापार

  3. निम्नलिखित में से कौन सा पत्तन 'एन्ट्रेपोट पत्तन' का उदाहरण है?
    a) मुंबई
    b) न्यूयॉर्क
    c) सिंगापुर
    d) लंदन

  4. भुगतान संतुलन (BoP) के चालू खाते में निम्नलिखित में से कौन सा घटक शामिल नहीं होता है?
    a) वस्तुओं का व्यापार
    b) सेवाओं का व्यापार
    c) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
    d) प्रेषण (Remittances)

  5. जब किसी देश का निर्यात मूल्य उसके आयात मूल्य से अधिक होता है, तो उसे क्या कहा जाता है?
    a) व्यापार घाटा
    b) व्यापार अधिशेष
    c) भुगतान संतुलन
    d) डंपिंग

  6. निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्रीय व्यापार समूह दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करता है?
    a) EU
    b) NAFTA
    c) ASEAN
    d) OPEC

  7. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मुख्य आधारों में से एक 'संसाधनों में भिन्नता' का कारण क्या हो सकता है?
    a) केवल भौगोलिक संरचना
    b) केवल जलवायु
    c) भौगोलिक संरचना, जलवायु और खनिज संसाधन
    d) केवल सरकारी नीतियां

  8. GATT (प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता) का उत्तराधिकारी संगठन कौन सा है?
    a) IMF
    b) World Bank
    c) WTO
    d) UNCTAD

  9. निम्नलिखित में से कौन सा पत्तन विशेष रूप से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के संचालन के लिए जाना जाता है?
    a) वाणिज्यिक पत्तन
    b) औद्योगिक पत्तन
    c) तेल पत्तन
    d) नौसैनिक पत्तन

  10. द्विपक्षीय व्यापार से क्या तात्पर्य है?
    a) दो से अधिक देशों के बीच व्यापार
    b) दो देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार
    c) केवल वस्तुओं का व्यापार
    d) केवल सेवाओं का व्यापार


उत्तरमाला:

  1. c) 1995
  2. b) डंपिंग
  3. c) सिंगापुर
  4. c) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) - यह पूंजी खाते का हिस्सा है।
  5. b) व्यापार अधिशेष
  6. c) ASEAN
  7. c) भौगोलिक संरचना, जलवायु और खनिज संसाधन
  8. c) WTO
  9. c) तेल पत्तन
  10. b) दो देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।

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