Class 12 Hindi Notes Chapter 1 (सूरदास की झोंपड़ी) – Antral Bhag-II Book

Antral Bhag-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतराल भाग-II' के प्रथम अध्याय 'सूरदास की झोंपड़ी' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह पाठ मुंशी प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास 'रंगभूमि' का एक अंश है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः हम इसके हर पहलू को गहराई से समझेंगे।


अध्याय 1: सूरदास की झोंपड़ी

लेखक: मुंशी प्रेमचंद
विधा: उपन्यास का अंश (मूल उपन्यास: रंगभूमि)


1. पाठ-परिचय

'सूरदास की झोंपड़ी' मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का एक मार्मिक अंश है। यह कहानी एक दृष्टिहीन भिखारी सूरदास के जीवन में अचानक आई विपत्ति और उसके प्रति उसकी प्रतिक्रिया का चित्रण करती है। यह पाठ मानवीय स्वभाव के विभिन्न पहलुओं - ईर्ष्या, प्रतिशोध, स्वार्थ, सहानुभूति, दृढ़ता और आशावादिता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति सब कुछ खोकर भी जीवन के प्रति अपनी आस्था और संघर्ष की भावना को बनाए रखता है।


2. प्रमुख पात्र

  • सूरदास: कहानी का मुख्य पात्र, एक दृष्टिहीन भिखारी। वह अत्यंत परिश्रमी, स्वाभिमानी और भविष्य के प्रति आशान्वित व्यक्ति है। उसकी झोंपड़ी जलने और जमा पूंजी चोरी होने के बाद भी वह हार नहीं मानता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखता है। वह बच्चों की खेल भावना से प्रेरणा लेकर पुनः संघर्ष के लिए तैयार हो जाता है।
  • भैरव: सूरदास का पड़ोसी और मुख्य खलनायक। वह ईर्ष्यालु, प्रतिशोधी और स्वार्थी स्वभाव का व्यक्ति है। अपनी पत्नी सुभागी के सूरदास के प्रति झुकाव और अपनी अपमानित भावना के कारण वह सूरदास की झोंपड़ी में आग लगा देता है और उसकी जमा पूंजी भी चुरा लेता है।
  • जगधर: सूरदास का एक अन्य पड़ोसी। वह भैरव का मित्र है, लेकिन उसका चरित्र भैरव से भिन्न है। वह लालची और स्वार्थी है, लेकिन उसमें पूरी तरह से क्रूरता नहीं है। वह भैरव की चोरी का भेद जानता है और उससे हिस्सा पाने की कोशिश करता है, पर अंततः सूरदास के प्रति कुछ सहानुभूति भी रखता है।
  • सुभागी: भैरव की पत्नी। वह भैरव के अत्याचारों से पीड़ित है और सूरदास के प्रति सहानुभूति रखती है। वह भैरव के घर से भागकर सूरदास के पास शरण लेती है, जिससे भैरव सूरदास से ईर्ष्या करने लगता है। वह बाद में भैरव के कृत्य पर पछताती है और सूरदास के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करती है।
  • मिट्ठुआ: सूरदास का पोता। वह कहानी में बच्चों की सहजता और खेल भावना का प्रतीक है, जिससे सूरदास को प्रेरणा मिलती है।

3. कथा का सार (विस्तृत)

कहानी की शुरुआत सूरदास की झोंपड़ी के जलने से होती है। रात के समय अचानक आग लग जाती है और देखते ही देखते सूरदास की पूरी झोंपड़ी राख हो जाती है। सूरदास को इस बात का गहरा दुख होता है, लेकिन उसे सबसे ज्यादा चिंता अपनी जीवन भर की कमाई की है, जो उसने झोंपड़ी में गाड़ रखी थी। यह पूंजी उसके भविष्य के सपनों, जैसे पोते मिट्ठुआ का ब्याह, पितरों का पिंडदान और गांव के लिए कुआँ बनवाने का आधार थी।

आग लगाने वाला भैरव था। भैरव सूरदास से ईर्ष्या करता था क्योंकि उसकी पत्नी सुभागी भैरव के दुर्व्यवहार से तंग आकर सूरदास के पास शरण लेती थी। भैरव को लगता था कि सूरदास ने उसकी पत्नी को बहकाया है और इससे उसके सम्मान को ठेस पहुँची थी। इसी प्रतिशोध की भावना से उसने सूरदास की झोंपड़ी में आग लगा दी थी।

आग बुझने के बाद, जब सूरदास अपनी राख हुई झोंपड़ी में अपनी जमा पूंजी ढूँढता है, तो उसे वह नहीं मिलती। उसे पता चलता है कि किसी ने उसकी पूंजी चुरा ली है। इस बात से वह अत्यंत विचलित हो जाता है। उसे झोंपड़ी जलने का उतना दुख नहीं था, जितना पूंजी के चोरी होने का। वह सोचता है कि अब उसके सारे सपने टूट गए हैं।

भैरव ने न केवल आग लगाई थी, बल्कि उसने सूरदास की पूंजी भी चुरा ली थी। वह यह बात अपने पड़ोसी जगधर को बताता है और उसे कुछ पैसे देने का लालच भी देता है। जगधर, जो कि स्वार्थी स्वभाव का था, भैरव से पैसे का हिसाब माँगने लगता है। जगधर को यह जानकर आश्चर्य होता है कि भैरव ने इतनी बड़ी रकम चुराई है। वह मन ही मन सोचता है कि काश यह पैसे उसे मिल जाते।

सूरदास अपनी दुखद स्थिति में भी अपनी पीड़ा को दूसरों के सामने व्यक्त नहीं करना चाहता। वह अपनी गरीबी और लाचारी को छिपाने की कोशिश करता है। वह जानता है कि यदि लोग जान गए कि उसके पास इतनी पूंजी थी, तो वे उसे भिखारी नहीं मानेंगे और उसकी मदद करना बंद कर देंगे। वह अपनी जमा पूंजी के बारे में किसी को नहीं बताता, सिवाय इसके कि वह अपनी झोंपड़ी जलने का दुख व्यक्त करता है।

इधर, सुभागी को भैरव के कृत्य पर बहुत पछतावा होता है। वह सूरदास के पास आकर उससे माफी माँगती है और अपनी सहानुभूति व्यक्त करती है। वह भैरव के अत्याचारों से तंग आकर सूरदास के पास आई थी, लेकिन अनजाने में वह सूरदास के लिए इस विपत्ति का कारण बन गई थी।

कहानी के अंत में, सूरदास को बच्चों के खेल से प्रेरणा मिलती है। बच्चे खेल-खेल में झोंपड़ी बनाते और बिगाड़ते रहते हैं। जब एक बच्चा कहता है, "खेल में रोना कैसा?", तो सूरदास को यह बात गहरे तक छू जाती है। वह समझ जाता है कि जीवन भी एक खेल की तरह है, जिसमें हार-जीत लगी रहती है। वह अपनी सारी निराशा त्याग देता है और नए सिरे से जीवन शुरू करने का संकल्प लेता है। वह सोचता है कि जब आग लगाने वाला और चोरी करने वाला भी चैन से नहीं रह पाएगा, तो वह क्यों हार माने? वह अपनी राख हुई झोंपड़ी को फिर से बनाने का निश्चय करता है और जीवन के प्रति एक नई आशा और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता है।


4. प्रमुख बिंदु एवं विश्लेषण

  • ईर्ष्या और प्रतिशोध: भैरव का सूरदास से ईर्ष्या करना और प्रतिशोध में उसकी झोंपड़ी जलाना, मानवीय स्वभाव के नकारात्मक पहलू को दर्शाता है।
  • गरीबी और आत्मसम्मान: सूरदास एक भिखारी होने के बावजूद स्वाभिमानी है। वह अपनी पूंजी के बारे में किसी को नहीं बताता, ताकि लोग उसे दया का पात्र न समझें और उसका आत्मसम्मान बना रहे।
  • पूंजी का महत्व: सूरदास के लिए उसकी जमा पूंजी केवल धन नहीं, बल्कि उसके भविष्य के सपने (पोते का ब्याह, पिंडदान, कुआँ) थे। इसका चोरी होना उसके सपनों का टूटना था।
  • मानवीय स्वभाव के विभिन्न पहलू: कहानी में स्वार्थ (जगधर), क्रूरता (भैरव), सहानुभूति (सुभागी) और दृढ़ता (सूरदास) जैसे विभिन्न मानवीय गुणों का चित्रण है।
  • आशा और निराशा का द्वंद्व: सूरदास पहले अपनी झोंपड़ी जलने और पूंजी खोने से निराशा में डूब जाता है, लेकिन अंत में वह बच्चों से प्रेरणा लेकर आशावादी बन जाता है।
  • पुनर्निर्माण का संकल्प: सूरदास का यह संकल्प कि वह फिर से झोंपड़ी बनाएगा, जीवन में संघर्ष और हार न मानने की भावना का प्रतीक है।
  • प्रेमचंद की यथार्थवादी शैली: प्रेमचंद ने समाज की सच्चाई, गरीबी, मानवीय मनोविज्ञान और ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण किया है।
  • प्रतीकात्मकता:
    • राख: सब कुछ नष्ट हो जाने का प्रतीक।
    • झोंपड़ी: सूरदास के जीवन, सपनों और आश्रय का प्रतीक।
    • खेल: जीवन की अस्थिरता और संघर्ष में भी आनंद खोजने की प्रेरणा का प्रतीक। 'खेल में रोना कैसा' संवाद जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

5. भाषा-शैली

प्रेमचंद की भाषा सरल, सहज और मुहावरेदार है। उन्होंने ग्रामीण परिवेश के अनुकूल शब्दावली का प्रयोग किया है। संवाद छोटे, प्रभावशाली और पात्रों के मनोभावों को व्यक्त करने वाले हैं। उनकी शैली यथार्थवादी है, जो समाज की कड़वी सच्चाइयों को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत करती है।


6. प्रमुख संवाद और उनका महत्व

  • "खेल में रोना कैसा?"
    • महत्व: यह संवाद सूरदास के जीवन में एक बड़ा मोड़ लाता है। यह उसे सिखाता है कि जीवन भी एक खेल है, जिसमें हार-जीत लगी रहती है। इसमें निराश होने के बजाय, व्यक्ति को फिर से उठकर संघर्ष करना चाहिए। यह सूरदास को निराशा से निकालकर आशा की ओर ले जाता है।
  • "राख ही तो थी।"
    • महत्व: यह सूरदास के आंतरिक संघर्ष और अपनी पीड़ा को छिपाने की कोशिश को दर्शाता है। वह अपनी जमा पूंजी के बारे में किसी को नहीं बताना चाहता, ताकि उसकी भिखारी की पहचान बनी रहे और लोग उसे दया का पात्र समझते रहें। यह उसके आत्मसम्मान और सामाजिक स्थिति के प्रति उसकी चिंता को दर्शाता है।
  • "मैं इसे फिर बनाऊँगा।"
    • महत्व: यह सूरदास के दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और जीवन के प्रति उसकी अटूट आस्था को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि वह विपत्ति से घबराता नहीं, बल्कि उसका सामना करने और नए सिरे से शुरुआत करने को तैयार है।

7. संदेश/उद्देश्य

यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए, हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। आशा और दृढ़ संकल्प के साथ हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह मानवीय मूल्यों, संघर्ष की प्रेरणा और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व को भी उजागर करती है। यह पाठ यह भी सिखाता है कि ईर्ष्या और प्रतिशोध अंततः किसी का भला नहीं करते।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

निर्देश: सही विकल्प का चयन करें।

  1. 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के लेखक कौन हैं?
    a) जयशंकर प्रसाद
    b) प्रेमचंद
    c) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
    d) महादेवी वर्मा

  2. सूरदास की झोंपड़ी में आग किसने लगाई थी?
    a) जगधर ने
    b) सुभागी ने
    c) भैरव ने
    d) मिट्ठुआ ने

  3. सूरदास को झोंपड़ी जलने से अधिक दुख किस बात का था?
    a) अपने पोते के भविष्य का
    b) अपनी जमा पूंजी के चोरी होने का
    c) अपने पड़ोसियों की बेरुखी का
    d) अपनी आँखों की रोशनी न होने का

  4. सूरदास ने अपनी जमा पूंजी किसलिए बचाकर रखी थी?
    a) नया घर बनवाने के लिए
    b) तीर्थयात्रा पर जाने के लिए
    c) पोते मिट्ठुआ का ब्याह, पितरों का पिंडदान और कुआँ बनवाने के लिए
    d) व्यापार शुरू करने के लिए

  5. भैरव ने सूरदास से बदला क्यों लिया था?
    a) सूरदास ने भैरव का अपमान किया था।
    b) भैरव की पत्नी सुभागी सूरदास के पास शरण लेती थी।
    c) सूरदास ने भैरव के पैसे चुराए थे।
    d) भैरव सूरदास की झोंपड़ी पर कब्जा करना चाहता था।

  6. जगधर का चरित्र कैसा था?
    a) ईमानदार और दयालु
    b) लालची और स्वार्थी
    c) क्रूर और प्रतिशोधी
    d) निस्वार्थ और परोपकारी

  7. सूरदास को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा किससे मिली?
    a) सुभागी से
    b) जगधर से
    c) बच्चों के खेल से
    d) अपनी अंतरात्मा की आवाज से

  8. 'खेल में रोना कैसा?' यह संवाद किसने कहा था?
    a) सूरदास ने
    b) मिट्ठुआ ने
    c) एक बच्चे ने
    d) सुभागी ने

  9. सूरदास अपनी जमा पूंजी के बारे में किसी को क्यों नहीं बताना चाहता था?
    a) वह लोगों को अमीर नहीं दिखना चाहता था।
    b) वह अपनी भिखारी की पहचान खोना नहीं चाहता था।
    c) उसे डर था कि लोग उससे पैसे माँगेंगे।
    d) उसे लगा कि कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करेगा।

  10. कहानी के अंत में सूरदास का क्या संकल्प था?
    a) गांव छोड़कर चले जाने का
    b) भैरव से बदला लेने का
    c) फिर से झोंपड़ी बनाने और जीवन को नए सिरे से शुरू करने का
    d) अपनी बाकी जिंदगी दुख में बिताने का


उत्तर कुंजी:

  1. b) प्रेमचंद
  2. c) भैरव ने
  3. b) अपनी जमा पूंजी के चोरी होने का
  4. c) पोते मिट्ठुआ का ब्याह, पितरों का पिंडदान और कुआँ बनवाने के लिए
  5. b) भैरव की पत्नी सुभागी सूरदास के पास शरण लेती थी।
  6. b) लालची और स्वार्थी
  7. c) बच्चों के खेल से
  8. c) एक बच्चे ने
  9. b) वह अपनी भिखारी की पहचान खोना नहीं चाहता था।
  10. c) फिर से झोंपड़ी बनाने और जीवन को नए सिरे से शुरू करने का

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय की गहन समझ प्रदान करेंगे और आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं।

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