Class 12 Hindi Notes Chapter 10 (Chapter 10) – Aroh Book

Aroh
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी 'आरोह' पाठ्यपुस्तक के दसवें अध्याय, कवि उमाशंकर जोशी द्वारा रचित दो कविताओं 'छोटा मेरा खेत' और 'बगुलों के पंख' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इन कविताओं के हर महत्वपूर्ण पहलू को समझना आवश्यक है।


अध्याय 10: छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख (उमाशंकर जोशी)

I. कवि परिचय: उमाशंकर जोशी

  • जन्म: 1911 ईस्वी (गुजरात)
  • निधन: 1988 ईस्वी
  • प्रमुख रचनाएँ:
    • काव्य संग्रह: विश्व शांति, गंगोत्री, निशीथ, प्राचीना, वसंत वर्षा, महाप्रस्थान, अभिज्ञा।
    • कहानी संग्रह: श्रावणी मेणो, विसामो।
    • एकांकी: हवेली।
    • आलोचना: गोष्ठी, उघाड़ी बारी।
    • संपादन: 'संस्कृति' पत्रिका का संपादन।
  • पुरस्कार एवं सम्मान:
    • ज्ञानपीठ पुरस्कार (1968 ईस्वी) - गुजराती साहित्य के लिए।
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार।
    • रणजीतराम सुवर्णचंद्रक।
    • सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार।
    • महात्मा गांधी द्वारा 'विश्व शांति' कविता की सराहना।
  • साहित्यिक विशेषताएँ:
    • गुजराती साहित्य के प्रमुख कवि।
    • प्रकृति प्रेम, मानवीय संवेदना और सांस्कृतिक चेतना उनकी कविताओं का मूल स्वर है।
    • उनकी कविताओं में लोकजीवन की गहरी पैठ और आधुनिक बोध का अद्भुत संगम मिलता है।
    • गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित।
  • भाषा शैली: सरल, सहज, खड़ी बोली, बिम्बात्मकता और प्रतीकात्मकता का सुंदर प्रयोग।

II. पाठ परिचय

इस अध्याय में उमाशंकर जोशी की दो कविताएँ संकलित हैं:

  1. छोटा मेरा खेत: यह कविता कवि-कर्म (रचना प्रक्रिया) को एक किसान के खेत में बीज बोने, फसल उगने और उसके कटने की प्रक्रिया के रूपक के माध्यम से समझाती है। इसमें कविता के शाश्वत और अक्षय स्वरूप को दर्शाया गया है।
  2. बगुलों के पंख: यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का चित्रण करती है। इसमें संध्याकाल में आकाश में उड़ते बगुलों की पंक्ति और बादलों के बीच उनके श्वेत पंखों के मनोहारी दृश्य का वर्णन है, जो कवि के मन को मोह लेता है।

कविता - 1: छोटा मेरा खेत

1. सारांश

'छोटा मेरा खेत' कविता में कवि ने अपनी रचनात्मक प्रक्रिया को एक किसान के खेत में बीज बोने और फसल काटने के रूपक के माध्यम से व्यक्त किया है। कवि का मन या कागज का पन्ना एक छोटा-सा खेत है। जिस प्रकार खेत में बीज बोया जाता है, उसी प्रकार कवि के मन में किसी भाव या विचार का बीज आता है। यह विचार कल्पना के सहारे अंकुरित होता है और शब्दों का रूप लेता है। फिर भावों और रसों के अमृत से कविता रूपी फसल तैयार होती है। यह कविता रूपी फसल अनंत काल तक पाठक को आनंद देती है और उसका रस कभी समाप्त नहीं होता। यह एक अक्षय पात्र के समान है, जिसे जितना बांटा जाए, उतना ही बढ़ता है।

2. प्रमुख बिंदु एवं व्याख्या

  • "छोटा मेरा खेत चौकोना, कागज़ का एक पन्ना": कवि अपने मन या कागज के पन्ने को एक छोटा-सा चौकोर खेत मानता है। यह रचना के आधार का प्रतीक है।
  • "कोई अंधड़ कहीं से आया, क्षण का बीज वहाँ बोया गया": 'अंधड़' यहाँ किसी भावनात्मक आवेग, विचार के तूफान या प्रेरणा का प्रतीक है। 'क्षण का बीज' किसी विशेष विचार, भाव या अनुभूति का प्रतीक है जो कवि के मन में उत्पन्न होता है।
  • "कल्पना के रसायनों को पी, बीज गल गया निःशेष": कवि की कल्पना शक्ति (रसायन) उस विचार को विकसित करती है। विचार कल्पना में घुलमिलकर एक नया रूप लेता है।
  • "शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष": विचार जब कल्पना से जुड़कर विकसित होता है, तो वह शब्दों का रूप लेता है। ये शब्द ही कविता के अंकुर हैं, जो पल्लवों (पत्तियों) और पुष्पों (फूलों) से झुककर विशेष रूप धारण करते हैं, अर्थात कविता आकार लेती है।
  • "झूमने लगे फल, रस अलौकिक": जब कविता पूर्ण हो जाती है, तो वह पाठक को आनंद (फल) देती है। यह आनंद सांसारिक नहीं, बल्कि अलौकिक और दिव्य होता है।
  • "अमृत धाराएँ फूटतीं, रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की": कविता से प्राप्त होने वाला आनंद अमृत के समान है, जो कभी समाप्त नहीं होता। कवि कहता है कि रचना प्रक्रिया तो एक क्षणिक होती है (भाव का आना, बीज बोना), लेकिन उसका फल (कविता का आनंद) अनंत काल तक मिलता रहता है।
  • "लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती, रस का अक्षय पात्र सदा का": कविता का आनंद जितना अधिक बांटा जाए, उतना ही बढ़ता है। यह कभी न खत्म होने वाला (अक्षय) रस का पात्र है। यह कविता की शाश्वतता और उसके सार्वभौमिक प्रभाव को दर्शाता है।

3. काव्य सौंदर्य

  • भाषा: सरल, सहज खड़ी बोली, भावानुकूल।
  • अलंकार:
    • रूपक अलंकार: 'छोटा मेरा खेत', 'क्षण का बीज', 'कल्पना के रसायन', 'शब्द के अंकुर', 'रस का अक्षय पात्र' आदि में सुंदर रूपक का प्रयोग।
    • मानवीकरण: 'झूमने लगे फल'।
  • छंद: मुक्त छंद।
  • रस: शांत रस।
  • बिम्ब: दृश्य बिम्ब (खेत, बीज, अंकुर, फल), अमूर्त बिम्ब (अंधड़, कल्पना के रसायन)।
  • शैली: प्रतीकात्मक और बिम्बात्मक।

कविता - 2: बगुलों के पंख

1. सारांश

'बगुलों के पंख' कविता में कवि संध्याकाल में आकाश में उड़ते हुए बगुलों की पंक्ति के मनोहारी दृश्य का वर्णन करता है। काले बादलों से भरे आकाश में सफेद बगुलों की पंक्ति ऐसे प्रतीत होती है, जैसे कोई श्वेत काया तैर रही हो। यह दृश्य इतना आकर्षक और जादुई है कि कवि की आँखें उस पर से हटती नहीं हैं। वह चाहता है कि यह सौंदर्य उसकी आँखों से ओझल न हो और वह इसे अपनी आँखों में कैद कर ले। कवि प्रकृति के क्षणिक सौंदर्य को स्थायी रूप से अनुभव करने की लालसा व्यक्त करता है।

2. प्रमुख बिंदु एवं व्याख्या

  • "नभ में पाँती बाँधे बगुलों के पाँख": कवि आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते हुए बगुलों के समूह को देखता है। यह एक सुंदर दृश्य बिम्ब है।
  • "कजरारे बादलों की छाई नभ-छाया": आकाश में काले बादल छाए हुए हैं, जिससे वातावरण में एक विशेष रंगत आ गई है। यह संध्याकाल का दृश्य है।
  • "तिरती, श्वेत काया": काले बादलों की पृष्ठभूमि में सफेद बगुले ऐसे लग रहे हैं, जैसे कोई सफेद शरीर (काया) तैर रहा हो। यह उपमा और दृश्य बिम्ब का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • "धीरे-धीरे काली छाया, माया से छूटी": जैसे-जैसे शाम गहराती है, काले बादलों की छाया और घनी होती जाती है, और बगुलों का सौंदर्य एक जादुई प्रभाव उत्पन्न करता है। 'माया' यहाँ सौंदर्य के जादुई आकर्षण का प्रतीक है।
  • "उसे कोई रोक रखो, वह तो चुरा ले जाती मेरी आँखें": कवि इस सौंदर्य से इतना मंत्रमुग्ध है कि वह चाहता है कि यह दृश्य उसकी आँखों से ओझल न हो। बगुलों का सौंदर्य उसकी आँखों को अपनी ओर खींच लेता है, मानो चुरा लेता हो।
  • "मैं उसे पकड़ना चाहता हूँ, वह तो भागती है": कवि इस क्षणभंगुर सौंदर्य को अपनी आँखों में, अपने मन में स्थायी रूप से कैद कर लेना चाहता है, लेकिन प्रकृति का सौंदर्य क्षणिक होता है, वह रुकता नहीं।
  • "उसे कोई तनिक रोक रखो": यह कवि की तीव्र इच्छा है कि इस मनोहारी दृश्य को कुछ देर और देखा जा सके, ताकि वह अपनी आत्मा में इस सौंदर्य को समाहित कर सके।

3. काव्य सौंदर्य

  • भाषा: सरल, सहज खड़ी बोली, बिम्बात्मकता का उत्कृष्ट प्रयोग।
  • अलंकार:
    • उपमा अलंकार: 'तिरती, श्वेत काया' (बगुलों की तुलना श्वेत काया से)।
    • अनुप्रास अलंकार: 'कजरारे बादलों की', 'पाँती बाँधे पाँख'।
    • मानवीकरण: 'चुरा ले जाती मेरी आँखें'।
  • छंद: मुक्त छंद।
  • रस: शांत रस, अद्भुत रस।
  • बिम्ब: अत्यंत प्रभावशाली दृश्य बिम्ब (काले बादल, सफेद बगुले, पंक्तिबद्ध उड़ान, सुनहरी शाम)।
  • शैली: चित्रात्मक और भावनात्मक।

III. सरकारी परीक्षा हेतु विशेष महत्वपूर्ण तथ्य

  • कवि का मूल राज्य: उमाशंकर जोशी गुजराती साहित्य के प्रमुख कवि थे।
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार: उन्हें 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • 'छोटा मेरा खेत' का मूल भाव: कविता की रचना प्रक्रिया, कविता की शाश्वतता और उसके अक्षय आनंद का वर्णन।
  • 'बगुलों के पंख' का मूल भाव: प्रकृति के क्षणिक सौंदर्य का मनोहारी चित्रण और उसे आत्मसात करने की कवि की लालसा।
  • रूपक अलंकार: 'छोटा मेरा खेत' कविता में प्रयुक्त विभिन्न रूपकों (खेत, बीज, अंधड़, रसायन, अंकुर, अक्षय पात्र) को गहराई से समझें।
  • बिम्ब विधान: 'बगुलों के पंख' कविता में दृश्य बिम्ब की प्रधानता को पहचानें।
  • पंक्तियों का भावार्थ: कविताओं की किसी भी पंक्ति का भावार्थ पूछा जा सकता है।
  • कवि के विचार: कवि की प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और कला के प्रति दृष्टिकोण को समझें।

IV. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. उमाशंकर जोशी का जन्म किस राज्य में हुआ था?
    क) राजस्थान
    ख) गुजरात
    ग) महाराष्ट्र
    घ) उत्तर प्रदेश

  2. उमाशंकर जोशी को किस वर्ष ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
    क) 1965
    ख) 1968
    ग) 1970
    घ) 1972

  3. 'छोटा मेरा खेत' कविता में 'अंधड़' किसका प्रतीक है?
    क) प्राकृतिक तूफान का
    ख) विचारों के आवेग का
    ग) खेत की जुताई का
    घ) फसल की कटाई का

  4. 'छोटा मेरा खेत' कविता में 'रस का अक्षय पात्र' किसे कहा गया है?
    क) खेत को
    ख) कवि के मन को
    ग) कविता को
    घ) कल्पना को

  5. 'छोटा मेरा खेत' कविता में 'रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की' का क्या अर्थ है?
    क) खेती का काम कम समय का होता है, फल लंबे समय तक मिलता है।
    ख) कविता रचना में कम समय लगता है, उसका आनंद अनंत काल तक मिलता है।
    ग) जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु अनंत है।
    घ) बीज बोना आसान है, फसल काटना कठिन।

  6. 'बगुलों के पंख' कविता में कवि किस समय के सौंदर्य का वर्णन कर रहा है?
    क) प्रातःकाल
    ख) दोपहर
    ग) संध्याकाल
    घ) मध्यरात्रि

  7. 'बगुलों के पंख' कविता में 'कजरारे बादलों की छाई नभ-छाया' किसका संकेत देती है?
    क) वर्षा ऋतु का आगमन
    ख) दिन के उजाले का
    ग) काले और घने बादलों से घिरे आकाश का
    घ) प्रदूषण युक्त वातावरण का

  8. 'बगुलों के पंख' कविता में कवि की आँखें कौन चुरा ले जाता है?
    क) काले बादल
    ख) बगुलों के पंख
    ग) सुनहरी धूप
    घ) नदी का जल

  9. 'छोटा मेरा खेत' कविता में 'कागज़ का एक पन्ना' किसका प्रतीक है?
    क) कवि के खेत का
    ख) कवि के मन का
    ग) कविता रचना के आधार का
    घ) एक खाली किताब का

  10. 'बगुलों के पंख' कविता में किस प्रकार के बिम्ब का सुंदर प्रयोग हुआ है?
    क) श्रव्य बिम्ब
    ख) स्पर्श बिम्ब
    ग) दृश्य बिम्ब
    घ) गंध बिम्ब


उत्तरमाला:

  1. ख) गुजरात
  2. ख) 1968
  3. ख) विचारों के आवेग का
  4. ग) कविता को
  5. ख) कविता रचना में कम समय लगता है, उसका आनंद अनंत काल तक मिलता है।
  6. ग) संध्याकाल
  7. ग) काले और घने बादलों से घिरे आकाश का
  8. ख) बगुलों के पंख
  9. ग) कविता रचना के आधार का
  10. ग) दृश्य बिम्ब

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। इन कविताओं के भावों और शिल्प सौंदर्य को गहराई से समझने का प्रयास करें। शुभकामनाएँ!

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