Class 12 Hindi Notes Chapter 14 (Chapter 14) – Aroh Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'आरोह' के अध्याय 14, 'पहलवान की ढोलक' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह कहानी न केवल एक पहलवान के जीवन संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि बदलते समय, लोककलाओं के पतन और ग्रामीण जीवन की त्रासदियों का भी मार्मिक चित्रण करती है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसके हर महत्वपूर्ण पहलू को समझना आवश्यक है।
अध्याय 14: पहलवान की ढोलक
लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु
1. लेखक परिचय: फणीश्वरनाथ रेणु
- जन्म: 1921, औराही हिंगना, जिला पूर्णिया (अब अररिया), बिहार।
- शिक्षा: भारत और नेपाल में।
- पहचान: हिंदी साहित्य के महान आंचलिक कथाकार के रूप में प्रसिद्ध। 'आंचलिक' का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र (अंचल) की लोक-संस्कृति, लोक-जीवन, भाषा और रीति-रिवाजों का चित्रण करने वाला।
- प्रमुख रचनाएँ:
- उपन्यास: मैला आँचल (अत्यंत प्रसिद्ध), परती परिकथा, दीर्घतपा, जुलूस, कितने चौराहे।
- कहानी संग्रह: ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप।
- रिपोर्ताज: ऋणजल धनजल, नेपाली क्रांति कथा, वन तुलसी की गंध, श्रुत अश्रुत पूर्व।
- पुरस्कार: 'मैला आँचल' के लिए पद्मश्री से सम्मानित।
- विशेषताएँ:
- ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी और सजीव चित्रण।
- लोकभाषा, लोक-संस्कृति और लोक-संगीत का गहरा ज्ञान।
- कहानियों में जनजीवन की पीड़ा, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक प्रस्तुतीकरण।
- उनकी भाषा में आंचलिक शब्दों और मुहावरों का सहज प्रयोग होता है।
- मृत्यु: 1977।
2. पाठ परिचय
- विधा: कहानी।
- विषय वस्तु: यह कहानी राजतंत्र के समाप्त होने और लोकतंत्र के आने के बाद लोककला और उसके कलाकारों के उपेक्षित होने की मार्मिक गाथा है। यह ग्रामीण जीवन में अकाल, महामारी और गरीबी के भयावह रूप का चित्रण करती है। साथ ही, यह मनुष्य की अदम्य जिजीविषा (जीने की इच्छा) और संघर्ष को भी दर्शाती है।
- मुख्य पात्र: लुट्टन पहलवान।
3. कहानी का सार (विस्तृत)
क. लुट्टन का प्रारंभिक जीवन और पहलवानी में प्रवेश:
- लुट्टन का बचपन में ही अनाथ हो जाना और सास द्वारा पाल-पोसकर बड़ा करना।
- वह बचपन से ही गाय-भैंस चराता, दूध पीता और शरीर बनाता था।
- उसकी शादी हो चुकी थी और वह अपनी सास को गालियाँ देने वाले गाँव वालों से बदला लेने के लिए पहलवान बनने का निश्चय करता है।
- श्यामनगर का दंगल: एक बार वह श्यामनगर के दंगल में जाता है। वहाँ पंजाब के नामी पहलवान चाँद सिंह (जिसे 'शेर के बच्चे' की उपाधि मिली थी) से मुकाबला करता है।
- राजा साहब का संरक्षण: लुट्टन, चाँद सिंह को चित्त कर देता है। राजा साहब (श्यामानंद) उसकी हिम्मत और दाँव-पेच से प्रभावित होकर उसे राज-पहलवान बना लेते हैं।
- राज-पहलवान का जीवन: लुट्टन राजा साहब के दरबार में रहता है, खूब खाता-पीता और कसरत करता है। वह राजा साहब का प्रिय बन जाता है।
- बेटों का जन्म: लुट्टन के दो बेटे होते हैं। वह उन्हें भी पहलवान बनाना चाहता है और राजा साहब की कृपा से उन्हें भी दूध-घी मिलता है।
ख. राज्याश्रय का अंत और संघर्ष:
- राजा साहब का निधन: 15 वर्ष तक लुट्टन राज-पहलवान बना रहता है, लेकिन अचानक राजा श्यामानंद का देहांत हो जाता है।
- नए राजकुमार का आगमन: राजा साहब के विलायत से लौटे बेटे ने राजकाज संभाला। वह पढ़ा-लिखा और अंग्रेजी सभ्यता का समर्थक था। उसे दंगल और पहलवानी व्यर्थ का काम लगता था।
- लुट्टन का निष्कासन: नए राजकुमार ने लुट्टन पहलवान को राजमहल से निकाल दिया। उसे केवल दस रुपये मासिक पेंशन दी गई।
- गांव लौटना: लुट्टन अपने दोनों बेटों के साथ गांव लौट आता है। वह गांव में छोटे-मोटे करतब दिखाकर और बच्चों को पहलवानी के दाँव-पेच सिखाकर गुजारा करने लगता है, लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं होता।
ग. महामारी का प्रकोप और ढोलक की भूमिका:
- अकाल और महामारी: गाँव में अकाल पड़ जाता है और उसके बाद मलेरिया व हैजा जैसी भयंकर बीमारियों का प्रकोप फैल जाता है।
- मौत का सन्नाटा: गाँव में चारों ओर मौत का सन्नाटा छा जाता है। लोग भयभीत और निराश हो जाते हैं। हर रात कई लोग मरते हैं।
- ढोलक की आवाज: ऐसे भयानक माहौल में केवल लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज ही लोगों को जीने की प्रेरणा देती है। ढोलक की आवाज में लुट्टन अपने शिष्यों को कुश्ती के दाँव-पेच सिखाने वाले बोलों को बजाता है, जैसे "धा गिड़-गिड़ धा गिड़-गिड़" (दाँव काटो, बाहर निकलो), "चटाक-धिन-चटाक-धिन" (मत डरना, उठा पटक दे)।
- संजीवनी शक्ति: ढोलक की आवाज रात के सन्नाटे को चीरती हुई लोगों में हिम्मत और जीने की इच्छा भरती है। बीमार लोग भी उस आवाज से कुछ देर के लिए अपनी पीड़ा भूल जाते हैं।
घ. लुट्टन की त्रासदी और मृत्यु:
- बेटों की मृत्यु: महामारी के कारण लुट्टन के दोनों जवान बेटों की भी मृत्यु हो जाती है। यह लुट्टन के लिए सबसे बड़ा आघात था।
- अकेलापन और ढोलक: बेटों की मृत्यु के बाद भी लुट्टन ढोलक बजाना नहीं छोड़ता। वह जानता है कि उसकी ढोलक ही अब लोगों का एकमात्र सहारा है।
- लुट्टन की मृत्यु: एक रात गाँव वालों को लुट्टन की ढोलक की आवाज सुनाई नहीं देती। सुबह जब वे उसके घर जाते हैं, तो लुट्टन चित्त लेटा हुआ मृत पाया जाता है।
- अंतिम इच्छा: लुट्टन ने मरने से पहले कहा था कि उसे चिता पर औंधे मुँह लिटाया जाए (पहलवान की तरह)। गाँव वालों ने उसकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान किया।
4. प्रमुख बिंदु और संदेश
- लोककला और राज्याश्रय: यह कहानी दर्शाती है कि लोककलाएँ और कलाकार किस प्रकार राज्याश्रय पर निर्भर होते हैं। राज्याश्रय समाप्त होने पर उनकी कला और जीवन दोनों का पतन हो जाता है।
- बदलते समय का प्रभाव: राजतंत्र से लोकतंत्र में संक्रमण और आधुनिकता के प्रभाव से पुरानी परंपराओं, कलाओं और जीवन-मूल्यों का महत्व कम होना।
- ग्रामीण जीवन की त्रासदी: अकाल, महामारी और गरीबी से जूझते ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी और मार्मिक चित्रण।
- मनुष्य की जिजीविषा: लुट्टन पहलवान का जीवन संघर्ष, विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानना और अपनी ढोलक के माध्यम से दूसरों में जीने की प्रेरणा भरना।
- ढोलक का प्रतीक: ढोलक केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि लुट्टन की कला, उसकी आत्मा, उसके संघर्ष और मृत्यु के माहौल में आशा का प्रतीक है। यह दुख और मृत्यु के बीच जीवन का संगीत है।
- आंचलिकता: कहानी में आंचलिक भाषा, लोक मुहावरों और ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण मिलता है, जो इसे और भी प्रभावी बनाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
'पहलवान की ढोलक' कहानी के लेखक कौन हैं?
क) प्रेमचंद
ख) फणीश्वरनाथ रेणु
ग) जैनेंद्र कुमार
घ) महादेवी वर्मा -
फणीश्वरनाथ रेणु किस प्रकार के कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं?
क) मनोवैज्ञानिक कथाकार
ख) ऐतिहासिक कथाकार
ग) आंचलिक कथाकार
घ) सामाजिक कथाकार -
लुट्टन पहलवान ने किस पहलवान को हराकर श्यामनगर के दंगल में जीत हासिल की थी?
क) काला खाँ
ख) चाँद सिंह
ग) बादल सिंह
घ) मोतीलाल -
राजा श्यामानंद के निधन के बाद उनके बेटे ने लुट्टन पहलवान के साथ क्या व्यवहार किया?
क) उसे राज-पहलवान बनाए रखा
ख) उसे सम्मानपूर्वक पेंशन देकर विदा किया
ग) उसे राजमहल से निकाल दिया और केवल 10 रुपये मासिक पेंशन दी
घ) उसे नए दंगल का प्रबंधक बना दिया -
लुट्टन पहलवान के गांव में कौन सी बीमारी फैल गई थी?
क) चेचक और प्लेग
ख) मलेरिया और हैजा
ग) टी.बी. और निमोनिया
घ) डेंगू और चिकनगुनिया -
महामारी के दौरान गाँव में रात के सन्नाटे को कौन सी आवाज़ चीरती थी?
क) कुत्तों के रोने की आवाज़
ख) लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज़
ग) गाँव वालों के कराहने की आवाज़
घ) उल्लू की आवाज़ -
लुट्टन पहलवान के दोनों बेटों की मृत्यु का कारण क्या था?
क) कुश्ती में चोट लगने से
ख) महामारी (हैजा-मलेरिया) से
ग) भूखमरी से
घ) दुर्घटना से -
लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज़ गाँव वालों के लिए किसका प्रतीक थी?
क) भय और निराशा का
ख) मनोरंजन और उत्साह का
ग) संजीवनी शक्ति और जीने की प्रेरणा का
घ) पुराने समय की यादों का -
लुट्टन पहलवान की मृत्यु कैसे हुई?
क) कुश्ती लड़ते हुए
ख) बीमारी से बिस्तर पर लेटे हुए
ग) ढोलक बजाते हुए
घ) भूख से -
लुट्टन पहलवान की अंतिम इच्छा क्या थी?
क) उसे राजमहल में दफनाया जाए
ख) उसकी ढोलक को हमेशा बजाया जाए
ग) उसे चिता पर औंधे मुँह (पहलवान की तरह) लिटाया जाए
घ) उसके बेटों की तरह उसे भी सम्मान मिले
उत्तरमाला:
- ख) फणीश्वरनाथ रेणु
- ग) आंचलिक कथाकार
- ख) चाँद सिंह
- ग) उसे राजमहल से निकाल दिया और केवल 10 रुपये मासिक पेंशन दी
- ख) मलेरिया और हैजा
- ख) लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज़
- ख) महामारी (हैजा-मलेरिया) से
- ग) संजीवनी शक्ति और जीने की प्रेरणा का
- ख) बीमारी से बिस्तर पर लेटे हुए (हालांकि पाठ में सीधे बीमारी का उल्लेख नहीं, बल्कि ढोलक बंद होने पर उसकी मृत्यु का पता चलता है, जो महामारी के संदर्भ में ही है)
- ग) उसे चिता पर औंधे मुँह (पहलवान की तरह) लिटाया जाए
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। मन लगाकर अध्ययन करें!