Class 12 Hindi Notes Chapter 16 (Chapter 16) – Aroh Book

Aroh
प्रिय विद्यार्थियों,

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 'आरोह' भाग-2 के सोलहवें अध्याय 'नमक' (रजिया सज्जाद ज़हीर) के विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न यहाँ प्रस्तुत हैं। आशा है, यह सामग्री आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


अध्याय 16: नमक - रज़िया सज्जाद ज़हीर

1. लेखिका परिचय: रज़िया सज्जाद ज़हीर (1917-1979)

  • जन्म: 1917 में अजमेर, राजस्थान में।
  • शिक्षा: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
  • कार्यक्षेत्र: 1947 में भारत-विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चली गईं, लेकिन बाद में भारत लौट आईं और स्थायी रूप से लखनऊ में बस गईं। उन्होंने उर्दू साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • प्रमुख कृतियाँ: 'ज़र्द गुलाब' (उपन्यास), 'काँटे' (कहानी संग्रह), 'सुमन' (कहानी संग्रह)। उन्होंने अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिखे, जिनमें मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ का गहरा चित्रण मिलता है।
  • विशेषता: उनकी कहानियों में विभाजन का दर्द, मानवीय रिश्तों की जटिलता और स्त्री-मन की सूक्ष्म अनुभूतियाँ प्रमुखता से उभरती हैं।
  • निधन: 1979 में।

2. पाठ का सारांश (कहानी 'नमक' का विस्तृत विवरण)

'नमक' कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद विस्थापित हुए लोगों की मनोदशा, उनकी पहचान के संकट और मानवीय संबंधों की मार्मिक गाथा है। यह कहानी बताती है कि सरहदें भले ही देशों को बाँट दें, लेकिन इंसानी रिश्ते और भावनाएँ सरहदों से परे होती हैं।

  • मुख्य घटनाक्रम:
    • सफ़िया की लाहौर यात्रा: कहानी की मुख्य पात्र सफ़िया अपने सिख भाई से मिलने लाहौर जा रही है। यात्रा से पहले वह अपनी एक पुरानी पड़ोसन, जो अब दिल्ली में रहती है, के घर जाती है।
    • लाहौरी नमक की इच्छा: सफ़िया की पड़ोसन, जो अब बूढ़ी हो चुकी है और जिसे लोग 'सिख बीवी' कहते हैं, लाहौर को अपना वतन मानती है। वह सफ़िया से कहती है कि अगर वह लाहौर से उसके लिए कुछ ला सके, तो उसे लाहौरी नमक ला दे। यह नमक उसके लिए सिर्फ़ एक वस्तु नहीं, बल्कि अपने वतन की मिट्टी, अपने अतीत और अपनी पहचान का प्रतीक है। वह कहती है कि "मरते दम तक मेरी जुबान पर लाहौर का नमक रहेगा।"
    • नमक ले जाने का संकल्प: सफ़िया अपनी पड़ोसन की इस इच्छा से बहुत भावुक हो जाती है और लाहौर पहुँचकर उसके लिए नमक लाने का संकल्प लेती है।
    • लाहौर में अनुभव: लाहौर में सफ़िया को अपने भाई-भाभी और दोस्तों से मिलकर बहुत खुशी होती है। वह वहाँ के लोगों के प्यार और मेहमाननवाज़ी से अभिभूत होती है। उसे लगता है कि यहाँ के लोग भी वैसे ही हैं जैसे दिल्ली में।
    • नमक छुपाने की समस्या: वापसी के समय सफ़िया को याद आता है कि उसे सिख बीवी के लिए नमक ले जाना है। नमक ले जाना कस्टम के नियमों के विरुद्ध है। वह असमंजस में पड़ जाती है कि इसे कैसे ले जाए। वह सोचती है कि इसे फलों की टोकरी में छुपाकर ले जाए, लेकिन फिर उसे लगता है कि चोरी-छिपे ले जाना गलत होगा। वह तय करती है कि वह कस्टम अधिकारियों को सब सच बता देगी।
    • भारतीय कस्टम अधिकारी से भेंट: अमृतसर में भारतीय कस्टम अधिकारी उसे रोकते हैं। सफ़िया उन्हें अपनी पूरी बात बताती है और सिख बीवी की इच्छा के बारे में बताती है। भारतीय कस्टम अधिकारी, जो स्वयं भी ढाका (बांग्लादेश) के निवासी रहे हैं और विभाजन का दर्द झेल चुके हैं, सफ़िया की बात सुनकर भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, "नमक ले जाना तो गैर-कानूनी है, पर इंसानियत के नाते हम आपको रोक नहीं सकते।" वे सफ़िया को जाने देते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर अपने वतन से बिछड़ने का दर्द साफ झलकता है। वे सफ़िया से कहते हैं कि "जब आप वापस दिल्ली जाएँ, तो यह नमक उस बूढ़ी सिख बीवी को दे दीजिएगा और कहिएगा कि मेरा सलाम कहिएगा।"
    • पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी से भेंट: वाघा बॉर्डर पर सफ़िया को पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी मिलते हैं। सफ़िया उन्हें भी अपनी पूरी बात बताती है। पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी, जो स्वयं दिल्ली के पुराने निवासी हैं, सफ़िया की बात सुनकर भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, "मुहब्बत तो कस्टम से यूँ गुज़र जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।" वे सफ़िया को नमक ले जाने की अनुमति दे देते हैं। वे सफ़िया से कहते हैं कि "जब आप वापस दिल्ली जाएँ, तो यह नमक उस बूढ़ी सिख बीवी को दे दीजिएगा और कहिएगा कि मेरा सलाम कहिएगा।"
    • अंतिम विचार: सफ़िया दोनों देशों के कस्टम अधिकारियों की मानवीय संवेदना से प्रभावित होती है। उसे लगता है कि सरहदें भले ही खींच दी गई हों, लेकिन लोगों के दिलों में अपने वतन और मानवीय रिश्तों के लिए प्यार अभी भी जीवित है। कहानी का अंत इस विचार के साथ होता है कि सरहद के दोनों ओर के लोगों में एक ही मिट्टी की खुशबू है, एक ही दर्द है और एक ही मानवीयता है।

3. प्रमुख पात्र और उनके गुण:

  • सफ़िया: कहानी की केंद्रीय पात्र। संवेदनशील, भावुक, कर्तव्यनिष्ठ, मानवीय मूल्यों में विश्वास रखने वाली।
  • सिख बीवी (सफ़िया की पड़ोसन): वृद्ध, अपने वतन लाहौर के प्रति गहरी भावनात्मक लगाव रखने वाली, विभाजन का दर्द झेल चुकी।
  • भारतीय कस्टम अधिकारी: संवेदनशील, अपने वतन ढाका (अब बांग्लादेश) से बिछड़ने का दर्द रखने वाला, मानवीयता को कानून से ऊपर रखने वाला।
  • पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी: संवेदनशील, अपने वतन दिल्ली से बिछड़ने का दर्द रखने वाला, मानवीयता को कानून से ऊपर रखने वाला।

4. मुख्य संदेश/विषय-वस्तु (Themes):

  • विभाजन का दर्द: कहानी विभाजन के कारण लाखों लोगों द्वारा झेले गए दर्द, विस्थापन और अपने वतन से बिछड़ने की पीड़ा को दर्शाती है।
  • मानवीय संबंध और संवेदनाएँ: यह कहानी दर्शाती है कि मानवीय संबंध और संवेदनाएँ राजनीतिक सरहदों से परे होती हैं। दोनों देशों के कस्टम अधिकारी इसका प्रमाण हैं।
  • पहचान का संकट: सिख बीवी, भारतीय कस्टम अधिकारी और पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी सभी अपने-अपने पुराने वतन से जुड़े हुए हैं, जो उनकी पहचान का अभिन्न अंग है। 'नमक' इस पहचान का प्रतीक बन जाता है।
  • सांस्कृतिक एकता: कहानी बताती है कि भारत और पाकिस्तान के लोगों की संस्कृति, भाषा और भावनाएँ बहुत हद तक समान हैं, भले ही राजनीतिक सीमाएँ उन्हें अलग करती हों।
  • प्रतीकात्मकता: 'नमक' यहाँ सिर्फ़ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि अपने वतन की मिट्टी, स्वाद, यादें और पहचान का प्रतीक है। यह विभाजन के दर्द और मानवीय जुड़ाव का प्रतीक है।

5. भाषा-शैली की विशेषताएँ:

  • संवेदनशील और मार्मिक: लेखिका ने अत्यंत संवेदनशील और मार्मिक भाषा का प्रयोग किया है, जो पाठकों को पात्रों की भावनाओं से जोड़ती है।
  • सरल और प्रवाहमयी: भाषा सरल और सहज है, जिससे कहानी आसानी से समझ में आती है।
  • उर्दू शब्दों का प्रयोग: कहानी में उर्दू शब्दों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो पात्रों के परिवेश और संवादों को प्रामाणिकता प्रदान करता है।
  • संवादात्मक: संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया गया है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'नमक' कहानी की लेखिका कौन हैं?
    अ) महादेवी वर्मा
    ब) रज़िया सज्जाद ज़हीर
    स) कृष्णा सोबती
    द) मन्नू भंडारी

  2. सफ़िया को लाहौर से क्या लाने के लिए कहा गया था?
    अ) मिठाई
    ब) कपड़े
    स) लाहौरी नमक
    द) फल

  3. सफ़िया की पड़ोसन, जिसे 'सिख बीवी' कहा गया है, मूल रूप से कहाँ की निवासी थी?
    अ) दिल्ली
    ब) लखनऊ
    स) लाहौर
    द) अमृतसर

  4. भारतीय कस्टम अधिकारी कहाँ के रहने वाले थे, जहाँ से उनका तबादला हुआ था?
    अ) दिल्ली
    ब) ढाका
    स) लाहौर
    द) कराची

  5. पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी कहाँ के रहने वाले थे?
    अ) लाहौर
    ब) कराची
    स) दिल्ली
    द) पेशावर

  6. "मुहब्बत तो कस्टम से यूँ गुज़र जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।" यह कथन किसका है?
    अ) सफ़िया का
    ब) सिख बीवी का
    स) भारतीय कस्टम अधिकारी का
    द) पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी का

  7. 'नमक' कहानी में 'नमक' किसका प्रतीक है?
    अ) खाद्य पदार्थ का
    ब) स्वाद का
    स) अपने वतन की मिट्टी, यादों और पहचान का
    द) दोस्ती का

  8. सफ़िया नमक को छुपाकर ले जाने के बजाय क्या करने का निर्णय लेती है?
    अ) उसे फेंक देने का
    ब) किसी और को दे देने का
    स) कस्टम अधिकारियों को सच बताने का
    द) उसे खा जाने का

  9. सफ़िया अपने भाई से मिलने कहाँ जा रही थी?
    अ) दिल्ली
    ब) अमृतसर
    स) लाहौर
    द) लखनऊ

  10. 'नमक' कहानी में विभाजन के किस पहलू को प्रमुखता से दर्शाया गया है?
    अ) राजनीतिक संघर्ष
    ब) आर्थिक समस्याएँ
    स) मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक जुड़ाव पर प्रभाव
    द) धार्मिक कट्टरता


उत्तरमाला:

  1. ब) रज़िया सज्जाद ज़हीर
  2. स) लाहौरी नमक
  3. स) लाहौर
  4. ब) ढाका
  5. स) दिल्ली
  6. द) पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी का
  7. स) अपने वतन की मिट्टी, यादों और पहचान का
  8. स) कस्टम अधिकारियों को सच बताने का
  9. स) लाहौर
  10. स) मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक जुड़ाव पर प्रभाव

मुझे आशा है कि यह विस्तृत सामग्री आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होगी। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!

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