Class 12 Hindi Notes Chapter 2 (Chapter 2) – Antral Bhag-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतराल भाग-2' के अध्याय 2 'सूरदास की झोंपड़ी' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाठ न केवल साहित्य की दृष्टि से बल्कि जीवन-मूल्यों की दृष्टि से भी हमें बहुत कुछ सिखाता है।
अध्याय 2: सूरदास की झोंपड़ी
(लेखक: प्रेमचंद)
I. लेखक परिचय: प्रेमचंद
- मूल नाम: धनपत राय श्रीवास्तव
- जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही गाँव, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
- मृत्यु: 8 अक्टूबर 1936
- उपनाम: उपन्यास सम्राट, कलम का सिपाही
- साहित्यिक योगदान: प्रेमचंद हिंदी साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित लेखकों में से एक हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, किसानों की दुर्दशा, सामाजिक कुरीतियों, शोषण और मानवीय भावनाओं का यथार्थवादी चित्रण किया है। वे 'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' के लिए जाने जाते हैं, जहाँ वे यथार्थ का चित्रण करते हुए भी आदर्श की स्थापना का प्रयास करते हैं।
- प्रमुख रचनाएँ:
- उपन्यास: गोदान, गबन, सेवासदन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, प्रेमाश्रम, कायाकल्प, मंगलसूत्र (अधूरा)।
- कहानी संग्रह: मानसरोवर (8 खंडों में लगभग 300 कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें 'कफन', 'पूस की रात', 'ईदगाह', 'पंच परमेश्वर', 'नमक का दरोगा', 'बड़े घर की बेटी' आदि प्रमुख हैं)।
- नाटक: कर्बला, संग्राम, प्रेम की वेदी।
- पत्रिकाएँ: माधुरी, मर्यादा, हंस, जागरण।
II. पाठ परिचय
- स्रोत: 'सूरदास की झोंपड़ी' प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास 'रंगभूमि' का एक अंश है।
- विषय-वस्तु: यह पाठ एक अंधे भिखारी सूरदास की कहानी है, जिसकी झोंपड़ी में आग लगा दी जाती है और उसकी जीवन भर की जमापूँजी (500 रुपये) चोरी हो जाती है। यह अंश सूरदास के जीवन में आई इस भीषण आपदा और उसके प्रति उसकी प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
- केंद्रीय भाव: यह पाठ विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य की जिजीविषा (जीने की इच्छा), आशावाद और संघर्ष करने की अदम्य भावना को उजागर करता है। यह अन्याय, प्रतिशोध, लालच और मानवीय संवेदनाओं के विभिन्न पहलुओं को भी दर्शाता है।
III. प्रमुख पात्र परिचय
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सूरदास:
- एक अंधा भिखारी, जो भीख माँगकर अपना जीवन यापन करता है।
- मेहनती, स्वाभिमानी और आशावादी।
- अपनी जमापूँजी (500 रुपये) को लेकर अनेक सपने देखता है (कुआँ खुदवाना, मिठुआ की शादी, पितरों का श्राद्ध)।
- सरल हृदय और परोपकारी स्वभाव का है, जिसने भैरों की पत्नी सुभागी को अपने घर में पनाह दी थी।
- विपत्ति में भी हार न मानने वाला, दृढ़ निश्चयी और अदम्य इच्छाशक्ति का धनी।
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भैरों:
- गाँव का एक ईर्ष्यालु और प्रतिशोधी व्यक्ति।
- सूरदास के प्रति द्वेष रखता है, क्योंकि सूरदास ने उसकी पत्नी सुभागी को उसके अत्याचारों से बचाने के लिए अपने घर में शरण दी थी।
- क्रूर और निर्दयी स्वभाव का है, जो सूरदास की झोंपड़ी जलाकर और उसकी जमापूँजी चुराकर प्रतिशोध लेता है।
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जगधर:
- भैरों का मित्र और पड़ोसी।
- लालची और ईर्ष्यालु स्वभाव का है। उसे सूरदास के पास इतनी बड़ी रकम होने का पता चलता है, तो वह भी उस पर अपना हक जताना चाहता है।
- भैरों के साथ मिलकर सूरदास के पैसे चुराने की योजना में शामिल होता है, लेकिन बाद में कुछ हद तक पश्चाताप और भय का अनुभव करता है।
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सुभागी:
- भैरों की पत्नी, जो अपने पति के अत्याचारों से पीड़ित है।
- सूरदास के प्रति सहानुभूति रखती है और उसकी मदद करने का प्रयास करती है।
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मिठुआ:
- सूरदास का पोता, जिसके भविष्य को लेकर सूरदास चिंतित रहता है और सपने देखता है।
IV. पाठ का सार (संक्षेप में)
'सूरदास की झोंपड़ी' उपन्यास 'रंगभूमि' का एक मार्मिक अंश है। सूरदास एक अंधा भिखारी है, जिसने अपनी मेहनत से 500 रुपये की जमापूँजी इकट्ठी की है। वह इस पैसे से अपने पोते मिठुआ का विवाह करने, अपने पितरों का श्राद्ध करने और गाँव में एक कुआँ खुदवाने का सपना देखता है।
गाँव का ही एक व्यक्ति भैरों, सूरदास से ईर्ष्या और प्रतिशोध की भावना रखता है। इसका कारण यह है कि भैरों अपनी पत्नी सुभागी को मारता-पीटता था और सूरदास ने उसे अपने घर में शरण दी थी। भैरों इस अपमान का बदला लेने के लिए सूरदास की झोंपड़ी में आग लगा देता है और उसकी जमापूँजी (500 रुपये) चुरा लेता है।
झोंपड़ी के जलने से पूरे गाँव में हड़कंप मच जाता है। लोग आग बुझाने का प्रयास करते हैं और सूरदास के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं। सूरदास अपनी जमापूँजी के चोरी होने से अत्यंत दुखी और निराश हो जाता है। उसे लगता है कि उसका सब कुछ लुट गया है, क्योंकि वह अपनी जमापूँजी को ही अपना स्वाभिमान और भविष्य मानता था।
भैरों अपने मित्र जगधर को चोरी के पैसे दिखाता है और उसे भी हिस्सा देने का लालच देता है। जगधर पहले तो लालच में आता है, लेकिन बाद में उसे भय और पश्चाताप होता है। वह भैरों को समझाता है कि सूरदास का पैसा उसके काम नहीं आएगा।
सूरदास अपनी झोंपड़ी की राख के ढेर में अपने पैसे ढूंढता है, लेकिन उसे कुछ नहीं मिलता। वह सोचता है कि अब वह फिर से भीख माँगेगा और पैसे जमा करेगा। वह अपने मन में यह संकल्प लेता है कि वह भैरों से कोई शिकायत नहीं करेगा, क्योंकि उसे लगता है कि शिकायत करने से उसकी कमजोरी उजागर होगी।
अंत में, सूरदास के मन में एक नई आशा और ऊर्जा का संचार होता है। वह मिठुआ और घीसू को खेलते हुए देखता है, जो झोंपड़ी की राख को उछाल रहे होते हैं। मिठुआ कहता है, "खेल में कोई रोता है?" यह सुनकर सूरदास के मन में एक नया विचार आता है – "कौन जानता था कि राख के ढेर में इतनी चिंगारी दबी पड़ी है।" वह अपने मन में दृढ़ निश्चय करता है कि वह फिर से सब कुछ बनाएगा। उसकी यह भावना उसकी अदम्य जिजीविषा और आशावाद का प्रतीक है।
V. प्रमुख विषय-वस्तु / संदेश
- जिजीविषा और आशावाद: पाठ का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि मनुष्य को कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए, उसे हार नहीं माननी चाहिए। सूरदास का "मैं फिर से बनाऊँगा" का संकल्प उसकी अदम्य जिजीविषा और आशावाद को दर्शाता है।
- अन्याय और प्रतिशोध: भैरों का कृत्य अन्याय और प्रतिशोध की भावना का प्रतीक है। पाठ दर्शाता है कि प्रतिशोध की आग में जलकर मनुष्य किस हद तक गिर सकता है।
- मानवीय मूल्य: सूरदास का परोपकारी स्वभाव (सुभागी को शरण देना) और उसका स्वाभिमान (शिकायत न करना) मानवीय मूल्यों को दर्शाता है।
- सामाजिक यथार्थ: प्रेमचंद ने इस पाठ के माध्यम से ग्रामीण समाज में व्याप्त गरीबी, ईर्ष्या, लालच और कमजोरों के प्रति अन्याय जैसे सामाजिक यथार्थ का चित्रण किया है।
- धन का महत्व और उसका मोह: सूरदास के लिए 500 रुपये केवल पैसे नहीं थे, बल्कि उसके सपने, उसका स्वाभिमान और उसका भविष्य थे। यह धन के प्रति मनुष्य के मोह को भी दर्शाता है।
- कर्म का महत्व: सूरदास यह समझता है कि केवल रोने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उसे फिर से कर्म करना होगा और अपने भविष्य का निर्माण करना होगा।
VI. महत्वपूर्ण उद्धरण एवं उनके भाव
- "कौन जानता था कि राख के ढेर में इतनी चिंगारी दबी पड़ी है।"
- भाव: यह सूरदास की अदम्य इच्छाशक्ति, आशावाद और संघर्ष करने की भावना को दर्शाता है। बाहरी रूप से सब कुछ नष्ट हो जाने के बाद भी उसके भीतर जीवन जीने और फिर से सब कुछ बनाने की प्रबल इच्छाशक्ति मौजूद है।
- "मैं फिर से बनाऊँगा।"
- भाव: यह सूरदास के दृढ़ संकल्प, पुनर्निर्माण की भावना और हार न मानने वाले स्वभाव का प्रतीक है। यह निराशा के बाद आशा के उदय को दर्शाता है।
- "जब तक मेरे पास पैसे हैं, मैं भिखारी नहीं।"
- भाव: यह सूरदास के स्वाभिमान को दर्शाता है। उसे लगता है कि धन उसे दूसरों के सामने हाथ फैलाने से बचाता है और उसे एक आत्मसम्मानपूर्ण जीवन जीने का अवसर देता है।
- "खेल में कोई रोता है?"
- भाव: मिठुआ का यह मासूम सवाल सूरदास के लिए एक प्रेरणा बन जाता है। यह उसे सिखाता है कि जीवन की कठिनाइयों को भी एक खेल की तरह लेना चाहिए, जहाँ हार-जीत लगी रहती है, लेकिन रोना नहीं चाहिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
अब हम इस अध्याय पर आधारित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करेंगे, जो आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।
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'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के लेखक कौन हैं?
क) जयशंकर प्रसाद
ख) प्रेमचंद
ग) महादेवी वर्मा
घ) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' -
'सूरदास की झोंपड़ी' प्रेमचंद के किस उपन्यास का अंश है?
क) गोदान
ख) गबन
ग) रंगभूमि
घ) निर्मला -
सूरदास ने अपनी जमापूँजी में कितने रुपये इकट्ठे किए थे?
क) 100 रुपये
ख) 200 रुपये
ग) 500 रुपये
घ) 1000 रुपये -
सूरदास की झोंपड़ी में आग किसने लगाई थी?
क) जगधर
ख) भैरों
ग) मिठुआ
घ) सुभागी -
भैरों ने सूरदास की झोंपड़ी में आग क्यों लगाई थी?
क) सूरदास से पैसे चुराने के लिए
ख) सूरदास की जमीन हड़पने के लिए
ग) सूरदास द्वारा अपनी पत्नी सुभागी को शरण देने के प्रतिशोध में
घ) गाँव वालों को डराने के लिए -
जगधर का चरित्र कैसा था?
क) ईमानदार और परोपकारी
ख) लालची और ईर्ष्यालु
ग) साहसी और निडर
घ) शांत और धार्मिक -
सूरदास अपनी जमापूँजी से क्या-क्या सपने देखता था?
क) मिठुआ का विवाह और कुआँ खुदवाना
ख) पितरों का श्राद्ध और मंदिर बनवाना
ग) क और ख दोनों
घ) केवल मिठुआ का विवाह -
'कौन जानता था कि राख के ढेर में इतनी चिंगारी दबी पड़ी है।' यह कथन किसके संदर्भ में कहा गया है?
क) भैरों की क्रूरता के संदर्भ में
ख) जगधर के पश्चाताप के संदर्भ में
ग) सूरदास की अदम्य जिजीविषा के संदर्भ में
घ) सुभागी की लाचारी के संदर्भ में -
अपनी झोंपड़ी जलने और पैसे चोरी होने के बाद सूरदास का अंतिम निर्णय क्या था?
क) भैरों से बदला लेने का
ख) गाँव छोड़कर चले जाने का
ग) फिर से सब कुछ बनाने का संकल्प
घ) पुलिस में शिकायत करने का -
'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
क) धन का महत्व
ख) प्रतिशोध की भावना
ग) संघर्ष और आशा का संदेश
घ) सामाजिक असमानता
उत्तरमाला:
- ख) प्रेमचंद
- ग) रंगभूमि
- ग) 500 रुपये
- ख) भैरों
- ग) सूरदास द्वारा अपनी पत्नी सुभागी को शरण देने के प्रतिशोध में
- ख) लालची और ईर्ष्यालु
- क) मिठुआ का विवाह और कुआँ खुदवाना (पाठ में श्राद्ध का भी उल्लेख है, लेकिन 'क' विकल्प सबसे सटीक है क्योंकि ये मुख्य सपने थे। यदि 'ग' विकल्प 'क और ख दोनों' होता और 'ख' में श्राद्ध होता, तो वह भी सही होता। दिए गए विकल्पों में 'क' सबसे उपयुक्त है।)
- ग) सूरदास की अदम्य जिजीविषा के संदर्भ में
- ग) फिर से सब कुछ बनाने का संकल्प
- ग) संघर्ष और आशा का संदेश
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायता करेंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।