Class 12 Hindi Notes Chapter 2 (जूझ) – Vitan Book

Vitan
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी 'वितान' पुस्तक के अध्याय 2 'जूझ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी आगामी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाठ हमें विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति लगन और संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। आइए, इसके प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझते हैं:


अध्याय 2: जूझ (Ansh)

लेखक: आनंद यादव (मूल मराठी आत्मकथात्मक उपन्यास 'जूझ' का एक अंश)

विधा: आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश

मुख्य विषय: एक किशोर की शिक्षा पाने की तीव्र इच्छा, ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण, संघर्ष और सफलता।


1. लेखक परिचय: आनंद यादव

  • मूल नाम: आनंद रतन यादव।
  • जन्म: 1935 (महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में)।
  • शिक्षा: मराठी और संस्कृत साहित्य में एम.ए., पी.एच.डी.।
  • कार्यक्षेत्र: मराठी साहित्य में प्राध्यापक, लेखक।
  • प्रमुख कृतियाँ: 'जूझ' (आत्मकथात्मक उपन्यास), 'नटरंग' (उपन्यास), 'मातीखालची माती' (कविता संग्रह), 'काचवेल' (कथा संग्रह) आदि।
  • पुरस्कार: 'जूझ' के लिए 1990 में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • विशेषता: उनकी रचनाएँ ग्रामीण जीवन, कृषि संस्कृति और दलित चेतना को गहराई से चित्रित करती हैं। 'जूझ' उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों और शिक्षा प्राप्त करने की लगन का मार्मिक चित्रण किया है।

2. पाठ का सार (विस्तृत)

'जूझ' लेखक आनंद यादव की आत्मकथात्मक उपन्यास का एक अंश है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन में शिक्षा पाने के लिए किए गए संघर्षों का वर्णन किया है।

  • शिक्षा से वंचित बचपन: लेखक के पिता ने उन्हें पाँचवीं कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोक दिया था। वे चाहते थे कि लेखक खेत में काम करे, जबकि उनके पिता स्वयं दिनभर बाजार में घूमते या मस्ती करते थे। लेखक का मन पढ़ाई में लगता था, लेकिन पिता की क्रूरता और लापरवाही के कारण वे खेत में काम करने के लिए मजबूर थे। उन्हें लगता था कि यदि वे खेत में काम करते रहेंगे, तो जीवन भर एक मजदूर ही बनकर रह जाएँगे।
  • पढ़ाई की तीव्र इच्छा और माँ का सहारा: लेखक के मन में पढ़ने की तीव्र इच्छा थी। वे अपनी माँ से इस बारे में बात करते हैं। माँ भी अपने पति से परेशान थी और बेटे को पढ़ाना चाहती थी, लेकिन पिता के डर से कुछ कह नहीं पाती थी। लेखक और माँ मिलकर एक योजना बनाते हैं कि गाँव के प्रभावशाली व्यक्ति दत्ता जी राव (देसाई) से इस विषय पर बात की जाए।
  • दत्ता जी राव का हस्तक्षेप: माँ और बेटा देसाई के पास जाते हैं। माँ देसाई को बताती है कि उसका पति दिनभर आवारागर्दी करता है और बेटे को स्कूल जाने से रोककर खेत में काम करवाता है। देसाई सारी बात सुनकर क्रोधित होते हैं और लेखक के पिता को बुलाकर डाँटते हैं। वे पिता को फटकार लगाते हैं कि वे खुद तो घूमते हैं और बच्चे को पढ़ाई से वंचित कर रहे हैं।
  • पिता की शर्तें और स्कूल वापसी: देसाई के दबाव के कारण पिता को हार माननी पड़ती है। वे लेखक को स्कूल जाने की अनुमति तो देते हैं, लेकिन कुछ कड़ी शर्तें रखते हैं:
    • सुबह 11 बजे तक खेत में काम करना होगा।
    • स्कूल से आने के बाद पशु चराना होगा।
    • खेत में पानी लगाना और अन्य काम भी करने होंगे।
    • यदि स्कूल में कोई शिकायत आई, तो पढ़ाई बंद करवा दी जाएगी।
    • लेखक इन सभी शर्तों को खुशी-खुशी मान लेता है, क्योंकि उसके लिए स्कूल जाना सबसे महत्वपूर्ण था।
  • स्कूल का शुरुआती अनुभव:
    • कक्षा में लेखक सबसे बड़ा था, इसलिए बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे।
    • उसकी धोती और गमछे का भी उपहास किया जाता था।
    • गणित के अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर (यहाँ सौंदलगेकर मराठी के अध्यापक हैं, गणित के नहीं, यह एक सामान्य गलतफहमी है, पाठ में मराठी के अध्यापक के रूप में उनका वर्णन है) से उसे डर लगता था।
    • शुरुआत में उसे उपेक्षा और अकेलापन महसूस होता है।
  • वसंत पाटिल से दोस्ती और पढ़ाई में सुधार: कक्षा में वसंत पाटिल नामक एक होशियार लड़का था, जो पढ़ाई में बहुत तेज था। वह शांत स्वभाव का था और हमेशा अपनी कॉपी-किताबें व्यवस्थित रखता था। लेखक उससे दोस्ती कर लेता है और उसकी मदद से गणित में होशियार हो जाता है। धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई में रुचि बढ़ती है और वह भी कक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने लगता है।
  • मास्टर सौंदलगेकर का प्रभाव (मराठी अध्यापक): लेखक के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव मराठी के अध्यापक मास्टर सौंदलगेकर के कारण आता है।
    • वे बहुत अच्छे कवि थे और अपनी कविताएँ गाकर सुनाते थे।
    • वे छंद, अलंकार और लय के साथ कविता पाठ करते थे, जिससे लेखक बहुत प्रभावित होता है।
    • सौंदलगेकर मास्टर छात्रों को अपनी कविताएँ लिखने के लिए भी प्रेरित करते थे।
    • लेखक उनसे प्रभावित होकर स्वयं कविताएँ लिखने लगता है। वह भैंस चराते हुए, खेतों में पानी लगाते हुए, अपनी कल्पनाओं को शब्दों में ढालता है।
    • वह अपनी कविताओं को मास्टर सौंदलगेकर को दिखाता है, जो उसे प्रोत्साहित करते हैं और उसमें सुधार भी बताते हैं।
    • मास्टर सौंदलगेकर के मार्गदर्शन में, लेखक को यह समझ आता है कि कविताएँ लिखने के लिए अपने आसपास के जीवन, प्रकृति और अनुभवों का अवलोकन कितना महत्वपूर्ण है।
  • लेखक का कवि बनना: मास्टर सौंदलगेकर की प्रेरणा से लेखक धीरे-धीरे एक कवि के रूप में विकसित होता है। वह अपनी कविताओं को लय में गाने का अभ्यास करता है, कभी अकेले गाता है तो कभी भैंसों के सामने। वह अपने अनुभवों को, खेतों के दृश्यों को, अपने जीवन के संघर्षों को कविता का विषय बनाता है। इस प्रकार, वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखता है और साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर होता है।

3. प्रमुख पात्र

  1. आनंद (लेखक): पाठ का केंद्रीय पात्र। शिक्षा के प्रति अदम्य इच्छाशक्ति रखने वाला, संघर्षशील, मेहनती और संवेदनशील किशोर। वह परिस्थितियों से हार नहीं मानता और अपनी लगन से सफलता प्राप्त करता है।
  2. आनंद की माँ: दयालु, ममतामयी और समझदार। वह अपने बेटे को पढ़ाना चाहती है और उसके संघर्ष में पूरी तरह साथ देती है। वह पति के खिलाफ जाकर बेटे की मदद करती है।
  3. आनंद का पिता (रमाप्पा): लापरवाह, क्रोधी, स्वार्थी और शिक्षा विरोधी। वह अपनी मौज-मस्ती के लिए बेटे को पढ़ाई से वंचित रखता है और उसे खेत में काम करवाता है।
  4. दत्ता जी राव (देसाई): गाँव के प्रभावशाली और सम्मानित व्यक्ति। न्यायप्रिय और समझदार। वे आनंद की मदद करते हैं और उसके पिता को डाँटकर उसे स्कूल जाने की अनुमति दिलवाते हैं।
  5. मास्टर सौंदलगेकर: मराठी के अध्यापक। वे एक कुशल कवि और प्रेरक शिक्षक हैं। उनकी शिक्षण शैली और व्यक्तिगत प्रेरणा से आनंद के जीवन में साहित्यिक रुचि जागृत होती है और वह कविताएँ लिखना शुरू करता है। वे आनंद के साहित्यिक गुरु बनते हैं।
  6. वसंत पाटिल: आनंद का सहपाठी। मेहनती, शांत और पढ़ाई में होशियार। वह आनंद को गणित में मदद करता है और उसे पढ़ाई के प्रति और अधिक गंभीर बनाता है।

4. प्रमुख बिंदु एवं विशेषताएँ

  • आत्मकथात्मक अंश: यह पाठ लेखक के स्वयं के जीवन के अनुभवों पर आधारित है, जो इसे यथार्थवादी और विश्वसनीय बनाता है।
  • ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण: पाठ में महाराष्ट्र के ग्रामीण अंचल की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण मिलता है।
  • शिक्षा के प्रति लगन: यह पाठ विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त करने की अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी है।
  • शिक्षक की भूमिका का महत्व: मास्टर सौंदलगेकर का चरित्र दर्शाता है कि एक अच्छा शिक्षक कैसे किसी छात्र के जीवन की दिशा बदल सकता है और उसकी प्रतिभा को निखार सकता है।
  • बाल मनोविज्ञान: लेखक ने एक किशोर के मन में उठने वाले विचारों, उसकी निराशा, आशा और संघर्ष को बखूबी दर्शाया है।
  • सामाजिक रूढ़ियाँ और आर्थिक चुनौतियाँ: पाठ में उस समय की सामाजिक रूढ़ियों (जैसे बच्चों को पढ़ाई से रोकना) और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक चुनौतियों का भी चित्रण है।
  • संघर्ष और सृजन: यह कहानी बताती है कि कैसे जीवन का संघर्ष ही व्यक्ति को कुछ नया रचने और अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
  • आधुनिकता और परंपरा का द्वंद्व: पिता का रूढ़िवादी सोच और लेखक की आधुनिक शिक्षा की चाहत के बीच का द्वंद्व भी परिलक्षित होता है।

5. महत्वपूर्ण शब्दावली (संदर्भ सहित)

  • जूझ: संघर्ष करना, लड़ना।
  • देसाई: गाँव का प्रभावशाली व्यक्ति या जमींदार।
  • मालक: मालिक (यहाँ पिता के लिए प्रयुक्त)।
  • अहाते: आँगन, घर का खुला स्थान।
  • अचरज: आश्चर्य।
  • अंदाजा: अनुमान।
  • दामन: पल्लू (माँ के लिए प्रयुक्त)।
  • फुरसत: खाली समय।
  • लंगोट: एक प्रकार का अंतर्वस्त्र।
  • छंद: कविता में मात्रा, वर्ण, गति, यति आदि के नियमों से बंधी रचना।
  • लय: संगीत या कविता में ध्वनि का क्रमबद्ध प्रवाह।

यह विस्तृत नोट्स आपको 'जूझ' अध्याय की गहरी समझ प्रदान करेंगे और सरकारी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में सहायक होंगे।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'जूझ' पाठ के लेखक कौन हैं?
    अ) मनोहर श्याम जोशी
    ब) आनंद यादव
    स) ओम थानवी
    द) एंटन चेखव

  2. लेखक को पाठशाला जाने से किसने रोक दिया था?
    अ) उसकी माँ ने
    ब) गाँव के मुखिया ने
    स) उसके पिता ने
    द) दत्ता जी राव ने

  3. लेखक की माँ ने उसे पढ़ाई के लिए किससे बात करने की सलाह दी?
    अ) अपने पति से
    ब) मास्टर सौंदलगेकर से
    स) दत्ता जी राव से
    द) गाँव के सरपंच से

  4. दत्ता जी राव ने लेखक के पिता को क्यों डाँटा?
    अ) क्योंकि वे खेत में काम नहीं करते थे।
    ब) क्योंकि वे बेटे को स्कूल नहीं भेजते थे और खुद आवारागर्दी करते थे।
    स) क्योंकि उन्होंने गाँव के नियमों का उल्लंघन किया था।
    द) क्योंकि वे कर्ज नहीं चुका रहे थे।

  5. लेखक के पिता ने उसे स्कूल जाने की क्या शर्त रखी?
    अ) उसे केवल रविवार को स्कूल जाना होगा।
    ब) उसे स्कूल के बाद खेत में काम करना होगा और पशु चराने होंगे।
    स) उसे केवल गणित की पढ़ाई करनी होगी।
    द) उसे कभी भी कक्षा में प्रथम नहीं आना होगा।

  6. कक्षा में लेखक का सबसे पहले किससे मेल-जोल बढ़ा?
    अ) मास्टर सौंदलगेकर से
    ब) वसंत पाटिल से
    स) अपने एक पुराने दोस्त से
    द) दत्ता जी राव के बेटे से

  7. लेखक को मराठी पढ़ाने वाले अध्यापक का नाम क्या था?
    अ) न.वा. सौंदलगेकर
    ब) वसंत पाटिल
    स) दत्ता जी राव
    द) मनोहर जोशी

  8. मास्टर सौंदलगेकर की किस बात से लेखक सबसे अधिक प्रभावित हुआ?
    अ) उनकी कठोर अनुशासन से
    ब) उनके गणित पढ़ाने के तरीके से
    स) उनके कविता गाने और पढ़ाने के तरीके से
    द) उनके व्यक्तित्व से

  9. लेखक ने अपनी पहली कविताएँ कहाँ लिखीं?
    अ) स्कूल की कॉपी में
    ब) खेत में काम करते हुए और भैंस चराते हुए
    स) अपने घर में छिपकर
    द) मास्टर सौंदलगेकर के घर पर

  10. 'जूझ' पाठ किस विधा की रचना है?
    अ) कहानी
    ब) उपन्यास
    स) आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश
    द) निबंध


उत्तरमाला:

  1. ब) आनंद यादव
  2. स) उसके पिता ने
  3. स) दत्ता जी राव से
  4. ब) क्योंकि वे बेटे को स्कूल नहीं भेजते थे और खुद आवारागर्दी करते थे।
  5. ब) उसे स्कूल के बाद खेत में काम करना होगा और पशु चराने होंगे।
  6. ब) वसंत पाटिल से
  7. अ) न.वा. सौंदलगेकर
  8. स) उनके कविता गाने और पढ़ाने के तरीके से
  9. ब) खेत में काम करते हुए और भैंस चराते हुए
  10. स) आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'जूझ' अध्याय को पूरी तरह समझने और अपनी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में मदद करेंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और किसी भी संदेह के लिए पूछने में संकोच न करें।

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