Class 12 Hindi Notes Chapter 3 (अतीत में दबे पाँव) – Vitan Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम आपकी वितान पाठ्यपुस्तक के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'अतीत में दबे पाँव' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय न केवल आपको सिंधु घाटी सभ्यता की गहराई से परिचित कराएगा, बल्कि सरकारी परीक्षाओं की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, एक-एक बिंदु को ध्यान से समझते हुए आगे बढ़ते हैं ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूटने न पाए।
अध्याय 3: अतीत में दबे पाँव
लेखक: ओम थानवी
1. लेखक परिचय:
- नाम: ओम थानवी
- जन्म: 1957, फलौदी, जोधपुर (राजस्थान)
- परिचय: ओम थानवी हिंदी के प्रसिद्ध पत्रकार, संपादक और लेखक हैं। उन्होंने लंबे समय तक 'जनसत्ता' जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र का संपादन किया है। उनकी लेखन शैली में गहन अवलोकन, विश्लेषण और तथ्यपरकता का अद्भुत समन्वय मिलता है। 'अतीत में दबे पाँव' उनका एक महत्वपूर्ण यात्रा वृत्तांत/रिपोर्टाज है, जिसमें उन्होंने मोहनजोदड़ो की यात्रा का सजीव वर्णन किया है।
2. पाठ का परिचय:
'अतीत में दबे पाँव' एक यात्रा वृत्तांत और रिपोर्टाज का मिला-जुला रूप है, जिसमें लेखक ओम थानवी अपनी मोहनजोदड़ो यात्रा के अनुभवों को साझा करते हैं। यह पाठ सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण नगर मोहनजोदड़ो की स्थापत्य कला, नगर नियोजन, सामाजिक व्यवस्था, जल प्रबंधन और संस्कृति का विस्तृत एवं मार्मिक चित्रण करता है। लेखक ने अतीत के इस गौरवशाली नगर के अवशेषों को देखकर उसके वैभव और वर्तमान की खामोशी के बीच एक संवाद स्थापित किया है।
3. मोहनजोदड़ो का अर्थ एवं स्थिति:
- अर्थ: 'मोहनजोदड़ो' का अर्थ है 'मृतकों का टीला'।
- स्थिति: यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित है।
- क्षेत्रफल: मोहनजोदड़ो लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था और इसकी आबादी लगभग 85,000 थी।
4. मोहनजोदड़ो का नगर नियोजन एवं स्थापत्य:
सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसका उत्कृष्ट नगर नियोजन था, जिसका मोहनजोदड़ो एक बेहतरीन उदाहरण है।
- दो प्रमुख हिस्से:
- दुर्ग (ऊँचाई पर): यह शहर का वह हिस्सा था जो अपेक्षाकृत ऊँचाई पर बना था। यहाँ महत्वपूर्ण सार्वजनिक इमारतें और प्रशासनिक केंद्र स्थित थे। यहाँ एक बौद्ध स्तूप भी है, जो बाद के काल में बना।
- निचला शहर (आवासीय): यह दुर्ग से नीचे स्थित था और यहाँ सामान्य लोगों के आवासीय मकान थे।
- सड़कें और गलियाँ:
- शहर की सड़कें और गलियाँ सीधी थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं (ग्रिड पैटर्न)।
- मुख्य सड़क लगभग 9 मीटर (33 फुट) चौड़ी थी, जिसे 'फर्स्ट स्ट्रीट' कहा जाता था।
- गलियाँ 3-4 फुट चौड़ी थीं।
- मकान:
- मकान पक्की ईंटों के बने थे।
- अधिकांश मकान दो मंजिला थे और आंगन केंद्रित थे।
- घरों में खिड़कियाँ सड़क की ओर नहीं खुलती थीं, बल्कि अंदर आंगन की ओर खुलती थीं, जिससे गोपनीयता बनी रहती थी।
- हर घर में स्नानागार और शौचालय की व्यवस्था थी।
- जल निकासी प्रणाली:
- यह मोहनजोदड़ो की सबसे अद्भुत विशेषता थी।
- घरों का पानी छोटी नालियों से निकलकर मुख्य सड़कों की बड़ी नालियों में मिलता था।
- ये नालियाँ ढकी हुई थीं और इनमें जगह-जगह मैनहोल बने थे, जिससे सफाई आसान होती थी।
5. प्रमुख सार्वजनिक स्थल:
- महाकुंड (विशाल स्नानागार):
- यह दुर्ग क्षेत्र में स्थित था और संभवतः किसी धार्मिक अनुष्ठान या सार्वजनिक स्नान के लिए उपयोग होता था।
- माप: लगभग 40 फुट लंबा, 25 फुट चौड़ा और 7 फुट गहरा।
- विशेषताएँ: इसमें उत्तर और दक्षिण दिशा से सीढ़ियाँ उतरती थीं। कुंड के तीनों ओर साधुओं के लिए छोटे कक्ष बने थे। पानी के रिसाव को रोकने के लिए ईंटों पर चूने और जिप्सम का लेप किया गया था।
- अन्न भंडार (कोठार):
- यह महाकुंड के पास स्थित था।
- यह एक विशाल इमारत थी जहाँ संभवतः कर के रूप में प्राप्त अनाज को भंडारित किया जाता था।
- सभा भवन:
- यहाँ एक विशाल सभा भवन के अवशेष भी मिले हैं, जिसमें 20 खंभे थे।
- बौद्ध स्तूप:
- मोहनजोदड़ो के सबसे ऊँचे चबूतरे पर एक बौद्ध स्तूप स्थित है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद कुषाण काल में बना था। यह स्तूप लगभग 25 फुट ऊँचा है।
6. जल प्रबंधन:
- कुएँ: मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुएँ थे, जो यह दर्शाता है कि यहाँ पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी। ये कुएँ या तो घरों के अंदर होते थे या सार्वजनिक स्थलों पर।
- सिंधु नदी: शहर सिंधु नदी के किनारे बसा था, जिससे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती थी।
7. कला और संस्कृति:
- मूर्तियाँ: 'नर्तकी' की कांस्य मूर्ति (दुनिया की पहली नृत्य मुद्रा वाली मूर्ति मानी जाती है), 'दाढ़ी वाले याजक' की पत्थर की मूर्ति।
- मुहरें: विभिन्न पशुओं (जैसे बैल, हाथी, गेंडा) और प्रतीकों वाली मुहरें मिली हैं, जिन पर चित्रलिपि अंकित है। यह लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
- मिट्टी के बर्तन: सुंदर ढंग से बनाए गए और चित्रित मिट्टी के बर्तन।
- आभूषण: सोने, चाँदी, ताँबे और कीमती पत्थरों के आभूषण।
- खिलौने: मिट्टी के खिलौने, बैलगाड़ियाँ।
8. सामाजिक जीवन:
- समतावादी समाज: मोहनजोदड़ो में किसी राजा या पुरोहित वर्ग के भव्य महल या मंदिर के अवशेष नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यह एक समतावादी समाज था जहाँ सभी लोग लगभग समान स्तर पर रहते थे।
- व्यवसाय: कृषि (गेहूँ, जौ, कपास), पशुपालन और व्यापार मुख्य व्यवसाय थे। मेसोपोटामिया जैसी सभ्यताओं से व्यापारिक संबंध थे।
- 'लो-प्रोफाइल' सभ्यता: लेखक ने इस सभ्यता को 'लो-प्रोफाइल' कहा है क्योंकि यहाँ भव्यता और दिखावे की बजाय सादगी, व्यवस्था और अनुशासन पर जोर था। यहाँ कोई पिरामिड या भव्य स्मारक नहीं थे, बल्कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया गया था।
9. वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ:
- क्षारीयता (लवणता): सिंधु नदी के पानी के रिसाव और आसपास की भूमि की क्षारीयता के कारण मोहनजोदड़ो की ईंटें गल रही हैं।
- संरक्षण: इस प्राचीन स्थल के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- अजायबघर: मोहनजोदड़ो में एक छोटा अजायबघर भी है, जहाँ खुदाई में मिली महत्वपूर्ण वस्तुएँ (जैसे औजार, बर्तन, मुहरें, आभूषण) प्रदर्शित की गई हैं। लेखक ने यहाँ रखी चीजों को देखकर अतीत को महसूस किया है।
10. लेखक का दृष्टिकोण:
लेखक ओम थानवी ने मोहनजोदड़ो को केवल एक पुरातात्विक स्थल के रूप में नहीं देखा है, बल्कि इसे एक जीवित इतिहास के रूप में प्रस्तुत किया है। वे अतीत की खामोशी में दबे पाँव चलते हुए उस महान सभ्यता के वैभव, व्यवस्था और जीवन शैली को महसूस करते हैं। वे वर्तमान की चुनौतियों और अतीत के गौरव के बीच एक पुल का काम करते हैं, जिससे पाठक को उस प्राचीन सभ्यता की गहराई और महत्व का बोध होता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
-
'अतीत में दबे पाँव' पाठ के लेखक कौन हैं?
क) मन्नू भंडारी
ख) ओम थानवी
ग) फणीश्वरनाथ रेणु
घ) मनोहर श्याम जोशी -
मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ क्या है?
क) देवताओं का टीला
ख) महान शहर
ग) मृतकों का टीला
घ) जीवन का स्रोत -
मोहनजोदड़ो किस नदी के किनारे बसा हुआ था?
क) गंगा नदी
ख) यमुना नदी
ग) सिंधु नदी
घ) सरस्वती नदी -
मोहनजोदड़ो में सबसे ऊँचे चबूतरे पर स्थित बौद्ध स्तूप किस काल में बना था?
क) हड़प्पा काल
ख) वैदिक काल
ग) कुषाण काल
घ) मौर्य काल -
विशाल स्नानागार (महाकुंड) की लंबाई, चौड़ाई और गहराई क्रमशः कितनी थी?
क) 30 फुट, 20 फुट, 5 फुट
ख) 40 फुट, 25 फुट, 7 फुट
ग) 50 फुट, 30 फुट, 10 फुट
घ) 35 फुट, 22 फुट, 6 फुट -
लेखक ने मोहनजोदड़ो की सभ्यता को 'लो-प्रोफाइल' सभ्यता क्यों कहा है?
क) यहाँ भव्य महलों और मंदिरों का अभाव था।
ख) यहाँ के लोग गरीब थे।
ग) यहाँ की कलाकृतियाँ साधारण थीं।
घ) यहाँ के लोग कम पढ़े-लिखे थे। -
मोहनजोदड़ो में लगभग कितने कुएँ होने का अनुमान है?
क) 100
ख) 300
ग) 500
घ) 700 -
सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषता क्या थी?
क) धार्मिक कट्टरता
ख) सैन्य शक्ति
ग) उत्कृष्ट नगर नियोजन और जल प्रबंधन
घ) विशाल साम्राज्य -
मोहनजोदड़ो की मुख्य सड़क की चौड़ाई लगभग कितनी थी?
क) 5 मीटर
ख) 9 मीटर
ग) 12 मीटर
घ) 15 मीटर -
मोहनजोदड़ो के घरों की खिड़कियाँ किस ओर खुलती थीं?
क) सड़क की ओर
ख) पीछे की गली की ओर
ग) अंदर आंगन की ओर
घ) छत की ओर
उत्तरमाला:
- ख) ओम थानवी
- ग) मृतकों का टीला
- ग) सिंधु नदी
- ग) कुषाण काल
- ख) 40 फुट, 25 फुट, 7 फुट
- क) यहाँ भव्य महलों और मंदिरों का अभाव था।
- घ) 700
- ग) उत्कृष्ट नगर नियोजन और जल प्रबंधन
- ख) 9 मीटर
- ग) अंदर आंगन की ओर
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और सफलता प्राप्त करें!