Class 12 Hindi Notes Chapter 3 (बिस्कोहर की माटी) – Antral Bhag-II Book

Antral Bhag-II
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतराल भाग-2' के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'बिस्कोहर की माटी' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह पाठ न केवल आपकी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आंचलिक जीवन, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को समझने का एक अद्भुत माध्यम भी है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमें इस पाठ के हर पहलू को गहराई से समझना होगा।


अध्याय 3: बिस्कोहर की माटी
(लेखक: फणीश्वरनाथ 'रेणु')

1. लेखक परिचय: फणीश्वरनाथ 'रेणु'

  • जन्म: 4 मार्च 1921, औराही हिंगना, पूर्णिया (अब अररिया), बिहार।
  • मृत्यु: 11 अप्रैल 1977।
  • पहचान: हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासकार और कहानीकार। इन्हें 'आंचलिक कथा सम्राट' कहा जाता है।
  • साहित्यिक विशेषताएँ:
    • आंचलिकता: इनकी रचनाओं में किसी विशेष अंचल (क्षेत्र) की संस्कृति, लोक-जीवन, भाषा, रहन-सहन, रीति-रिवाज, अंधविश्वास और समस्याओं का सजीव चित्रण मिलता है।
    • बिंब-विधान: इनकी भाषा में बिंबों (चित्रों) का अद्भुत प्रयोग होता है, जिससे पाठक को घटनाएँ आँखों के सामने घटित होती प्रतीत होती हैं।
    • लोक-भाषा का प्रयोग: क्षेत्रीय बोलियों, मुहावरों और लोकोक्तियों का सहज प्रयोग।
    • प्रकृति चित्रण: प्रकृति का मानवीकरण और उसके विभिन्न रूपों का सूक्ष्म अवलोकन।
    • यथार्थवादी दृष्टिकोण: ग्रामीण जीवन की सच्चाईयों को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत करना।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • उपन्यास: मैला आँचल (प्रथम आंचलिक उपन्यास), परती परिकथा, दीर्घतपा, जुलूस, कितने चौराहे।
    • कहानी संग्रह: ठुमरी, अग्निखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप।
    • संस्मरण/रिपोर्ताज: ऋणजल धनजल, नेपाली क्रांति कथा, वन तुलसी की गंध, श्रुत अश्रुत पूर्व।
  • सम्मान: 'मैला आँचल' के लिए पद्मश्री से सम्मानित।

2. पाठ का मूल भाव एवं विषय-वस्तु
'बिस्कोहर की माटी' लेखक फणीश्वरनाथ रेणु का एक संस्मरण है, जो उनकी पुस्तक 'ऋणजल धनजल' से लिया गया है। इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के गाँव 'बिस्कोहर' और उसके आसपास के प्राकृतिक परिवेश का अत्यंत सजीव और आत्मीय चित्रण किया है। यह पाठ मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित है:

  • बचपन की यादें: लेखक के बचपन की स्मृतियाँ और प्रकृति के साथ उनका गहरा जुड़ाव।
  • आंचलिक जीवन: बिस्कोहर गाँव की भौगोलिक स्थिति, वहाँ के लोगों का जीवन, उनकी दिनचर्या, लोक-संस्कृति और लोक-विश्वास।
  • प्रकृति का सजीव चित्रण: विशेषकर वर्षा ऋतु में गाँव के तालाबों, नदियों, खेतों और विभिन्न जीव-जंतुओं (साँप, बिच्छू, मेंढक, मछलियाँ, पक्षी) का विस्तृत और मार्मिक वर्णन।
  • मानव और प्रकृति का अटूट संबंध: यह दर्शाना कि कैसे ग्रामीण जीवन पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है और उसके साथ सामंजस्य स्थापित करके चलता है।
  • बदलते समय का संकेत: यद्यपि पाठ मुख्य रूप से अतीत की स्मृतियों पर आधारित है, फिर भी इसमें कहीं-कहीं बदलते परिवेश का सूक्ष्म संकेत मिलता है।

3. विस्तृत नोट्स: प्रमुख बिंदु

  • बिस्कोहर गाँव का परिचय:

    • लेखक का बचपन बिस्कोहर गाँव में बीता, जो पूर्णिया जिले (अब अररिया) में स्थित है।
    • यह गाँव प्रकृति की गोद में बसा है, जहाँ खेत, खलिहान, तालाब, नदियाँ और घने पेड़-पौधे हैं।
    • लेखक ने गाँव की माटी से अपने गहरे लगाव को व्यक्त किया है, जो उनकी पहचान का हिस्सा है।
  • बचपन और प्रकृति से जुड़ाव:

    • लेखक ने बताया है कि बचपन में वे प्रकृति के हर रूप से परिचित थे - पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, नदियों, तालाबों से उनका गहरा रिश्ता था।
    • वे प्रकृति को केवल देखते नहीं थे, बल्कि उसे महसूस करते थे और उसके साथ एक हो जाते थे।
    • बचपन में साँप, बिच्छू, मेंढक जैसे जीवों से उनका भय और कौतूहल दोनों था।
  • वर्षा ऋतु का चित्रण:

    • पाठ का अधिकांश भाग वर्षा ऋतु के इर्द-गिर्द घूमता है।
    • पानी का साम्राज्य: वर्षा ऋतु में चारों ओर पानी ही पानी भर जाता है। खेत, खलिहान, पोखर, नदियाँ सब जलमग्न हो जाते हैं।
    • नदियों का उफान: नदियों में बाढ़ आ जाती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है।
    • मेंढकों का शोर: वर्षा होते ही मेंढकों की टर्र-टर्र की आवाजें सुनाई देने लगती हैं, जो लेखक को एक संगीत की तरह लगती थी।
    • जीव-जंतुओं का आगमन: पानी भरने के साथ ही विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु (साँप, बिच्छू, केंचुआ, मछलियाँ) अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं या पानी में तैरते दिखते हैं।
  • विभिन्न जीव-जंतुओं का वर्णन:

    • साँप और बिच्छू:
      • वर्षा में बिलों में पानी भर जाने से ये बाहर आ जाते हैं।
      • लेखक ने बचपन में साँप-बिच्छुओं से जुड़ी कहानियाँ और अंधविश्वासों का जिक्र किया है (जैसे साँप के काटने पर झाड़-फूँक, बिच्छू का डंक)।
      • साँप को 'ईश्वर का दूत' या 'धरती का कील' मानने जैसे लोक-विश्वास।
      • 'केवड़' (पानी वाला साँप) का विशेष उल्लेख।
    • मेंढक:
      • वर्षा के अग्रदूत, जिनकी टर्र-टर्र की आवाजें लेखक को प्रिय थीं।
      • विभिन्न प्रकार के मेंढक: 'भे-भे' करने वाला, 'ते-ते' करने वाला।
    • मछलियाँ:
      • वर्षा के पानी में मछलियाँ खूब मिलती हैं।
      • छोटे-छोटे बच्चे और बड़े लोग मिलकर मछलियाँ पकड़ते हैं।
      • मछली पकड़ने के विभिन्न तरीके: जाल, हाथ से पकड़ना।
    • पक्षी:
      • बगुला: धान के खेतों में बगुले अपनी टाँगों पर खड़े होकर मछली पकड़ते दिखते हैं।
      • सारस: सारस पक्षी का जोड़ा, जो प्रेम और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
      • तीतर-बटेर: वर्षा के बाद ये पक्षी भी दिखाई देते हैं।
  • लोक-संस्कृति और लोक-विश्वास:

    • साँप के काटने पर झाड़-फूँक और ओझाओं का महत्व।
    • बिच्छू के डंक का इलाज।
    • ग्रामीणों का प्रकृति के प्रति सम्मान और भय।
    • विभिन्न त्योहार और अनुष्ठान जो प्रकृति से जुड़े हैं।
  • मानवीय जीवन पर प्रकृति का प्रभाव:

    • खेती-किसानी पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर है।
    • बारिश के कारण गाँव के रास्ते दुर्गम हो जाते हैं।
    • ग्रामीणों की जीवनशैली प्रकृति के अनुसार ढल जाती है।
    • प्रकृति के साथ संघर्ष और सामंजस्य दोनों।
  • भाषा-शैली:

    • आंचलिक भाषा: पाठ में ठेठ ग्रामीण शब्दों, मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग किया गया है, जैसे 'केवड़', 'ढोढ़ा', 'गड़ही', 'मछुआ', 'अंधेरी रतिया', 'भौं-भौं', 'टर्र-टर्र'।
    • बिंब-विधान: लेखक ने शब्दों के माध्यम से ऐसे चित्र खींचे हैं, जो पाठक के मन में सजीव हो उठते हैं (जैसे पानी में तैरते साँप, मेंढकों का शोर, बगुलों का मछली पकड़ना)।
    • सजीव चित्रण: प्रकृति और जीव-जंतुओं का वर्णन इतना सजीव है कि पाठक स्वयं को उस परिवेश का हिस्सा महसूस करता है।
    • संस्मरणात्मक शैली: लेखक अपने बचपन की यादों को भावुकता और आत्मीयता के साथ प्रस्तुत करते हैं।
  • निष्कर्ष:
    'बिस्कोहर की माटी' केवल एक गाँव का वर्णन नहीं है, बल्कि यह उस आंचलिक जीवन का एक दस्तावेज है जहाँ प्रकृति और मनुष्य एक-दूसरे में घुले-मिले हैं। यह पाठ हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, प्रकृति का सम्मान करने और बदलते समय में भी अपनी संस्कृति और परिवेश को सहेजने का संदेश देता है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'बिस्कोहर की माटी' पाठ के लेखक कौन हैं?
    अ) प्रेमचंद
    ब) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
    स) रामवृक्ष बेनीपुरी
    द) महादेवी वर्मा

  2. फणीश्वरनाथ 'रेणु' को हिंदी साहित्य में किस रूप में जाना जाता है?
    अ) प्रयोगवादी कवि
    ब) छायावादी कवि
    स) आंचलिक कथा सम्राट
    द) प्रगतिवादी लेखक

  3. 'बिस्कोहर की माटी' किस विधा की रचना है?
    अ) कहानी
    ब) उपन्यास
    स) संस्मरण
    द) नाटक

  4. लेखक का बचपन किस गाँव में बीता था?
    अ) सिमरिया
    ब) बिस्कोहर
    स) औराही
    द) पूर्णिया

  5. वर्षा ऋतु में बिलों में पानी भर जाने पर कौन से जीव बाहर आ जाते हैं?
    अ) खरगोश और लोमड़ी
    ब) साँप और बिच्छू
    स) गिलहरी और चूहे
    द) पक्षी और तितलियाँ

  6. लेखक ने वर्षा ऋतु में मेंढकों की आवाज़ को क्या कहा है?
    अ) कोलाहल
    ब) संगीत
    स) शोर
    द) कर्कश ध्वनि

  7. पाठ में 'केवड़' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
    अ) एक प्रकार का फूल
    ब) पानी वाला साँप
    स) एक प्रकार की मछली
    द) एक प्रकार का पौधा

  8. 'मैला आँचल' किस लेखक की प्रसिद्ध कृति है?
    अ) प्रेमचंद
    ब) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
    स) जयशंकर प्रसाद
    द) अज्ञेय

  9. वर्षा ऋतु में धान के खेतों में कौन से पक्षी मछली पकड़ते हुए दिखाई देते हैं?
    अ) मोर
    ब) तोता
    स) बगुला
    द) कोयल

  10. इस पाठ में लेखक ने मुख्य रूप से किस ऋतु का वर्णन किया है?
    अ) ग्रीष्म ऋतु
    ब) शरद ऋतु
    स) वर्षा ऋतु
    द) वसंत ऋतु


उत्तरमाला:

  1. ब) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
  2. स) आंचलिक कथा सम्राट
  3. स) संस्मरण
  4. ब) बिस्कोहर
  5. ब) साँप और बिच्छू
  6. ब) संगीत
  7. ब) पानी वाला साँप
  8. ब) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
  9. स) बगुला
  10. स) वर्षा ऋतु

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। इस पाठ को ध्यान से पढ़ें और इसके हर पहलू को आत्मसात करें। शुभकामनाएँ!

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