Class 12 Hindi Notes Chapter 4 (अपना मालवा-खाऊ-उजाडु सभ्यता में) – Antral Bhag-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतराल भाग-2' के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'अपना मालवा-खाऊ-उजाडु सभ्यता में' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह पाठ न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारे पर्यावरण और जीवनशैली के प्रति एक गहरी समझ भी विकसित करता है।
अध्याय 4: अपना मालवा-खाऊ-उजाडु सभ्यता में
लेखक: प्रभाष जोशी
1. लेखक परिचय: प्रभाष जोशी
- जन्म: 15 जुलाई 1937, आष्टा, सीहोर, मध्य प्रदेश।
- निधन: 5 नवंबर 2009।
- पहचान: वरिष्ठ पत्रकार, संपादक, लेखक।
- कार्यक्षेत्र: पत्रकारिता के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। 'जनसत्ता' जैसे प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक के संस्थापक संपादक रहे। 'नई दुनिया' से भी जुड़े रहे।
- लेखन शैली: उनकी भाषा में सहजता, प्रवाह और लोक-जीवन की गहरी समझ दिखाई देती है। वे सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर बेबाकी से लिखते थे।
- प्रमुख कृतियाँ:
- 'कागद की दौन'
- 'एक दिन बोलै पेड़'
- 'कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली'
- 'हिंदू होने का धर्म'
- 'आज की बात'
- 'लोकतंत्र का चौथा स्तंभ'
- विशेषता: उन्होंने पत्रकारिता को केवल सूचना देने का माध्यम नहीं माना, बल्कि उसे समाज के प्रति जवाबदेह और जागरूक बनाने का एक सशक्त उपकरण बनाया।
2. पाठ का केंद्रीय विचार एवं उद्देश्य
यह पाठ मालवा क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, उसकी विशिष्ट जीवनशैली और पारंपरिक जल-प्रबंधन की समृद्ध परंपरा का चित्रण करता है। लेखक आधुनिक 'खाऊ-उजाडु' सभ्यता (उपभोक्तावादी और विनाशकारी संस्कृति) द्वारा मालवा के पर्यावरण और जल-प्रणाली पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को उजागर करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने वाली पारंपरिक जीवनशैली के महत्व को समझाना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
3. मालवा की भौगोलिक स्थिति और जलवायु
- स्थिति: मालवा का पठार विंध्य पर्वत की निचली ढलान पर स्थित है। यह चंबल और नर्मदा नदियों के बीच का क्षेत्र है।
- मिट्टी: यहाँ की मिट्टी काली और उपजाऊ है, जिसे 'मालवी मिट्टी' कहा जाता है। यह कपास, सोयाबीन और गेहूँ जैसी फसलों के लिए उपयुक्त है।
- जलवायु: मालवा की जलवायु समशीतोष्ण है, यानी न ज़्यादा गर्मी और न ज़्यादा सर्दी। कालिदास ने इसे 'स्वर्ग का एक टुकड़ा' कहा था।
- वर्षा: यहाँ औसत वर्षा 50 से 75 सेंटीमीटर होती है, जो कृषि और जल-प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
4. मालवा की जल-संरक्षण परंपरा
- प्राचीन ज्ञान: मालवा में पानी को देवता माना जाता था और उसके संरक्षण के लिए सदियों पुरानी परंपराएँ थीं।
- जल-स्रोत: यहाँ के लोग तालाबों, कुओं और बावड़ियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन करते थे। हर गाँव में तालाब होते थे और हर घर में कुआँ।
- नदियाँ: शिप्रा, चंबल, गंभीर, पार्वती, कालीसिंध जैसी नदियाँ मालवा की जीवनरेखा थीं।
- पानी का महत्व: मालवा के लोग पानी की एक-एक बूँद का सम्मान करते थे। 'पानी उतर गया' मुहावरे का अर्थ था कि अब पानी नहीं मिलेगा, और यह जीवन के लिए संकट का सूचक था।
- सामंजस्य: मालवा की संस्कृति प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने की थी, जहाँ जल, जंगल और जमीन का सम्मान किया जाता था।
5. 'खाऊ-उजाडु सभ्यता' की अवधारणा
- अर्थ: लेखक 'खाऊ-उजाडु सभ्यता' शब्द का प्रयोग आधुनिक उपभोक्तावादी और विनाशकारी जीवनशैली के लिए करते हैं। इसका अर्थ है – प्रकृति का अंधाधुंध उपभोग करना और उसे नष्ट करना।
- विशेषताएँ:
- अत्यधिक दोहन: भूजल का अत्यधिक दोहन (ट्यूबवेल, बोरवेल)।
- प्रदूषण: नदियों, तालाबों और पर्यावरण को प्रदूषित करना।
- कंक्रीट के जंगल: प्राकृतिक हरियाली को नष्ट कर कंक्रीट की इमारतें बनाना।
- उपभोगवादी सोच: 'जितना है, उतना खाओ-पियो और फिर फेंक दो' की मानसिकता।
- प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग: AC, फ्रिज, गाड़ियाँ आदि का अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग।
- तुलना: यह सभ्यता मालवा की पारंपरिक 'प्रकृति के साथ जीने' की संस्कृति के ठीक विपरीत है।
6. आधुनिक सभ्यता के दुष्परिणाम
- जल संकट: शिप्रा जैसी पवित्र नदियाँ सूख गई हैं या उनका पानी प्रदूषित हो गया है। भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
- अनियमित वर्षा: जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा का चक्र बिगड़ गया है, जिससे कभी सूखा तो कभी बाढ़ की स्थिति बनती है।
- पर्यावरणीय असंतुलन: प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है।
- जीवनशैली में बदलाव: आधुनिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ ने मनुष्य को प्रकृति से दूर कर दिया है।
7. लेखक का संदेश एवं निष्कर्ष
लेखक प्रभाष जोशी इस पाठ के माध्यम से हमें चेताते हैं कि यदि हमने अपनी 'खाऊ-उजाडु' सभ्यता को नहीं त्यागा और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना नहीं सीखा, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। वे हमें मालवा की पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणालियों और प्रकृति-प्रेमी जीवनशैली से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हैं। उनका मानना है कि हमें अपनी जड़ों से जुड़कर, विवेकपूर्ण उपभोग करके और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करके ही भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। यह पाठ हमें अपनी जीवनशैली पर पुनर्विचार करने और पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनने की प्रेरणा देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य/शब्द:
- मालवा: मध्य प्रदेश का एक पठारी क्षेत्र।
- कालिदास: महान कवि, जिन्होंने मालवा की जलवायु को 'स्वर्ग का एक टुकड़ा' कहा था।
- विक्रमादित्य: उज्जैन के प्रसिद्ध राजा, जिनके शासनकाल में मालवा समृद्ध था।
- शिप्रा, चंबल, गंभीर, पार्वती, कालीसिंध: मालवा की प्रमुख नदियाँ।
- तालाब, कुएँ, बावड़ियाँ: मालवा में जल-संरक्षण के पारंपरिक साधन।
- खाऊ-उजाडु सभ्यता: प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करने वाली उपभोक्तावादी और विनाशकारी सभ्यता।
- पानी उतर गया: मालवा में पानी की कमी को दर्शाने वाला मुहावरा।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. 'अपना मालवा-खाऊ-उजाडु सभ्यता में' पाठ के लेखक कौन हैं?
क) हजारी प्रसाद द्विवेदी
ख) प्रभाष जोशी
ग) रामचंद्र शुक्ल
घ) फणीश्वरनाथ रेणु
2. लेखक प्रभाष जोशी ने किस सभ्यता को 'खाऊ-उजाडु सभ्यता' कहा है?
क) वैदिक सभ्यता
ख) पारंपरिक ग्रामीण सभ्यता
ग) आधुनिक उपभोक्तावादी और विनाशकारी सभ्यता
घ) सिंधु घाटी सभ्यता
3. कालिदास ने मालवा की जलवायु को कैसा बताया है?
क) अत्यधिक गर्म
ख) अत्यधिक ठंडा
ग) समशीतोष्ण (न ज़्यादा गर्म न ज़्यादा ठंडा)
घ) शुष्क और रेगिस्तानी
4. मालवा की पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणाली में इनमें से क्या शामिल नहीं था?
क) तालाब
ख) कुएँ
ग) बावड़ियाँ
घ) बड़े-बड़े बाँध (डैम)
5. 'पानी उतर गया' मुहावरे का मालवा के संदर्भ में क्या अर्थ है?
क) पानी का स्तर बढ़ जाना
ख) पानी का रंग बदल जाना
ग) पानी की कमी हो जाना
घ) पानी का शुद्ध हो जाना
6. मालवा की प्रमुख नदियों में से कौन-सी एक नदी का उल्लेख पाठ में नहीं है?
क) शिप्रा
ख) चंबल
ग) गंगा
घ) गंभीर
7. लेखक के अनुसार, आधुनिक 'खाऊ-उजाडु' सभ्यता का मुख्य दुष्परिणाम क्या है?
क) आर्थिक समृद्धि
ख) सांस्कृतिक विकास
ग) जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन
घ) बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ
8. प्रभाष जोशी का संबंध मुख्यतः किस क्षेत्र से रहा है?
क) साहित्य
ख) विज्ञान
ग) पत्रकारिता
घ) खेल
9. मालवा की मिट्टी की मुख्य विशेषता क्या है?
क) रेतीली और अनुर्वर
ख) काली और उपजाऊ
ग) लाल और पथरीली
घ) दलदली और नमकीन
10. लेखक किस बात पर जोर देते हैं?
क) आधुनिक तकनीक का अंधाधुंध प्रयोग
ख) प्रकृति पर विजय प्राप्त करना
ग) पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्य
घ) केवल आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना
उत्तरमाला:
- ख) प्रभाष जोशी
- ग) आधुनिक उपभोक्तावादी और विनाशकारी सभ्यता
- ग) समशीतोष्ण (न ज़्यादा गर्म न ज़्यादा ठंडा)
- घ) बड़े-बड़े बाँध (डैम)
- ग) पानी की कमी हो जाना
- ग) गंगा
- ग) जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन
- ग) पत्रकारिता
- ख) काली और उपजाऊ
- ग) पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्य
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखें और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनें। शुभकामनाएँ!