Class 12 Hindi Notes Chapter 4 (Chapter 4) – Aroh Book

Aroh
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी 'आरोह' पुस्तक के काव्य खंड के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय - 'कैमरे में बंद अपाहिज' पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह कविता रघुवीर सहाय जी द्वारा रचित है और मीडिया की संवेदनहीनता तथा व्यावसायिकता पर एक गहरा व्यंग्य है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसके हर पहलू को समझना आवश्यक है।


अध्याय 4: कैमरे में बंद अपाहिज (रघुवीर सहाय)

1. कवि परिचय

  • नाम: रघुवीर सहाय
  • जन्म: 1929, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
  • शिक्षा: लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.
  • कार्यक्षेत्र:
    • पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई।
    • 'प्रतीक' और 'कल्पना' जैसी पत्रिकाओं में सहायक संपादक रहे।
    • 'नवभारत टाइम्स' में विशेष संवाददाता के रूप में काम किया।
    • 'दिनमान' साप्ताहिक के प्रधान संपादक भी रहे।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • काव्य संग्रह: 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो हँसो जल्दी हँसो', 'लोग भूल गए हैं' (इसी संग्रह से प्रस्तुत कविता ली गई है)।
    • पुरस्कार: 'लोग भूल गए हैं' काव्य संग्रह के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • काव्यगत विशेषताएँ:
    • समकालीन हिंदी कविता के महत्वपूर्ण कवि।
    • उनकी कविताओं पर पत्रकारिता का गहरा प्रभाव दिखता है।
    • आम आदमी की पीड़ा, विडंबना और व्यंग्य उनकी कविताओं के मुख्य स्वर हैं।
    • उन्होंने लघुमानव की प्रतिष्ठा की और सामाजिक यथार्थ को अपनी कविताओं में स्थान दिया।
    • उनकी भाषा सरल, सीधी, सपाट और बोलचाल के करीब है।
  • निधन: 1990

2. कविता का सार

'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता रघुवीर सहाय के काव्य संग्रह 'लोग भूल गए हैं' से ली गई है। यह कविता मीडिया (विशेषकर दूरदर्शन) की व्यावसायिकता और संवेदनहीनता पर करारा व्यंग्य है।

कविता में एक दूरदर्शन कार्यक्रम निर्माता एक अपाहिज व्यक्ति को कैमरे के सामने लाता है। उसका उद्देश्य अपाहिज की पीड़ा को दर्शकों के सामने इस प्रकार प्रस्तुत करना है कि कार्यक्रम लोकप्रिय हो जाए और टीआरपी बढ़ जाए। कार्यक्रम निर्माता अपाहिज से बेतुके, संवेदनहीन और अमानवीय प्रश्न पूछते हैं, जैसे "क्या आप अपाहिज हैं?", "आपका अपाहिजपन आपको दुख देता होगा?"। वे अपाहिज को रोने के लिए उकसाते हैं, ताकि उसकी पीड़ा को 'करुणा' का जामा पहनाकर बेचा जा सके। वे कैमरे को अपाहिज के रोते हुए चेहरे पर ज़ूम करते हैं, उसकी फूली हुई आँखें और होंठों की कसमसाहट को बड़ा-बड़ा दिखाते हैं, ताकि दर्शक भी भावुक हो जाएँ।

कवि ने इस कविता के माध्यम से यह दर्शाया है कि कैसे मीडियाकर्मी अपने व्यावसायिक लाभ के लिए दूसरों की पीड़ा को एक वस्तु की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे सामाजिक उद्देश्य का ढोंग करते हैं, लेकिन उनका असली मकसद सिर्फ पैसा कमाना और कार्यक्रम को सनसनीखेज बनाना होता है। कविता मानवीय संवेदनाओं के शोषण और मीडिया की क्रूरता को उजागर करती है।

3. कविता की विस्तृत व्याख्या

  • "हम दूरदर्शन पर बोलेंगे / हम समर्थ शक्तिवान": कार्यक्रम निर्माता अपनी शक्ति और सामर्थ्य का प्रदर्शन करते हैं। 'हम' शब्द मीडियाकर्मियों के अहंकारी और सामूहिक चरित्र को दर्शाता है।
  • "हम एक दुर्बल को लाएँगे / एक बंद कमरे में": वे एक कमजोर, असहाय अपाहिज व्यक्ति को चुनते हैं और उसे एक नियंत्रित (स्टूडियो के) वातावरण में लाते हैं, जहाँ वह उनकी मर्जी से बोलने को विवश होता है।
  • "उससे पूछेंगे तो क्या आप अपाहिज हैं? / तो आप क्यों अपाहिज हैं?": ये प्रश्न अपाहिज के प्रति संवेदनहीनता और क्रूरता दर्शाते हैं। अपाहिज से उसका अपाहिजपन पूछना उसकी पीड़ा को कुरेदने जैसा है।
  • "आपका दुख तो दुख देता होगा? / कैमरा दिखाओ इसे बड़ा-बड़ा": कार्यक्रम निर्माता अपाहिज की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करने पर जोर देते हैं, ताकि दर्शक भावुक हों। वे कैमरे को अपाहिज के चेहरे पर केंद्रित करने का निर्देश देते हैं ताकि उसकी पीड़ा स्पष्ट दिखे।
  • "हाँ तो बताइए आपका दुख क्या है? / जल्दी बताइए वह दुख बताइए / बता नहीं पाएगा": अपाहिज अपनी पीड़ा को शब्दों में शायद व्यक्त न कर पाए, क्योंकि वह इतनी गहरी है। मीडियाकर्मी उस पर जल्दी बताने का दबाव डालते हैं।
  • "सोचिए, बताइए / आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है? / कैसा यानी कैसा लगता है? / हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा?": वे अपाहिज को सोचने और बताने के लिए प्रेरित करते हैं, और जब वह नहीं बता पाता, तो खुद ही इशारे करके उसे रोने या पीड़ा व्यक्त करने के लिए उकसाते हैं।
  • "थोड़ी कोशिश कीजिए / यह अवसर खो देंगे आप": वे अपाहिज पर दबाव डालते हैं कि वह रोए या अपनी पीड़ा व्यक्त करे, क्योंकि यह उसके लिए 'सुनहरा अवसर' है (कार्यक्रम में आने का)। यह मीडिया की व्यावसायिक सोच का चरम है।
  • "आप जानते हैं कि कार्यक्रम को रोचक बनाने के वास्ते / हम पूछ-पूछ कर उसको रुला देंगे": कार्यक्रम निर्माताओं का उद्देश्य स्पष्ट है - अपाहिज को रुलाकर कार्यक्रम को सनसनीखेज और रोचक बनाना, ताकि टीआरपी बढ़े।
  • "इंतज़ार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का": कवि यहाँ दर्शकों पर भी व्यंग्य करता है, जो दूसरों के दुख में मनोरंजन ढूंढते हैं और अपाहिज के रोने का इंतजार करते हैं।
  • "फिर हम परदे पर दिखलाएँगे / फूली हुई आँख की एक बड़ी तस्वीर / बहुत बड़ी तस्वीर / और होंठों पर एक कसमसाहट भी": अपाहिज के रोते हुए चेहरे का क्लोज-अप दिखाया जाएगा - उसकी सूजी हुई आँखें और होंठों पर छाई पीड़ा, ताकि दर्शकों में करुणा का भाव उत्पन्न हो।
  • "आशा है आप उसे उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे": यह मीडिया की चालाकी है, जहाँ अपाहिज की आंतरिक पीड़ा को बाहरी प्रदर्शन से जोड़ा जाता है।
  • "एक और कोशिश / दर्शक धीरज रखिए / हम दोनों एक संग रुलाने हैं / आप और वह / दोनों": कार्यक्रम निर्माता दर्शकों को धैर्य रखने को कहते हैं और उनका लक्ष्य अपाहिज और दर्शकों दोनों को एक साथ रुलाना है, ताकि कार्यक्रम 'सफल' हो।
  • "कैमरा बस करो / नहीं हुआ / रहने दो / परदे पर वक्त की कीमत है": यदि अपाहिज नहीं रोता या कार्यक्रम अपेक्षा के अनुरूप सफल नहीं होता, तो वे उसे बंद कर देते हैं क्योंकि कार्यक्रम के समय कीमती है और हर पल पैसे से जुड़ा है। यह व्यावसायिकता का चरम है।
  • "अब मुस्कुराएँगे हम / आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम / थोड़ी ही कसर रह गई / धन्यवाद": कार्यक्रम के अंत में वे मुस्कुराते हुए झूठी नैतिकता का प्रदर्शन करते हैं कि यह एक 'सामाजिक उद्देश्य' वाला कार्यक्रम था, जबकि उनका वास्तविक उद्देश्य कुछ और था।

4. काव्य-सौंदर्य

  • भाषा: सरल, सहज, खड़ी बोली हिंदी। पत्रकारिता की भाषा का प्रभाव स्पष्ट है, जिसमें सीधे-सीधे प्रश्न और निर्देश हैं।
  • शैली: नाटकीय, व्यंग्यात्मक, प्रश्नात्मक और संवादात्मक। कविता एक संवाद की तरह आगे बढ़ती है।
  • रस: करुण रस की प्रतीति होती है, परंतु कवि का मुख्य उद्देश्य करुणा उत्पन्न करना नहीं, बल्कि मीडिया की संवेदनहीनता को उजागर करना है।
  • अलंकार:
    • अनुप्रास अलंकार: "समर्थ शक्तिवान", "बड़ी तस्वीर", "वक्त की कीमत" आदि में।
    • पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: "बड़ा-बड़ा", "बहुत बड़ी", "जल्दी-जल्दी" आदि में।
    • प्रश्न अलंकार: कविता में अनेक प्रश्न पूछे गए हैं, जो मीडिया की संवेदनहीनता को दर्शाते हैं।
    • करुणा का दिखावा: अंतर्विरोध।
  • छंद: मुक्त छंद। कविता में कोई निश्चित छंद नहीं है, यह गद्य के करीब है।
  • बिंब:
    • दृश्य बिंब: "फूली हुई आँख की एक बड़ी तस्वीर", "बंद कमरा", "कैमरा" आदि।
    • श्रव्य बिंब: प्रश्नों का पूछना, रोने की कोशिश करना।
  • विषय-वस्तु: मीडिया की व्यावसायिकता, संवेदनहीनता, मानवीय पीड़ा का प्रदर्शन, सामाजिक विडंबना और क्रूरता।

5. विशेष बिंदु

  • यह कविता मीडिया के दोहरे चरित्र को उजागर करती है - एक ओर समाज सेवा और जनहित का दावा, दूसरी ओर व्यावसायिक लाभ के लिए मानवीय संवेदनाओं का निर्मम शोषण।
  • कवि ने 'हम' शब्द का प्रयोग दूरदर्शन के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए किया है, जो उनकी सामूहिक मानसिकता और स्वार्थपरता को दर्शाता है।
  • कविता में अपाहिज की चुप्पी, लाचारी और बेबसी को भी दर्शाया गया है, जो मीडिया के सामने एक निरीह प्राणी मात्र है।
  • यह कविता समाज में व्याप्त संवेदनहीनता और टीआरपी की अंधी दौड़ पर करारा व्यंग्य है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता रघुवीर सहाय के किस काव्य संग्रह से ली गई है?
    a) सीढ़ियों पर धूप में
    b) आत्महत्या के विरुद्ध
    c) हँसो हँसो जल्दी हँसो
    d) लोग भूल गए हैं

  2. 'हम समर्थ शक्तिवान' यहाँ 'हम' शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
    a) कवि के लिए
    b) दर्शकों के लिए
    c) दूरदर्शन के कार्यक्रम निर्माताओं के लिए
    d) अपाहिज के लिए

  3. दूरदर्शन वाले अपाहिज से कैसे प्रश्न पूछते हैं?
    a) सहानुभूतिपूर्ण
    b) तार्किक
    c) बेतुके और संवेदनहीन
    d) प्रेरणादायक

  4. दूरदर्शन का कार्यक्रम बनाने वालों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    a) अपाहिज की मदद करना
    b) सामाजिक चेतना फैलाना
    c) कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाना और पैसा कमाना
    d) दर्शकों का मनोरंजन करना

  5. 'परदे पर वक्त की कीमत है' पंक्ति का क्या आशय है?
    a) समय बहुत कीमती होता है
    b) दूरदर्शन पर कार्यक्रम का समय पैसे से जुड़ा है
    c) अपाहिज का समय बर्बाद हो रहा है
    d) दर्शकों को धैर्य रखना चाहिए

  6. कवि ने कविता में किस पर व्यंग्य किया है?
    a) अपाहिज पर
    b) दर्शकों पर
    c) मीडिया की व्यावसायिकता और संवेदनहीनता पर
    d) समाज की गरीबी पर

  7. अपाहिज को कैमरे के सामने लाने का मुख्य कारण क्या है?
    a) उसे सम्मान देना
    b) उसकी समस्या का समाधान करना
    c) उसकी पीड़ा को बेचकर कार्यक्रम को सफल बनाना
    d) उसे नौकरी देना

  8. कविता में 'फूली हुई आँख की एक बड़ी तस्वीर' दिखाने का क्या उद्देश्य है?
    a) अपाहिज की शारीरिक अवस्था बताना
    b) दर्शकों में करुणा का भाव जगाना
    c) कैमरे की क्षमता दिखाना
    d) अपाहिज को शर्मिंदा करना

  9. रघुवीर सहाय को किस काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
    a) आत्महत्या के विरुद्ध
    b) हँसो हँसो जल्दी हँसो
    c) लोग भूल गए हैं
    d) सीढ़ियों पर धूप में

  10. कविता में 'हम दोनों एक संग रुलाने हैं' कहकर कवि क्या दर्शाना चाहता है?
    a) अपाहिज और दर्शकों की समान स्थिति
    b) कार्यक्रम निर्माताओं की संवेदनशीलता
    c) कार्यक्रम निर्माताओं का व्यावसायिक स्वार्थ
    d) समाज में करुणा का प्रसार


उत्तरमाला:

  1. d) लोग भूल गए हैं
  2. c) दूरदर्शन के कार्यक्रम निर्माताओं के लिए
  3. c) बेतुके और संवेदनहीन
  4. c) कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाना और पैसा कमाना
  5. b) दूरदर्शन पर कार्यक्रम का समय पैसे से जुड़ा है
  6. c) मीडिया की व्यावसायिकता और संवेदनहीनता पर
  7. c) उसकी पीड़ा को बेचकर कार्यक्रम को सफल बनाना
  8. b) दर्शकों में करुणा का भाव जगाना
  9. c) लोग भूल गए हैं
  10. c) कार्यक्रम निर्माताओं का व्यावसायिक स्वार्थ

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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