Class 12 Hindi Notes Chapter 5 (Chapter 5) – Aroh Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'आरोह, भाग-2' के पाँचवें अध्याय का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में दो रचनाएँ शामिल हैं: गजानन माधव मुक्तिबोध की कविता 'सहर्ष स्वीकारा है' और विष्णु खरे का निबंध 'चार्ली चैप्लिन यानी हम सब'।
अध्याय 5: सहर्ष स्वीकारा है (कविता) - गजानन माधव मुक्तिबोध
1. कवि परिचय: गजानन माधव मुक्तिबोध
- जन्म: 13 नवंबर 1917, श्योपुर, मध्य प्रदेश।
- मृत्यु: 11 सितंबर 1964, दिल्ली।
- साहित्यिक पहचान: 'तार सप्तक' के पहले कवि, प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख हस्ताक्षर, नई कविता के महत्वपूर्ण कवि। उनकी कविताएँ गहन बौद्धिकता, वैयक्तिक और सामाजिक चेतना के समन्वय तथा फैंटेसी (कल्पना) के प्रयोग के लिए जानी जाती हैं।
- प्रमुख रचनाएँ:
- काव्य संग्रह: 'चाँद का मुँह टेढ़ा है', 'भूरी भूरी खाक धूल'।
- आलोचना: 'कामायनी: एक पुनर्विचार', 'एक साहित्यिक की डायरी', 'नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र'।
- उपन्यास: 'विपात्र'।
- कहानी संग्रह: 'सतह से उठता आदमी'।
- भाषा-शैली: इनकी भाषा में जटिलता, बिंबात्मकता और प्रतीकात्मकता का गहरा प्रयोग मिलता है। वे लंबी कविताएँ लिखने के लिए प्रसिद्ध हैं।
2. कविता का सार एवं प्रमुख बिंदु
'सहर्ष स्वीकारा है' कविता कवि के 'भूरी भूरी खाक धूल' नामक काव्य संग्रह से ली गई है। यह एक ऐसी कविता है जिसमें कवि अपने जीवन के हर अनुभव, हर सुख-दुख, हर संघर्ष और हर उपलब्धि को सहर्ष स्वीकार करता है।
- अगाध प्रेम और समर्पण: कवि अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त करता है, चाहे वह सुख हो या दुख, सफलता हो या असफलता, उसे वह खुशी-खुशी स्वीकार करता है। इसका कारण यह है कि कवि को लगता है कि उसके प्रिय (जो माँ, प्रेमिका, पत्नी, मित्र या ईश्वर कोई भी हो सकता है) को यह सब प्यारा है।
- प्रिय का प्रभाव: कवि के जीवन में जो भी विचार, भावनाएँ, स्मृतियाँ और अनुभव हैं, वे सब उसके प्रिय से गहरे जुड़े हुए हैं। प्रिय का प्रेम कवि के भीतर एक नदी की तरह बहता है, जो उसे लगातार प्रेरित करता है।
- गरबीली गरीबी: कवि अपनी गरीबी को भी 'गरबीली' कहता है, क्योंकि यह उसके प्रिय के प्रेम और प्रेरणा से जुड़ी है। यह दर्शाता है कि कवि भौतिक अभावों को भी गर्व के साथ स्वीकार करता है।
- ममता के बादल: प्रिय की ममता कवि के लिए 'ममता के बादल' की तरह हैं, जो उसे भीतर से कोमल और भावुक बनाते हैं। ये बादल उसके हृदय को हमेशा घेरे रहते हैं।
- मुक्ति की आकांक्षा: कविता में एक विरोधाभास भी है। कवि अपने प्रिय से इतना जुड़ा हुआ है कि वह उससे दूर होना चाहता है। वह चाहता है कि वह ऐसी अँधेरी गुफाओं, सुरंगों या धुएँ के बादलों में खो जाए जहाँ उसे अपने प्रिय की यादों का सहारा न मिले। यह मुक्ति की चाह इसलिए है ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और अपने अस्तित्व को स्वयं पहचान सके।
- मीठी यातना: प्रिय की यादें कवि के लिए 'मीठी यातना' हैं। ये यादें उसे सुख भी देती हैं, पर साथ ही उसे कमजोर भी बनाती हैं, जिससे वह अपने बल पर खड़ा नहीं हो पाता।
- अस्तित्व का संकट: कवि को डर है कि प्रिय के अत्यधिक प्रेम और प्रभाव के कारण कहीं उसका अपना अस्तित्व ही न मिट जाए। इसलिए वह उससे दूर होकर अपनी पहचान खोजना चाहता है।
- अंतिम विश्वास: अंत में, कवि यह स्वीकार करता है कि भले ही वह प्रिय से दूर चला जाए, लेकिन प्रिय का प्रेम उसके भीतर हमेशा रहेगा। वह जानता है कि उसका प्रिय हमेशा उसके साथ है, क्योंकि उसके प्रिय का प्रेम उसके भीतर समाया हुआ है।
3. काव्य-सौंदर्य एवं विशेष बिंदु
- भाषा: खड़ी बोली हिंदी, तत्सम शब्दावली का प्रयोग, बिंबात्मकता (जैसे - 'गरबीली गरीबी', 'भीतर की सरिता', 'ममता के बादल')।
- शैली: आत्म-कथनात्मक, संवादात्मक, फैंटेसी का प्रयोग।
- अलंकार: अनुप्रास, उपमा, रूपक, मानवीकरण, विरोधाभास ('मीठी यातना')।
- छंद: मुक्त छंद।
- विषय-वस्तु: प्रिय के प्रति असीम प्रेम, जीवन के हर अनुभव को स्वीकारना, प्रिय की यादों से मुक्ति की चाह, आत्म-निर्भरता की खोज का द्वंद्व।
- महत्वपूर्ण पंक्तियाँ:
- "जिंदगी में जो कुछ है, जो भी है, सहर्ष स्वीकारा है।"
- "गरबीली गरीबी यह, यह गंभीर अनुभव सब, यह विचार-वैभव सब, दृढ़ता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब..."
- "ममता के बादल की मँडराती कोमलता भीतर पिराती है।"
- "सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ पाताली अँधेरे की गुहाओं में, विवरों में।"
- "तुम्हें भूल जाने की दक्षिणी ध्रुवी अंधकार अमावस्या शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं।"
- "तुम्हारे ही कारण है जो कुछ भी मेरा है।"
अध्याय 5: चार्ली चैप्लिन यानी हम सब (निबंध) - विष्णु खरे
1. लेखक परिचय: विष्णु खरे
- जन्म: 1940, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश।
- साहित्यिक पहचान: समकालीन हिंदी कविता और आलोचना के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर। पत्रकारिता और फिल्म आलोचना में भी सक्रिय रहे।
- प्रमुख रचनाएँ:
- काव्य संग्रह: 'एक नई दुनिया', 'खुद अपनी आँख से', 'सबकी आवाज़ के पर्दे में', 'पिछला बाकी'।
- आलोचना: 'आलोचना की पहली किताब', 'सिनेमा और संस्कृति'।
- भाषा-शैली: इनकी भाषा सहज, प्रवाहमयी और विश्लेषणात्मक है। इनकी रचनाओं में आधुनिक जीवन की विसंगतियों, मानवीय मूल्यों के क्षरण और सामाजिक यथार्थ का चित्रण मिलता है।
2. पाठ का सार एवं प्रमुख बिंदु
यह निबंध चार्ली चैप्लिन के कलात्मक व्यक्तित्व, उनकी फिल्मों के सार्वभौमिक प्रभाव और भारतीय सिनेमा तथा दर्शकों पर उनके असर का विश्लेषण करता है।
- चैप्लिन की सार्वभौमिक अपील: लेखक बताता है कि चार्ली चैप्लिन की कला किसी विशेष भाषा, संस्कृति या देश की सीमाओं में बंधी नहीं है। उनकी मूक फिल्में पूरी दुनिया में समझी और सराही जाती हैं। उनका हास्य और करुणा का मिश्रण सार्वभौमिक मानवीय भावनाओं को छूता है।
- हास्य और करुणा का संगम: चैप्लिन की फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे दर्शकों को हँसाते-हँसाते रुला देती हैं। उनका हास्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं होता, बल्कि वह मानवीय त्रासदी और विडंबना को उजागर करता है।
- 'द लिटिल ट्रैम्प' का चरित्र: चैप्लिन का प्रसिद्ध चरित्र 'द लिटिल ट्रैम्प' (छोटा खानाबदोश) एक ऐसा व्यक्ति है जो गरीब, असहाय, अनाथ और बेघर है, लेकिन फिर भी मानवीय गरिमा, आशा और संघर्ष की भावना से भरा है। वह व्यवस्था का शिकार है, फिर भी हार नहीं मानता और अपनी मुस्कान बनाए रखता है।
- भारतीय संदर्भ में चैप्लिन: लेखक बताता है कि भारत में चैप्लिन की लोकप्रियता अद्भुत है। भारतीय दर्शक चैप्लिन में अपनी ही परिस्थितियों, अपनी गरीबी, अपने संघर्षों और अपनी आशाओं का प्रतिबिंब देखते हैं। भारत में गरीबी और संघर्ष का अनुभव व्यापक है, इसलिए चैप्लिन का चरित्र उनसे गहरा जुड़ाव महसूस कराता है।
- भारतीय सिनेमा पर प्रभाव: भारतीय सिनेमा में राज कपूर ने चैप्लिन के 'ट्रैम्प' चरित्र से गहरी प्रेरणा ली। उनकी फिल्में 'आवारा', 'श्री 420' आदि में राज कपूर का चरित्र चैप्लिन के चरित्र से मिलता-जुलता है - एक भोला-भाला, संघर्षरत, लेकिन आशावादी व्यक्ति। राज कपूर और नरगिस की जोड़ी में चैप्लिन और उनके स्त्री पात्रों का प्रभाव देखा जा सकता है।
- चैप्लिन का हास्य: चैप्लिन का हास्य केवल शारीरिक या 'स्लैपस्टिक' कॉमेडी नहीं है, बल्कि वह मानवीय कमजोरियों, सामाजिक विसंगतियों और व्यवस्था की क्रूरता पर आधारित है। यह हमें अपनी ही कमजोरियों और मानवीयता से जोड़ता है।
- 'चार्ली चैप्लिन यानी हम सब': शीर्षक का अर्थ है कि चैप्लिन का चरित्र किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति का प्रतिनिधित्व करता है। वह हर उस व्यक्ति का प्रतीक है जो जीवन के संघर्षों में भी अपनी मानवीयता और आशा को नहीं छोड़ता।
3. भाषा-शैली एवं विशेष बिंदु
- भाषा: सहज, प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी। लेखक ने अंग्रेजी शब्दों (जैसे 'ट्रैम्प', 'कॉमेडी ऑफ मैनर्स', 'स्लैपस्टिक') का भी आवश्यकतानुसार प्रयोग किया है।
- शैली: विश्लेषणात्मक, निबंधात्मक, तुलनात्मक। लेखक चैप्लिन की कला का गहन विश्लेषण करता है और उसकी भारतीय संदर्भ से तुलना करता है।
- विषय-वस्तु: चार्ली चैप्लिन की सार्वभौमिक अपील, हास्य और करुणा का संगम, भारतीय सिनेमा पर प्रभाव, मानवीयता का चित्रण।
- महत्वपूर्ण विचार:
- "चैप्लिन की कला किसी भाषा की मोहताज नहीं।"
- "चैप्लिन का जादू सिर चढ़कर बोलता है क्योंकि वह सार्वभौमिक है।"
- "चैप्लिन ने करुणा और हास्य का ऐसा सामंजस्य बिठाया कि दर्शक हँसते-हँसते रो पड़ते हैं।"
- "राज कपूर ने चैप्लिन से प्रेरणा लेकर भारतीय सिनेमा में एक नई परंपरा शुरू की।"
- "चैप्लिन का 'ट्रैम्प' चरित्र एक ऐसे व्यक्ति का प्रतीक है जो अनाथ, आवारा, बेघर, बेहतर जिंदगी की तलाश में भटकने वाला है।"
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - अध्याय 5
निर्देश: सही विकल्प का चयन करें।
-
'सहर्ष स्वीकारा है' कविता के कवि कौन हैं?
अ) शमशेर बहादुर सिंह
ब) गजानन माधव मुक्तिबोध
स) रघुवीर सहाय
द) कुँवर नारायण -
मुक्तिबोध की कौन सी रचना 'तार सप्तक' में शामिल है?
अ) चाँद का मुँह टेढ़ा है
ब) भूरी भूरी खाक धूल
स) एक साहित्यिक की डायरी
द) तार सप्तक (वे स्वयं इसके पहले कवि थे, उनकी कविताएँ 'तार सप्तक' में संकलित हैं) -
कविता में कवि अपनी गरीबी को कैसा बताता है?
अ) दुखदायी
ब) गरबीली
स) शर्मनाक
द) सामान्य -
कवि को अपने प्रिय की ममता के बादल कैसे लगते हैं?
अ) सुखदायी
ब) शीतल
स) भीतर पिराती (दर्द देती)
द) उदासीन -
कवि अपने प्रिय से दूर क्यों होना चाहता है?
अ) प्रिय से ऊब जाने के कारण
ब) आत्म-निर्भर बनने और अपने अस्तित्व को पहचानने के लिए
स) नए अनुभवों की तलाश में
द) प्रिय के व्यवहार से दुखी होकर -
'चार्ली चैप्लिन यानी हम सब' निबंध के लेखक कौन हैं?
अ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
ब) धर्मवीर भारती
स) विष्णु खरे
द) रामविलास शर्मा -
चार्ली चैप्लिन की फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
अ) केवल हास्य
ब) केवल करुणा
स) हास्य और करुणा का अद्भुत संगम
द) रोमांच और एक्शन -
चैप्लिन का प्रसिद्ध चरित्र 'द लिटिल ट्रैम्प' कैसा व्यक्ति है?
अ) अमीर और शक्तिशाली
ब) गरीब, असहाय, लेकिन मानवीय गरिमा से भरा
स) क्रूर और अहंकारी
द) बुद्धिमान और चालाक -
भारतीय सिनेमा में किस अभिनेता ने चैप्लिन के 'ट्रैम्प' चरित्र से गहरी प्रेरणा ली?
अ) दिलीप कुमार
ब) देव आनंद
स) राज कपूर
द) अमिताभ बच्चन -
लेखक के अनुसार, चैप्लिन की कला की सार्वभौमिक अपील का मुख्य कारण क्या है?
अ) उनकी फिल्मों का रंगीन होना
ब) उनकी फिल्मों में संगीत का प्रयोग
स) उनका किसी भाषा या संस्कृति की मोहताज न होना
द) उनकी फिल्मों का केवल हास्यप्रद होना
उत्तरमाला:
- ब) गजानन माधव मुक्तिबोध
- द) तार सप्तक (वे स्वयं इसके पहले कवि थे, उनकी कविताएँ 'तार सप्तक' में संकलित हैं)
- ब) गरबीली
- स) भीतर पिराती (दर्द देती)
- ब) आत्म-निर्भर बनने और अपने अस्तित्व को पहचानने के लिए
- स) विष्णु खरे
- स) हास्य और करुणा का अद्भुत संगम
- ब) गरीब, असहाय, लेकिन मानवीय गरिमा से भरा
- स) राज कपूर
- स) उनका किसी भाषा या संस्कृति की मोहताज न होना
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को समझने और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!