Class 12 Hindi Notes Chapter 6 (Chapter 6) – Aroh Book

Aroh
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी 'आरोह' पुस्तक के छठे अध्याय 'शिरीष के फूल' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाठ हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक ललित निबंध है, जिसमें उन्होंने शिरीष के माध्यम से जीवन की अजेय जिजीविषा, अनासक्ति और मस्ती का संदेश दिया है।


अध्याय 6: शिरीष के फूल

लेखक: हजारीप्रसाद द्विवेदी

1. लेखक परिचय (हजारीप्रसाद द्विवेदी)

  • जन्म: 1907 ई. में आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर प्रदेश) में।
  • शिक्षा: काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिष और संस्कृत में आचार्य की उपाधि प्राप्त की।
  • कार्यक्षेत्र:
    • शांतिनिकेतन में हिंदी भवन के निदेशक।
    • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष।
    • पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में हिंदी विभाग के अध्यक्ष।
  • पुरस्कार एवं सम्मान:
    • पद्म भूषण (1957 ई.)।
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार (निबंध संग्रह 'आलोक पर्व' के लिए)।
    • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष।
  • मृत्यु: 1979 ई. में।
  • साहित्यिक विशेषताएँ: गंभीर विचारक, ललित निबंधकार, इतिहासवेत्ता, आलोचक और अन्वेषक।
  • प्रमुख रचनाएँ:
    • उपन्यास: 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'चारु चंद्रलेख', 'पुनर्नवा', 'अनामदास का पोथा'।
    • आलोचना साहित्य: 'सूर साहित्य', 'कबीर', 'नाथ संप्रदाय', 'हिंदी साहित्य की भूमिका', 'हिंदी साहित्य का आदिकाल', 'हिंदी साहित्य: उद्भव और विकास'।
    • निबंध संग्रह: 'अशोक के फूल', 'कल्पलता', 'मध्यकालीन धर्मसाधना', 'विचार और वितर्क', 'विचार-प्रवाह', 'कुटज', 'आलोक पर्व'।
    • संपादित ग्रंथ: 'संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो', 'नाथ सिद्धों की बानियाँ'।
  • भाषा-शैली: संस्कृतनिष्ठ, परिष्कृत, प्रवाहमयी हिंदी। उनकी शैली में विचार, भाव और व्यंग्य का सुंदर समन्वय मिलता है।

2. पाठ परिचय ('शिरीष के फूल' - एक ललित निबंध)

  • 'शिरीष के फूल' एक ललित निबंध है, जिसमें लेखक ने शिरीष के वृक्ष के माध्यम से मनुष्य की अदम्य जिजीविषा (जीने की इच्छा) और अनासक्त भाव से जीवन जीने की प्रेरणा दी है।
  • यह निबंध उस समय लिखा गया था जब द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका चल रही थी और भारत में गांधी जी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था।
  • लेखक ने शिरीष के माध्यम से विषम परिस्थितियों में भी धैर्य, अनासक्ति और जीवटता बनाए रखने का संदेश दिया है। उन्होंने शिरीष की तुलना एक अवधूत (संन्यासी) से की है।
  • इसमें भारतीय संस्कृति की निरंतरता, कालिदास के काव्य और गांधी जी के व्यक्तित्व का भी उल्लेख है।

3. पाठ का सार एवं प्रमुख बिंदु

  1. शिरीष की अजेय जीवनी-शक्ति:

    • लेखक बताते हैं कि शिरीष का वृक्ष जेठ की तपती धूप और लू में भी हरा-भरा रहता है और फूलता है, जब अन्य फूल-पत्ते मुरझा जाते हैं।
    • यह भीषण गर्मी में भी वायुमंडल से रस खींचकर जीवित रहता है, जो इसकी अदम्य जीवनी-शक्ति का प्रतीक है।
    • यह वसंत के आगमन से लेकर आषाढ़ तक, और कभी-कभी भादों तक भी फूलता रहता है।
  2. शिरीष की अवधूत-तुल्यता:

    • लेखक शिरीष को एक अवधूत (संन्यासी) के समान मानते हैं। जिस प्रकार एक अवधूत बाहरी परिस्थितियों से अप्रभावित रहकर मस्त रहता है, उसी प्रकार शिरीष भी गर्मी, लू, आँधी-तूफान में भी अडिग खड़ा रहता है।
    • यह सुख-दुख, लाभ-हानि से परे होकर अपनी मस्ती में जीता है।
  3. पुराने और नए का समन्वय:

    • शिरीष की एक विशेषता यह है कि उसके पुराने फूल झड़ते नहीं, बल्कि नए फूलों के आने पर ही झड़ते हैं। लेखक इसे 'अनादि-अनंत काल' तक फूलों का क्रम बताते हैं।
    • यह दर्शाता है कि जीवन में पुराने का मोह छोड़ना और नए का स्वागत करना आवश्यक है, तभी जीवन गतिशील रहता है।
  4. कालिदास और शिरीष:

    • लेखक कालिदास के 'मेघदूत' का संदर्भ देते हुए बताते हैं कि कालिदास ने शिरीष के फूल को अत्यंत कोमल माना है। उन्होंने कहा है कि शिरीष का फूल इतना कोमल होता है कि उस पर पक्षी का भार भी सहन नहीं हो सकता।
    • लेखक इस पर प्रश्न उठाते हैं कि यदि यह इतना कोमल है, तो इतनी प्रचंड गर्मी में कैसे टिका रहता है?
    • लेखक कालिदास को 'अनासक्त योगी' कहते हैं, क्योंकि उन्होंने सौंदर्य और भोग को अलग-अलग देखा। वे सौंदर्य के प्रति आसक्त नहीं थे, बल्कि उसे तटस्थ भाव से देखते थे।
  5. हृदय की कोमलता और मस्तिष्क की दृढ़ता:

    • लेखक शिरीष के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि महान व्यक्ति में हृदय की संवेदनशीलता (कोमलता) और मस्तिष्क की दृढ़ता (कठोरता) दोनों का समन्वय होना चाहिए।
    • शिरीष में यह दोनों गुण विद्यमान हैं - वह कोमल है, पर विषम परिस्थितियों में भी दृढ़ता से खड़ा रहता है।
    • कवि को भी ऐसा ही होना चाहिए - कोमल भावनाओं से युक्त, पर सत्य के प्रति दृढ़।
  6. गांधी जी का संदर्भ:

    • लेखक ने गांधी जी की तुलना शिरीष और अवधूत से की है।
    • गांधी जी ने भारत की विषम परिस्थितियों (पराधीनता, गरीबी, सांप्रदायिकता) में भी शिरीष की तरह अडिग रहकर, अनासक्त भाव से देश को नेतृत्व दिया।
    • उन्होंने भी वायुमंडल से रस खींचकर (जनता से शक्ति और विश्वास प्राप्त कर) देश को आज़ादी दिलाई। उनमें शिरीष जैसी अजेय जीवनी-शक्ति थी।
  7. कालजयी साहित्य और शिरीष:

    • लेखक बताते हैं कि शिरीष की तरह ही कालजयी साहित्य भी समय के थपेड़ों को सहकर भी बना रहता है और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखता है।
    • जो साहित्य या व्यक्ति पुराने मोह को नहीं छोड़ पाता, वह कालजयी नहीं बन सकता।
  8. मृत्युंजय और जीजीविषा:

    • शिरीष मृत्युंजय है, क्योंकि वह पुराने को छोड़कर नए को जन्म देता रहता है। यह जीवन की अदम्य जीजीविषा का प्रतीक है, जो मृत्यु को स्वीकार कर नए जीवन का स्वागत करती है।
  9. भारत की सांस्कृतिक विरासत:

    • भारत की संस्कृति भी शिरीष की तरह ही अनेक आघातों, परिवर्तनों और आक्रमणों को सहकर भी अपनी आंतरिक शक्ति से जीवित है और निरंतर बनी हुई है।

4. भाषा-शैली

  • शैली: ललित निबंध शैली। इसमें विचार, भाव और व्यक्तिगत अनुभूतियों का सुंदर समन्वय है।
  • भाषा: संस्कृतनिष्ठ हिंदी। तत्सम शब्दों की बहुलता है, जो भाषा को गरिमा प्रदान करती है।
  • प्रवाह और सरलता: गंभीर विषयों को भी अत्यंत सहज और प्रवाहमयी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
  • अलंकार: उपमा, रूपक, मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोग।
  • प्रसंग और उद्धरण: कालिदास, गांधी जी आदि के प्रसंगों और उद्धरणों का प्रयोग निबंध को अधिक प्रभावी बनाता है।

5. महत्वपूर्ण उद्धरण

  • "शिरीष के फूल मुझे मस्तमौला बना देते हैं।"
  • "अवधूत आज कहाँ है?"
  • "शिरीष वायुमंडल से रस खींचता है।"
  • "कालिदास अनासक्त योगी की तरह स्थिरप्रज्ञ थे।"
  • "हृदय की कोमलता और मस्तिष्क की दृढ़ता का समन्वय।"
  • "जो फक्कड़ नहीं बन सका, जो अनासक्त नहीं रह सका, वह कालजयी नहीं बन सकता।"

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. 'शिरीष के फूल' पाठ के लेखक कौन हैं?
    a) महावीर प्रसाद द्विवेदी
    b) हजारीप्रसाद द्विवेदी
    c) रामचंद्र शुक्ल
    d) जैनेंद्र कुमार

  2. 'शिरीष के फूल' साहित्य की कौन सी विधा है?
    a) कहानी
    b) कविता
    c) ललित निबंध
    d) आत्मकथा

  3. लेखक ने शिरीष के फूल की तुलना किससे की है?
    a) एक राजा से
    b) एक अवधूत से
    c) एक सैनिक से
    d) एक बच्चे से

  4. शिरीष का वृक्ष किस ऋतु की प्रचंडता में भी फूलता है?
    a) वसंत ऋतु
    b) शरद ऋतु
    c) ग्रीष्म ऋतु (जेठ की तपती धूप)
    d) वर्षा ऋतु

  5. कालिदास ने शिरीष के फूल को कैसा बताया है?
    a) अत्यंत कठोर
    b) अत्यंत कोमल
    c) सामान्य
    d) सुगंधहीन

  6. लेखक ने कालिदास को किस विशेषण से संबोधित किया है?
    a) महाकवि
    b) अनासक्त योगी
    c) प्रकृति प्रेमी
    d) नाटककार

  7. शिरीष का वृक्ष कहाँ से रस खींचकर जीवित रहता है?
    a) धरती से
    b) वायुमंडल से
    c) जल से
    d) सूर्य के प्रकाश से

  8. लेखक ने किस महापुरुष के व्यक्तित्व में शिरीष जैसी अदम्य जीवनी-शक्ति देखी है?
    a) जवाहरलाल नेहरू
    b) सरदार वल्लभभाई पटेल
    c) महात्मा गांधी
    d) सुभाष चंद्र बोस

  9. 'हृदय की कोमलता और मस्तिष्क की दृढ़ता' का समन्वय किसमें आवश्यक बताया गया है?
    a) केवल सैनिक में
    b) केवल व्यापारी में
    c) महान व्यक्ति और कवि में
    d) केवल शासक में

  10. शिरीष के फूल कब तक फूलते रहते हैं?
    a) केवल वसंत में
    b) केवल वर्षा में
    c) वसंत से लेकर आषाढ़ तक (और कभी-कभी भादों तक)
    d) केवल ग्रीष्म में


उत्तरमाला:

  1. b) हजारीप्रसाद द्विवेदी
  2. c) ललित निबंध
  3. b) एक अवधूत से
  4. c) ग्रीष्म ऋतु (जेठ की तपती धूप)
  5. b) अत्यंत कोमल
  6. b) अनासक्त योगी
  7. b) वायुमंडल से
  8. c) महात्मा गांधी
  9. c) महान व्यक्ति और कवि में
  10. c) वसंत से लेकर आषाढ़ तक (और कभी-कभी भादों तक)

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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