Class 12 Hindi Notes Chapter 7 (Chapter 7) – Aroh Book

Aroh
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी 'आरोह' पाठ्यपुस्तक के अध्याय 7, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित कविता 'बादल राग' का विस्तृत अध्ययन करेंगे, जो आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


अध्याय 7: बादल राग - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

यह कविता निराला की प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जो उनके 'परिमल' काव्य संग्रह में संकलित है। यह छह खंडों में प्रकाशित 'बादल राग' कविता का छठा खंड है। यह कविता बादलों को क्रांति के अग्रदूत के रूप में देखती है और सामाजिक विषमता पर गहरा प्रहार करती है।


1. कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

  • जन्म: सन् 1899, महिषादल (मेदिनीपुर, बंगाल)।
  • निधन: सन् 1961, इलाहाबाद (प्रयागराज)।
  • मूल स्थान: गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
  • शिक्षा: औपचारिक शिक्षा नौवीं कक्षा तक। स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त किया।
  • प्रमुख रचनाएँ:
    • काव्य संग्रह: अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नए पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत गुंज।
    • उपन्यास: अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, बिल्लेसुर बकरिहा, चमेली, इंदुलेखा (अपूर्ण)।
    • कहानी संग्रह: लिली, सखी, सुकुल की बीवी, चतुरी चमार।
    • निबंध संग्रह: प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन।
  • काव्यगत विशेषताएँ:
    • छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक: जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ।
    • विद्रोही कवि: रूढ़ियों, सामाजिक विषमताओं और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई।
    • क्रांति और विद्रोह के स्वर: उनकी कविताओं में शोषण के विरुद्ध क्रांति का आह्वान प्रमुखता से मिलता है।
    • छंदमुक्त कविता के प्रणेता: उन्होंने हिंदी कविता को छंदों के बंधन से मुक्त कर 'मुक्त छंद' का प्रवर्तन किया, जिसे 'केंचुआ छंद' कहकर उपहास भी किया गया।
    • प्रकृति चित्रण: प्रकृति का मानवीकरण और जीवंत चित्रण।
    • प्रेम और सौंदर्य: उनकी कविताओं में प्रेम और सौंदर्य का भी चित्रण मिलता है।
    • दार्शनिकता और रहस्यवाद: कहीं-कहीं दार्शनिक और रहस्यवादी चेतना भी परिलक्षित होती है।
    • सामाजिक चेतना: दलितों, शोषितों और पीड़ितों के प्रति गहरी सहानुभूति।
  • भाषा शैली: संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली, ओजपूर्ण, चित्रात्मक, प्रतीकात्मक।

2. कविता का सार (Summary of the Poem)

'बादल राग' कविता निराला की क्रांतिकारी चेतना को व्यक्त करती है। इसमें कवि बादलों को क्रांति का प्रतीक मानता है और उनका आह्वान करता है।

  • बादल - क्रांति के अग्रदूत: कवि बादलों को क्रांति का प्रतीक मानता है, जो समाज में परिवर्तन लाते हैं। वे गर्जना करते हुए आते हैं और शोषक वर्ग (पूंजीपति) के मन में भय उत्पन्न करते हैं, जबकि शोषित वर्ग (किसान, मजदूर) के लिए आशा और जीवन का संदेश लाते हैं।
  • पूंजीपतियों का भय और विनाश: कवि कहता है कि बादलों की भयंकर गर्जना और वज्रपात से पूंजीपति वर्ग भयभीत हो जाता है। उनके ऊँचे-ऊँचे महल (अट्टालिकाएँ) कवि को आतंक के भवन प्रतीत होते हैं, जो गरीबों के शोषण पर खड़े हैं। ये महल बादलों की मार से ढह सकते हैं। पूंजीपतियों का जीवन भोग-विलास और ऐश्वर्य से भरा है, लेकिन क्रांति की आहट से वे काँप उठते हैं।
  • शोषितों के लिए आशा और जीवन: इसके विपरीत, छोटे-छोटे पौधे (शोषित वर्ग) बादलों के आने से प्रसन्न होते हैं। वे वर्षा से नवजीवन पाते हैं और लहलहा उठते हैं। कवि कहता है कि क्रांति हमेशा कीचड़ (पंक) पर ही होती है, अर्थात शोषक वर्ग को ही प्रभावित करती है, क्योंकि वही समाज में विषमता और गंदगी फैलाता है।
  • सामाजिक विषमता का चित्रण: कविता में समाज की आर्थिक विषमता का स्पष्ट चित्रण है। एक ओर पूंजीपति वर्ग है जो धन-धान्य से परिपूर्ण है, लेकिन क्रांति की आहट से भयभीत है। दूसरी ओर, किसान और मजदूर हैं जो निर्धन और शोषित हैं, लेकिन बादलों (क्रांति) से जीवन की आशा रखते हैं।
  • विषमता का अंत और नवजीवन: बादल पूंजीपतियों के 'रुद्ध कोष' (बंद खजाने) और 'क्षीण शरीर' (कमजोर शरीर) को नष्ट करके नए जीवन का संचार करते हैं। वे शोषण के विरुद्ध विद्रोह का आह्वान करते हैं, जिससे समाज में समता और न्याय स्थापित हो सके।

3. प्रमुख बिंदु एवं व्याख्या (Key Points and Explanation)

  • "गरजो, हे बादल! गरजो!": यह क्रांति का आह्वान है। बादल यहाँ केवल प्रकृति का अंग नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शक्ति हैं।
  • "हृदय थाम लेता संसार, सुन-सुन घोर वज्र हुंकार।": यहाँ 'संसार' पूंजीपति वर्ग का प्रतीक है। बादलों की गर्जना (क्रांति की आहट) से शोषक वर्ग भयभीत हो जाता है।
  • "अट्टालिका नहीं, रे आतंक भवन।": पूंजीपतियों के ऊँचे महल गरीबों के शोषण पर बने हैं, इसलिए वे आतंक का प्रतीक हैं। क्रांति इन महलों को ध्वस्त कर सकती है।
  • "सदा पंक पर ही होता जल-विप्लव-प्लावन।": क्रांति (जल-विप्लव-प्लावन) हमेशा कीचड़ (पंक) पर ही होती है। 'पंक' यहाँ पूंजीपतियों और उनके द्वारा फैलाए गए शोषण का प्रतीक है। क्रांति शोषकों को ही प्रभावित करती है।
  • "छोटे हैं शोभा पाते, खेतियाँ हैं झूमतीं।": छोटे पौधे (किसान, मजदूर, शोषित वर्ग) बादलों की वर्षा से नवजीवन पाते हैं। क्रांति उनके लिए कल्याणकारी होती है।
  • "रुग्ण है जग के हृदय में, सोए हैं अंकुर।": संसार के हृदय में क्रांति के बीज (अंकुर) अभी सोए हुए हैं, जिन्हें बादलों की गर्जना (क्रांति का आह्वान) जगाएगी।
  • "हास विलास सरोज पर, निर्भर।": पूंजीपतियों का जीवन भोग-विलास पर आधारित है, वे कमल (सरोज) की तरह पानी पर तैरते हैं, लेकिन क्रांति उन्हें डुबो सकती है।
  • "जीर्ण बाहु, है शीर्ण शरीर, तुझे बुलाता कृषक अधीर।": किसान की भुजाएँ कमजोर और शरीर क्षीण हो चुका है। वह क्रांति (बादलों) का अधीरता से इंतजार कर रहा है ताकि उसे शोषण से मुक्ति मिले और जीवन में खुशहाली आए।
  • "ऐ विप्लव के प्लावन, ऐ जीवन के पारावार!": बादल को विप्लव (क्रांति) और जीवन का सागर कहा गया है। वे विनाश भी करते हैं और नवजीवन भी देते हैं।
  • प्रतीकात्मकता:
    • बादल: क्रांति, विद्रोह, नवजीवन।
    • पंक (कीचड़): शोषण, पूंजीपति वर्ग।
    • अट्टालिकाएँ: पूंजीपतियों के वैभव और शोषण के प्रतीक।
    • छोटे पौधे: शोषित वर्ग, किसान, मजदूर।
    • सरोज (कमल): पूंजीपतियों का भोग-विलास।
  • सामाजिक चेतना: कविता पूंजीवादी व्यवस्था पर गहरा प्रहार करती है और शोषित वर्ग के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त करती है। यह वर्ग-संघर्ष का चित्रण करती है।

4. काव्य सौंदर्य (Poetic Beauty)

  • भाषा: संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग, ओजपूर्ण और प्रवाहमयी।
  • छंद: मुक्त छंद का प्रयोग, जो निराला की विशिष्ट पहचान है। कविता में आंतरिक लय और संगीत है।
  • अलंकार:
    • मानवीकरण: बादलों का मानवीकरण किया गया है, उन्हें क्रांति के दूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ("गरजो, हे बादल!", "ऐ विप्लव के प्लावन")
    • अनुप्रास: "सुन-सुन घोर वज्र हुंकार", "रुद्ध कोष", "क्षीण शरीर" आदि।
    • रूपक: "आतंक भवन" (अट्टालिकाओं को आतंक भवन का रूप दिया गया है)।
    • पुनरुक्ति प्रकाश: "सुन-सुन"।
  • रस: वीर रस और रौद्र रस की प्रधानता है, जो क्रांति और विद्रोह के भाव को व्यक्त करते हैं।
  • शैली: उद्बोधनात्मक, प्रतीकात्मक और चित्रात्मक। कवि बादलों को संबोधित कर रहा है और विभिन्न बिंबों के माध्यम से अपनी बात कह रहा है।
  • बिंब-विधान: गर्जना, वज्रपात, अट्टालिकाएँ, पंक, हास-विलास, क्षीण शरीर, रुद्ध कोष आदि के सशक्त बिंबों का प्रयोग किया गया है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ 'बादल राग' कविता पर आधारित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

  1. 'बादल राग' कविता के कवि कौन हैं?
    क) जयशंकर प्रसाद
    ख) सुमित्रानंदन पंत
    ग) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
    घ) महादेवी वर्मा

  2. 'बादल राग' कविता में बादल किसका प्रतीक हैं?
    क) प्रेम और सौंदर्य का
    ख) शांति और सद्भाव का
    ग) क्रांति और विद्रोह का
    घ) प्रकृति की सुंदरता का

  3. कवि ने पूंजीपतियों के महलों को क्या कहा है?
    क) वैभव के भवन
    ख) आनंद के धाम
    ग) आतंक भवन
    घ) शांति कुटीर

  4. 'सदा पंक पर ही होता जल-विप्लव-प्लावन' में 'पंक' किसका प्रतीक है?
    क) कीचड़ का
    ख) शोषित वर्ग का
    ग) पूंजीपति वर्ग का
    घ) प्रकृति का

  5. 'बादल राग' कविता में 'छोटे हैं शोभा पाते' कहकर कवि ने किनका उल्लेख किया है?
    क) छोटे बच्चे
    ख) छोटे पौधे
    ग) छोटे जीव-जंतु
    घ) छोटे व्यापारी

  6. कवि ने बादलों को 'ऐ विप्लव के प्लावन' क्यों कहा है?
    क) क्योंकि वे बाढ़ लाते हैं
    ख) क्योंकि वे क्रांति और विनाश लाते हैं
    ग) क्योंकि वे जीवन का संचार करते हैं
    घ) ख और ग दोनों

  7. 'जीर्ण बाहु, है शीर्ण शरीर, तुझे बुलाता कृषक अधीर' - इन पंक्तियों में 'कृषक' किसका प्रतीक है?
    क) कमजोर किसान का
    ख) मेहनती किसान का
    ग) शोषित और पीड़ित वर्ग का
    घ) अमीर किसान का

  8. 'बादल राग' कविता में किस रस की प्रधानता है?
    क) श्रृंगार रस
    ख) शांत रस
    ग) वीर रस
    घ) करुण रस

  9. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' को किस छंद के प्रवर्तन के लिए जाना जाता है?
    क) दोहा छंद
    ख) सवैया छंद
    ग) मुक्त छंद
    घ) चौपाई छंद

  10. 'हास विलास सरोज पर, निर्भर' - यहाँ 'सरोज' किसका प्रतीक है?
    क) कमल का फूल
    ख) पूंजीपतियों के भोग-विलास का
    ग) प्रकृति के सौंदर्य का
    घ) शोषितों की आशा का


उत्तरमाला:

  1. ग) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
  2. ग) क्रांति और विद्रोह का
  3. ग) आतंक भवन
  4. ग) पूंजीपति वर्ग का
  5. ख) छोटे पौधे
  6. घ) ख और ग दोनों (क्योंकि वे क्रांति और विनाश भी लाते हैं और नवजीवन भी देते हैं)
  7. ग) शोषित और पीड़ित वर्ग का
  8. ग) वीर रस
  9. ग) मुक्त छंद
  10. ख) पूंजीपतियों के भोग-विलास का

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको 'बादल राग' कविता को गहराई से समझने और आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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