Class 12 Hindi Notes Chapter 9 (Chapter 9) – Aroh Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'आरोह, भाग-2' के नवें अध्याय 'छोटा मेरा खेत' और 'बगुलों के पंख' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय उमा शंकर जोशी द्वारा रचित है और सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसके हर पहलू को समझना अत्यंत आवश्यक है।
अध्याय 9: छोटा मेरा खेत और बगुलों के पंख
कवि: उमा शंकर जोशी
कवि परिचय: उमा शंकर जोशी
- जन्म: 1911 ईस्वी, गुजरात।
- निधन: 1988 ईस्वी।
- परिचय: उमा शंकर जोशी गुजराती साहित्य के एक प्रमुख कवि हैं। उन्होंने गुजराती साहित्य को कई उत्कृष्ट रचनाएँ दीं। वे एक कवि के साथ-साथ नाटककार, निबंधकार और संपादक भी थे। उनकी रचनाओं में प्रकृति प्रेम, मानवीय संवेदनाएँ, आधुनिकता और गहन चिंतनशीलता का अद्भुत संगम मिलता है।
- प्रमुख रचनाएँ:
- काव्य: विश्व-शांति, गंगोत्री, निशीथ, प्राचीना, वसंत वर्षा, महाप्रस्थान, अभिज्ञा।
- एकांकी: शहिद।
- उपन्यास: सापना भारा।
- निबंध: घर और बाहर।
- पुरस्कार एवं सम्मान:
- 1967 में 'निशीथ' काव्य संग्रह के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित।
- साहित्य अकादमी पुरस्कार।
- भारतीय ज्ञानपीठ के अध्यक्ष भी रहे।
- विशेषता: उनकी कविताएँ भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती हैं। प्रस्तुत दोनों कविताएँ उनकी गुजराती कविताओं का हिंदी अनुवाद हैं।
कविता 1: छोटा मेरा खेत
यह कविता कवि-कर्म की प्रक्रिया को एक किसान के खेती करने के रूपक में प्रस्तुत करती है।
कविता का सार:
कवि कहता है कि उसका खेत बहुत छोटा है, जो एक चौकोर कागज का पन्ना है। इस खेत में वह कल्पना के सहारे शब्दों और विचारों के बीज बोता है। ये बीज जब कल्पना रूपी रसायन से सिंचित होते हैं, तो उनमें अंकुर फूटते हैं। ये अंकुर धीरे-धीरे पल्लवित होकर एक विशेष रूप धारण कर लेते हैं, जिससे कविता का जन्म होता है।
यह कविता रूपी फसल क्षण भर में पक कर तैयार हो जाती है। इसमें से जो रस निकलता है, वह कभी न खत्म होने वाली अमृत धारा के समान होता है। इस रस को जितना बाँटा जाए, यह उतना ही बढ़ता जाता है। यह रस अनंत काल तक लोगों को आनंद देता रहता है। कवि का कहना है कि कविता की फसल से मिलने वाला साहित्यिक रस कभी खत्म नहीं होता, यह युगों-युगों तक लोगों को तृप्त करता रहता है।
काव्य सौंदर्य:
- भाव सौंदर्य:
- कवि-कर्म की गरिमा और उसकी सृजनात्मक प्रक्रिया का सुंदर चित्रण।
- कला की अमरता और अक्षयता का संदेश।
- कविता से प्राप्त आनंद की अनंतता का बोध।
- शिल्प सौंदर्य:
- भाषा: खड़ी बोली हिंदी, सरल, सहज और प्रतीकात्मक।
- अलंकार:
- रूपक अलंकार: 'छोटा मेरा खेत' (कागज का पन्ना), 'शब्द का बीज', 'कल्पना के रसायनों' (भावों का पोषण), 'अमृत धारा' (कविता का रस)।
- मानवीकरण: 'अंकुर फूटे', 'पल्लव, पुष्पों से नमित हुआ विशेष'।
- छंद: मुक्त छंद।
- बिंब: दृश्य बिंब (खेत, बीज, अंकुर, फसल, अमृत धारा)।
- शैली: प्रतीकात्मक, चित्रात्मक।
- विशेष: कवि ने खेती के माध्यम से कविता रचने के आंतरिक अनुभव को व्यक्त किया है।
कविता 2: बगुलों के पंख
यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का बिंबात्मक चित्रण है।
कविता का सार:
कवि संध्या के समय आकाश में उड़ते हुए बगुलों की पंक्ति को देखता है। आकाश में काले-काले बादल छाए हुए हैं, और उन कजरारे बादलों के ऊपर श्वेत बगुलों की पंक्ति तैरती हुई प्रतीत होती है। यह दृश्य इतना मनमोहक है कि कवि उसे अपलक निहारता रहता है। बगुलों की यह पंक्ति कभी ऊपर उठती है, कभी नीचे आती है, और कभी स्थिर हो जाती है।
कवि इस सौंदर्य से इतना अभिभूत हो जाता है कि उसे लगता है जैसे कोई जादू उसकी आँखों को बाँध रहा है। वह इस सौंदर्य से अपनी आँखें हटा नहीं पाता। उसे डर है कि कहीं यह सौंदर्य उसकी आँखों से ओझल न हो जाए, या उसका मन इस मोहक दृश्य में ही न अटक जाए। यह कविता प्रकृति के सौंदर्य के प्रति कवि की गहन आसक्ति और विस्मय को दर्शाती है।
काव्य सौंदर्य:
- भाव सौंदर्य:
- प्रकृति के अनुपम और क्षणिक सौंदर्य के प्रति कवि का गहरा आकर्षण और विस्मय।
- सौंदर्य के मोहक प्रभाव का वर्णन, जो मन को वशीभूत कर लेता है।
- जीवन में सौंदर्य के महत्व और उसकी अनुभूति का चित्रण।
- शिल्प सौंदर्य:
- भाषा: खड़ी बोली हिंदी, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग (कजरारे बादल, नभ की पाँती, तिरती साँझ)।
- अलंकार:
- उपमा अलंकार: 'कजरारे बादलों की काया' (काले बादलों की तुलना सांवले शरीर से)।
- अनुप्रास अलंकार: 'कजरारे बादलों की काया', 'धीरे-धीरे', 'चुरा लिए जाती मेरी आँखें'।
- पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: 'धीरे-धीरे'।
- छंद: मुक्त छंद।
- बिंब: अत्यंत सजीव और प्रभावी दृश्य बिंब (काले बादल, श्वेत बगुलों की पाँती, तैरती साँझ, मंद गति)।
- शैली: बिंबात्मक, चित्रात्मक, वर्णनात्मक।
- विशेष: यह कविता बिंब-प्रधान है, जो पाठक के मन में एक स्पष्ट चित्र उकेर देती है।
महत्वपूर्ण बिंदु (परीक्षा हेतु):
- कवि-कर्म का रूपक: 'छोटा मेरा खेत' कविता में कवि-कर्म को खेती के रूपक द्वारा समझाया गया है।
- अक्षय रस: कविता से प्राप्त साहित्यिक रस को 'अमृत धारा' कहा गया है, जो कभी समाप्त नहीं होता।
- प्रकृति सौंदर्य: 'बगुलों के पंख' कविता में संध्याकालीन आकाश में उड़ते बगुलों की पंक्ति के माध्यम से प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का चित्रण है।
- बिंब-प्रधानता: 'बगुलों के पंख' एक बिंब-प्रधान कविता है, जिसमें दृश्य बिंबों की प्रधानता है।
- मूल भाषा: उमा शंकर जोशी गुजराती कवि हैं, और ये कविताएँ उनकी गुजराती कविताओं का हिंदी अनुवाद हैं।
- मुक्त छंद: दोनों कविताएँ मुक्त छंद में रचित हैं।
- ज्ञानपीठ पुरस्कार: उमा शंकर जोशी को उनकी कृति 'निशीथ' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
यहाँ इस अध्याय पर आधारित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:
-
'छोटा मेरा खेत' कविता में कवि ने 'खेत' किसे कहा है?
अ) धरती के एक टुकड़े को
ब) अपने घर के आँगन को
स) कागज के पन्ने को
द) जीवन के संघर्ष को -
'छोटा मेरा खेत' कविता में 'शब्द का बीज' बोने का क्या अर्थ है?
अ) शब्दों को जमीन में गाड़ना
ब) विचारों और भावों को व्यक्त करना
स) बीज बोने के लिए शब्दों का प्रयोग करना
द) शब्दों को याद करना -
'अमृत धारा' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
अ) गंगा नदी के जल के लिए
ब) कविता से प्राप्त होने वाले साहित्यिक रस के लिए
स) देवताओं के पेय के लिए
द) जीवन देने वाले पानी के लिए -
'बगुलों के पंख' कविता में कवि ने किस समय के सौंदर्य का वर्णन किया है?
अ) सुबह के समय का
ब) दोपहर के समय का
स) संध्या के समय का
द) आधी रात के समय का -
'बगुलों के पंख' कविता में बगुलों की पाँती किसके ऊपर तैरती हुई दिखाई देती है?
अ) नीले आकाश के ऊपर
ब) कजरारे बादलों के ऊपर
स) सूरज की किरणों के ऊपर
द) पहाड़ों के ऊपर -
उमा शंकर जोशी को किस कृति के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था?
अ) सापना भारा
ब) गंगोत्री
स) निशीथ
द) विश्व-शांति -
'छोटा मेरा खेत' कविता में 'कल्पना के रसायनों' का क्या तात्पर्य है?
अ) रासायनिक खाद
ब) कल्पना शक्ति और भावनात्मक पोषण
स) वैज्ञानिक प्रयोग
द) जादू-टोना -
'बगुलों के पंख' कविता में कवि की आँखें क्यों चुराई जा रही हैं?
अ) चोरों द्वारा
ब) किसी व्यक्ति द्वारा
स) प्रकृति के अनुपम सौंदर्य द्वारा
द) थकान के कारण -
उमा शंकर जोशी मुख्य रूप से किस भाषा के कवि हैं?
अ) हिंदी
ब) मराठी
स) गुजराती
द) बंगाली -
'छोटा मेरा खेत' कविता के अनुसार, कविता का रस बाँटने से क्या होता है?
अ) वह कम हो जाता है
ब) वह समाप्त हो जाता है
स) वह बढ़ता जाता है
द) उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
उत्तरमाला:
- स) कागज के पन्ने को
- ब) विचारों और भावों को व्यक्त करना
- ब) कविता से प्राप्त होने वाले साहित्यिक रस के लिए
- स) संध्या के समय का
- ब) कजरारे बादलों के ऊपर
- स) निशीथ
- ब) कल्पना शक्ति और भावनात्मक पोषण
- स) प्रकृति के अनुपम सौंदर्य द्वारा
- स) गुजराती
- स) वह बढ़ता जाता है
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। अपनी पढ़ाई जारी रखें और कोई भी संदेह होने पर अवश्य पूछें।