Class 12 Hindi Notes Kavita 4 (केदारनाथ सिह: बनारस; दिशा) – Antra Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग 2' में संकलित कवि केदारनाथ सिंह की दो महत्वपूर्ण कविताओं 'बनारस' और 'दिशा' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। ये कविताएँ न केवल साहित्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जीवन और समाज के प्रति एक गहरी अंतर्दृष्टि भी प्रदान करती हैं। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इन कविताओं के हर पहलू को समझना आवश्यक है।
कवि परिचय: केदारनाथ सिंह
- जन्म: 1934 ईस्वी, चकिया गाँव, बलिया, उत्तर प्रदेश।
- शिक्षा: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पी-एच.डी.।
- कार्यक्षेत्र: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जे.एन.यू.) में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे।
- प्रमुख काव्य संग्रह:
- अभी बिल्कुल अभी
- ज़मीन पक रही है
- यहाँ से देखो
- अकाल में सारस (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त)
- उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ
- बाघ
- टॉलस्टॉय और साइकिल
- पुरस्कार एवं सम्मान:
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1989)
- ज्ञानपीठ पुरस्कार (2013)
- व्यास सम्मान
- कबीर सम्मान
- काव्यगत विशेषताएँ:
- केदारनाथ सिंह अपनी बिंब-प्रधान कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताओं में बिंबों की ताजगी और मौलिकता विशेष रूप से दिखाई देती है।
- वे लोक जीवन, ग्रामीण परिवेश और साधारण वस्तुओं में असाधारण सौंदर्य का अन्वेषण करते हैं।
- उनकी भाषा सरल, सहज और बोलचाल के निकट होती है, जिसमें गहरी मानवीय संवेदना छिपी होती है।
- उनकी कविताओं में एक दार्शनिक गहराई होती है, जो जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को व्यक्त करती है।
- वे अपनी कविताओं में गति और स्थिरता, प्राचीनता और आधुनिकता, आस्था और यथार्थ के द्वंद्व को सहजता से प्रस्तुत करते हैं।
- मृत्यु: 2018
कविता 1: बनारस
यह कविता बनारस शहर की सांस्कृतिक, धार्मिक और मानवीय पहचान का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। कवि ने बनारस की गतिशीलता और ठहराव, प्राचीनता और आधुनिकता, आस्था और यथार्थ के विरोधाभासी तत्वों को बड़ी कुशलता से उकेरा है।
कविता का सार एवं महत्वपूर्ण बिंदु:
- बनारस की गति और स्थिरता: कविता की शुरुआत ही बनारस की इस विशिष्टता से होती है कि यहाँ सब कुछ 'धीरे-धीरे' होता है। यह 'धीरे-धीरे' केवल एक क्रिया विशेषण नहीं, बल्कि बनारस की जीवन शैली, उसकी धीमी गति और उसके शाश्वत स्वरूप का प्रतीक है।
- शहर में धूल उड़ती है, लोग चलते हैं, घंटे बजते हैं, शाम होती है, लेकिन यह सब एक खास लय में, धीमे-धीमे होता है।
- यह गतिशीलता के भीतर एक स्थिरता को दर्शाता है, जैसे शहर अपनी प्राचीन पहचान को बनाए रखते हुए भी निरंतर चलायमान है।
- गंगा और घाटों का महत्व: बनारस की पहचान गंगा और उसके घाटों से अभिन्न रूप से जुड़ी है।
- घाटों पर सुबह-शाम की गतिविधियाँ, गंगा में आस्था की डुबकी लगाते लोग, आरती का दृश्य – ये सब बनारस की आत्मा हैं।
- गंगा नदी को शहर की "आत्मा" के रूप में चित्रित किया गया है, जो शहर के हर हिस्से में प्रवाहित होती है।
- धार्मिक आस्था और जीवन की नश्वरता:
- शहर में मंदिरों के घंटे, शंख की ध्वनि, धूप और धुआँ धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं।
- वहीं, गंगा के किनारे अधजली लाशों का दृश्य जीवन की नश्वरता और मृत्यु के सत्य को दर्शाता है। बनारस में जीवन और मृत्यु एक साथ, एक ही घाट पर घटित होते हैं। यह शहर मृत्यु को भी उत्सव के रूप में स्वीकार करता है।
- गंगा का जल इन अधजली लाशों के कंकालों को अपने में समेट लेता है, जैसे जीवन और मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहता है।
- शहर की आध्यात्मिकता और मानवीय पक्ष:
- बनारस की आध्यात्मिकता केवल मंदिरों या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर के कण-कण में, हर व्यक्ति के जीवन में व्याप्त है।
- भिखारी, पुजारी, पर्यटक, नाविक, पान वाला – हर कोई इस शहर का अभिन्न अंग है।
- कवि कहता है कि बनारस में "एक अजीब-सी चमक" है, जो उसकी आध्यात्मिकता और प्राचीनता से उपजी है।
- अंधेरे और प्रकाश का मिश्रण:
- कविता में शाम के समय का वर्णन है, जब शहर में 'अंधेरा' धीरे-धीरे उतरता है। यह अंधेरा केवल भौतिक नहीं, बल्कि एक रहस्यमय और आध्यात्मिक अंधेरा है।
- इसके साथ ही मंदिरों की रोशनी, आरती की लौ, लोगों के चेहरों पर आस्था की चमक – ये सब प्रकाश के प्रतीक हैं।
- यह अंधेरे और प्रकाश का मिश्रण बनारस को एक रहस्यमय और जादुई रूप देता है।
- "धीरे-धीरे" का प्रयोग: यह शब्द कविता में बार-बार आता है और बनारस के चरित्र को परिभाषित करता है। यह शहर की धीमी गति, उसकी प्राचीनता, उसके धैर्य और उसके शाश्वत स्वरूप को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि बनारस अपनी गति से चलता है, बाहरी दुनिया की आपाधापी से अप्रभावित।
- बिंब-प्रधानता: कवि ने दृश्य बिंब (धूल, गंगा, घाट, लाशें, रोशनी), श्रव्य बिंब (घंटे, शंख) और गंध बिंब (धूप, धुआँ) का सुंदर प्रयोग किया है, जिससे कविता जीवंत हो उठती है।
काव्य सौंदर्य:
- भाषा: सरल, सहज, बिंब-प्रधान खड़ी बोली हिंदी। लोक जीवन से जुड़ी शब्दावली का प्रयोग।
- शैली: चित्रात्मक, वर्णनात्मक।
- छंद: मुक्त छंद।
- अलंकार:
- मानवीकरण: "शहर में बसंत उतरता है", "गंगा अपने पानी में खड़ी है", "शहर अपनी धीमी गति से चलता है"।
- उपमा: "गंगा का पानी जैसे किसी बच्चे की हथेली पर रखा हुआ", "आधा शहर गंगा में है"।
- विरोधाभास: गति और स्थिरता, जीवन और मृत्यु का एक साथ चित्रण।
- अनुप्रास: 'धीरे-धीरे', 'धूप-धुआँ', 'शंख-घंटे'।
- विशेषताएँ: बनारस के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप का सूक्ष्म चित्रण। गति और स्थिरता का अद्भुत सामंजस्य।
कविता 2: दिशा
यह एक छोटी सी कविता है, जो बाल मनोविज्ञान और ज्ञान की सापेक्षता को दर्शाती है। कवि ने एक बच्चे की मासूमियत और उसकी सहज दृष्टि के माध्यम से बड़ों की दुनिया के निश्चित ज्ञान पर प्रश्न उठाया है।
कविता का सार एवं महत्वपूर्ण बिंदु:
- बाल मनोविज्ञान का चित्रण: कवि ने एक बच्चे की दुनिया को दिखाया है, जहाँ कल्पना और अनुभव की प्रधानता होती है, न कि बड़ों के निश्चित ज्ञान की।
- ज्ञान की सापेक्षता: कवि बच्चे से पूछता है कि हिमालय किधर है। बच्चा तुरंत जवाब देता है कि हिमालय उधर है, जहाँ उसकी पतंग भागी जा रही है।
- बड़ों के लिए हिमालय एक निश्चित भौगोलिक दिशा में स्थित है।
- लेकिन बच्चे के लिए हिमालय का अस्तित्व उसकी कल्पना और खेल से जुड़ा है। उसकी दुनिया में वही दिशा सही है, जिधर उसकी पतंग उड़ती है।
- मासूमियत और सहज दृष्टि: बच्चे का जवाब कवि को विस्मित कर देता है। यह दिखाता है कि बच्चे दुनिया को अपनी सहज, मासूम दृष्टि से देखते हैं, जो बड़ों की तर्कसंगत दुनिया से भिन्न होती है।
- बड़ों के ज्ञान पर प्रश्न: बच्चे का यह जवाब कवि को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या बड़ों का ज्ञान हमेशा पूर्ण और सही होता है? क्या हम दुनिया को केवल एक ही निश्चित तरीके से देख सकते हैं?
- जीवन के प्रति दृष्टिकोण का अंतर: कविता यह भी दर्शाती है कि जीवन के प्रति बच्चों और बड़ों का दृष्टिकोण कितना अलग होता है। बच्चे अपनी तात्कालिक खुशी और अनुभवों में जीते हैं, जबकि बड़े अक्सर निश्चित नियमों और तथ्यों से बंधे होते हैं।
- प्रतीकात्मकता:
- हिमालय: बड़ों के लिए एक विशाल, निश्चित और ज्ञात भौगोलिक इकाई। बच्चे के लिए कल्पना और खेल का विस्तार।
- पतंग: बच्चे की स्वतंत्रता, कल्पनाशीलता और उसकी दुनिया का प्रतीक।
काव्य सौंदर्य:
- भाषा: अत्यंत सरल, सहज और संप्रेषणीय खड़ी बोली हिंदी।
- शैली: संवादात्मक, नाटकीय।
- छंद: मुक्त छंद।
- अलंकार:
- अनुप्रास: 'उधर-उधर', 'पतंग-भागी'।
- प्रश्नालंकार: 'हिमालय किधर है?'
- विशेषताएँ: बाल मनोविज्ञान का सटीक और मार्मिक चित्रण। ज्ञान की सापेक्षता का दार्शनिक बोध। सहजता और सरलता में गहरी बात कहने की क्षमता।
सरकारी परीक्षा हेतु विशेष बिंदु:
- कवि केदारनाथ सिंह का जन्म वर्ष, स्थान, प्रमुख रचनाएँ (विशेषकर 'अकाल में सारस', 'बाघ'), और प्राप्त पुरस्कार (साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ) कंठस्थ करें।
- 'बनारस' कविता में 'धीरे-धीरे' शब्द का प्रतीकात्मक महत्व क्या है, इसे समझें। यह शहर की गति, ठहराव, प्राचीनता और धैर्य का प्रतीक है।
- 'बनारस' कविता में शहर की किन-किन विशेषताओं (धार्मिकता, आध्यात्मिकता, जीवन-मृत्यु का संगम, मानवीय पक्ष) का वर्णन हुआ है, इसे पहचानें।
- गंगा नदी का बनारस के संदर्भ में क्या महत्व है, और उसे किस रूप में चित्रित किया गया है ('शहर की आत्मा')।
- 'दिशा' कविता का केंद्रीय भाव क्या है – बाल मनोविज्ञान, ज्ञान की सापेक्षता, बड़ों के निश्चित ज्ञान पर प्रश्न।
- 'दिशा' कविता में बच्चे के लिए हिमालय का क्या अर्थ है और यह बड़ों के अर्थ से कैसे भिन्न है।
- दोनों कविताओं की भाषा-शैली, बिंब-योजना और प्रयुक्त अलंकारों पर ध्यान दें।
- दोनों कविताओं में मानवीय संवेदना और दार्शनिक गहराई को रेखांकित करें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
-
केदारनाथ सिंह का जन्म किस वर्ष हुआ था?
क) 1924
ख) 1934
ग) 1944
घ) 1954 -
केदारनाथ सिंह को किस काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था?
क) अभी बिल्कुल अभी
ख) ज़मीन पक रही है
ग) अकाल में सारस
घ) उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ -
'बनारस' कविता में "धीरे-धीरे" शब्द का प्रयोग किस विशेषता को उजागर करता है?
क) शहर की तेज गति
ख) शहर की प्राचीनता और धैर्य
ग) लोगों की आलस्य
घ) आधुनिकता का प्रभाव -
'बनारस' कविता के अनुसार, शहर में बसंत कैसे उतरता है?
क) अचानक और तेजी से
ख) धीरे-धीरे और चुपचाप
ग) शोरगुल के साथ
घ) फूलों की सुगंध के साथ -
'बनारस' कविता में गंगा नदी को किस रूप में चित्रित किया गया है?
क) एक सामान्य नदी
ख) शहर की आत्मा
ग) केवल एक पर्यटन स्थल
घ) एक डरावनी नदी -
'बनारस' कविता में अधजली लाशों और गंगा के जल का चित्रण क्या दर्शाता है?
क) शहर की गंदगी
ख) जीवन की नश्वरता और मृत्यु का सत्य
ग) धार्मिक अंधविश्वास
घ) गंगा का प्रदूषित होना -
'दिशा' कविता में कवि ने बच्चे से किस पर्वत के बारे में पूछा था?
क) विंध्याचल
ख) अरावली
ग) हिमालय
घ) सतपुड़ा -
'दिशा' कविता में बच्चे के अनुसार हिमालय किधर है?
क) पूर्व दिशा में
ख) उत्तर दिशा में
ग) उधर, जहाँ उसकी पतंग भागी जा रही है
घ) जिधर सूरज उगता है -
'दिशा' कविता का मुख्य संदेश क्या है?
क) बच्चों को दिशाओं का ज्ञान नहीं होता
ख) बड़ों का ज्ञान हमेशा सही होता है
ग) ज्ञान की सापेक्षता और बाल मनोविज्ञान
घ) पतंग उड़ाना एक अच्छा खेल है -
केदारनाथ सिंह को किस वर्ष ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
क) 2003
ख) 2008
ग) 2013
घ) 2018
उत्तरमाला:
- ख) 1934
- ग) अकाल में सारस
- ख) शहर की प्राचीनता और धैर्य
- ख) धीरे-धीरे और चुपचाप
- ख) शहर की आत्मा
- ख) जीवन की नश्वरता और मृत्यु का सत्य
- ग) हिमालय
- ग) उधर, जहाँ उसकी पतंग भागी जा रही है
- ग) ज्ञान की सापेक्षता और बाल मनोविज्ञान
- ग) 2013
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इन कविताओं को गहराई से समझें और इनके निहितार्थों पर चिंतन करें। शुभकामनाएँ!