Class 12 Hindi Notes Story 13 (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) – Antra Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' के अंतर्गत संकलित महान साहित्यकार पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी के साहित्यिक परिचय का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आपकी बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ध्यानपूर्वक इन बिंदुओं को आत्मसात करें।
अध्याय 13: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी
1. लेखक परिचय: हिंदी साहित्य के अप्रतिम हस्ताक्षर
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी साहित्य के उन बिरले रचनाकारों में से हैं, जिन्होंने अपनी अल्पायु में ही कालजयी रचनाएँ देकर हिंदी कहानी को एक नई दिशा प्रदान की। उन्हें आधुनिक हिंदी कहानी के अग्रदूतों में से एक माना जाता है। उनकी कहानी 'उसने कहा था' हिंदी साहित्य की मील का पत्थर मानी जाती है।
2. जीवन परिचय
- जन्म: 7 जुलाई, 1883 ईस्वी को जयपुर (राजस्थान) में।
- पैतृक निवास: गुलेर गाँव, काँगड़ा (हिमाचल प्रदेश)। उनके नाम के साथ 'गुलेरी' इसी पैतृक स्थान के कारण जुड़ा।
- पिता का नाम: पंडित शिवराम शास्त्री। वे एक प्रकांड विद्वान और ज्योतिष के ज्ञाता थे।
- शिक्षा:
- संस्कृत की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की।
- इलाहाबाद तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.ए. की उपाधि प्राप्त की।
- वे संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, हिंदी, अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच, जर्मन आदि अनेक भाषाओं के प्रकांड पंडित थे।
- कार्यक्षेत्र:
- जयपुर के मेयो कॉलेज में अध्यापन कार्य किया।
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राच्य विद्या विभाग के अध्यक्ष रहे।
- उन्होंने प्राचीन विद्या, पुरातत्व, भाषा विज्ञान, इतिहास, दर्शन, ज्योतिष आदि विषयों पर गहन शोध कार्य किया।
- निधन: 12 सितंबर, 1922 ईस्वी को मात्र 39 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया।
3. साहित्यिक योगदान एवं विशेषताएँ
गुलेरी जी केवल कथाकार ही नहीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उनके साहित्यिक योगदान को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- कथाकार के रूप में:
- उन्होंने मात्र तीन कहानियाँ लिखीं, किंतु ये तीनों कहानियाँ हिंदी साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं:
- 'सुखमय जीवन' (1911 ई.)
- 'बुद्धू का काँटा' (1911 ई.)
- 'उसने कहा था' (1915 ई.)
- 'उसने कहा था' कहानी की विशिष्टताएँ:
- यह हिंदी की पहली सफल कहानी मानी जाती है, जिसने कहानी कला को नया आयाम दिया।
- इसमें प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि है।
- इसमें पूर्वदीप्ति शैली (फ्लैशबैक) का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया गया है, जो उस समय के लिए एक अभिनव प्रयोग था।
- कहानी में निश्छल प्रेम, त्याग, बलिदान, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण है।
- इसके प्रमुख पात्र लहना सिंह, सूबेदारनी, सूबेदार हजारा सिंह आदि हैं।
- इसका प्रकाशन 1915 में 'सरस्वती' पत्रिका में हुआ था।
- उन्होंने मात्र तीन कहानियाँ लिखीं, किंतु ये तीनों कहानियाँ हिंदी साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं:
- निबंधकार के रूप में:
- गुलेरी जी एक गंभीर और विचारोत्तेजक निबंधकार थे। उनके निबंधों में हास्य, व्यंग्य और गंभीर चिंतन का अद्भुत मेल मिलता है।
- प्रमुख निबंध: 'कछुआ धर्म', 'मारेसि मोहिं कुठाँव', 'पुरानी हिंदी', 'देवानांप्रिय', 'आँख', 'ढेल चुन लो', 'गंगोत्री', 'अमरकोश' आदि।
- उनके निबंधों में भारतीय संस्कृति, इतिहास, भाषा विज्ञान और समाज पर गहन दृष्टि दिखाई देती है।
- संपादक के रूप में:
- उन्होंने 'समालोचक' पत्रिका का संपादन किया।
- वे 'काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका' के संपादन मंडल में भी शामिल थे।
- भाषाविद् एवं शोधकर्ता:
- वे संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश जैसी प्राचीन भाषाओं के गहरे अध्येता थे।
- उन्होंने 'पुरानी हिंदी' नामक लेख में अपभ्रंश और अवहट्ट भाषाओं के स्वरूप पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला।
- पुरातत्व और इतिहास के क्षेत्र में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है।
- भाषा-शैली:
- उनकी भाषा तत्सम प्रधान, परिष्कृत और साहित्यिक है, जिसमें मुहावरों और लोकोक्तियों का सहज प्रयोग मिलता है।
- शैली में विनोदप्रियता, व्यंग्य और गंभीर चिंतन का समन्वय है।
4. हिंदी साहित्य में स्थान
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी कहानी के विकास में एक युग प्रवर्तक साहित्यकार के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी कहानियों और निबंधों के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जन्म किस वर्ष हुआ था?
अ) 1880 ई.
ब) 1883 ई.
स) 1890 ई.
द) 1900 ई. -
गुलेरी जी का पैतृक निवास स्थान कहाँ था?
अ) जयपुर
ब) इलाहाबाद
स) गुलेर, काँगड़ा
द) काशी -
'उसने कहा था' कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है?
अ) 1911 ई.
ब) 1915 ई.
स) 1922 ई.
द) 1907 ई. -
गुलेरी जी ने कुल कितनी कहानियाँ लिखीं?
अ) दो
ब) तीन
स) चार
द) पाँच -
निम्न में से कौन-सी गुलेरी जी की निबंध रचना है?
अ) उसने कहा था
ब) बुद्धू का काँटा
स) कछुआ धर्म
द) सुखमय जीवन -
'उसने कहा था' कहानी में किस शैली का प्रयोग किया गया है?
अ) वर्णनात्मक शैली
ब) आत्मकथात्मक शैली
स) पूर्वदीप्ति (फ्लैशबैक) शैली
द) पत्रात्मक शैली -
गुलेरी जी ने किस पत्रिका का संपादन किया था?
अ) हंस
ब) सरस्वती
स) समालोचक
द) माधुरी -
'उसने कहा था' कहानी का मुख्य पात्र कौन है?
अ) सूबेदार हजारा सिंह
ब) बोधा सिंह
स) लहना सिंह
द) वजीरा सिंह -
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी का निधन किस वर्ष हुआ?
अ) 1915 ई.
ब) 1922 ई.
स) 1930 ई.
द) 1947 ई. -
गुलेरी जी को साहित्य के अतिरिक्त किस क्षेत्र का गहरा ज्ञान था?
अ) विज्ञान
ब) अर्थशास्त्र
स) इतिहास एवं पुरातत्व
द) संगीत
उत्तरमाला:
- ब) 1883 ई.
- स) गुलेर, काँगड़ा
- ब) 1915 ई.
- ब) तीन
- स) कछुआ धर्म
- स) पूर्वदीप्ति (फ्लैशबैक) शैली
- स) समालोचक
- स) लहना सिंह
- ब) 1922 ई.
- स) इतिहास एवं पुरातत्व
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी के साहित्यिक परिचय को गहराई से समझने और परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!