Class 12 Hindi Notes Story 14 (ब्रजमोहन व्यास) – Antra Book

Antra
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग 2' में संकलित ब्रजमोहन व्यास जी के आत्मकथात्मक अंश 'मेरा कच्चा चिट्ठा' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह पाठ आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः ध्यानपूर्वक इसका अवलोकन करें।


1. लेखक परिचय: ब्रजमोहन व्यास

  • नाम: ब्रजमोहन व्यास
  • जन्म: सन् 1896 ई. में इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में।
  • मृत्यु: सन् 1980 ई. में।
  • शिक्षा:
    • एम.ए. (इतिहास)
    • एल.एल.बी.
  • कार्यक्षेत्र एवं योगदान:
    • ब्रजमोहन व्यास जी एक कुशल प्रशासक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता और साहित्यकार थे।
    • उन्होंने इलाहाबाद नगर पालिका के चेयरमैन पद पर कार्य किया।
    • उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान प्रयाग संग्रहालय की स्थापना और विकास में रहा। वे इस संग्रहालय के संस्थापक और अध्यक्ष थे।
    • उन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रति गहरी रुचि रखते हुए दुर्लभ मूर्तियों, चित्रों, पांडुलिपियों, सिक्कों और अन्य कलाकृतियों को एकत्र कर प्रयाग संग्रहालय को एक राष्ट्रीय महत्व का सांस्कृतिक केंद्र बनाया।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • आत्मकथा: 'मेरा कच्चा चिट्ठा' (यह पाठ इसी आत्मकथा का एक अंश है)
    • जीवनी: 'पंडित जवाहरलाल नेहरू', 'महात्मा गांधी'
    • अन्य ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक ग्रंथ: 'भारत के प्राचीन नगर', 'पुराणों की कहानियाँ', 'पुरातत्व की कहानियाँ', 'हिमालय की यात्रा', 'भारत के प्रसिद्ध मंदिर', 'भारतीय मूर्तिकला', 'भारतीय चित्रकला' आदि।
  • लेखन शैली: उनकी लेखन शैली अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहमयी है। वे अपनी आत्मकथा में ईमानदारी, आत्म-निरीक्षण और सहजता से अपने अनुभवों को व्यक्त करते हैं। उनकी भाषा में लोक-जीवन की मिठास और सहजता स्पष्ट झलकती है।

2. पाठ का सार: 'मेरा कच्चा चिट्ठा' (आत्मकथा का अंश)

यह पाठ ब्रजमोहन व्यास की आत्मकथा 'मेरा कच्चा चिट्ठा' का एक मार्मिक और प्रेरणादायी अंश है, जिसमें लेखक ने अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण अनुभवों, विशेषकर प्रयाग संग्रहालय की स्थापना और उसके विकास में अपने अथक संघर्षों का वर्णन किया है।

  • प्रारंभिक जीवन और पिता का प्रभाव:
    • लेखक ने अपने पिता को एक अत्यंत अनुशासनप्रिय, सिद्धांतवादी और स्वाभिमानी व्यक्ति के रूप में चित्रित किया है। पिता यद्यपि सख्त थे, परंतु वे अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य के प्रति अत्यंत गंभीर और दूरदर्शी थे।
    • लेखक ने अपने पिता के माध्यम से जीवन में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, स्वावलंबन और आत्म-सम्मान के महत्व को सीखा। पिता की शिक्षाओं और उनके जीवन जीने के तरीके ने ब्रजमोहन व्यास के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • शिक्षा और संघर्ष:
    • लेखक ने अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना किया। वे आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई के खर्चों को पूरा करने के लिए ट्यूशन पढ़ाए और अन्य छोटे-मोटे काम किए। यह उनके स्वावलंबन और संघर्षशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • प्रयाग संग्रहालय की स्थापना का स्वप्न और संघर्ष:
    • यह पाठ का केंद्रीय और सबसे महत्वपूर्ण विषय है। लेखक ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा प्रयाग संग्रहालय की स्थापना और उसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बनाने में समर्पित कर दिया।
    • संग्रह का जुनून: लेखक को बचपन से ही पुरानी और ऐतिहासिक वस्तुओं को एकत्र करने का शौक था। उन्होंने अपनी इस रुचि को एक बड़े उद्देश्य में बदला और विभिन्न स्थानों से दुर्लभ मूर्तियों, चित्रों, पांडुलिपियों, सिक्कों और अन्य कलाकृतियों को इकट्ठा किया।
    • स्थान की समस्या: शुरुआत में संग्रहालय के लिए एक उपयुक्त और स्थायी स्थान खोजना एक बड़ी चुनौती थी। लेखक ने अपनी दूरदर्शिता और अथक प्रयासों से इस समस्या का समाधान किया।
    • वित्तीय कठिनाइयाँ और सरकारी उदासीनता: संग्रहालय की स्थापना और उसके संचालन के लिए पर्याप्त धन का अभाव और सरकारी विभागों की उदासीनता एक बड़ी बाधा थी। लेखक ने हार नहीं मानी। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दानदाताओं से संपर्क किया, विभिन्न स्रोतों से धन जुटाया और अपने सीमित संसाधनों का उपयोग कर संग्रहालय को खड़ा किया।
    • निजी समर्पण: ब्रजमोहन व्यास ने न केवल संग्रहालय की नींव रखी, बल्कि उसके विकास और प्रबंधन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने संग्रहालय को केवल एक इमारती ढाँचा नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्था बनाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वे स्वयं कलाकृतियों की पहचान, उनके संरक्षण और प्रदर्शन में व्यक्तिगत रूप से संलग्न रहते थे।
    • सांस्कृतिक चेतना: लेखक का उद्देश्य केवल वस्तुओं का संग्रह करना नहीं था, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, उसे जनमानस तक पहुँचाना और उसके प्रति जागरूकता पैदा करना था। वे चाहते थे कि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी धरोहर से परिचित हों और उस पर गर्व करें।
  • लेखन शैली और संदेश:
    • पाठ आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है, जिसमें लेखक ने अपने अनुभवों को अत्यंत ईमानदारी, सहजता और आत्म-निरीक्षण के साथ प्रस्तुत किया है।
    • यह पाठ हमें कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने की प्रेरणा देता है।

3. प्रमुख बिंदु एवं तथ्य (Key Points & Facts)

  • ब्रजमोहन व्यास की आत्मकथा का नाम 'मेरा कच्चा चिट्ठा' है।
  • यह पाठ उनकी आत्मकथा का ही एक अंश है, जो उनके जीवन के संघर्षों और उपलब्धियों को दर्शाता है।
  • लेखक ने प्रयाग संग्रहालय, इलाहाबाद की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसके प्रथम अध्यक्ष रहे।
  • लेखक इलाहाबाद नगर पालिका के चेयरमैन भी रहे थे।
  • लेखक के पिता अत्यंत अनुशासनप्रिय और सिद्धांतवादी व्यक्ति थे, जिनका लेखक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
  • लेखक ने अपनी उच्च शिक्षा के लिए ट्यूशन पढ़ाकर और अन्य छोटे-मोटे काम करके स्वयं धन अर्जित किया।
  • पाठ में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर विशेष बल दिया गया है।
  • लेखक ने अपने जीवन के अनुभवों को सरल, सहज और प्रवाहमयी भाषा में प्रस्तुत किया है।

4. भाषा-शैली

  • सरल एवं सहज: भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और आम बोलचाल के करीब है, जिससे पाठक को विषय समझने में कोई कठिनाई नहीं होती।
  • प्रवाहमयी: वाक्य संरचना स्पष्ट और प्रवाहमयी है, जो पढ़ने में सहजता प्रदान करती है।
  • आत्मकथात्मक एवं संस्मरणात्मक: लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और स्मृतियों को आत्म-कथ्य शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठ में आत्मीयता का भाव आता है।
  • वर्णनात्मक: घटनाओं और परिस्थितियों का सजीव एवं विस्तृत चित्रण किया गया है, जिससे पाठक स्वयं को उन परिस्थितियों से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
  • भावात्मक: लेखक के संघर्ष, समर्पण, दृढ़ निश्चय और भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया गया है।

5. संदेश

  • दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष: यह पाठ हमें जीवन में आने वाली बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने और अथक संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति सजग रहने, उनके महत्व को समझने तथा उनके संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करने का महत्व सिखाता है।
  • ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा: जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी, निष्ठा और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है।
  • स्वावलंबन: आत्मनिर्भरता और अपने दम पर चुनौतियों का सामना करने की सीख देता है, जिससे व्यक्ति आत्मविश्वासी और सशक्त बनता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

यहाँ 'ब्रजमोहन व्यास' पाठ पर आधारित 10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं:

  1. ब्रजमोहन व्यास का जन्म किस वर्ष हुआ था?
    a) 1886
    b) 1896
    c) 1906
    d) 1916

  2. ब्रजमोहन व्यास की आत्मकथा का नाम क्या है?
    a) मेरी जीवन यात्रा
    b) मेरा कच्चा चिट्ठा
    c) अपनी कहानी
    d) संघर्षों का सफर

  3. ब्रजमोहन व्यास ने किस संग्रहालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
    a) राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली
    b) भारतीय संग्रहालय, कोलकाता
    c) प्रयाग संग्रहालय, इलाहाबाद
    d) सालारजंग संग्रहालय, हैदराबाद

  4. ब्रजमोहन व्यास इलाहाबाद नगर पालिका में किस पद पर रहे थे?
    a) महापौर
    b) सदस्य
    c) चेयरमैन
    d) सचिव

  5. पाठ 'ब्रजमोहन व्यास' किस विधा की रचना है?
    a) कहानी
    b) निबंध
    c) आत्मकथा का अंश
    d) यात्रा वृत्तांत

  6. लेखक के पिता का स्वभाव कैसा था?
    a) लापरवाह
    b) अनुशासनहीन
    c) अनुशासनप्रिय और सिद्धांतवादी
    d) अत्यधिक उदार

  7. ब्रजमोहन व्यास ने अपनी शिक्षा के लिए क्या किया था?
    a) सरकारी छात्रवृत्ति पर निर्भर रहे
    b) अपने पिता से धन लिया
    c) ट्यूशन पढ़ाए और छोटे-मोटे काम किए
    d) शिक्षा बीच में ही छोड़ दी

  8. ब्रजमोहन व्यास की मृत्यु किस वर्ष हुई?
    a) 1970
    b) 1980
    c) 1990
    d) 2000

  9. निम्नलिखित में से कौन-सी कृति ब्रजमोहन व्यास की नहीं है?
    a) पंडित जवाहरलाल नेहरू
    b) भारत के प्राचीन नगर
    c) गोदान
    d) पुराणों की कहानियाँ

  10. ब्रजमोहन व्यास ने प्रयाग संग्रहालय की स्थापना क्यों की थी?
    a) धन कमाने के लिए
    b) प्रसिद्धि पाने के लिए
    c) सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए
    d) सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए


उत्तरमाला (MCQs):

  1. b) 1896
  2. b) मेरा कच्चा चिट्ठा
  3. c) प्रयाग संग्रहालय, इलाहाबाद
  4. c) चेयरमैन
  5. c) आत्मकथा का अंश
  6. c) अनुशासनप्रिय और सिद्धांतवादी
  7. c) ट्यूशन पढ़ाए और छोटे-मोटे काम किए
  8. b) 1980
  9. c) गोदान (यह प्रेमचंद की रचना है)
  10. c) सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए

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