Class 12 Hindi Notes Story 15 (फणीश्वरनाथ ‘रेणु’) – Antra Book

Antra
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम हिंदी साहित्य के एक ऐसे अप्रतिम हस्ताक्षर के बारे में विस्तार से जानेंगे, जिन्होंने अपनी कलम से ग्रामीण भारत की आत्मा को जीवंत कर दिया – फणीश्वरनाथ ‘रेणु’। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि रेणु जी का साहित्य न केवल भारतीय ग्रामीण जीवन का दर्पण है, बल्कि हिंदी साहित्य की एक विशिष्ट धारा 'आंचलिकता' के जनक भी हैं। आइए, उनके जीवन, कृतित्व और साहित्यिक महत्व को गहराई से समझते हैं।


विस्तृत नोट्स: फणीश्वरनाथ ‘रेणु’

1. लेखक परिचय

  • जन्म और प्रारंभिक जीवन:

    • जन्म: 4 मार्च, 1921 को।
    • जन्म स्थान: बिहार के पूर्णिया जिले (वर्तमान अररिया जिला) के औराही हिंगना गाँव में।
    • शिक्षा: प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। उच्च शिक्षा नेपाल और भारत में प्राप्त की।
    • पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनका परिवार स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार था, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और लेखन पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
  • राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता:

    • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।
    • नेपाल की राणाशाही विरोधी आंदोलन (1950): इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जेल भी गए।
    • जे.पी. आंदोलन (1974): जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से भी जुड़े रहे।
    • उनकी सामाजिक-राजनीतिक चेतना उनके साहित्य में ग्रामीण जनता के शोषण, गरीबी और संघर्षों के चित्रण के माध्यम से अभिव्यक्त होती है।
  • साहित्यिक यात्रा और पहचान:

    • हिंदी साहित्य में उन्हें 'आंचलिक उपन्यास' के जनक के रूप में जाना जाता है।
    • उनके प्रथम उपन्यास 'मैला आँचल' (1954) ने उन्हें अपार ख्याति दिलाई और हिंदी उपन्यास साहित्य को एक नई दिशा दी।
    • उन्होंने गाँव-देहात की लोक-संस्कृति, बोलियों, रीति-रिवाजों और जीवन-शैली का अत्यंत यथार्थवादी और सजीव चित्रण किया।
  • प्रमुख रचनाएँ:

    • उपन्यास:
      • मैला आँचल (1954): उनका सर्वाधिक प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास।
      • परती परिकथा (1957): दूसरा महत्वपूर्ण आंचलिक उपन्यास।
      • दीर्घतपा (1963)
      • जुलूस (1965)
      • कितने चौराहे (1966)
      • पलटू बाबू रोड (1979)
    • कहानी संग्रह:
      • ठुमरी (1959): इसमें 'मारे गए गुलफाम' (तीसरी कसम) और 'लाल पान की बेगम' जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ शामिल हैं।
      • अग्निखोर (1973)
      • आदिम रात्रि की महक (1967)
      • एक श्रावणी दोपहरी की धूप (1962)
      • अच्छे आदमी (1986)
      • संवदिया (1959): यह कहानी 'ठुमरी' संग्रह में संकलित है और आपके पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
    • रिपोर्ताज:
      • ऋणजल धनजल (1977)
      • नेपाली क्रांति कथा (1978)
      • श्रुत अश्रुत पूर्व (1984)
      • वन तुलसी की गंध (1984)
    • संस्मरण: वन तुलसी की गंध, श्रुत अश्रुत पूर्व (इनमें रिपोर्ताज के साथ संस्मरण भी हैं)।
    • अन्य: रेणु रचनावली (5 खंडों में उनकी संपूर्ण रचनाएँ संकलित हैं)।
  • साहित्यिक विशेषताएँ:

    • आंचलिकता: उनकी सबसे बड़ी विशेषता। उन्होंने बिहार के पूर्णिया (अब अररिया) और कोसी अंचल के विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र की संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज, अंधविश्वास, संघर्षों और उत्सवों का सजीव एवं प्रामाणिक चित्रण किया।
    • भाषा शैली: लोकभाषा, ग्रामीण बोलियों (मैथिली, अंगिका, मगही), मुहावरों, लोकोक्तियों, लोकगीतों और लोक-कथाओं का अद्भुत प्रयोग। उनकी भाषा चित्रात्मक और बिंबात्मक है, जो पाठक को सीधे ग्रामीण परिवेश से जोड़ती है।
    • यथार्थवाद: ग्रामीण जीवन की विसंगतियों, शोषण, गरीबी, अशिक्षा, जातिवाद और राजनैतिक दाँव-पेंच का बेबाक और मार्मिक चित्रण।
    • संवेदना: मानवीय करुणा, प्रेम, संघर्ष, आशा और निराशा का गहरा बोध उनके साहित्य में मिलता है। वे हाशिए पर पड़े लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति रखते थे।
    • प्रतीकात्मकता: प्रकृति और ग्रामीण जीवन के प्रतीकों का प्रभावी प्रयोग कर अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाते थे।
  • पुरस्कार और सम्मान:

    • पद्मश्री (1965): उन्हें 'मैला आँचल' के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
    • पुरस्कार वापसी: आपातकाल के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया था, जो उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचायक है।
    • अन्य कई साहित्यिक सम्मान भी प्राप्त हुए।
  • निधन: 11 अप्रैल, 1977 को।

2. 'संवदिया' कहानी का संक्षिप्त परिचय (पाठ्यक्रम में शामिल कहानी)

'संवदिया' फणीश्वरनाथ रेणु की एक अत्यंत मार्मिक और प्रतिनिधि आंचलिक कहानी है, जो उनके 'ठुमरी' कहानी संग्रह में संकलित है।

  • कहानी का प्रकार: आंचलिक कहानी।
  • मुख्य पात्र:
    • हरगोबिन: गाँव का संवदिया (संदेशवाहक)। वह अत्यंत संवेदनशील और भावुक व्यक्ति है, जो संदेश को केवल पहुँचाता नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को आत्मसात कर लेता है।
    • बड़ी बहुरिया: जमींदार परिवार की एक अकेली, असहाय और दुखी स्त्री, जो अपने मायके संदेश भेजती है।
  • कथानक: कहानी हरगोबिन नामक संवदिया के माध्यम से ग्रामीण जीवन की बदलती परिस्थितियों, मानवीय संबंधों की जटिलता और संवेदना के क्षरण को दर्शाती है। बड़ी बहुरिया अपने मायके अपनी दयनीय स्थिति और ससुराल में हो रहे शोषण का संदेश भेजने के लिए हरगोबिन को बुलाती है। हरगोबिन संदेश लेकर जाता है, लेकिन बड़ी बहुरिया के दुख और अपनी संवदिया की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, वह संदेश को पूरा नहीं कह पाता और लौटकर बड़ी बहुरिया को आश्वासन देता है कि वह अब उसका संवदिया बनेगा।
  • केंद्रीय विषय:
    • ग्रामीण समाज में बदलाव: संवदिया जैसे पारंपरिक पेशों का लुप्त होना और संचार के नए माध्यमों का आगमन।
    • पारिवारिक विघटन और मानवीय संवेदना का ह्रास: संयुक्त परिवारों का टूटना और रिश्तों में आत्मीयता की कमी।
    • स्त्री की दयनीय स्थिति: ग्रामीण समाज में अकेली और असहाय स्त्री का शोषण और उसका अकेलापन।
    • लोक-संस्कृति और लोक-भाषा का प्रयोग: कहानी में ग्रामीण परिवेश, बोलियों और लोक-जीवन का सजीव चित्रण है।
    • संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव का महत्व: हरगोबिन की संवेदनशीलता कहानी का केंद्रीय बिंदु है।
  • विशेषता: 'संवदिया' रेणु की आंचलिकता, मार्मिकता और लोक-जीवन के प्रति गहरी समझ का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कहानी हमें मानवीय संबंधों की गहराई और बदलते सामाजिक मूल्यों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. फणीश्वरनाथ 'रेणु' का जन्म किस वर्ष हुआ था?
    a) 1911
    b) 1921
    c) 1931
    d) 1941

  2. फणीश्वरनाथ 'रेणु' का जन्म स्थान किस राज्य में है?
    a) उत्तर प्रदेश
    b) मध्य प्रदेश
    c) बिहार
    d) राजस्थान

  3. 'मैला आँचल' किस विधा की रचना है?
    a) कहानी
    b) उपन्यास
    c) नाटक
    d) रिपोर्ताज

  4. फणीश्वरनाथ 'रेणु' को हिंदी साहित्य में किस धारा के जनक के रूप में जाना जाता है?
    a) छायावाद
    b) प्रयोगवाद
    c) आंचलिक उपन्यास
    d) प्रगतिवाद

  5. 'संवदिया' कहानी फणीश्वरनाथ 'रेणु' के किस कहानी संग्रह में संकलित है?
    a) अग्निखोर
    b) आदिम रात्रि की महक
    c) ठुमरी
    d) अच्छे आदमी

  6. फणीश्वरनाथ 'रेणु' ने किस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई थी?
    a) असहयोग आंदोलन
    b) सविनय अवज्ञा आंदोलन
    c) भारत छोड़ो आंदोलन
    d) चिपको आंदोलन

  7. 'ऋणजल धनजल' किस साहित्य विधा की रचना है?
    a) उपन्यास
    b) कहानी
    c) रिपोर्ताज
    d) संस्मरण

  8. फणीश्वरनाथ 'रेणु' को 'मैला आँचल' के लिए किस सम्मान से सम्मानित किया गया था, जिसे उन्होंने आपातकाल के विरोध में लौटा दिया था?
    a) साहित्य अकादमी पुरस्कार
    b) ज्ञानपीठ पुरस्कार
    c) पद्मश्री
    d) व्यास सम्मान

  9. 'संवदिया' कहानी का मुख्य पात्र कौन है?
    a) हरगोबिन
    b) मैना
    c) मंगल
    d) रमजू

  10. 'संवदिया' कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
    a) ग्रामीण जीवन में संचार के आधुनिक साधनों का महत्व
    b) मानवीय संवेदना का क्षरण और बदलते रिश्ते
    c) जमींदारी प्रथा का गुणगान
    d) शहरी जीवन की चकाचौंध


उत्तरमाला:

  1. b) 1921
  2. c) बिहार
  3. b) उपन्यास
  4. c) आंचलिक उपन्यास
  5. c) ठुमरी
  6. c) भारत छोड़ो आंदोलन
  7. c) रिपोर्ताज
  8. c) पद्मश्री
  9. a) हरगोबिन
  10. b) मानवीय संवेदना का क्षरण और बदलते रिश्ते

मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। मन लगाकर अध्ययन करें और कोई भी संदेह होने पर अवश्य पूछें।

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