Class 12 Hindi Notes Story 16 (भीष्म साहनी) – Antra Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम हिंदी साहित्य के एक अप्रतिम हस्ताक्षर, भीष्म साहनी जी के जीवन परिचय और उनकी प्रसिद्ध कहानी 'गांधी, नेहरू और यास्सर अराफात' (जो प्रायः आपकी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' में संकलित होती है) का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्ययन आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भीष्म साहनी: विस्तृत नोट्स
1. लेखक परिचय
- नाम: भीष्म साहनी
- जन्म: 8 अगस्त, 1915, रावलपिंडी (अविभाजित भारत, वर्तमान पाकिस्तान)
- मृत्यु: 11 जुलाई, 2003, दिल्ली
- शिक्षा:
- एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य) - पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर।
- पीएच.डी. - पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़।
- कार्यक्षेत्र:
- अध्यापन (कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर)।
- 'नई कहानियाँ' पत्रिका का संपादन।
- मास्को में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह में अनुवादक के रूप में कार्य (सात वर्ष)।
- प्रगतिशील लेखक संघ और अ.भा.प्र.ना. संघ (इप्टा) से सक्रिय जुड़ाव।
- साहित्य अकादमी की कार्यकारी समिति के सदस्य।
- साहित्यिक विचारधारा: प्रगतिशील, यथार्थवादी, मानवीय मूल्यों के पक्षधर। उनकी रचनाओं में सांप्रदायिकता, शोषण और सामाजिक विसंगतियों का मुखर विरोध मिलता है।
2. प्रमुख रचनाएँ
- कहानी संग्रह:
- भाग्य रेखा (1953)
- पहला पाठ (1957)
- भटकती राख (1966)
- पटरियाँ (1973)
- वांगचू (1978)
- शोभायात्रा (1981)
- निशाचर (1983)
- पालो (1989)
- डायन (1998)
- उपन्यास:
- झरोखे (1967)
- कड़ियाँ (1970)
- तमस (1973) - सर्वाधिक प्रसिद्ध उपन्यास, भारत-पाक विभाजन की त्रासदी पर आधारित। इस पर गोविंद निहलानी द्वारा दूरदर्शन धारावाहिक भी बना।
- बसन्ती (1979)
- मायादास की माड़ी (1988)
- कुंतो (1993)
- नीलू नीलिमा नीलोफर (2000)
- नाटक:
- हानूश (1977)
- कबीरा खड़ा बज़ार में (1981)
- माधवी (1984)
- मुआवज़े (1993)
- रंग दे बसंती चोला (1998)
- आलमगीर (1999)
- आत्मकथा:
- आज के अतीत (2003)
- बाल साहित्य:
- गुलेल का खेल
- अनुवाद: टॉल्स्टॉय, चेखव, गोर्की के साहित्य का हिंदी में अनुवाद।
3. पुरस्कार एवं सम्मान
- साहित्य अकादमी पुरस्कार: 1975 (उपन्यास 'तमस' के लिए)
- सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार: 1983
- पद्म भूषण: 1998 (भारत सरकार द्वारा)
- उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान
- मध्य प्रदेश सरकार का शिखर सम्मान
- मैथिलीशरण गुप्त सम्मान
- प्रेमचंद पुरस्कार
- अफ्रो-एशियाई लेखक संघ का लोटस पुरस्कार
4. साहित्यिक विशेषताएँ
- यथार्थवाद: उनकी रचनाओं में जीवन और समाज का यथार्थवादी चित्रण मिलता है। वे समस्याओं को उनके मूल रूप में प्रस्तुत करते हैं।
- मानवीयता: वे मानव मूल्यों, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के प्रबल पक्षधर थे। उनकी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत होती हैं।
- प्रगतिशील चेतना: वे शोषण, अन्याय, सांप्रदायिकता और रूढ़िवादिता के घोर विरोधी थे। उनकी कलम समाज में परिवर्तन की आकांक्षा जगाती है।
- सरल भाषा-शैली: उनकी भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोधगम्य है। वे आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करते हुए भी गहरी बातें कह जाते हैं।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 'तमस' जैसे उपन्यासों में वे इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ों को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं।
- मध्यवर्गीय जीवन का चित्रण: उनकी कहानियों और उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाएँ, संघर्ष और आकांक्षाएँ मुखर रूप से सामने आती हैं।
कहानी: 'गांधी, नेहरू और यास्सर अराफात' का विस्तृत अध्ययन
यह कहानी भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक अंश है। यह लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित एक संस्मरण है, जिसमें तीन महान नेताओं के मानवीय पक्षों को उजागर किया गया है।
1. कहानी का सारांश
यह संस्मरण भीष्म साहनी के मास्को प्रवास के दौरान की घटना पर आधारित है। लेखक को एक बार फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के नेता यास्सर अराफात से मिलने का अवसर मिलता है। अराफात, जो उस समय एक युवा और जुझारू नेता थे, लेखक को अपने कमरे में बुलाते हैं। बातचीत के दौरान अराफात भारतीय नेताओं महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे गांधी और नेहरू के आदर्शों ने उन्हें और उनके संघर्ष को प्रेरित किया है।
अराफात लेखक को बताते हैं कि वे गांधी और नेहरू के विचारों से बहुत प्रभावित हैं, विशेषकर अहिंसा और शांति के सिद्धांतों से, भले ही उनका अपना संघर्ष सशस्त्र रहा हो। वे भारत के गुटनिरपेक्ष आंदोलन और विश्व शांति में उसकी भूमिका की सराहना करते हैं। इस मुलाकात के दौरान अराफात लेखक को अपने हाथ से बना एक साधारण-सा भोजन (संभवतः सैंडविच या कोई हल्का नाश्ता) भी परोसते हैं। यह साधारण-सा आतिथ्य लेखक को बहुत प्रभावित करता है।
कहानी का मुख्य आकर्षण यह है कि एक युवा क्रांतिकारी नेता, जो अपने देश की मुक्ति के लिए संघर्षरत है, गांधी और नेहरू जैसे शांतिवादी नेताओं के प्रति इतनी गहरी आस्था रखता है। यह नेताओं के सार्वजनिक व्यक्तित्व के पीछे छिपे मानवीय मूल्यों और आदर्शों की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।
2. मुख्य बिंदु एवं विश्लेषण
- मानवीय संबंध: कहानी दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक और वैचारिक भिन्नताओं के बावजूद, मानवीय मूल्य और आदर्श लोगों को जोड़ सकते हैं। अराफात का गांधी और नेहरू के प्रति सम्मान, उनके संघर्ष की प्रेरणा का स्रोत बनता है।
- आदर्शों की सार्वभौमिकता: गांधी के अहिंसा और नेहरू के गुटनिरपेक्षता के आदर्शों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि वे विश्व भर के मुक्ति आंदोलनों और नेताओं को प्रेरित कर रहे थे।
- साधारणता में महानता: अराफात का लेखक को अपने हाथ से भोजन परोसना उनकी सादगी, विनम्रता और मानवीय गरिमा को दर्शाता है। यह दिखाता है कि महानता केवल पद या शक्ति में नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार और आदर्शों में निहित होती है।
- अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव: कहानी भारत की उस समय की वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित करती है, जब वह गुटनिरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से विश्व शांति और उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्षों का नेतृत्व कर रहा था।
- लेखक की दृष्टि: भीष्म साहनी एक संवेदनशील लेखक के रूप में इस मुलाकात के गहरे मानवीय और वैचारिक निहितार्थों को समझते हैं और उसे पाठकों तक पहुँचाते हैं। वे नेताओं के सार्वजनिक जीवन से परे उनके व्यक्तिगत गुणों को उजागर करते हैं।
- संस्मरण की विशेषता: यह संस्मरण एक ऐतिहासिक क्षण को व्यक्तिगत अनुभव के माध्यम से जीवंत करता है, जिससे पाठक उस समय के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
3. भाषा-शैली
- भीष्म साहनी की सहज, सरल और आत्मीय भाषा-शैली इस संस्मरण को और भी प्रभावी बनाती है।
- संवादात्मकता और वर्णनात्मकता का सुंदर मेल है।
- लेखक की तटस्थ किंतु संवेदनशील दृष्टि घटनाओं को विश्वसनीय बनाती है।
4. संदेश
यह कहानी हमें सिखाती है कि महान नेताओं के आदर्श किसी एक देश या काल तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सार्वभौमिक होते हैं। यह मानवीय मूल्यों, सादगी और विश्व बंधुत्व के महत्व पर बल देती है, और यह दर्शाती है कि संघर्षरत नेता भी शांति और अहिंसा के आदर्शों से प्रेरणा ले सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
यहाँ भीष्म साहनी और उनकी रचनाओं से संबंधित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, जो आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे:
1. भीष्म साहनी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
क) 1915, लाहौर
ख) 1915, रावलपिंडी
ग) 1916, अमृतसर
घ) 1914, दिल्ली
2. भीष्म साहनी को किस उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था?
क) झरोखे
ख) कड़ियाँ
ग) तमस
घ) बसन्ती
3. भीष्म साहनी ने मास्को में किस रूप में कार्य किया था?
क) अध्यापक
ख) पत्रकार
ग) अनुवादक
घ) राजनयिक
4. 'गांधी, नेहरू और यास्सर अराफात' कहानी भीष्म साहनी की किस विधा की रचना है?
क) उपन्यास
ख) नाटक
ग) संस्मरण (आत्मकथा का अंश)
घ) निबंध
5. 'तमस' उपन्यास का मुख्य विषय क्या है?
क) ग्रामीण जीवन का चित्रण
ख) भारत-पाक विभाजन की त्रासदी
ग) प्रेम और विरह
घ) शहरीकरण की समस्या
6. 'कबीरा खड़ा बज़ार में' भीष्म साहनी की किस विधा की रचना है?
क) कहानी संग्रह
ख) उपन्यास
ग) नाटक
घ) आत्मकथा
7. 'गांधी, नेहरू और यास्सर अराफात' कहानी में यास्सर अराफात किस देश के नेता थे?
क) मिस्र
ख) फिलिस्तीन
ग) सीरिया
घ) जॉर्डन
8. भीष्म साहनी को भारत सरकार द्वारा कौन-सा सम्मान प्रदान किया गया था?
क) भारत रत्न
ख) पद्म विभूषण
ग) पद्म भूषण
घ) ज्ञानपीठ पुरस्कार
9. भीष्म साहनी की आत्मकथा का नाम क्या है?
क) आज के अतीत
ख) अतीत के पन्ने
ग) मेरी जीवन यात्रा
घ) यादों का सफर
10. 'गांधी, नेहरू और यास्सर अराफात' कहानी में यास्सर अराफात ने लेखक को क्या परोसा था?
क) भारतीय व्यंजन
ख) साधारण-सा भोजन (नाश्ता)
ग) फल
घ) चाय और बिस्कुट
उत्तरमाला:
- ख) 1915, रावलपिंडी
- ग) तमस
- ग) अनुवादक
- ग) संस्मरण (आत्मकथा का अंश)
- ख) भारत-पाक विभाजन की त्रासदी
- ग) नाटक
- ख) फिलिस्तीन
- ग) पद्म भूषण
- क) आज के अतीत
- ख) साधारण-सा भोजन (नाश्ता)
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और अभ्यास प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। लगन और एकाग्रता से अध्ययन करते रहें। शुभकामनाएँ!