Class 12 Hindi Notes Story 17 (असगर वजाहत) – Antra Book

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम कक्षा 12 की हिंदी ऐच्छिक की पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग 2' में संकलित असगर वजाहत की कहानियों 'शेर' और 'साझा' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। ये कहानियाँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी इनमें निहित संदेश और विश्लेषण को समझना अत्यंत आवश्यक है।
असगर वजाहत: विस्तृत नोट्स (कहानियाँ: 'शेर' और 'साझा')
1. लेखक परिचय: असगर वजाहत
- जन्म: 5 जुलाई 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।
- शिक्षा: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एम.ए. और पीएच.डी.।
- कार्यक्षेत्र: जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली में हिंदी विभाग में प्रोफेसर रहे।
- साहित्यिक पहचान: हिंदी के एक महत्वपूर्ण समकालीन कथाकार, नाटककार, उपन्यासकार और पटकथा लेखक। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज की विसंगतियों, राजनीतिक भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और आम आदमी के संघर्ष को बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत किया है।
- प्रमुख विधाएँ: कहानी, नाटक, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत, फिल्म और टेलीविजन लेखन।
- भाषा-शैली: उनकी भाषा सरल, सहज और व्यंग्यात्मक होती है। वे प्रतीकों और बिंबों का कुशलता से प्रयोग करते हैं, जिससे उनकी बात सीधे पाठक के दिल तक पहुँचती है। उनकी कहानियों में यथार्थ का तीखा चित्रण होता है, जो अक्सर सत्ता और समाज की पोल खोलता है।
- प्रमुख कृतियाँ:
- कहानी संग्रह: 'दिल्ली पहुँचना है', 'स्विमिंग पूल', 'सब कहाँ कुछ', 'पिंजरबंद', 'गंधा', 'सबसे सस्ता गोश्त', 'आसमान कैसे गिरता है', 'मैं हिंदू हूँ'।
- उपन्यास: 'सात आसमान', 'पहर दर पहर', 'कैसी आग लगाई', 'ओथेलो', 'जिस लाहौर नहीं देख्या ओ जम्या ही नहीं', 'बाकरगंज के सैयद'।
- नाटक: 'फिरंगी लौट आए', 'इन्ना की आवाज', 'सम्राट अशोक', 'जिस लाहौर नहीं देख्या ओ जम्या ही नहीं' (उपन्यास का नाट्य रूपांतरण)।
- यात्रा-वृत्तांत: 'चलते तो अच्छा था', 'पाकिस्तान का मतलब क्या'।
- पुरस्कार/सम्मान: विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित।
2. कहानी 'शेर' का विस्तृत विश्लेषण
यह कहानी सत्ता के चरित्र, आम आदमी की बेबसी और व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करती है।
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सारांश:
- कहानी एक ऐसे देश की कल्पना करती है जहाँ एक 'शेर' है, जो सत्ता का प्रतीक है। यह शेर लोगों को डराता है और उन्हें अपनी इच्छानुसार कार्य करने के लिए विवश करता है।
- लोग शेर से भयभीत रहते हैं, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि शेर केवल उन्हीं लोगों को खाता है जो उसे 'शेर' मानते हैं और उससे डरते हैं।
- कहानी में एक 'मैं' (कथावाचक) है जो इस व्यवस्था को समझता है और लोगों को समझाने का प्रयास करता है कि शेर का डर केवल एक भ्रम है। वह कहता है कि शेर की शक्ति लोगों के डर में निहित है।
- कथावाचक यह भी देखता है कि कुछ लोग जानबूझकर शेर का गुणगान करते हैं और उसे शक्तिशाली बनाए रखते हैं, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें व्यवस्था में कुछ लाभ मिलता है। ये लोग 'शेर' के चमचे या चाटुकार होते हैं।
- कहानी में एक 'मूर्ख' व्यक्ति का जिक्र है जो शेर के सामने खड़ा होकर उसे 'शेर' मानने से इनकार करता है। जब वह ऐसा करता है, तो शेर उसे नहीं खाता। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि जब लोग सत्ता के भय को त्याग देते हैं, तो सत्ता अपनी शक्ति खो देती है।
- अंततः, कहानी यह दर्शाती है कि सत्ता का भय एक मानसिक स्थिति है। यदि लोग एकजुट होकर भय का त्याग कर दें, तो कोई भी सत्ता उन्हें दबा नहीं सकती।
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प्रमुख विषय/संदेश:
- सत्ता का भय और उसका मनोविज्ञान: कहानी बताती है कि सत्ता का डर अक्सर वास्तविक खतरे से अधिक मानसिक होता है।
- आम आदमी की बेबसी और प्रतिरोध: लोग डरते हैं, लेकिन कुछ लोग इस डर को चुनौती भी देते हैं।
- चाटुकारिता और स्वार्थपरता: कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों के लिए सत्ता का गुणगान करते हैं और उसे मजबूत बनाते हैं।
- प्रतीकात्मकता: 'शेर' सत्ता का, 'गुफा' सत्ता के केंद्र का, और 'मूर्ख' व्यक्ति निर्भीक प्रतिरोध का प्रतीक है।
- जागरूकता और एकजुटता का महत्व: कहानी अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को जागरूक होने और एकजुट होकर अन्याय का विरोध करने का संदेश देती है।
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भाषा-शैली:
- सरल, सपाट और व्यंग्यात्मक।
- प्रतीकात्मकता का कुशल प्रयोग।
- संवादात्मक शैली, जो पाठक को सीधे संबोधित करती है।
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महत्वपूर्ण बिंदु:
- यह कहानी किसी विशेष राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी न होकर, सत्ता के सार्वभौमिक चरित्र पर प्रकाश डालती है।
- 'मूर्ख' व्यक्ति का कार्य यह दर्शाता है कि सत्य को स्वीकार करने से इनकार करना ही भय से मुक्ति का मार्ग है।
- कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भी किसी 'शेर' के डर में जी रहे हैं।
3. कहानी 'साझा' का विस्तृत विश्लेषण
यह कहानी ग्रामीण जीवन, शोषण, आपसी संबंधों की जटिलता और व्यवस्थागत विसंगतियों को दर्शाती है।
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सारांश:
- कहानी दो किसानों, 'हरखू' और 'गिरधारी' के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बैल को साझा करते हैं। इस बैल को वे बारी-बारी से अपने खेतों में हल चलाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
- बैल 'हरखू' का है और 'गिरधारी' उसे इस्तेमाल करने के बदले में हरखू को कुछ भुगतान करता है। यह एक साझा व्यवस्था है, लेकिन इसमें एक अंतर्निहित असमानता और शोषण का तत्व मौजूद है।
- कहानी में दिखाया गया है कि गिरधारी बैल का अधिक उपयोग करता है और हरखू को अक्सर बैल की आवश्यकता होने पर वह उपलब्ध नहीं होता।
- गिरधारी बैल से अत्यधिक काम लेता है, जिससे बैल कमजोर हो जाता है। हरखू को अपने बैल की दुर्दशा देखकर दुख होता है, लेकिन वह अपनी आर्थिक स्थिति के कारण गिरधारी पर निर्भर है।
- एक दिन बैल मर जाता है। बैल के मरने पर हरखू को गहरा दुख होता है, क्योंकि वह उसका अपना बैल था और उसकी आजीविका का साधन था। गिरधारी को भी दुख होता है, लेकिन उसका दुख हरखू जितना गहरा नहीं होता क्योंकि उसने केवल 'साझा' किया था, मालिकाना हक हरखू का था।
- बैल के मरने के बाद, दोनों के बीच एक नया समझौता होता है। गिरधारी हरखू को एक नया बैल खरीदने के लिए कुछ पैसे देता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस नई व्यवस्था में भी हरखू की मजबूरी का फायदा उठाया जाएगा।
- कहानी इस बात पर समाप्त होती है कि ग्रामीण समाज में गरीब और कमजोर व्यक्ति हमेशा शोषण का शिकार होता है, भले ही वह 'साझा' के नाम पर ही क्यों न हो।
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प्रमुख विषय/संदेश:
- ग्रामीण शोषण और गरीबी: कहानी ग्रामीण समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता और गरीब किसानों के शोषण को उजागर करती है।
- साझा व्यवस्था की विसंगतियाँ: 'साझा' एक सहयोगात्मक व्यवस्था लग सकती है, लेकिन यह अक्सर कमजोर पक्ष के शोषण का माध्यम बन जाती है।
- मानवीय संबंध और स्वार्थ: हरखू और गिरधारी के संबंध में आर्थिक स्वार्थ हावी है, जो मानवीय संवेदनाओं पर भारी पड़ता है।
- पशु के प्रति संवेदनशीलता: बैल के माध्यम से लेखक ने ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और पशुओं के प्रति मनुष्य के व्यवहार को भी दर्शाया है।
- व्यवस्थागत अन्याय: कहानी यह भी दर्शाती है कि कैसे व्यवस्था ही कुछ लोगों को शोषण करने और कुछ को शोषित होने के लिए मजबूर करती है।
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भाषा-शैली:
- यथार्थवादी और आंचलिक पुट लिए हुए।
- संवेदनशील और मार्मिक चित्रण।
- ग्रामीण परिवेश की शब्दावली का प्रयोग।
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महत्वपूर्ण बिंदु:
- बैल का मरना केवल एक पशु की मृत्यु नहीं, बल्कि हरखू जैसे गरीब किसान की उम्मीदों और आजीविका के साधन का अंत है।
- गिरधारी का व्यवहार यह दर्शाता है कि आर्थिक लाभ के लिए लोग दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाने से नहीं चूकते।
- कहानी ग्रामीण भारत की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ गरीबी और अभाव के कारण लोग समझौतावादी जीवन जीने को मजबूर होते हैं।
दोनों कहानियों का सामान्य उद्देश्य:
असगर वजाहत की ये दोनों कहानियाँ, अलग-अलग संदर्भों में होते हुए भी, सत्ता के चरित्र, शोषण, सामाजिक विसंगतियों और आम आदमी की लाचारी को उजागर करती हैं। वे हमें समाज और व्यवस्था को आलोचनात्मक दृष्टि से देखने और उसमें निहित अन्याय को समझने के लिए प्रेरित करती हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. असगर वजाहत का जन्म कहाँ हुआ था?
अ) लखनऊ
ब) अलीगढ़
स) फतेहपुर
द) कानपुर
2. असगर वजाहत की कहानियों की मुख्य विशेषता क्या है?
अ) केवल प्रेम कहानियाँ लिखना
ब) समाज की विसंगतियों और सत्ता पर व्यंग्य
स) पौराणिक कथाओं का वर्णन
द) केवल ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित
3. 'शेर' कहानी में 'शेर' किसका प्रतीक है?
अ) जंगल के राजा का
ब) ताकतवर व्यक्ति का
स) सत्ता और व्यवस्था का
द) एक पालतू जानवर का
4. 'शेर' कहानी में 'मूर्ख' व्यक्ति क्या करता है?
अ) शेर को खाना खिलाता है
ब) शेर के सामने नाचता है
स) शेर को 'शेर' मानने से इनकार करता है
द) शेर से डरकर भाग जाता है
5. 'शेर' कहानी का केंद्रीय संदेश क्या है?
अ) शेर से हमेशा डरना चाहिए
ब) सत्ता का भय एक मानसिक भ्रम है
स) जंगल में शेर का राज होता है
द) मूर्ख व्यक्ति हमेशा मुसीबत में पड़ता है
6. 'साझा' कहानी में हरखू और गिरधारी क्या साझा करते हैं?
अ) खेत
ब) कुआँ
स) बैल
द) घर
7. 'साझा' कहानी में बैल के मरने पर सबसे अधिक दुख किसे होता है?
अ) हरखू को
ब) गिरधारी को
स) दोनों को समान
द) किसी को नहीं
8. 'साझा' कहानी का मुख्य विषय क्या है?
अ) ग्रामीण जीवन की खुशियाँ
ब) पशु प्रेम
स) ग्रामीण शोषण और आर्थिक असमानता
द) दोस्ती का महत्व
9. असगर वजाहत का कौन सा उपन्यास काफी प्रसिद्ध है जिसका नाट्य रूपांतरण भी हुआ है?
अ) सात आसमान
ब) ओथेलो
स) जिस लाहौर नहीं देख्या ओ जम्या ही नहीं
द) बाकरगंज के सैयद
10. असगर वजाहत की भाषा शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?
अ) संस्कृतनिष्ठ और क्लिष्ट
ब) सरल, सहज और व्यंग्यात्मक
स) केवल काव्यात्मक
द) अंग्रेजी मिश्रित
उत्तरमाला:
- स) फतेहपुर
- ब) समाज की विसंगतियों और सत्ता पर व्यंग्य
- स) सत्ता और व्यवस्था का
- स) शेर को 'शेर' मानने से इनकार करता है
- ब) सत्ता का भय एक मानसिक भ्रम है
- स) बैल
- अ) हरखू को
- स) ग्रामीण शोषण और आर्थिक असमानता
- स) जिस लाहौर नहीं देख्या ओ जम्या ही नहीं
- ब) सरल, सहज और व्यंग्यात्मक
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। इन कहानियों को ध्यान से पढ़ें और इनके निहितार्थों को समझने का प्रयास करें। शुभकामनाएँ!