Class 12 Hindi Notes Story 19 (रामविलास शर्मा) – Antra Book

प्रिय विद्यार्थियों,
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में साहित्यकारों का विस्तृत अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आज हम हिंदी साहित्य के मूर्धन्य आलोचक, निबंधकार और विचारक डॉ. रामविलास शर्मा के जीवन, कृतित्व और साहित्यिक योगदान पर विस्तृत नोट्स तैयार करेंगे, जो आपकी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
डॉ. रामविलास शर्मा: विस्तृत नोट्स
1. जीवन परिचय
- जन्म: 10 अक्टूबर, 1912 ईस्वी
- जन्म स्थान: ऊँचगाँव सानी, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश
- शिक्षा:
- प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई।
- लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. (1934) और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
- कार्यक्षेत्र:
- 1938 में लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में अध्यापन कार्य प्रारंभ किया।
- 1943 से 1971 तक बलवंत राजपूत कॉलेज, आगरा में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष रहे।
- 1971 से 1974 तक कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी विद्यापीठ, आगरा के निदेशक पद पर कार्य किया।
- इसके बाद वे स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य में संलग्न रहे।
- निधन: 30 मई, 2000 ईस्वी को दिल्ली में।
2. साहित्यिक परिचय एवं योगदान
डॉ. रामविलास शर्मा हिंदी के उन अग्रणी आलोचकों में से हैं, जिन्होंने मार्क्सवादी आलोचना पद्धति को भारतीय संदर्भ में विकसित किया और उसे एक नई दिशा प्रदान की। वे प्रगतिशील आलोचना के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं।
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आलोचना दृष्टि:
- मार्क्सवादी दृष्टिकोण: उन्होंने साहित्य को समाज और इतिहास से जोड़कर देखा। वे मानते थे कि साहित्य सामाजिक यथार्थ का प्रतिबिंब होता है और सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारतीय परंपरा का पुनर्मूल्यांकन: उन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का गहन अध्ययन किया और उसे मार्क्सवादी दृष्टि से पुनर्मूल्यांकित किया। उन्होंने भारतीय नवजागरण और उसके विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
- तुलनात्मक अध्ययन: वे भारतीय साहित्य के साथ-साथ पाश्चात्य साहित्य और दर्शन का भी गहरा ज्ञान रखते थे, जिसका उपयोग उन्होंने अपने तुलनात्मक अध्ययनों में किया।
- वैज्ञानिक और तार्किक विश्लेषण: उनकी आलोचना पद्धति अत्यंत वैज्ञानिक, तार्किक और विश्लेषणात्मक थी। वे किसी भी साहित्यिक कृति या प्रवृत्ति का मूल्यांकन ठोस ऐतिहासिक और सामाजिक आधार पर करते थे।
- भाषा और समाज का संबंध: उन्होंने भाषा के विकास और समाज के संबंध पर भी गहन विचार किया। 'भाषा और समाज' उनकी एक महत्वपूर्ण कृति है।
- साहित्य का जनवादी स्वरूप: वे साहित्य को जनसामान्य से जोड़ने और उसकी जनवादी परंपरा को उजागर करने पर बल देते थे।
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भाषा शैली:
- उनकी भाषा गंभीर, चिंतनपरक और विश्लेषणात्मक है।
- वाक्य-विन्यास सुगठित और तार्किक होता है।
- विषय की गंभीरता के अनुरूप शब्दावली का प्रयोग करते हैं, जिसमें तत्सम शब्दों की प्रधानता होती है।
- उनकी शैली में स्पष्टता, प्रवाहमयता और अकाट्य तर्कशक्ति का अद्भुत समन्वय मिलता है।
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प्रमुख योगदान:
- हिंदी आलोचना को एक सुदृढ़ सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।
- प्रेमचंद, निराला, भारतेंदु, महावीर प्रसाद द्विवेदी जैसे साहित्यकारों का गहन और मौलिक मूल्यांकन किया।
- हिंदी नवजागरण और भारतीय संस्कृति के स्वरूप को स्पष्ट किया।
- भारतीय इतिहास, भाषा विज्ञान और दर्शन पर भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
3. प्रमुख रचनाएँ
डॉ. रामविलास शर्मा का साहित्य विपुल और विविध है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
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आलोचनात्मक ग्रंथ:
- प्रेमचंद और उनका युग (1952)
- निराला की साहित्य साधना (तीन खंड, 1969-76) – (इस पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला)
- भारतेंदु हरिश्चंद्र (1953)
- महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण (1977)
- भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रदेश (दो खंड)
- भारतीय साहित्य की जनवादी परंपरा
- आस्था और सौंदर्य (1961)
- भाषा और समाज (1961)
- मार्क्स और पिछड़ा साहित्य
- लोक ऋण
- गांधी, आंबेडकर, लोहिया और भारतीय इतिहास की समस्याएँ
- हिंदी जाति का साहित्य
- पश्चिमी एशिया और ऋग्वेद
- भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद
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निबंध संग्रह:
- विराम चिह्न (1957)
- अपनी धरती अपने लोग (आत्मकथात्मक निबंध)
- यथास्मै रोचते विश्वम् (यह निबंध प्रायः पाठ्यक्रम में शामिल होता है)
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शोध ग्रंथ:
- भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद
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संपादन:
- प्रेमचंद की कहानियाँ
- निराला रचनावली (आठ खंड)
4. पुरस्कार एवं सम्मान
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1970): 'निराला की साहित्य साधना' (प्रथम खंड) पर।
- व्यास सम्मान (1991): 'भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद' पर।
- शलाका सम्मान (1989-90): हिंदी साहित्य में उनके समग्र योगदान के लिए।
- महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा।
- सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार: 'निराला की साहित्य साधना' पर।
5. पाठ का संदर्भ (यदि 'यथास्मै रोचते विश्वम्' पाठ है)
यदि आपके पाठ्यक्रम में डॉ. रामविलास शर्मा का निबंध 'यथास्मै रोचते विश्वम्' शामिल है, तो उसका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है:
- यह निबंध साहित्य के उद्देश्य और उसकी सामाजिक भूमिका पर केंद्रित है।
- शर्मा जी इस निबंध में यह तर्क देते हैं कि साहित्य केवल व्यक्तिगत रुचि या मनोरंजन का विषय नहीं है, बल्कि उसका गहरा सामाजिक और ऐतिहासिक संबंध होता है।
- वे साहित्य को जीवन के यथार्थ से जोड़कर देखते हैं और उसकी प्रगतिशील भूमिका पर बल देते हैं।
- निबंध में वे साहित्य में सौंदर्य और उपयोगिता के समन्वय को महत्वपूर्ण मानते हैं, जहाँ सौंदर्य सामाजिक चेतना से विच्छिन्न न हो।
- वे साहित्य में मनुष्य की इच्छाओं, आकांक्षाओं और संघर्षों के चित्रण को आवश्यक मानते हैं, जो समाज को आगे बढ़ाने में सहायक होता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. डॉ. रामविलास शर्मा का जन्म किस वर्ष हुआ था?
अ) 1902
ब) 1912
स) 1922
द) 1932
2. डॉ. रामविलास शर्मा का जन्म स्थान कहाँ है?
अ) वाराणसी
ब) लखनऊ
स) उन्नाव
द) आगरा
3. डॉ. रामविलास शर्मा ने किस विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी?
अ) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
ब) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
स) लखनऊ विश्वविद्यालय
द) दिल्ली विश्वविद्यालय
4. डॉ. रामविलास शर्मा को किस कृति पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था?
अ) प्रेमचंद और उनका युग
ब) निराला की साहित्य साधना
स) भाषा और समाज
द) महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण
5. 'निराला की साहित्य साधना' कितने खंडों में प्रकाशित है?
अ) एक
ब) दो
स) तीन
द) चार
6. 'भाषा और समाज' नामक प्रसिद्ध आलोचनात्मक कृति के लेखक कौन हैं?
अ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
ब) नामवर सिंह
स) रामविलास शर्मा
द) रामचंद्र शुक्ल
7. डॉ. रामविलास शर्मा को 'व्यास सम्मान' किस कृति पर मिला था?
अ) निराला की साहित्य साधना
ब) भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद
स) आस्था और सौंदर्य
द) विराम चिह्न
8. डॉ. रामविलास शर्मा मुख्य रूप से किस प्रकार के आलोचक माने जाते हैं?
अ) मनोवैज्ञानिक आलोचक
ब) रसवादी आलोचक
स) मार्क्सवादी आलोचक
द) स्वच्छंदतावादी आलोचक
9. 'यथास्मै रोचते विश्वम्' डॉ. रामविलास शर्मा की किस विधा की रचना है?
अ) कहानी
ब) उपन्यास
स) निबंध
द) आलोचना
10. डॉ. रामविलास शर्मा का निधन किस वर्ष हुआ था?
अ) 1990
ब) 1995
स) 2000
द) 2005
उत्तरमाला:
- ब) 1912
- स) उन्नाव
- स) लखनऊ विश्वविद्यालय
- ब) निराला की साहित्य साधना
- स) तीन
- स) रामविलास शर्मा
- ब) भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद
- स) मार्क्सवादी आलोचक
- स) निबंध
- स) 2000
मुझे आशा है कि यह विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। मन लगाकर अध्ययन करें और सफलता प्राप्त करें!