Class 12 History Notes Chapter 2 (राजा; किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-I Book

Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 2, 'राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्राचीन भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण कालखंड, विशेषकर छठी शताब्दी ईसा पूर्व से छठी शताब्दी ईस्वी तक के राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों को समझने में सहायक है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह खंड अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः प्रत्येक बिंदु पर ध्यान देना आवश्यक है।


अध्याय 2: राजा, किसान और नगर: आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ

1. परिचय: आरंभिक भारतीय इतिहास के प्रमुख परिवर्तन

  • हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद, भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 1500 वर्षों तक कोई बड़ा नगरीय विकास नहीं हुआ।
  • छठी शताब्दी ईसा पूर्व से नए राज्यों, साम्राज्यों और नगरों का विकास हुआ।
  • इस काल में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और नए नगरों का उदय हुआ।
  • बौद्ध और जैन धर्म सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ।
  • यह काल आरंभिक राज्यों और अर्थव्यवस्थाओं के उद्भव का साक्षी है।

2. प्रिंसेप और पियदस्सी

  • जेम्स प्रिंसेप: ईस्ट इंडिया कंपनी का एक अधिकारी, जिसने 1830 के दशक में ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ निकाला।
  • इन लिपियों का उपयोग आरंभिक अभिलेखों और सिक्कों में किया गया था।
  • पियदस्सी: अधिकांश अभिलेखों में 'पियदस्सी' (यानी 'मनोहर मुखाकृति वाला राजा') नामक राजा का उल्लेख है।
  • कुछ अभिलेखों में राजा का नाम अशोक भी मिलता है, जो बौद्ध ग्रंथों के अनुसार सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक था।
  • इन खोजों से आरंभिक भारतीय राजनीतिक इतिहास को समझने में मदद मिली।

3. आरंभिक राज्य: सोलह महाजनपद

  • छठी शताब्दी ईसा पूर्व को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
  • यह काल आरंभिक राज्यों, साम्राज्यों और रजवाड़ों के विकास से जुड़ा है।
  • महाजनपद: इस काल में 16 बड़े राज्यों का उदय हुआ जिन्हें 'महाजनपद' कहा गया। बौद्ध और जैन ग्रंथों में इनका उल्लेख मिलता है।
  • प्रमुख महाजनपद: वज्जि, मगध, कोसल, कुरु, पांचाल, गांधार, अवंति।
  • महाजनपदों की विशेषताएँ:
    • अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन होता था।
    • कुछ 'गण' या 'संघ' के नाम से प्रसिद्ध थे, जहाँ कई लोगों का समूह शासन करता था (जैसे वज्जि संघ)।
    • प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी, जिसे प्रायः किलेबंद किया जाता था।
    • किलेबंद राजधानियों के रखरखाव और सेना के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती थी।
    • शासक किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से कर और भेंट वसूलते थे।
    • धीरे-धीरे स्थायी सेनाएँ और नौकरशाही विकसित हुई।

4. मगध का उत्कर्ष

  • छठी से चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया।
  • मगध के शक्तिशाली होने के कारण:
    • उपजाऊ भूमि: गंगा और इसकी सहायक नदियों के कारण कृषि उपज बहुत अच्छी थी।
    • लौह अयस्क: मगध क्षेत्र में लौह अयस्क की खदानें थीं, जिससे हथियार और कृषि उपकरण बनाना आसान हुआ।
    • हाथी: जंगल में हाथी उपलब्ध थे, जो सेना का महत्वपूर्ण अंग बन गए।
    • परिवहन: गंगा नदी द्वारा सस्ता और सुगम परिवहन उपलब्ध था।
    • महत्वाकांक्षी शासक: बिंबिसार, अजातशत्रु और महापद्मनंद जैसे महत्वाकांक्षी शासकों ने मगध के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • राजधानी: आरंभ में राजगाह (राजगीर, पहाड़ियों से घिरा) और बाद में पाटलिपुत्र (गंगा के किनारे) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थी।

5. मौर्य साम्राज्य

  • स्थापना: चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ईसा पूर्व में मगध पर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।
  • विस्तार: उनका साम्राज्य अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला हुआ था।
  • अशोक: चंद्रगुप्त का पौत्र अशोक (लगभग 268-232 ईसा पूर्व) मौर्य साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक था। उसने कलिंग (आधुनिक ओडिशा) पर विजय प्राप्त की, जिसके बाद उसने युद्ध त्याग कर 'धम्म' का प्रचार किया।
  • जानकारी के स्रोत:
    • मेगस्थनीज की 'इंडिका': यूनानी राजदूत मेगस्थनीज द्वारा लिखित।
    • कौटिल्य/चाणक्य का 'अर्थशास्त्र': शासन कला और राजनीति पर आधारित ग्रंथ।
    • बौद्ध, जैन और पौराणिक ग्रंथ: मौर्यों के बारे में जानकारी देते हैं।
    • अशोक के अभिलेख: स्तंभों और चट्टानों पर उत्कीर्ण अभिलेख, धम्म के सिद्धांतों की जानकारी देते हैं।
    • पुरातात्विक साक्ष्य: मूर्तिकलाएँ, सिक्के आदि।
  • मौर्य प्रशासन:
    • पांच प्रमुख राजनीतिक केंद्र: राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र – तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसली और सुवर्णगिरि।
    • सैन्य प्रशासन: मेगस्थनीज के अनुसार, सेना के संचालन के लिए एक समिति और छह उपसमितियाँ थीं (नौसेना, पैदल सेना, अश्वसेना, रथ, हाथी, उपकरण)।
    • राजस्व: कृषि, पशुपालन, वन और खदानों से राजस्व एकत्र किया जाता था।
    • धम्म महामात्त: अशोक ने धम्म के प्रचार के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की।
  • महत्व: मौर्य साम्राज्य लगभग 150 वर्षों तक चला। यह भारत का पहला विशाल साम्राज्य था जिसने राजनीतिक एकता स्थापित की।

6. राजधर्म के नवीन सिद्धांत

  • मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद (लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व), उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में नए राज्यों और सरदारों का उदय हुआ।
  • दक्षिण के राज्य: चोल, चेर और पांड्य जैसे सरदारियों का उदय हुआ, जो अत्यंत समृद्ध थे। संगम ग्रंथों में इनका विस्तृत वर्णन मिलता है।
  • दैविक राजा:
    • कुषाण शासक: प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से प्रथम शताब्दी ईस्वी तक मध्य एशिया से पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत पर शासन किया। उन्होंने अपनी उच्च स्थिति दर्शाने के लिए 'देवपुत्र' जैसी उपाधियाँ धारण कीं और अपनी विशाल मूर्तियाँ स्थापित करवाईं (जैसे मथुरा के पास माट में)।
    • गुप्त साम्राज्य: चौथी शताब्दी ईस्वी में गुप्त साम्राज्य का उदय हुआ।
      • समुद्रगुप्त: गुप्त शासकों में सबसे शक्तिशाली। उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) में उसकी उपलब्धियों का वर्णन है।
      • प्रशासन: गुप्त शासकों का प्रशासन मौर्यों की तुलना में अधिक विकेन्द्रीकृत था। सामंतों पर निर्भरता अधिक थी।
      • सामंत: ऐसे शक्तिशाली व्यक्ति जो राजा को सैन्य सहायता देते थे और बदले में कर वसूलते थे।

7. बदलते हुए ग्रामीण परिदृश्य

  • जनता में राजा की छवि: राजा और प्रजा के संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण नहीं थे। जातक कथाओं (जैसे गंदतिंदु जातक) में राजाओं द्वारा किसानों पर अत्यधिक कर लगाने और उनके शोषण का वर्णन मिलता है, जिससे किसान जंगल में भाग जाते थे।
  • उपज बढ़ाने के तरीके:
    • लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग: गंगा की घाटी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से इसका प्रयोग शुरू हुआ, जिससे उर्वर भूमि की जुताई आसान हुई।
    • धान की रोपाई: गंगा के मैदानी इलाकों में धान की रोपाई से उत्पादन में वृद्धि हुई।
    • कुएँ, तालाब और नहरों द्वारा सिंचाई: कुछ क्षेत्रों में सिंचाई के कृत्रिम साधन विकसित किए गए।
  • ग्रामीण समाज में विभिन्नताएँ:
    • उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, समाज में असमानताएँ बढ़ीं।
    • गहपति: बड़े भूस्वामी, छोटे किसान और भूमिहीन खेतिहर मजदूर।
    • ग्राम भोजक: तमिल संगम साहित्य में बड़े भूस्वामियों (वेल्लालर), हलवाहों (उझावर) और दासों (अदिमई) का उल्लेख है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया शक्तिशाली होते गए।
  • भूमि अनुदान और नए ग्रामीण अभिजात वर्ग:
    • ईस्वी की आरंभिक शताब्दियों से भूमि अनुदान के प्रमाण मिलते हैं।
    • अग्रहार: ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि, जिससे वे कर मुक्त होते थे और स्थानीय प्रशासन भी देखते थे।
    • प्रभावती गुप्त: चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री, जिसने भूमि दान की। यह दर्शाता है कि कुछ महिलाएँ भी संपत्ति की मालिक हो सकती थीं, हालाँकि धर्मशास्त्रों में महिलाओं को संपत्ति का अधिकार नहीं दिया गया था।
    • भूमि अनुदान से नए ग्रामीण अभिजात वर्ग (सामंत) का उदय हुआ, जो राजाओं के लिए सैन्य सहायता जुटाते थे।

8. नगर और व्यापार

  • नगरीय केंद्र: पाटलिपुत्र, उज्जैनी, मथुरा, वाराणसी आदि प्रमुख नगर थे।
  • नगरों में जीवन:
    • नगरों में शासक वर्ग, व्यापारी, शिल्पकार और सामान्य लोग रहते थे।
    • शिल्प उत्पादन: मिट्टी के बर्तन (उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र - NBPW), आभूषण, उपकरण आदि।
    • श्रेणियाँ (गिल्ड): शिल्पकारों और व्यापारियों के संगठन, जो कच्चे माल की खरीद, उत्पादन और उत्पादों के वितरण का कार्य करते थे।
  • व्यापार:
    • स्थलीय और समुद्री मार्ग: व्यापार उपमहाद्वीप के भीतर और बाहर भी होता था।
    • समुद्री व्यापार: अरब सागर के रास्ते पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी एशिया और भूमध्यसागर तक; बंगाल की खाड़ी के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन तक।
    • व्यापारी: पैदल चलने वाले व्यापारी (वनिक), साहूकार (सेठ)।
    • वस्तुएँ: नमक, अनाज, कपड़ा, धातु, पत्थर, लकड़ी, मसाले (काली मिर्च), औषधीय पौधे आदि।
    • रोमन साम्राज्य से व्यापार: काली मिर्च, मसाले, वस्त्र, औषधीय पौधे रोमन साम्राज्य में निर्यात किए जाते थे।
  • सिक्के और राजा:
    • आहत सिक्के (पंच-मार्क सिक्के): छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्रचलन में आए, जिन पर प्रतीक चिन्ह अंकित होते थे।
    • इंडो-यूनानी शासक: द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में शासकों के नाम और चित्र वाले सिक्के जारी किए।
    • कुषाण शासक: प्रथम शताब्दी ईस्वी में बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए।
    • गुप्त शासक: सोने के सिक्कों का एक और बड़ा ढेर जारी किया, जो उनकी समृद्धि को दर्शाता है।
    • रोमन सिक्के: दक्षिण भारत में रोमन सोने और चाँदी के सिक्के बड़ी संख्या में मिले हैं, जो व्यापारिक संबंधों को दर्शाते हैं।

9. अभिलेखों का अध्ययन

  • अभिलेखशास्त्र (Epigraphy): अभिलेखों के अध्ययन को अभिलेखशास्त्र कहते हैं।
  • अभिलेखों की सीमाएँ:
    • अक्षरों का हल्का उत्कीर्णन, जिससे उन्हें पढ़ना मुश्किल होता है।
    • कुछ अभिलेख नष्ट हो गए हैं या उनके अक्षर मिट गए हैं।
    • अभिलेखों में केवल उन्हीं घटनाओं का उल्लेख होता है जो महत्वपूर्ण मानी जाती थीं।
    • अभिलेखों में शासक के दृष्टिकोण को ही प्राथमिकता दी जाती है।
    • सभी अभिलेखों का अर्थ अभी तक नहीं निकाला जा सका है।
  • ऐतिहासिक साक्ष्य: अभिलेखों से शासकों के नाम, उपाधियाँ, वंशावली, विजयें, धम्म के सिद्धांत और सामाजिक-आर्थिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

निष्कर्ष:
यह अध्याय छठी शताब्दी ईसा पूर्व से छठी शताब्दी ईस्वी तक के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों का एक विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें राज्यों के उदय, कृषि के विकास, शहरीकरण, व्यापार और विभिन्न शासकों द्वारा अपनाई गई नीतियों का विश्लेषण किया गया है, जो प्राचीन भारतीय इतिहास को समझने के लिए आधारभूत है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ किस दशक में निकाला?
    A. 1810 के दशक में
    B. 1820 के दशक में
    C. 1830 के दशक में
    D. 1840 के दशक में

  2. अशोक के अधिकांश अभिलेखों में किस उपाधि का प्रयोग किया गया है?
    A. महाराजाधिराज
    B. देवपुत्र
    C. पियदस्सी
    D. सम्राट

  3. छठी शताब्दी ईसा पूर्व में कितने महाजनपदों का उदय हुआ था?
    A. 8
    B. 10
    C. 12
    D. 16

  4. मगध के शक्तिशाली होने का एक प्रमुख कारण क्या नहीं था?
    A. उपजाऊ भूमि
    B. लौह अयस्क की उपलब्धता
    C. विशाल नौसेना
    D. गंगा नदी द्वारा सुगम परिवहन

  5. मेगस्थनीज द्वारा लिखित पुस्तक का नाम क्या है?
    A. अर्थशास्त्र
    B. मुद्रा राक्षस
    C. इंडिका
    D. राजतरंगिणी

  6. मौर्य साम्राज्य के पांच प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में से कौन सा एक नहीं था?
    A. पाटलिपुत्र
    B. तक्षशिला
    C. उज्जैनी
    D. कन्नौज

  7. किस शासक ने 'देवपुत्र' की उपाधि धारण की थी?
    A. अशोक
    B. चंद्रगुप्त मौर्य
    C. कुषाण शासक
    D. समुद्रगुप्त

  8. 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) की रचना किसने की थी?
    A. कौटिल्य
    B. हरिषेण
    C. मेगस्थनीज
    D. बाणभट्ट

  9. आरंभिक भारतीय इतिहास में 'गहपति' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाता था?
    A. राजा
    B. बड़े भूस्वामी
    C. सैनिक
    D. पुरोहित

  10. शिल्पकारों और व्यापारियों के संगठनों को क्या कहा जाता था?
    A. गण
    B. संघ
    C. श्रेणी
    D. सभा


उत्तरमाला:

  1. C
  2. C
  3. D
  4. C
  5. C
  6. D
  7. C
  8. B
  9. B
  10. C

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