Class 12 History Notes Chapter 3 (Chapter 3) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-II Book

प्रिय विद्यार्थियों,
आज हम आपकी कक्षा 12 की इतिहास की पुस्तक 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय-II' के अध्याय 3, 'एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक)' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय विजयनगर साम्राज्य की स्थापना, विकास, स्थापत्य, सामाजिक-आर्थिक पहलुओं और उसके पतन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हमें इसके हर पहलू को गहराई से समझना होगा।
अध्याय 3: एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक)
विस्तृत नोट्स
1. विजयनगर साम्राज्य का परिचय एवं खोज
- नाम का अर्थ: विजयनगर का अर्थ है "विजय का शहर"। यह साम्राज्य और उसकी राजधानी दोनों के लिए प्रयुक्त होता था।
- स्थापना: 14वीं शताब्दी में स्थापित।
- विस्तार: कृष्णा नदी से लेकर सुदूर दक्षिण तक फैला।
- पतन: 1565 ई. में तालीकोटा के युद्ध के बाद इसका पतन हो गया, लेकिन इसके अवशेष आज भी हंपी में देखे जा सकते हैं।
- हंपी की खोज:
- 1800 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के अभियंता और पुराविद् कॉलिन मैकेंज़ी ने हंपी के पुरातात्विक अवशेषों का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।
- उन्होंने विरूपाक्ष मंदिर और पंपादेवी के पूजा स्थलों के पुजारियों की स्मृतियों के आधार पर जानकारी एकत्र की।
- बाद में, अभिलेखविदों ने मंदिरों की दीवारों से मिले अभिलेखों और यात्रियों के वृत्तांतों का अध्ययन किया।
- इन सभी स्रोतों (पुरातत्व, अभिलेख, मौखिक परंपराएँ, विदेशी यात्रियों के वृत्तांत) से विजयनगर के इतिहास को पुनर्निर्मित किया गया।
2. राय, नायक और सुल्तान
- स्थापना: हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई. में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की।
- शासक वंश:
- संगम वंश (1336-1485 ई.): हरिहर और बुक्का इसी वंश के थे।
- सालुव वंश (1485-1503 ई.): संगम वंश के बाद आया।
- तुलुव वंश (1503-1565 ई.): सालुव वंश के बाद आया।
- अरविदु वंश (1565-17वीं सदी): विजयनगर के पतन के बाद भी कुछ समय तक शासन किया।
- कृष्णदेव राय (1509-1529 ई.):
- तुलुव वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक।
- उनके शासनकाल में विजयनगर अपने उत्कर्ष पर पहुँचा।
- उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ:
- दक्कन के सुल्तानों और ओडिशा के गजपति शासकों को पराजित किया।
- रायचूर दोआब (कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का क्षेत्र) पर अधिकार किया।
- कुछ बेहतरीन मंदिरों का निर्माण करवाया और महत्वपूर्ण मंदिरों में भव्य गोपुरम जुड़वाए।
- अपनी माता के नाम पर विजयनगर के समीप नगलपुरम नामक उपनगरीय बस्ती की स्थापना की।
- तेलुगु भाषा में 'अमुक्तमाल्यद' नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें राज्य-प्रशासन और नीतियों पर चर्चा की गई है।
- नायक:
- सेना प्रमुख होते थे जो किलों पर नियंत्रण रखते थे और सशस्त्र समर्थक रखते थे।
- ये आमतौर पर तेलुगु या कन्नड़ भाषा बोलते थे।
- अक्सर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करते थे और उपजाऊ भूमि की तलाश में किसानों को बसाते थे।
- राजा अक्सर इन नायकों को नियंत्रण में रखने के लिए सैन्य कार्यवाही करते थे।
- अमर-नायक प्रणाली:
- विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज।
- संभवतः दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से प्रेरित थी।
- 'अमर' शब्द संस्कृत के 'समर' (युद्ध) से निकला है, या फारसी शब्द 'अमीर' से।
- अमर-नायक सैन्य कमांडर होते थे, जिन्हें राय द्वारा प्रशासन के लिए क्षेत्र दिए जाते थे।
- ये किसान, शिल्पी और व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर वसूलते थे।
- राजस्व का एक हिस्सा व्यक्तिगत उपयोग और घोड़ों व हाथियों के एक निश्चित दल के रखरखाव के लिए रखते थे।
- यह दल विजयनगर शासकों को एक प्रभावी सैन्य शक्ति प्रदान करता था।
- नायक वर्ष में एक बार राजा को भेंट भेजते थे और दरबार में निष्ठा प्रकट करते थे।
- समय-समय पर राजा इन्हें स्थानांतरित कर अपने नियंत्रण में रखते थे।
- 17वीं शताब्दी में कई नायकों ने स्वतंत्रता की घोषणा की, जिससे साम्राज्य कमजोर हुआ।
3. जल संपदा
- प्राकृतिक बनावट: विजयनगर तुंगभद्रा नदी के प्राकृतिक कुंड में स्थित था।
- नदी का महत्व: नदी उत्तर-पूर्वी दिशा में बहती थी, जिसके आसपास की ग्रेनाइट की पहाड़ियाँ एक प्राकृतिक घाटी बनाती थीं।
- जलाशय और नहरें:
- पहाड़ियों से नीचे बहने वाली कई जलधाराओं पर बाँध बनाकर विभिन्न आकार के जलाशय बनाए गए।
- कमलपुरम जलाशय: 15वीं शताब्दी के आरंभ में निर्मित, इससे खेतों की सिंचाई होती थी और नहर के माध्यम से 'शाही केंद्र' तक पानी ले जाया जाता था।
- हिरिया नहर: संगम वंश के राजाओं द्वारा निर्मित, तुंगभद्रा पर बने बाँध से निकलती थी और धार्मिक केंद्र से होते हुए शहरी केंद्र तक जाती थी। इसका उपयोग सिंचाई के लिए होता था।
4. किलेबंदी और सड़कें
- अब्दुर रज्जाक का विवरण: 15वीं शताब्दी में फारस के शासक द्वारा कालीकट (केरल) भेजा गया दूत अब्दुर रज्जाक विजयनगर की किलेबंदी से बहुत प्रभावित हुआ।
- सात दीवारों की किलेबंदी:
- शहर को सात दीवारों से घेरा गया था।
- यह न केवल शहर को, बल्कि कृषि भूभाग और जंगलों को भी घेरती थी।
- अब्दुर रज्जाक के अनुसार, पहली, दूसरी और तीसरी दीवार के बीच जुते हुए खेत, बगीचे और आवास थे।
- पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने भी लिखा कि दीवारों के भीतर विशाल उपजाऊ भूमि थी, जहाँ चावल उगाया जाता था।
- किलेबंदी का उद्देश्य घेराबंदी के समय खाद्य सामग्री की कमी से बचना था।
- किलेबंदी की तकनीक:
- चूने और गारे जैसे जोड़ने वाले मसाले का प्रयोग नहीं किया गया था।
- पत्थर के टुकड़े फानाकार होते थे, जिन्हें आपस में फँसाकर बनाया जाता था।
- दीवारों के अंदरूनी हिस्से में मिट्टी भरकर मजबूत किया जाता था।
- प्रवेश द्वार: किलेबंद बस्ती में प्रवेश के लिए सुदृढ़ प्रवेश द्वार थे, जो शहरी केंद्र को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों से जुड़े थे।
5. शहरी केंद्र
- सामान्य लोगों के आवास:
- पुरातात्विक सर्वेक्षणों से पता चला है कि सामान्य लोगों के आवास छोटे होते थे, लेकिन बड़ी संख्या में थे।
- ये मिट्टी, घास-फूस और नाशवान सामग्री से बने होते थे, इसलिए उनके अवशेष कम मिलते हैं।
- पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने लिखा है कि सामान्य लोगों के घर छप्पर के होते थे, लेकिन सुदृढ़ थे।
- सड़कों पर खुली जगहें, मंदिर और बाजार होते थे।
- शाही केंद्र (Royal Centre):
- बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित।
- इसमें लगभग 60 मंदिर और 30 से अधिक महलनुमा संरचनाएँ थीं।
- इनमें से कुछ संरचनाओं की पहचान 'महानवमी डिब्बा' और 'हजार राम मंदिर' के रूप में की गई है।
- महानवमी डिब्बा:
- शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित एक विशालकाय मंच।
- लगभग 11,000 वर्ग फीट के आधार पर 40 फीट ऊँचा।
- इस पर कई अनुष्ठान किए जाते थे, जैसे मूर्ति पूजा, घोड़ों की पूजा, भैंसों और अन्य जानवरों की बलि।
- यह दशहरे, दुर्गा पूजा और महानवमी (दक्षिण में नवरात्रि) के अवसर पर राजकीय अनुष्ठानों का केंद्र था।
- इस अवसर पर राजा अपनी शक्ति, प्रतिष्ठा और आधिपत्य का प्रदर्शन करते थे।
- यह मंच शाही परिवार के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता था, जहाँ से वे संगीत, नृत्य, कुश्ती और सेना की परेड देख सकते थे।
- इसकी संरचना में दो मंच थे - एक विशाल मंच और एक 'सभा मंडप'।
- हजार राम मंदिर:
- यह मंदिर केवल राजा और उनके परिवार द्वारा उपयोग किया जाता था।
- इसकी दीवारों पर रामायण के दृश्यों का चित्रण है।
6. पवित्र केंद्र (Sacred Centre)
- स्थान: शहरी केंद्र के उत्तरी भाग में स्थित, तुंगभद्रा नदी के तट पर।
- पहाड़ी श्रृंखलाएँ: विजयनगर की स्थापना से पहले से ही यहाँ की पहाड़ियाँ और तुंगभद्रा नदी के किनारे पवित्र माने जाते थे।
- पंपादेवी: स्थानीय मातृ देवी, जिसने शिव के साथ विवाह के लिए तपस्या की थी।
- विरूपाक्ष: शिव का एक रूप, जिसे विजयनगर के शासक अपना संरक्षक देवता मानते थे।
- विरूपाक्ष मंदिर:
- यह मंदिर कई शताब्दियों में विकसित हुआ।
- मुख्य मंदिर के सामने एक मंडप है, जिसका निर्माण कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में करवाया था।
- इस मंडप का उपयोग विशेष प्रतिमाओं को स्थापित करने और देवताओं की शादी के उत्सव के लिए किया जाता था।
- मंदिर के पूर्वी गोपुरम का निर्माण भी कृष्णदेव राय ने करवाया था।
- विट्ठल मंदिर:
- विट्ठल (विष्णु का एक रूप) महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले प्रमुख देवता थे।
- यह मंदिर भी कई मंडपों और एक अद्वितीय रथ के आकार के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
- रथ के आकार का मंदिर विजयनगर स्थापत्य की एक विशिष्ट विशेषता है।
- अन्य महत्वपूर्ण विशेषता संगीत स्तंभ हैं, जो छूने पर संगीत की ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
- मंदिरों का महत्व:
- मंदिर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र थे।
- शासक मंदिरों के निर्माण, रखरखाव और दान के माध्यम से अपनी सत्ता और वैधता का दावा करते थे।
7. मंडप और गोपुरम
- मंडप: मंदिरों में बने विशाल कक्ष, जिनका उपयोग विभिन्न अनुष्ठानों, सभाओं और उत्सवों के लिए होता था।
- गोपुरम: विशाल और ऊँचे प्रवेश द्वार, जो शाही सत्ता का प्रतीक थे।
- इन्हें 'राय गोपुरम' भी कहा जाता था क्योंकि इनका निर्माण राय (राजाओं) द्वारा किया जाता था।
- ये दूर से ही मंदिर की पहचान कराते थे और अक्सर मंदिर की दीवारों से भी ऊँचे होते थे।
- इनका उद्देश्य शासकों की शक्ति और धन का प्रदर्शन करना था।
8. विजयनगर का पतन
- तालीकोटा का युद्ध (राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध):
- 1565 ई. में विजयनगर की सेना और दक्कन के सुल्तानों (बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त सेना) के बीच लड़ा गया।
- विजयनगर का नेतृत्व रामराय कर रहे थे।
- इस युद्ध में विजयनगर की पराजय हुई और शहर को लूटा गया तथा उजाड़ दिया गया।
- पतन के बाद:
- विजयनगर साम्राज्य धीरे-धीरे सिकुड़ता गया।
- अरविदु वंश ने पेनुकोंडा और बाद में चंद्रगिरि से शासन किया।
- हालांकि, विजयनगर की स्थापत्य परंपराएँ नायकों के अधीन जारी रहीं, जिन्होंने अपनी स्थानीय राजधानियों में मंदिरों का निर्माण किया।
9. हंपी की खोज का महत्व
- कॉलिन मैकेंज़ी के शुरुआती सर्वेक्षणों से लेकर आधुनिक पुरातात्विक खुदाई तक, हंपी के अवशेषों ने हमें विजयनगर साम्राज्य की भव्यता और जटिलता को समझने में मदद की है।
- विभिन्न स्रोतों (विदेशी यात्रियों के वृत्तांत, स्थानीय मौखिक परंपराएँ, अभिलेख और पुरातात्विक साक्ष्य) के संयोजन से इस महान साम्राज्य का इतिहास पुनर्निर्मित किया गया है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
-
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
a) 1300 ई.
b) 1336 ई.
c) 1400 ई.
d) 1450 ई. -
विजयनगर साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेव राय किस वंश से संबंधित थे?
a) संगम वंश
b) सालुव वंश
c) तुलुव वंश
d) अरविदु वंश -
'अमुक्तमाल्यद' नामक ग्रंथ की रचना किस शासक ने की थी?
a) हरिहर
b) बुक्का
c) कृष्णदेव राय
d) रामराय -
विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हंपी किस नदी के किनारे स्थित थी?
a) कृष्णा नदी
b) कावेरी नदी
c) तुंगभद्रा नदी
d) गोदावरी नदी -
विजयनगर साम्राज्य में अमर-नायक प्रणाली किससे प्रेरित थी?
a) मुगल मनसबदारी प्रणाली
b) दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली
c) चोल प्रशासन
d) गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक प्रणाली -
विजयनगर शहर की किलेबंदी का विस्तृत वर्णन किस विदेशी यात्री ने किया था?
a) इब्न बतूता
b) अब्दुर रज्जाक
c) मार्को पोलो
d) निकोलो कोंटी -
विजयनगर में महानवमी डिब्बा का उपयोग किस अवसर पर किया जाता था?
a) होली
b) दिवाली
c) दशहरा/महानवमी
d) ईद -
तालीकोटा का युद्ध (राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध) किस वर्ष लड़ा गया था?
a) 1509 ई.
b) 1529 ई.
c) 1565 ई.
d) 1600 ई. -
विजयनगर के पवित्र केंद्र में स्थित विरूपाक्ष मंदिर किस देवता को समर्पित है?
a) विष्णु
b) शिव
c) ब्रह्मा
d) गणेश -
हंपी के पुरातात्विक अवशेषों का पहला सर्वेक्षण मानचित्र किसने तैयार किया था?
a) जेम्स प्रिंसेप
b) जॉन मार्शल
c) आर.ई.एम. व्हीलर
d) कॉलिन मैकेंज़ी
उत्तरमाला:
- b) 1336 ई.
- c) तुलुव वंश
- c) कृष्णदेव राय
- c) तुंगभद्रा नदी
- b) दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली
- b) अब्दुर रज्जाक
- c) दशहरा/महानवमी
- c) 1565 ई.
- b) शिव
- d) कॉलिन मैकेंज़ी
मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपको इस अध्याय को गहराई से समझने और अपनी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेंगे। किसी भी अन्य शंका या प्रश्न के लिए आप पूछ सकते हैं। शुभकामनाएँ!