Class 12 History Notes Chapter 3 (Chapter 3) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-III Book

Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-III
प्रिय विद्यार्थियों,

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय - भाग III' पुस्तक के अध्याय 3, 'एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक)' के विस्तृत नोट्स यहाँ प्रस्तुत हैं। इन नोट्स में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और जानकारियों को समाहित करने का प्रयास किया गया है, जो आपकी तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।


अध्याय 3: एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक)

विजयनगर साम्राज्य (लगभग 1336-1646 ई.) दक्कन में कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण साम्राज्य था। इसकी राजधानी विजयनगर या हम्पी थी।

1. विजयनगर साम्राज्य की खोज और पहचान:

  • हम्पी की खोज: हम्पी के खंडहरों को 1800 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के अभियंता और पुराविद् कर्नल कॉलिन मैकेंजी द्वारा प्रकाश में लाया गया। उन्होंने इस स्थल का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।
  • मैकेंजी का योगदान: वे 1815 में भारत के पहले सर्वेयर जनरल बने। उन्होंने विजयनगर के विषय में जानकारी स्थानीय लोगों की स्मृतियों, विरुपाक्ष मंदिर तथा पंपा देवी के पुजारियों से प्राप्त की।
  • पुरातत्वविदों का कार्य: 19वीं सदी के मध्य से पुराविदों ने इस क्षेत्र के मंदिरों, मूर्तियों और अन्य अवशेषों का अध्ययन करना शुरू किया। 1876 में जे.एफ. फ्लीट ने हम्पी के अभिलेखों का संकलन किया।
  • साक्ष्य: विजयनगर के इतिहास को समझने के लिए मौखिक परंपराएँ, अभिलेख, स्मारक और अन्य पुरातात्विक खोजें महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

2. राय, नायक तथा सल्तनत:

  • स्थापना: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी। ये संगम वंश के थे।
  • शासक और परंपरा: विजयनगर के शासकों ने स्वयं को 'राय' कहा। उन्होंने स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं को आत्मसात किया।
  • भौगोलिक स्थिति: यह साम्राज्य कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था। तुंगभद्रा नदी इस क्षेत्र की जीवनरेखा थी।
  • नायक: विजयनगर सेना के प्रमुखों को 'नायक' कहा जाता था। ये प्रायः तेलुगु या कन्नड़ भाषा बोलते थे। ये अक्सर एक स्थान से दूसरे स्थान तक भ्रमण करते थे और उपजाऊ भूमि की तलाश में किसानों को बसाते थे। नायक राजा के नियंत्रण में होते थे, लेकिन कभी-कभी विद्रोह भी कर देते थे, जिन्हें सैन्य कार्यवाही द्वारा दबाया जाता था।
  • अमर-नायक प्रणाली: यह विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी।
    • माना जाता है कि यह दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से प्रेरित थी।
    • अमर-नायक सैन्य कमांडर होते थे, जिन्हें राय द्वारा प्रशासन के लिए क्षेत्र दिए जाते थे।
    • ये किसान, शिल्पी और व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर वसूलते थे।
    • वे राजस्व का एक भाग व्यक्तिगत उपयोग तथा घोड़ों और हाथियों के दल को बनाए रखने के लिए रखते थे।
    • वे राजा को एक निश्चित भेंट देते थे और युद्ध में सहायता भी करते थे।
    • यह प्रणाली साम्राज्य के विस्तार और सुदृढ़ीकरण में सहायक थी, लेकिन 17वीं शताब्दी में कई नायकों ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी, जिससे साम्राज्य कमजोर हुआ।
  • बहमनी सल्तनत: विजयनगर का पड़ोसी राज्य बहमनी सल्तनत (स्थापना 1347 ई.) था। दोनों राज्यों के बीच उपजाऊ नदी घाटियों और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर नियंत्रण के लिए अक्सर संघर्ष होता था।
  • वंश: विजयनगर पर चार राजवंशों ने शासन किया:
    1. संगम वंश (1336-1485 ई.): हरिहर और बुक्का इसके संस्थापक थे।
    2. सालुव वंश (1485-1503 ई.): संगम वंश के सैन्य कमांडरों ने सत्ता पर कब्ज़ा किया।
    3. तुलुव वंश (1503-1565 ई.): सालुवों के बाद तुलुवों ने सत्ता संभाली।
    4. अरविदु वंश (1565-1646 ई.): तालीकोटा के युद्ध के बाद सत्ता संभाली।
  • कृष्णदेव राय (1509-1529 ई.): तुलुव वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे।
    • उनके शासनकाल में विजयनगर शक्ति और समृद्धि के शिखर पर पहुँचा।
    • उन्होंने तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के बीच के रायचूर दोआब को जीता (1512)।
    • ओडिशा के शासकों और बीजापुर के सुल्तान को हराया।
    • उन्होंने कई भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया और महत्वपूर्ण गोपुरमों को जोड़ा।
    • उन्होंने अपनी माता के नाम पर विजयनगर के पास 'नगलपुरम' नामक उपनगरीय बस्ती की स्थापना की।
    • वे एक कुशल प्रशासक और विद्वान थे। उन्होंने तेलुगु में 'अमुक्तमाल्यद' और संस्कृत में 'जाम्बवती कल्याणम्' नामक ग्रंथ लिखे।
    • पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने कृष्णदेव राय के बारे में लिखा है।
  • तालीकोटा का युद्ध (राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध) - 1565 ई.:
    • विजयनगर की सेना का नेतृत्व रामराय कर रहे थे।
    • बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर को बुरी तरह हराया।
    • यह युद्ध विजयनगर साम्राज्य के पतन का कारण बना। शहर को लूटकर उजाड़ दिया गया।
    • इसके बाद अरविदु वंश ने पेनुकोंडा और बाद में चंद्रगिरि से शासन किया, लेकिन साम्राज्य पहले जैसी शक्ति प्राप्त नहीं कर सका।

3. विजयनगर की जल संपदा और किलेबंदी:

  • जल संपदा: विजयनगर की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक विशेषता तुंगभद्रा नदी द्वारा निर्मित एक प्राकृतिक कुंड था। इस नदी से कई नहरें और जलाशय बनाए गए।
    • कमलापुरम जलाशय: 15वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में निर्मित एक विशाल जलाशय। इससे नहर के माध्यम से खेतों की सिंचाई होती थी।
    • हीरा नहर: कृष्णदेव राय द्वारा निर्मित। यह नहर तुंगभद्रा पर बने एक बांध से पानी लाती थी और धार्मिक केंद्र से शहरी केंद्र को अलग करने वाली घाटी को सिंचित करती थी।
  • किलेबंदी:
    • विजयनगर की किलेबंदी की दीवारों का वर्णन अब्दुर रज्जाक (फारस का दूत, 15वीं शताब्दी) ने किया है।
    • शहर की सात दीवारों से किलेबंदी की गई थी।
    • सबसे बाहरी दीवार न केवल शहर को बल्कि आसपास के कृषि क्षेत्रों और जंगलों को भी घेरती थी। यह व्यवस्था घेराबंदी के समय खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए थी।
    • अब्दुर रज्जाक के अनुसार, पहली, दूसरी और तीसरी दीवार के बीच खेती होती थी।
    • किलेबंद बस्ती में प्रवेश के लिए सुदृढ़ द्वार थे, जो मेहराबनुमा थे और उनके साथ संतरी कक्ष बने थे।
    • किलेबंदी में गारे का प्रयोग नहीं किया गया था; पत्थर के टुकड़े फानाकार थे और आपस में फँसाकर बनाए गए थे।

4. शहरी केंद्र (Urban Core):

  • पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने विजयनगर को रोम जितना बड़ा बताया था।
  • शहर में कई कुएँ, जलाशय और तालाब थे।
  • विदेशी यात्रियों ने विजयनगर को एक विशाल और समृद्ध शहर बताया है।
  • सामान्य लोगों के आवासों के पुरातात्विक साक्ष्य कम मिलते हैं, क्योंकि वे मिट्टी और घास-फूस के बने होते थे।
  • पुर्तगाली यात्री बारबोसा ने लिखा है कि लोगों के आवास छप्पर के थे, फिर भी वे सुदृढ़ थे।

5. शाही केंद्र (Royal Centre):

  • यह परिसर बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था।
  • इसमें लगभग 60 मंदिर और 30 से अधिक महलनुमा संरचनाएँ थीं।
  • महानवमी डिब्बा:
    • यह एक विशाल मंच था, जो लगभग 11,000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट ऊँचा था।
    • इस पर लकड़ी की संरचना बनी होती थी।
    • इस पर महानवमी (दशहरा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि) के अवसर पर अनुष्ठान होते थे।
    • इन अनुष्ठानों में मूर्ति पूजा, घोड़ों की पूजा, भैंसों और अन्य जानवरों की बलि, नृत्य, कुश्ती, शाही सेना की परेड और नायकों द्वारा राजा को भेंट शामिल थी।
    • यह मंच शासक की शक्ति, प्रतिष्ठा और सार्वभौमिक सत्ता का प्रतीक था।
  • कमल महल:
    • यह एक सुंदर संरचना थी, जिसका उपयोग संभवतः शाही परिवार के सदस्यों के लिए एक विश्राम गृह के रूप में किया जाता था।
    • कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह राजा और उनके सलाहकारों के बीच बैठकों के लिए एक परिषद कक्ष था।
    • इसकी वास्तुकला में भारतीय और इस्लामी शैलियों का मिश्रण है।
  • हजार राम मंदिर:
    • यह एक मंदिर था जिसका उपयोग केवल राजा और उनके परिवार द्वारा किया जाता था।
    • इसकी दीवारों पर रामायण के दृश्यों को चित्रित किया गया है।

6. पवित्र केंद्र (Sacred Centre):

  • यह तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित था।
  • इस क्षेत्र का चुनाव संभवतः रामायण की किष्किंधा से जुड़ा था, जो वानर राजा सुग्रीव और हनुमान का निवास स्थान था।
  • विरुपाक्ष मंदिर:
    • यह विजयनगर साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर था, जो शिव के एक रूप विरुपाक्ष को समर्पित था।
    • यह मंदिर सदियों से अस्तित्व में है, लेकिन विजयनगर के शासकों ने इसे और अधिक विस्तृत किया।
    • मुख्य मंदिर के सामने एक विशाल मंडप है, जो कृष्णदेव राय द्वारा बनवाया गया था (1509)।
    • इस मंडप में नक्काशीदार स्तंभ हैं, जिन पर पौराणिक कथाओं के दृश्य उत्कीर्ण हैं।
    • विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) शासकों की शक्ति और धन का प्रतीक थे।
    • मंदिर में वार्षिक विवाह उत्सव मनाया जाता था, जिसमें विरुपाक्ष और पंपा देवी का विवाह होता था।
  • विट्ठल मंदिर:
    • यह दूसरा महत्वपूर्ण मंदिर था, जो विष्णु के एक रूप विट्ठल को समर्पित था।
    • विट्ठल महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु का एक रूप हैं। यह इस बात का संकेत है कि विजयनगर के शासक विभिन्न परंपराओं को आत्मसात कर रहे थे।
    • इस मंदिर की विशेषता इसका रथ के आकार का मंडप है, जो एक पत्थर के रथ के रूप में बना है।
    • इसमें भी विशाल गोपुरम और कई मंडप हैं।
    • मंदिर के पूर्व में एक लंबी गली थी, जिसमें व्यापारियों की दुकानें थीं।

7. मंडप और गोपुरम:

  • विजयनगर के शासकों ने मंदिरों में कई मंडप (स्तंभों वाले हॉल) और विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) बनवाए।
  • गोपुरमों का उद्देश्य दूर से ही मंदिर की शक्ति और भव्यता को प्रदर्शित करना था।
  • मंडपों का उपयोग विभिन्न अनुष्ठानों, नृत्य और संगीत प्रदर्शनों के लिए किया जाता था।

8. विजयनगर का अंत:

  • 1565 ई. में तालीकोटा के युद्ध में हार के बाद विजयनगर साम्राज्य कमजोर हो गया।
  • राजधानी विजयनगर को लूट लिया गया और उजाड़ दिया गया।
  • इसके बाद अरविदु वंश ने शासन किया, लेकिन वे साम्राज्य की पुरानी महिमा को बहाल नहीं कर सके।
  • 17वीं शताब्दी तक विजयनगर का महत्व लगभग समाप्त हो गया और यह एक खंडहर में बदल गया।

9. महत्वपूर्ण विदेशी यात्री:

  • निकितिन (रूस): 15वीं शताब्दी, बहमनी साम्राज्य का वर्णन।
  • अब्दुर रज्जाक (फारस): 15वीं शताब्दी, विजयनगर की किलेबंदी और समृद्धि का वर्णन।
  • डोमिंगो पेस (पुर्तगाल): 16वीं शताब्दी, कृष्णदेव राय और विजयनगर शहर का विस्तृत वर्णन।
  • बारबोसा (पुर्तगाल): 16वीं शताब्दी, विजयनगर के व्यापार और जीवन शैली का वर्णन।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):

  1. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
    क) 1347 ई.
    ख) 1336 ई.
    ग) 1365 ई.
    घ) 1565 ई.

  2. विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
    क) कृष्णदेव राय
    ख) हरिहर और बुक्का
    ग) रामराय
    घ) सालुव नरसिंह

  3. हम्पी के खंडहरों को किस वर्ष प्रकाश में लाया गया?
    क) 1700 ई.
    ख) 1800 ई.
    ग) 1856 ई.
    घ) 1900 ई.

  4. विजयनगर की किलेबंदी का विस्तृत वर्णन किस विदेशी यात्री ने किया है?
    क) डोमिंगो पेस
    ख) बारबोसा
    ग) अब्दुर रज्जाक
    घ) निकितिन

  5. तालीकोटा का युद्ध (राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध) किस वर्ष लड़ा गया था?
    क) 1509 ई.
    ख) 1529 ई.
    ग) 1565 ई.
    घ) 1646 ई.

  6. विजयनगर साम्राज्य के किस शासक ने तेलुगु में 'अमुक्तमाल्यद' नामक ग्रंथ लिखा था?
    क) हरिहर प्रथम
    ख) बुक्का प्रथम
    ग) कृष्णदेव राय
    घ) रामराय

  7. विजयनगर साम्राज्य में 'अमर-नायक' कौन थे?
    क) शाही पुजारी
    ख) सैन्य कमांडर
    ग) व्यापारी
    घ) शिल्पी

  8. विजयनगर का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर, जो शिव के एक रूप को समर्पित था, कौन सा है?
    क) विट्ठल मंदिर
    ख) हजार राम मंदिर
    ग) विरुपाक्ष मंदिर
    घ) मीनाक्षी मंदिर

  9. महानवमी डिब्बा किस साम्राज्य से संबंधित है?
    क) बहमनी सल्तनत
    ख) दिल्ली सल्तनत
    ग) विजयनगर साम्राज्य
    घ) मुगल साम्राज्य

  10. कमल महल का संबंध किस साम्राज्य से है?
    क) चोल साम्राज्य
    ख) विजयनगर साम्राज्य
    ग) पल्लव साम्राज्य
    घ) चालुक्य साम्राज्य


उत्तरमाला:

  1. ख) 1336 ई.
  2. ख) हरिहर और बुक्का
  3. ख) 1800 ई.
  4. ग) अब्दुर रज्जाक
  5. ग) 1565 ई.
  6. ग) कृष्णदेव राय
  7. ख) सैन्य कमांडर
  8. ग) विरुपाक्ष मंदिर
  9. ग) विजयनगर साम्राज्य
  10. ख) विजयनगर साम्राज्य

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे। शुभकामनाएँ!

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