Class 12 History Notes Chapter 3 (महात्मा गांधी और स्व-निर्भरता) – Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-I Book

Bharatiya Itihas ke Kuch Vishay-I
प्रिय विद्यार्थियों,

आज हम कक्षा 12 की इतिहास पुस्तक 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय-I' के अध्याय 3, 'महात्मा गांधी और स्व-निर्भरता' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय महात्मा गांधी के जीवन, उनके दर्शन और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी निर्णायक भूमिका को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए।


अध्याय 3: महात्मा गांधी और स्व-निर्भरता (विस्तृत नोट्स)

1. महात्मा गांधी: एक परिचय

  • पूरा नाम: मोहनदास करमचंद गांधी।
  • जन्म: 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर, गुजरात।
  • निधन: 30 जनवरी 1948, दिल्ली।
  • उपाधियाँ:
    • महात्मा: रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा (चंपारण सत्याग्रह के बाद)।
    • राष्ट्रपिता: सुभाष चंद्र बोस द्वारा।
  • शिक्षा: इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की।

2. दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी (1893-1915)

  • प्रस्थान: 1893 में एक भारतीय व्यापारी दादा अब्दुल्ला का मुकदमा लड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए।
  • रंगभेद का अनुभव: पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर रंगभेद का सामना किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
  • संघर्ष की शुरुआत: उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
  • सत्याग्रह का पहला प्रयोग: यहीं उन्होंने अहिंसक प्रतिरोध के अपने दर्शन 'सत्याग्रह' का विकास और पहला सफल प्रयोग किया।
  • इंडियन नेटाल कांग्रेस (1894): भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस संगठन की स्थापना की।
  • टॉलस्टॉय फार्म और फीनिक्स आश्रम: सामुदायिक जीवन, आत्म-निर्भरता और अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतों पर आधारित इन आश्रमों की स्थापना की।
  • हिंद स्वराज (1909): इस पुस्तक में उन्होंने अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विचारों को प्रस्तुत किया, जिसमें स्व-शासन (स्वराज) और स्व-निर्भरता पर जोर दिया गया।

3. भारत वापसी और प्रारंभिक सत्याग्रह (1915-1918)

  • भारत वापसी: 9 जनवरी 1915 को गांधीजी भारत लौटे। इस दिन को 'प्रवासी भारतीय दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
  • राजनीतिक गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु माना। गोखले की सलाह पर, उन्होंने एक वर्ष तक भारत का भ्रमण किया ताकि देश की वास्तविक स्थिति को समझ सकें।
  • चंपारण सत्याग्रह (1917):
    • स्थान: बिहार का चंपारण जिला।
    • कारण: यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों को 'तिनकठिया प्रणाली' (अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती अनिवार्य) के तहत नील उगाने और कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करना।
    • परिणाम: गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह। सरकार को जांच समिति गठित करनी पड़ी और तिनकठिया प्रणाली समाप्त हुई।
    • प्रमुख सहयोगी: राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी, महादेव देसाई।
  • अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918):
    • स्थान: गुजरात का अहमदाबाद शहर।
    • कारण: सूती कपड़ा मिल श्रमिकों और मालिकों के बीच प्लेग बोनस और वेतन वृद्धि को लेकर विवाद।
    • तरीका: गांधीजी ने श्रमिकों के समर्थन में भारत में अपनी पहली भूख हड़ताल की।
    • परिणाम: मिल मालिकों को श्रमिकों का वेतन बढ़ाने पर सहमत होना पड़ा।
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918):
    • स्थान: गुजरात का खेड़ा जिला।
    • कारण: फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा किसानों से लगान (राजस्व) की पूरी वसूली।
    • तरीका: गांधीजी ने किसानों से लगान न चुकाने का आह्वान किया।
    • परिणाम: सरकार को लगान स्थगित करना पड़ा।
    • प्रमुख सहयोगी: सरदार वल्लभभाई पटेल।

4. राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी का प्रवेश

  • रॉलेट एक्ट (1919):
    • उद्देश्य: प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलना।
    • प्रावधान: इस कानून के तहत ब्रिटिश सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार कर सकती थी और जेल में डाल सकती थी। गांधीजी ने इसे "काला कानून" कहा।
    • गांधीजी का विरोध: उन्होंने इस एक्ट के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल और सत्याग्रह का आह्वान किया।
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919):
    • स्थान: अमृतसर, पंजाब।
    • घटना: रॉलेट एक्ट के विरोध में जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा पर जनरल डायर ने अंधाधुंध गोलियां चलवा दीं, जिसमें हजारों लोग मारे गए।
    • प्रभाव: इस घटना ने गांधीजी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक व्यापक और संगठित आंदोलन शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
  • खिलाफत आंदोलन (1919-1924):
    • कारण: प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा तुर्की के खलीफा (इस्लामी जगत के आध्यात्मिक प्रमुख) के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में भारतीय मुसलमानों द्वारा शुरू किया गया।
    • गांधीजी का समर्थन: गांधीजी ने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का एक स्वर्णिम अवसर माना और इसका समर्थन किया।
    • प्रमुख नेता: अली बंधु (मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली)।

5. असहयोग आंदोलन (1920-1922)

  • कारण: रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत मुद्दा, पंजाब में हुए अत्याचार और स्वराज की मांग।
  • प्रस्ताव:
    • कलकत्ता अधिवेशन (सितंबर 1920): लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित।
    • नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920): सी. विजयराघवाचारी की अध्यक्षता में आंदोलन के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
  • कार्यक्रम:
    • सरकारी उपाधियों, मानद पदों और सरकारी शिक्षण संस्थाओं का त्याग।
    • सरकारी न्यायालयों, विधानसभाओं और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
    • खादी को अपनाना, अस्पृश्यता निवारण और हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना।
  • चौरी-चौरा घटना (5 फरवरी 1922):
    • उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए।
    • गांधीजी ने हिंसा के कारण 12 फरवरी 1922 को आंदोलन को तत्काल स्थगित कर दिया।
  • महत्व:
    • यह भारत का पहला अखिल भारतीय जन आंदोलन था, जिसने समाज के सभी वर्गों को जोड़ा।
    • गांधीजी एक राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे।
    • लोगों में राजनीतिक चेतना और आत्मविश्वास बढ़ा।

6. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934)

  • पृष्ठभूमि:
    • साइमन कमीशन (1927): भारत के संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए गठित इस कमीशन में कोई भारतीय सदस्य नहीं था, जिसका व्यापक विरोध हुआ।
    • नेहरू रिपोर्ट (1928): मोतीलाल नेहरू द्वारा भारत के लिए संविधान का मसौदा प्रस्तुत किया गया।
    • लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929): जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) का प्रस्ताव पारित किया और 26 जनवरी 1930 को 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने का संकल्प लिया।
  • दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) (12 मार्च 1930 - 6 अप्रैल 1930):
    • गांधीजी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से गुजरात के दांडी तट तक 240 मील की यात्रा की।
    • 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर, उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून तोड़ा।
    • यह सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत थी, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों को शांतिपूर्वक तोड़ना था।
  • आंदोलन का विस्तार:
    • देश के विभिन्न हिस्सों में नमक कानून तोड़े गए।
    • विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर धरना दिया गया।
    • किसानों ने लगान देने से इनकार कर दिया और वन कानूनों का उल्लंघन किया गया।
    • महिलाओं ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931):
    • गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच यह समझौता हुआ।
    • शर्तें: सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया जाएगा, सभी राजनीतिक कैदियों (जो हिंसा में शामिल नहीं थे) को रिहा किया जाएगा, तटीय गांवों में नमक बनाने की अनुमति दी जाएगी और कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी।
  • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931):
    • गांधीजी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन में आयोजित इस सम्मेलन में भाग लिया।
    • सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुधारों पर गतिरोध के कारण यह सम्मेलन असफल रहा।
  • आंदोलन की पुनः शुरुआत:
    • भारत लौटने पर गांधीजी ने देखा कि सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाई हैं।
    • उन्होंने आंदोलन को फिर से शुरू किया, लेकिन सरकार के कठोर दमन के कारण इसे अंततः 1934 में वापस ले लिया गया।
  • महत्व:
    • इसने ब्रिटिश सरकार को भारतीयों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर किया।
    • स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई गति और जन समर्थन मिला।

7. भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त 1942)

  • पृष्ठभूमि:
    • द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना उसकी सहमति के शामिल करना।
    • क्रिप्स मिशन (मार्च 1942): इसकी असफलता, जिसने भारतीयों को निराश किया।
    • जापान के भारत पर संभावित आक्रमण का खतरा।
  • प्रस्ताव: 8 अगस्त 1942 को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया गया।
  • गांधीजी का आह्वान: उन्होंने जनता को "करो या मरो" (Do or Die) का नारा दिया।
  • गिरफ्तारियां: 9 अगस्त 1942 को गांधीजी सहित सभी प्रमुख कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया (ऑपरेशन जीरो आवर)।
  • जन प्रतिक्रिया:
    • यह एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन था, जिसमें जनता ने स्वयं नेतृत्व संभाला।
    • देश के विभिन्न हिस्सों में हड़तालें, प्रदर्शन, सरकारी इमारतों पर हमले और संचार लाइनों को बाधित किया गया।
    • बलिया (उत्तर प्रदेश), तामलुक (बंगाल) और सतारा (महाराष्ट्र) जैसे स्थानों पर समानांतर सरकारें स्थापित की गईं।
  • दमन: ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिसमें हजारों लोग मारे गए और गिरफ्तार हुए।
  • महत्व:
    • इस आंदोलन ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब ब्रिटिश शासन के अधीन नहीं रहना चाहता था।
    • यह स्वतंत्रता की अंतिम बड़ी लड़ाई थी और इसने ब्रिटिशों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।

8. गांधीजी के विचार और दर्शन (स्व-निर्भरता के संदर्भ में)

  • सत्याग्रह: सत्य और अहिंसा पर आधारित नैतिक प्रतिरोध। अन्याय के खिलाफ आत्मा की शक्ति का प्रयोग।
  • अहिंसा: मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न पहुंचाना। यह कायरता नहीं, बल्कि वीरों का गुण है।
  • स्वराज:
    • केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता भी।
    • आत्म-शासन और आत्म-निर्भरता।
    • ग्राम स्वराज्य की अवधारणा: प्रत्येक गांव को आत्मनिर्भर और स्वशासित इकाई बनाना।
  • स्वदेशी:
    • अपने देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करना और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना।
    • इसका उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना, बेरोजगारी कम करना और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था।
  • चरखा और खादी:
    • चरखा आत्मनिर्भरता, कुटीर उद्योगों और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक था।
    • खादी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और गरीबों को रोजगार प्रदान करने का एक साधन थी।
  • सर्वोदय:
    • "सबका उदय" या "सबका कल्याण"। जॉन रस्किन की पुस्तक 'अनटू दिस लास्ट' से प्रेरित।
    • समाज के सबसे कमजोर वर्ग का उत्थान, जिसमें आर्थिक समानता और न्याय निहित है।
  • अस्पृश्यता निवारण:
    • गांधीजी ने अस्पृश्यता को एक सामाजिक बुराई माना और इसके उन्मूलन के लिए जीवन भर संघर्ष किया।
    • उन्होंने अछूतों को 'हरिजन' (ईश्वर के लोग) कहा और उनके उत्थान के लिए 'हरिजन सेवक संघ' की स्थापना की।
  • ग्राम स्वराज्य:
    • गांधीजी का सपना था कि भारत के गांव आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हों।
    • प्रत्येक गांव अपनी मूलभूत आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास) को स्वयं पूरा करे।
    • विकेंद्रीकृत शासन और आर्थिक प्रणाली पर जोर।
  • ट्रस्टीशिप का सिद्धांत:
    • पूंजीपतियों और जमींदारों को अपनी संपत्ति का उपयोग समाज के कल्याण के लिए ट्रस्टी के रूप में करना चाहिए।
    • यह आर्थिक असमानता को कम करने का एक अहिंसक तरीका था।
  • बुनियादी शिक्षा (नई तालीम):
    • बच्चों को हस्तकला के माध्यम से शिक्षा देना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    • शिक्षा को जीवन और आजीविका से जोड़ना।
  • धर्मनिरपेक्षता:
    • सभी धर्मों का समान सम्मान।
    • राज्य का कोई विशेष धर्म नहीं होगा।

9. विभाजन और गांधीजी

  • गांधीजी भारत के विभाजन के प्रबल विरोधी थे।
  • उन्होंने विभाजन को रोकने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हुए।
  • विभाजन के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए उन्होंने अनशन और यात्राएं कीं।

10. गांधीजी की मृत्यु

  • 30 जनवरी 1948: नाथूराम गोडसे द्वारा दिल्ली में प्रार्थना सभा के दौरान उनकी हत्या कर दी गई।
  • उनकी समाधि राजघाट, दिल्ली में है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) - 10 प्रश्न

  1. गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे थे?
    a) 1914
    b) 1915
    c) 1916
    d) 1917

  2. गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह कौन सा था?
    a) खेड़ा सत्याग्रह
    b) अहमदाबाद मिल हड़ताल
    c) चंपारण सत्याग्रह
    d) रॉलेट सत्याग्रह

  3. किस घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिया था?
    a) जलियांवाला बाग हत्याकांड
    b) चौरी-चौरा घटना
    c) रॉलेट एक्ट का पारित होना
    d) साइमन कमीशन का आगमन

  4. गांधीजी ने किस आंदोलन के दौरान "करो या मरो" का प्रसिद्ध नारा दिया था?
    a) असहयोग आंदोलन
    b) सविनय अवज्ञा आंदोलन
    c) भारत छोड़ो आंदोलन
    d) खिलाफत आंदोलन

  5. दांडी मार्च किस वर्ष शुरू हुआ था?
    a) 1928
    b) 1929
    c) 1930
    d) 1931

  6. गांधीजी ने किस गोलमेज सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था?
    a) प्रथम गोलमेज सम्मेलन
    b) द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
    c) तृतीय गोलमेज सम्मेलन
    d) किसी भी गोलमेज सम्मेलन में नहीं

  7. गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष संपन्न हुआ था?
    a) 1930
    b) 1931
    c) 1932
    d) 1933

  8. गांधीजी ने अस्पृश्यता के खिलाफ अपने अभियान में अछूतों के लिए किस शब्द का प्रयोग किया था?
    a) दलित
    b) शूद्र
    c) हरिजन
    d) गिरिजन

  9. गांधीजी के अनुसार, 'स्वराज' का वास्तविक अर्थ क्या था?
    a) केवल राजनीतिक स्वतंत्रता
    b) आत्म-शासन और आत्म-निर्भरता
    c) ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन
    d) केवल आर्थिक स्वतंत्रता

  10. 'हिंद स्वराज' नामक पुस्तक किसने लिखी थी?
    a) जवाहरलाल नेहरू
    b) सरदार वल्लभभाई पटेल
    c) महात्मा गांधी
    d) गोपाल कृष्ण गोखले


उत्तरमाला:

  1. b) 1915
  2. c) चंपारण सत्याग्रह
  3. b) चौरी-चौरा घटना
  4. c) भारत छोड़ो आंदोलन
  5. c) 1930
  6. b) द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
  7. b) 1931
  8. c) हरिजन
  9. b) आत्म-शासन और आत्म-निर्भरता
  10. c) महात्मा गांधी

मुझे आशा है कि ये विस्तृत नोट्स और बहुविकल्पीय प्रश्न आपकी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। लगन से अध्ययन करते रहें और सफलता अवश्य मिलेगी।

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